✅ सीधा जवाब: सरपंच का नतीजा मतदान वाली शाम पंचायत मुख्यालय पर ही आ जाता है, पर पंचायत के 5 साल उस दिन से नहीं गिने जाते। अगले दिन उपसरपंच का चुनाव होता है और उसी बैठक से कार्यकाल गिना जाता है। फिर 3 महीने में शपथ, शपथ के बाद पंचायत का चार्ज, और 15 दिन में चुनाव खर्च का हिसाब। हारने वाले उम्मीदवार के पास 30 दिन तक जिला जज के पास चुनाव याचिका का रास्ता है, जबकि नए सरपंच के खिलाफ 2 साल तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं आ सकता।
🗓️ नतीजा और उपसरपंच चुनाव, चरणवार: पहला चरण नतीजा 24 अक्टूबर की शाम, उपसरपंच 25 अक्टूबर · दूसरा 30 और 31 अक्टूबर · तीसरा 5 और 6 नवंबर · चौथा 16 और 17 नवंबर 2026। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती सभी चरणों की एक साथ 20 नवंबर को। आपकी पंचायत किस चरण में है: जिलेवार चरण सूची देखें →
गांव में सरपंच की जीत का मतलब ढोल-नगाड़े और बधाइयां होता है, पर कानून की घड़ी उसी शाम से चलनी शुरू हो जाती है। अगले कुछ हफ्तों में नए सरपंच को कुछ काम तय समय में करने होते हैं, और कुछ अधिकार तय समय तक सुरक्षित रहते हैं। हारने वाले पक्ष के लिए भी नियम साफ हैं कि नतीजे पर सवाल कहां और कितने दिन में उठाया जा सकता है। नीचे हर कदम राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994, पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 और राज्य निर्वाचन आयोग के आदेशों की असली कॉपी के साथ है। पहले एक मिनट का वीडियो देख लीजिए:
एक नज़र में: जीत के बाद क्या, कब तक
| क्या | कब तक | आधार |
|---|---|---|
| गिनती और नतीजा | मतदान खत्म होते ही, उसी शाम, पंचायत मुख्यालय पर | आयोग आदेश 10090 |
| वोट बराबर हों तो | लॉटरी (पर्ची) से फैसला | निर्वाचन नियम 51 |
| विजय जुलूस | प्रतिबंधित | आयोग प्रेस नोट, 3 अक्टूबर 2026 |
| उपसरपंच का चुनाव | मतदान के अगले दिन | नियम 65, 66 |
| 5 साल की गिनती | उपसरपंच चुनाव वाली बैठक से | अधिनियम धारा 17 |
| शपथ | नतीजे की घोषणा से 3 महीने के अंदर | नियम 76, धारा 24, 39 |
| पंचायत का चार्ज | शपथ के बाद तुरंत | धारा 25(2) |
| चुनाव खर्च का हिसाब | नतीजों की घोषणा के 15 दिन में | आयोग प्रेस नोट |
| चुनाव याचिका | नतीजे से 30 दिन में, ₹500 जमानत | नियम 80, 81 |
| अविश्वास प्रस्ताव पर रोक | पद ग्रहण से 2 साल तक | धारा 37(13) |
1. नतीजे की शाम: गिनती पंचायत पर, बराबरी पर पर्ची, जुलूस पर रोक
पंच और सरपंच के वोट मतपेटी से पड़ते हैं, और उनकी गिनती कहीं और नहीं ले जाई जाती। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक गिनती मतदान खत्म होने के तुरंत बाद ग्राम पंचायत मुख्यालय पर होती है, और नतीजा उसी दिन घोषित होता है।

कड़े मुकाबले में दो उम्मीदवारों के वोट बराबर हो जाएं, तो दोबारा मतदान नहीं होता। नियम 51 के मुताबिक फैसला लॉटरी से होता है, उस तरीके से जो रिटर्निंग अधिकारी उचित समझे।

और जीत की खुशी में जुलूस निकालने पर रोक है। आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही साफ कर दिया था कि पंच और सरपंच के चुनाव के परिणाम के बाद विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा।

2. अगले ही दिन उपसरपंच का चुनाव
नियम 65 के मुताबिक उपसरपंच का चुनाव वार्ड पंच और सरपंच के चुनाव के अगले दिन होता है। इसमें नए चुने गए सभी वार्ड पंच और सरपंच बैठते हैं। उम्मीदवार सिर्फ कोई चुना हुआ वार्ड पंच हो सकता है, और उसका नाम कोई पंच या सरपंच बैठक शुरू होने के एक घंटे के भीतर लिखित में प्रस्तावित करता है (नियम 66(1))। एक से ज़्यादा उम्मीदवार हों तो गुप्त मतदान होता है। पूरी प्रक्रिया यहां पढ़ें: उप-सरपंच का चुनाव कैसे होता है।



3. पांच साल कब से गिने जाते हैं
यह बात ज़्यादातर लोगों को नहीं पता। अधिनियम की धारा 17 कहती है कि पंचायत अपनी पहली बैठक की तारीख से पांच साल तक चलती है, और उसका स्पष्टीकरण कहता है कि उपसरपंच के चुनाव के लिए होने वाली बैठक को ही पहली बैठक माना जाता है। यानी नए सरपंच का कार्यकाल नतीजे वाली शाम से नहीं, अगले दिन की उपसरपंच वाली बैठक से गिना जाता है।

