✅ सीधा जवाब: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में ईवीएम पर नामों का क्रम किस्मत या पर्ची से नहीं, नियम से तय होता है। पहले मान्यता प्राप्त पार्टियों के उम्मीदवार, फिर बाकी, और हर समूह के भीतर हिंदी वर्णमाला के क्रम में (नियम 58(5)(d))। पार्टी के उम्मीदवार को एक प्रस्तावक चाहिए, निर्दलीय को पांच। मतपत्र पर नोटा भी होता है, हर नाम और चिन्ह की जगह एक ही नाप की (नियम 39A)। बटन से पहले रजिस्टर में दस्तखत या अंगूठा (नियम 40A), और नेत्रहीन या अशक्त वोटर की इच्छा से मतदान अधिकारी बटन दबा सकता है (नियम 41A)।

🗓️ ईवीएम से मतदान (जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य): पहला चरण 22 अक्टूबर (हो चुका), दूसरा 28 अक्टूबर, तीसरा 3 नवंबर, चौथा 14 नवंबर 2026, सुबह 7 से शाम 6 बजे तक। सभी चरणों की गिनती 20 नवंबर को। सरपंच-पंच का वोट इससे दो दिन बाद मतपत्र से। अपने जिले का चरण और वार्ड: जिला परिषद चुनाव 2026 →

आज वोटर ईवीएम के सामने खड़ा होगा तो सबसे पहले सबसे ऊपर वाला नाम दिखेगा। बहुत से लोग मानते हैं कि यह क्रम लॉटरी से बनता है, या जिसने पहले पर्चा भरा उसका नाम ऊपर है। ऐसा नहीं है। राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 में यह क्रम लिखा हुआ है, और उसी नियम में यह भी कि पार्टी के उम्मीदवार और निर्दलीय के पर्चे में क्या फर्क है। नीचे हर बात नियमों की असली कटिंग के साथ है। पहले एक मिनट का वीडियो देख लीजिए:

वीडियो: ईवीएम पर सबसे ऊपर कौन

क्रम कौन तय करता है: पहले पार्टी वाले, फिर बाकी

जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए नियम 58 लागू होता है। उसके उपनियम (5)(d) के मुताबिक रिटर्निंग अधिकारी उम्मीदवारों की सूची बनाते समय उन्हें दो वर्गों में रखता है: (i) मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवार और (ii) बाकी उम्मीदवार, इसी क्रम में। फिर हर वर्ग के भीतर नाम हिंदी वर्णमाला के क्रम में लगाए जाते हैं। यानी पार्टी वाले उम्मीदवारों में जिसका नाम "अ" से शुरू होता है वह "ग" वाले से ऊपर रहेगा, और निर्दलीयों में भी यही नियम। जहां किसी मान्यता प्राप्त पार्टी का उम्मीदवार खड़ा ही नहीं है, वहां सबसे ऊपर निर्दलीय ही होगा।

पंचायती राज निर्वाचन नियम 58(5)(d) की कटिंग: उम्मीदवार दो वर्गों में, पहले मान्यता प्राप्त पार्टियों के, फिर बाकी, हर वर्ग में हिंदी वर्णमाला के क्रम में
नियम 58(5)(d): दो वर्ग, "arranged in that order", और हर वर्ग के भीतर "Hindi alphabetical order"। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका, पेज 123

पार्टी के उम्मीदवार को एक प्रस्तावक, निर्दलीय को पांच

नियम इस क्रम का कारण नहीं बताता। पर पर्चे का फर्क वही नियम बताता है। उपनियम (5)(e) के मुताबिक मान्यता प्राप्त पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन तभी सही माना जाएगा जब उसी निर्वाचन क्षेत्र का एक वोटर प्रस्तावक के तौर पर उस पर दस्तखत करे, और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष या अधिकृत व्यक्ति का पत्र नामांकन के आखिरी दिन दोपहर 3 बजे तक पेश हो। उपनियम (5)(f) के मुताबिक जो उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त पार्टी का नहीं है, उसके पर्चे पर उसी क्षेत्र के पांच वोटर प्रस्तावक होने चाहिए।

