जयपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) में राजस्थान के हर घर के लिए ₹1,20,000 मिलते हैं, पर एक साथ नहीं, तीन किस्तों में। सरकारी PMAY-G पोर्टल की रिपोर्ट में राजस्थान के घरों का हिसाब एक ही तरह दर्ज है: मंजूरी पर ₹15,000, मकान प्लिंथ (कुर्सी) लेवल तक पहुंचने पर ₹45,000, और छत की ढलाई के बाद ₹60,000। इसके ऊपर घर बनाने में 90 दिन की मज़दूरी और शौचालय के ₹12,000 अलग से मिल सकते हैं। हर किस्त सीधे लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में PFMS के ज़रिए आती है, और अगली किस्त तभी बनती है जब मकान के उस चरण की जियो-टैग फोटो पोर्टल पर चढ़ जाए।
आज की स्थिति (25 अक्टूबर 2026): 17 अगस्त 2026 को बारां में केंद्र ने राजस्थान के लिए 2,89,355 नए घरों की मंजूरी का पत्र सौंपा, लागत ₹3,473 करोड़ (PIB)। पर इन घरों के लाभार्थियों के नाम अभी पोर्टल पर नहीं हैं: 24 अक्टूबर 2026 की सरकारी रिपोर्ट में राजस्थान के 33 में से एक भी जिले का 2026-27 का लक्ष्य दर्ज नहीं है, और नियम के मुताबिक सालाना सूची लक्ष्य दर्ज होने के बाद ही बनती है। इसलिए अभी किस्त की जांच उन्हीं घरों की होती है जो 2024-25, 2025-26 या उससे पहले मंजूर हुए। अपनी पंचायत की सूची, किस्त और मकान की स्थिति: पीएम आवास लिस्ट में नाम और किस्त देखें।
"पीएम आवास ग्रामीण में कितना पैसा मिलता है", "आवास का पैसा कब आएगा" और "मेरी किस्त आई या नहीं", इन तीनों के जवाब PMAY-G के सरकारी ढांचे (Framework for Implementation) में हैं, जिसे पोर्टल आज भी योजना की गाइडलाइन के तौर पर देता है। राजस्थान में असल में किस चरण पर कितना पैसा गया, यह पोर्टल की सार्वजनिक रिपोर्ट में दर्ज है। नीचे हर नियम उसी दस्तावेज़ की कॉपी के साथ है।
1. एक घर के कितने पैसे: ₹1.20 लाख, 2029 तक यही रकम
PMAY-G के ढांचे का पैरा 5.1.1 कहता है कि मैदानी इलाकों में पक्का घर बनाने के लिए ₹1.20 लाख और पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर, "कठिन क्षेत्रों" व IAP जिलों में ₹1.30 लाख मिलते हैं। पहाड़ी राज्यों की सूची में हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हैं; राजस्थान इनमें नहीं है। पोर्टल पर भी यही दिखता है: 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच मंजूर राजस्थान के 7,16,522 घरों में से हर एक की स्वीकृत राशि ₹1,20,000 दर्ज है (हमारी गिनती)।

क्या 2024-29 के नए दौर में रकम बढ़ी? नहीं। केंद्रीय कैबिनेट ने 9 अगस्त 2024 को अप्रैल 2024 से मार्च 2029 तक 2 करोड़ और घर बनाने को मंजूरी दी, और उसी फैसले में साफ लिखा कि सहायता "मौजूदा दरों" पर रहेगी: मैदानी इलाकों में ₹1.20 लाख, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में ₹1.30 लाख। बारां वाली मंजूरी का हिसाब भी इसी से मेल खाता है: 2,89,355 घर × ₹1,20,000 = ₹3,472.26 करोड़, जिसे PIB ने ₹3,473 करोड़ लिखा है।
2. तीन किस्तें, और कौन-सी किस्त किस काम पर
ढांचा किस्तों की संख्या और रकम राज्य पर छोड़ता है, पर दो शर्तें तय करता है: किस्तें कम से कम 3 होंगी, और पहली किस्त मंजूरी के समय ही देनी होगी।

बाकी किस्तें मकान के निर्माण-चरण से जुड़ती हैं। ढांचे में मकान के कुल 7 चरण गिने गए हैं: मंजूरी, नींव (Foundation), प्लिंथ, खिड़की-स्तर (Windowsill), लिंटल, छत की ढलाई (Roof cast) और पूरा (Completed)। पैरा 5.7.3 के अनुसार दूसरी किस्त नींव या प्लिंथ से और तीसरी किस्त खिड़की-स्तर, लिंटल या छत की ढलाई से जोड़ी जानी चाहिए।

