सरपंच, प्रधान और वार्ड पंच का मानदेय 2026 — कितना मिलता है, और अधिकार क्या हैं
राज्य में 14,403 सरपंच और 1,30,584 वार्ड पंच पदों पर चुनाव होने हैं। नीचे हर पद का मानदेय या बैठक भत्ता है — हर आंकड़े के साथ उसकी लागू होने की तारीख, क्योंकि इसी एक बात के न लिखे होने से इंटरनेट पर तीन अलग-अलग आंकड़े घूम रहे हैं। अपडेट: 2 अक्टूबर 2026।
सीधा जवाब
सरपंच को ₹6,072, प्रधान को ₹10,626 और जिला प्रमुख को ₹15,180 मासिक मानदेय मिलता है — तीनों 1 अप्रैल 2024 से लागू। वार्ड पंच को कोई वेतन नहीं मिलता, सिर्फ ₹276 प्रति बैठक का भत्ता। और उप-सरपंच के लिए अलग मानदेय तय ही नहीं है — नीचे वजह दी है।
हर पद का मानदेय और भत्ता
| पद | स्तर | मासिक मानदेय | बैठक भत्ता | कब से लागू |
|---|---|---|---|---|
| सरपंच | ग्राम पंचायत | ₹6,072 | — | 1 अप्रैल 2024 |
| उप-सरपंच | ग्राम पंचायत | नहीं मिलता | — | — |
| वार्ड पंच | ग्राम पंचायत | नहीं मिलता | ₹276 प्रति बैठक | 1 अप्रैल 2023 |
| प्रधान | पंचायत समिति | ₹10,626 | — | 1 अप्रैल 2024 |
| पंचायत समिति सदस्य | पंचायत समिति | नहीं मिलता | ₹483 प्रति बैठक | 1 अप्रैल 2023 |
| जिला प्रमुख | जिला परिषद | ₹15,180 | — | 1 अप्रैल 2024 |
| जिला परिषद सदस्य | जिला परिषद | नहीं मिलता | ₹690 प्रति बैठक | 1 अप्रैल 2023 |
सदस्यों (वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य) के बैठक भत्ते की जो दरें ऊपर दी हैं, वे 1 अप्रैल 2023 के संशोधन की हैं। अप्रैल 2024 में जो करीब 10% की बढ़ोतरी हुई, उसकी खबरों में तीनों मुखिया पदों के आंकड़े साफ़ दिए गए हैं, पर सदस्यों के संशोधित बैठक भत्ते का आंकड़ा कहीं स्पष्ट रूप से प्रकाशित नहीं मिला। इसलिए यहां 2023 की पुष्ट दर तारीख के साथ दी है, उसे अनुमान से बढ़ाकर नहीं लिखा।
₹4,800, ₹5,520 या ₹6,072 — कौन सा सही है?
तीनों सही हैं, बस अलग-अलग सालों के आदेश के। जो पेज तारीख नहीं लिखते, वही भ्रम पैदा करते हैं। पूरा क्रम:
| कब से | जिला प्रमुख | प्रधान | सरपंच |
|---|---|---|---|
| पहले2022 की बढ़ोतरी के बाद | ₹12,000 | ₹8,400 | ₹4,800 |
| 1 अप्रैल 2023करीब 15% बढ़ोतरी | ₹13,800 | ₹9,660 | ₹5,520 |
| 1 अप्रैल 2024करीब 10% बढ़ोतरी — यही मौजूदा दर है | ₹15,180 | ₹10,626 | ₹6,072 |
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हर पद करता क्या है
सरपंचग्राम पंचायत
ग्राम पंचायत का मुखिया, सीधे जनता द्वारा चुना जाता है। कार्यकाल 5 साल।
- ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता करना
- पंचायत के खाते से भुगतान पर हस्ताक्षर — ग्राम विकास अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से
- नरेगा के काम, पट्टे, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और पंचायत की संपत्ति का प्रबंधन
- पंचायत के प्रस्ताव ग्राम सभा से पास कराना — असली ताकत प्रस्ताव पास कराने में है, निजी कोष में नहीं
उप-सरपंचग्राम पंचायत
चुने हुए वार्ड पंचों में से ही चुना जाता है। सरपंच की अनुपस्थिति में उनका काम देखता है।
- सरपंच की अनुपस्थिति या पद रिक्त होने पर सरपंच के कार्य करना
- वार्ड पंच के रूप में अपना बैठक भत्ता यथावत मिलता रहता है
- नियमों में उप-सरपंच के लिए अलग से कोई मासिक मानदेय तय नहीं है
वार्ड पंचग्राम पंचायत
हर वार्ड से सीधे चुना गया ग्राम पंचायत का सदस्य। कार्यकाल 5 साल।
- ग्राम पंचायत की बैठक में मत देना — यही सबसे बड़ा अधिकार है
- उप-सरपंच के चुनाव में मतदान
- अपने वार्ड के काम पंचायत की बैठक में रखवाना
- कोई मासिक वेतन नहीं — सिर्फ बैठक में उपस्थिति का भत्ता
प्रधानपंचायत समिति
पंचायत समिति (ब्लॉक) का मुखिया। पंचायत समिति सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
- पंचायत समिति की बैठक बुलाना और अध्यक्षता करना
- ब्लॉक स्तर की विकास योजनाओं और बजट की मंज़ूरी में भूमिका