4. तीन महीने में शपथ, फिर पंचायत का चार्ज
अधिनियम की धारा 24 के मुताबिक हर सरपंच और पंच को पद का काम शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी के सामने शपथ लेनी होती है, और नियम 76 इसके लिए नतीजे की घोषणा से 3 महीने का समय देता है।

तीन महीने में शपथ न ली, तो क्या होगा? धारा 39(1)(f) के मुताबिक ऐसा सदस्य पद पर बने रहने के योग्य नहीं रहता, लेकिन सीट अपने-आप खाली नहीं होती: धारा 39(2) के तहत सक्षम अधिकारी सुनवाई का मौका देकर उसे अयोग्य घोषित करता है, तभी पद खाली होता है। तब तक वह पद पर बना रहता है।

शपथ के बाद पुराने पदाधिकारी को पंचायत का चार्ज, सारे कागज़ और संपत्ति तुरंत नए सरपंच को सौंपनी होती है (धारा 25(2))। चार्ज न सौंपने पर सक्षम अधिकारी लिखित आदेश से चार्ज सौंपने का निर्देश दे सकता है (धारा 25(3))।

5. 15 दिन में चुनाव खर्च का पूरा हिसाब
आयोग की प्रेस नोट में यह नियम “अभ्यर्थियों के लिए चुनाव खर्च सीमा” के तहत है, यानी चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार पर, जीता हो या हारा। चुनाव खर्च का पूरा विवरण नतीजों की घोषणा के 15 दिन के भीतर, तय प्रारूप में, संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी या उनके अधिकृत अधिकारी को देना होता है। सरपंच के लिए अधिकतम खर्च सीमा ₹1,00,000 है, पंचायत समिति सदस्य के लिए ₹1,50,000 और जिला परिषद सदस्य के लिए ₹3,00,000।

6. दो साल तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं
नए सरपंच को काम करने का समय मिले, इसके लिए धारा 37(13) एक सुरक्षा देती है: पद ग्रहण के दो साल के भीतर सरपंच या उपसरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस नहीं दिया जा सकता।

हार गए, या नतीजे पर शक है, तो क्या कर सकते हैं
गिनती के दौरान: नियम 49(6) के मुताबिक गिनती में मौजूद कोई भी उम्मीदवार, गिनती चलते हुए, रिटर्निंग अधिकारी से लिखित में दोबारा गिनती की मांग कर सकता है। रिटर्निंग अधिकारी कारण दर्ज करके या तो मांग खारिज कर सकता है या दोबारा गिनती करवा सकता है। यानी दोबारा गिनती की बात गिनती की मेज़ पर ही, लिखित में उठानी होती है।

नतीजे के बाद: नियम 80 के मुताबिक उस चुनाव का कोई भी उम्मीदवार नतीजे की घोषणा से 30 दिन के भीतर क्षेत्र के जिला जज के पास चुनाव याचिका दायर कर सकता है। आधार ये हो सकते हैं: जीतने वाला चुनाव की तारीख पर योग्य नहीं था, भ्रष्ट आचरण हुआ, कोई नामांकन गलत तरीके से खारिज हुआ, या गलत वोट गिने गए या सही वोट खारिज हुए जिससे नतीजा बदला। याचिका के साथ ₹500 जमानत के तौर पर जमा करने होते हैं (नियम 81(2)), और उसकी एक कॉपी जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) को भेजनी होती है (नियम 81(3))।


गिनती में कौन-सा मतपत्र गिना जाता है और कौन-सा खारिज होता है, इसके आयोग के असली उदाहरण यहां देखें: मतपत्र पर ये 11 गलतियां कीं तो वोट खारिज।
सरपंच की ताकत, बजट और मानदेय
शपथ के बाद नए सरपंच के पास क्या अधिकार होते हैं, पंचायत के पास 5 साल में कितना पैसा आता है, और सरपंच को कितना मानदेय मिलता है, ये तीनों बातें हमने आधिकारिक आदेशों के साथ अलग-अलग लेखों में लिखी हैं: सरपंच के अधिकार और कार्य, सरपंच का बजट कितना होता है और सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंच का मानदेय।
इसे भी पढ़ें
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- उप-सरपंच का चुनाव कैसे होता है 2026
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- सरपंच का बजट कितना होता है: 5 साल का हिसाब
- सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंच का मानदेय 2026
- मतपत्र पर ये 11 गलतियां कीं तो वोट खारिज
स्रोत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994: धारा 17 (स्पष्टीकरण सहित), 24, 25, 37(13), 39 (पंचायती राज मंत्रालय की प्रति और राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका); राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994: नियम 49, 51, 65, 66, 76, 80, 81 (राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका); राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: चुनाव कार्यक्रम प्रेस नोट 9836 (3 अक्टूबर 2026) और संशोधित समय-सारणी आदेश 10090 (6 अक्टूबर 2026)। फोटो: दौसा के एक मतदान केंद्र पर पर्ची लिए कतार में खड़े मतदाता, लोकसभा चुनाव 2014, भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।







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