राजस्थान में बंटवारा कैसा है? राजस्थान के ग्रामीण विकास विभाग का वह आदेश, जिसमें इस साल की किस्तों की रकम और चरण तय हों, हमें किसी सरकारी साइट पर खुला हुआ नहीं मिला। इसलिए हम वही लिख रहे हैं जो सरकारी पोर्टल की रिपोर्ट की पंक्तियों में दर्ज है। 2024-25 और 2025-26 में मंजूर जिन 7,12,337 घरों को कम से कम एक किस्त मिली है, उनमें एक पंक्ति को छोड़कर सब इसी पैटर्न पर हैं:
- 1 किस्त मिली: कुल जारी राशि ₹15,000
- 2 किस्तें मिलीं: कुल ₹60,000, यानी दूसरी किस्त ₹45,000
- 3 किस्तें मिलीं: कुल ₹1,20,000, यानी तीसरी किस्त ₹60,000
चरण भी उसी रिपोर्ट से साफ होते हैं: जिन घरों को 2 किस्तें मिली हैं, उनमें से एक भी "House Sanctioned" पर नहीं है, सब प्लिंथ या उससे आगे हैं; और जिन्हें 3 किस्तें मिली हैं, वे सब "Roof Cast" या "Completed" पर हैं। यानी राजस्थान में दूसरी किस्त प्लिंथ पर और तीसरी छत की ढलाई पर जारी हुई है। पहली किस्त के लिए ढांचे का पैरा 5.4.1 कहता है कि मंजूरी पत्र जारी होने के 7 कार्य-दिवस में पैसा खाते में जाना चाहिए, और बैंक इसकी सूचना SMS से देगा।
3. मज़दूरी और शौचालय: ये ₹1.20 लाख से अलग हैं
₹1.20 लाख के ऊपर दो और मदद ढांचे में लिखी हैं। पहली, घर बनाने में 90 दिन की अकुशल मज़दूरी (पहाड़ी व कठिन क्षेत्रों में 95 दिन)। दूसरी, शौचालय के लिए ₹12,000, जो स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), मनरेगा या किसी और योजना से दिया जाता है (पैरा 5.1.3)। ढांचा यह भी कहता है कि शौचालय बने बिना घर "पूरा" नहीं माना जाएगा।

मनरेगा तो खत्म हो गया, अब मज़दूरी कैसे? 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) कानून लागू है। केंद्र सरकार के PIB पर जारी इस कानून के सवाल-जवाब (11 मई 2026) में लिखा है कि PMAY-G के घर का काम इस नए कानून में भी 90/95 दिन की मज़दूरी के लिए लिया जा सकता है, "लागू दिशानिर्देशों के अनुसार"। ये दिशानिर्देश, यानी नए कानून में आवास का काम किस चरण पर कितने दिन का होगा, हमें आधिकारिक रूप में नहीं मिले। मज़दूरी की दर तय है: भारत के राजपत्र (S.O. 3518(E), 30 जून 2026) में राजस्थान के लिए ₹300 प्रति दिन। इस दर पर पूरे 90 दिन का काम मिले और किया जाए, तो मज़दूरी ₹27,000 बनती है। ढांचे के अनुसार लाभार्थी के पंजीकरण के समय उसका मनरेगा जॉब कार्ड नंबर भरना ज़रूरी था (पैरा 5.3.1)। अपने परिवार का जॉब कार्ड नरेगा / जी राम जी जॉब कार्ड लिस्ट में देखें।
4. पैसा कैसे आता है: FTO, PFMS और आधार
हर किस्त AwaasSoft पर बने फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTO) से निकलती है, PFMS उसे जांचता है और राज्य का नोडल बैंक पैसा लाभार्थी के खाते में भेजता है। किस्त किसी के हाथ नकद नहीं दी जाती। अगली किस्त के लिए मकान के तय चरण की जियो-टैग, तारीख-समय वाली फोटो AwaasApp से पोर्टल पर चढ़ानी होती है। यह फोटो पंचायत या ब्लॉक का कर्मचारी लेता है, और ढांचे के मुताबिक लाभार्थी या उसका प्रतिनिधि भी AwaasApp से प्रगति दर्ज कर सकता है।

खाते की जांच भी तय है। आधार से भुगतान हो तो आधार UIDAI से प्रमाणित होकर PFMS में बैंक-खाते से जुड़ाव के लिए जांचा जाता है; खाते से भुगतान हो तो ब्लॉक लॉगिन से खाता "फ्रीज़" होकर PFMS से जांचा जाता है। इसके बाद ब्लॉक के अधिकारी देखते हैं कि आधार या बैंक खाते का नाम पोर्टल पर दर्ज लाभार्थी के नाम से मिलता है। PFMS जिस खाते को लौटा दे, उसे फिर से ठीक करके दर्ज करना पड़ता है।