नियम 58(5)(e) और (f) की कटिंग: पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन एक प्रस्तावक से, बाकी का पांच प्रस्तावकों से
नियम 58(5)(e): "subscribed by one proposer"; (f): "subscribed by 5 proposers being electors of the same constituency"। स्रोत: वही पुस्तिका, पेज 123

ईवीएम का मतपत्र: नोटा भी, हर खाना एक ही नाप का

ईवीएम की बैलेट यूनिट पर जो पर्ची लगी होती है, उसे नियम 39A "मतपत्र" कहता है। उसके मुताबिक नाम उसी क्रम में छपते हैं जिस क्रम में उम्मीदवारों की सूची में हैं, और उनके साथ नोटा (इनमें से कोई नहीं) भी दिखाया जाता है। हर उम्मीदवार के नाम के साथ उसका चुनाव चिन्ह, और नोटा के साथ नोटा का चिन्ह। उपनियम (5) कहता है कि हर उम्मीदवार और नोटा की जगह एक ही नाप की होगी, यानी ऊपर वाले नाम को बड़ा खाना नहीं मिलता। सारी जानकारी हिंदी में, देवनागरी में होती है।

नियम 39A की कटिंग: नाम सूची के क्रम में, नोटा भी दिखाया जाएगा, हर जगह एक ही नाप की
नियम 39A(2), (4), (5): "same order", "NOTA shall also be shown", "same dimensions"। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पेज 116

बटन से पहले रजिस्टर, और जो बटन नहीं दबा सकता उसके लिए नियम

नियम 40A के मुताबिक वोट देने की इजाज़त से पहले मतदान अधिकारी वोटर का क्रमांक मतदाता रजिस्टर (फॉर्म XII) में दर्ज करता है और वोटर उस पर दस्तखत या अंगूठा लगाता है। बिना इसके वोट नहीं दिया जा सकता, और अंगूठे के निशान को किसी से सत्यापित कराने की ज़रूरत नहीं। नियम 41A कहता है कि अगर कोई वोटर अंधेपन या किसी और शारीरिक अशक्तता की वजह से बैलेट यूनिट पर चिन्ह पहचान नहीं सकता या बटन नहीं दबा सकता, तो मतदान अधिकारी उसकी इच्छा के मुताबिक उसकी ओर से बटन दबाएगा और वोटर सूची में उसके नाम के आगे इसका कारण लिखेगा।

नियम 40A की कटिंग: वोट से पहले रजिस्टर में दस्तखत या अंगूठा, बिना इसके वोट नहीं
नियम 40A(1)(b) और परंतुक: "signature or thumb impression of that voter", "no voter shall be allowed to vote unless"। स्रोत: वही पुस्तिका, पेज 116
नियम 41A की कटिंग: नेत्रहीन या अशक्त वोटर की ओर से मतदान अधिकारी उसकी इच्छा के मुताबिक वोट दर्ज करेगा
नियम 41A(1): "unable to recognize the symbols", "the Polling Officer shall do so for recording the vote on his behalf and in accordance with his wishes"। स्रोत: वही पुस्तिका, पेज 117

इसलिए आज बूथ पर क्या देखें

ऊपर वाला नाम नियम से ऊपर है, वोट से नहीं। आपके दोनों वोट, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य, अलग-अलग बैलेट यूनिट पर इसी क्रम में हैं। इसलिए बटन दबाने से पहले अपने उम्मीदवार का नाम और चिन्ह दोनों पढ़िए, पहली पंक्ति देखकर बटन मत दबाइए। आपके जिले के जिला परिषद वार्ड, आरक्षण और उम्मीदवार यहां हैं: जिला परिषद चुनाव 2026, जिलेवार →

इसी सीरीज़ में:

स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994: नियम 58(5)(d), (e), (f); अध्याय IVA (ईवीएम) के नियम 33B, 39A, 40A, 41A (राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका, पेज 116-117, 123); राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: प्रेस नोट 9836 (3 अक्टूबर 2026) और संशोधित समय-सारणी आदेश 10090 (6 अक्टूबर 2026)। फोटो: एक मतदान केंद्र पर ईवीएम के साथ पहुंचे मतदान अधिकारी, हाजो, कामरूप (असम), विधानसभा चुनाव 2016, भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।