5. पूरा हिसाब एक टेबल में
| मद | रकम | कब / कैसे |
|---|---|---|
| पहली किस्त | ₹15,000 | मंजूरी पत्र जारी होने पर, 7 कार्य-दिवस में |
| दूसरी किस्त | ₹45,000 (कुल ₹60,000) | मकान प्लिंथ लेवल पर, जियो-टैग फोटो के बाद |
| तीसरी किस्त | ₹60,000 (कुल ₹1,20,000) | छत की ढलाई के बाद, जियो-टैग फोटो के बाद |
| मज़दूरी | 90 दिन × ₹300 = ₹27,000 तक | घर के काम के दिनों की मज़दूरी (नए कानून के आवास दिशानिर्देश अभी सार्वजनिक नहीं मिले) |
| शौचालय | ₹12,000 | स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) या अन्य स्रोत से; इसके बिना घर "पूरा" नहीं |
| भुगतान का रास्ता | AwaasSoft पर FTO, PFMS से जांच, बैंक या डाकघर खाते में सीधा | |
| घर पूरा करने की समय-सीमा | मंजूरी से 12 महीने (पैरा 5.6.2) | |
किस्तों की रकम पोर्टल की रिपोर्ट में दर्ज भुगतान से है, राज्य के लिखित आदेश से नहीं।
6. किस्त आई या नहीं, ऐसे देखें
- Rajasthan365 की पीएम आवास लिस्ट खोलें। रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं चाहिए।
- अपना जिला, फिर ब्लॉक (पंचायत समिति), फिर ग्राम पंचायत चुनें। पंचायत के सभी लाभार्थी खुल जाएंगे; नाम वाले बॉक्स में हिंदी या अंग्रेज़ी में नाम लिखकर भी खोज सकते हैं।
- अपनी पंक्ति में तीन चीज़ें देखें: कितनी किस्तें मिलीं, अब तक कितनी राशि जारी हुई, और मकान की स्थिति (House Sanctioned, Plinth, Roof Cast, Completed)। यह सूची सरकारी PMAY-G भौतिक प्रगति रिपोर्ट से है, 24 अक्टूबर 2026 तक अपडेट, और इसमें 7,20,086 नाम हैं।
- रजिस्ट्रेशन नंबर (RJ से शुरू) पता हो, तो सरकारी AwaasSoft "Search Beneficiary Details" पेज पर नंबर और कैप्चा भरकर अपना पूरा ब्योरा देखें।
- किसी किस्त का FTO नंबर या PFMS Id हो, तो AwaasSoft "FTO Tracking" पेज पर (कैप्चा के साथ) भुगतान की स्थिति दिखती है।
- पंचायत-वार पूरी सरकारी सूची पोर्टल की "House progress against the target financial year" रिपोर्ट में भी है, जिसमें योजना, राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत चुननी होती है।
- आखिर में बैंक पासबुक या SMS से मिलान करें, और आधार किस बैंक खाते से जुड़ा है, यह myAadhaar पर जांच लें।
7. उदाहरण: ₹1,20,000 का घर, किस्त-दर-किस्त
मान लीजिए किसी परिवार का घर मंजूर हुआ (राजस्थान, मैदानी इलाका)। पोर्टल वाले पैटर्न से पैसा ऐसे आएगा:
| चरण | इस बार | अब तक कुल | कुल का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| मंजूरी | ₹15,000 | ₹15,000 | 12.5% |
| प्लिंथ | ₹45,000 | ₹60,000 | 50% |
| छत की ढलाई | ₹60,000 | ₹1,20,000 | 100% |
इसके ऊपर 90 दिन × ₹300 = ₹27,000 तक की मज़दूरी और ₹12,000 शौचालय के जोड़ें, तो एक परिवार को कुल ₹1,59,000 तक की मदद बनती है। इसमें ₹27,000 की मज़दूरी तभी पूरी बनती है जब पूरे 90 दिन का काम मिले और किया जाए।
अपनी पंक्ति ऐसे पढ़ें: अगर सूची में "किस्तें 2, जारी राशि ₹60,000, स्थिति Plinth" लिखा है, तो दो किस्तें आ चुकी हैं और बाकी ₹60,000 छत की ढलाई की जियो-टैग फोटो के बाद बनेंगे। अगर "किस्तें 1, ₹15,000, स्थिति Plinth" है, तो मकान प्लिंथ पर दर्ज है पर दूसरी किस्त अभी नहीं दिखती, और यही पूछताछ की जगह है।
8. आम गलतियां और किस्त अटकने की वजहें
24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट से हमारी गिनती में 2024-26 के 7,16,522 घरों में से 56% (4,02,028) को तीनों किस्तें, 28.5% (2,04,458) को दो और 14.8% (1,05,851) को सिर्फ पहली किस्त मिली थी। इनमें करीब 20 हज़ार घर ऐसे हैं जिनकी स्थिति प्लिंथ या उससे आगे दर्ज है पर किस्त सिर्फ एक, और करीब 58.5 हज़ार ऐसे जो छत की ढलाई या पूरे होने पर दर्ज हैं पर किस्तें दो। अगर आपका घर भी ऐसा दिखे, तो ये बातें जांचें:
- चरण की फोटो नहीं चढ़ी: काम हो जाना काफी नहीं, उस चरण की जियो-टैग फोटो AwaasApp से पोर्टल पर जानी चाहिए। ढांचे के मुताबिक घरों का निरीक्षण पंचायत और ब्लॉक स्तर पर होता है, इसलिए पंचायत या ब्लॉक के कर्मचारी से पूछें कि फोटो कब ली जाएगी।
- नाम का मेल नहीं: आधार, बैंक खाते और पोर्टल पर नाम की वर्तनी अलग हो, तो ब्लॉक स्तर की जांच में भुगतान रुक सकता है। ब्लॉक कार्यालय में सही दस्तावेज़ देकर नाम ठीक कराएं।
- खाता लौटा या बंद: PFMS जिस खाते को लौटा दे, वह दोबारा दर्ज होने तक भुगतान नहीं होगा। खाता बंद या निष्क्रिय हो तो बैंक जाकर चालू कराएं और ब्लॉक को नया या सही खाता दें।
- आधार दूसरे बैंक से जुड़ा: आधार से भुगतान होता है तो पैसा उस खाते में जाता है जो आधार से जुड़ा है, ज़रूरी नहीं कि वही जो आप सोच रहे हैं। आधार-बैंक DBT लिंक स्टेटस देख लें।
- शौचालय बाकी: शौचालय बने बिना घर पोर्टल पर "पूरा" नहीं माना जाता।
- नई मंजूरी से कन्फ्यूज़न: 2.89 लाख नए घरों की खबर का मतलब पुरानी सूची वालों के लिए नई किस्त नहीं है। नए घरों के नाम अभी पोर्टल पर नहीं आए हैं।
- शिकायत कहां करें: ढांचे के अनुसार ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला और राज्य, हर स्तर पर शिकायत सुनने वाला अधिकारी तय होना चाहिए, जिसका नाम और फोन पंचायत में लिखा हो, और उसे 15 दिन में निपटारा करना है (पैरा 12.1-12.3)। केंद्र सरकार के CPGRAMS पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज हो सकती है।
घर मंजूरी से 12 महीने में पूरा होना चाहिए (पैरा 5.6.2)। पैसा कम पड़े तो ढांचे में बैंक से ₹70,000 तक का कर्ज दिलाने में मदद का भी प्रावधान है (पैरा 6.2.6); इसके लिए ब्लॉक कार्यालय से पूछें।
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स्रोत: PMAY-G Framework for Implementation (2022), पैरा 4.7.1, 5.1, 5.3.1, 5.4.1, 5.6.2, 5.7, 6.2.6, 8.1, 12, 13.4.2, 13.6.3, 13.7 (हिंदी संस्करण); PIB: PMAY-G 2024-25 से 2028-29 को कैबिनेट की मंजूरी (9 अगस्त 2024); PIB: बारां में राजस्थान के लिए 2,89,355 घरों की मंजूरी (17 अगस्त 2026); PIB: विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025, सवाल-जवाब (11 मई 2026); भारत का राजपत्र S.O. 3518(E), 30 जून 2026 (मज़दूरी दरें); PMAY-G पोर्टल की "Gap in entry of Targets" और "House progress against the target financial year" रिपोर्ट (24 अक्टूबर 2026)। कवर फोटो: थार रेगिस्तान, राजस्थान में PMAY-G का बोर्ड लगा पक्का घर और उसके पास पारंपरिक झोंपा (2019), Ji-Elle, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 4.0; बोर्ड पर लाभार्थी का नाम हमने धुंधला किया है। Rajasthan365 सरकारी वेबसाइट नहीं है; भुगतान की अंतिम पुष्टि PMAY-G पोर्टल, बैंक या ब्लॉक कार्यालय से करें।







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