- विकास अधिकारी (BDO) के कामकाज की निगरानी
पंचायत समिति सदस्यपंचायत समिति
पंचायत समिति के निर्वाचन क्षेत्र से सीधे चुना गया सदस्य।
- पंचायत समिति की बैठक में मत देना
- प्रधान और उप-प्रधान के चुनाव में मतदान
- अपने क्षेत्र के काम समिति के सामने रखना
जिला प्रमुखजिला परिषद
जिला परिषद का मुखिया — पंचायती राज का सबसे ऊपरी पद। जिला परिषद सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
- जिला परिषद की बैठक बुलाना और अध्यक्षता करना
- जिले की पंचायती राज योजनाओं की समीक्षा
- जिला स्तर पर सबसे ऊंचा निर्वाचित पंचायती राज पद
जिला परिषद सदस्यजिला परिषद
जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्र से सीधे चुना गया सदस्य।
- जिला परिषद की बैठक में मत देना
- जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख के चुनाव में मतदान
गांव बनाम शहर — किस मुखिया को कितना
एक सरपंच गांव की पूरी सरकार चलाता है, पर उसका मानदेय नगर पालिका अध्यक्ष से भी कम है:
| पद | मासिक मानदेय |
|---|---|
| महापौर (नगर निगम) | ₹30,360 |
| सभापति (नगर परिषद) | ₹18,216 |
| अध्यक्ष (नगर पालिका) | ₹11,385 |
| जिला प्रमुख (जिला परिषद) | ₹15,180 |
| प्रधान (पंचायत समिति) | ₹10,626 |
| सरपंच (ग्राम पंचायत) | ₹6,072 |
निकाय के आंकड़े भी 1 अप्रैल 2024 से लागू हैं। पार्षद का पूरा हिसाब इस पेज पर है।
चुनाव लड़ने की योग्यता — 2026 के नियम
| शर्त | 2026 में स्थिति |
|---|---|
| न्यूनतम उम्र | 21 वर्ष — गिनती नामांकन पत्रों की जांच वाले दिन से |
| मतदाता सूची | उसी ग्राम पंचायत के किसी भी वार्ड की सूची में नाम होना ज़रूरी |
| शैक्षणिक योग्यता | ज़रूरी नहीं — 2015 की 8वीं/5वीं पास शर्त हटाई जा चुकी है |
| दो से ज़्यादा बच्चे | अब रोक नहीं — मार्च 2026 से (अधिनियम संख्या 6, 2026) |
| घर में चालू शौचालय | अब भी ज़रूरी |
| सरकारी वेतन/मानदेय पाने वाले | चुनाव नहीं लड़ सकते |
| चुनाव खर्च की सीमा | अधिकतम ₹1 लाख, प्रचार में सिर्फ एक वाहन |
सावधान: राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पड़ा पुराना FAQ अब भी 8वीं पास और दो बच्चों वाली शर्त दिखाता है। वह 2015 के नियमों का दस्तावेज़ है, 2026 का नहीं। पूरी योग्यता इस पेज पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राजस्थान में सरपंच की सैलरी कितनी होती है?
- सरपंच को मासिक मानदेय ₹6,072 मिलता है, जो 1 अप्रैल 2024 से लागू है। इंटरनेट पर आपको ₹4,800 और ₹5,520 भी लिखा मिलेगा — वे गलत नहीं, बल्कि पुराने आदेशों के आंकड़े हैं: ₹4,800 वाली दर 2022 की, ₹5,520 वाली 1 अप्रैल 2023 की, और ₹6,072 वाली 1 अप्रैल 2024 की है। इसे वेतन कहना भी ठीक नहीं — यह मानदेय है, और पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 के मुताबिक संस्था की अपनी आय से दिया जाता है।
- वार्ड पंच को कितनी सैलरी मिलती है?
- वार्ड पंच को कोई मासिक वेतन या मानदेय नहीं मिलता — सिर्फ बैठक भत्ता मिलता है, यानी ग्राम पंचायत की बैठक में उपस्थिति का भत्ता, ₹276 प्रति बैठक (1 अप्रैल 2023 की दर)। बैठक न हो तो उस महीने कुछ नहीं। वार्ड पंच की असली ताकत पैसा नहीं, बैठक में उसका वोट है — उप-सरपंच भी इन्हीं के वोट से चुना जाता है।
- उप-सरपंच का मानदेय कितना है?
- उप-सरपंच के लिए अलग से कोई मासिक मानदेय तय ही नहीं है। राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 में मानदेय की सूची (नियम 28) में सिर्फ मुखिया पद और सदस्य आते हैं; उप पद सिर्फ दैनिक भत्ते की सूची (नियम 29) में हैं, वह भी अपने मुखिया के बराबर दर पर। उप-सरपंच चुने हुए वार्ड पंचों में से ही बनता है, इसलिए उसे वार्ड पंच वाला बैठक भत्ता मिलता रहता है। जिन पेजों पर उप-सरपंच की सैलरी ₹3,000–₹5,000 लिखी है, वे ज़्यादातर महाराष्ट्र के आंकड़े हैं।
- प्रधान और जिला प्रमुख को कितना मानदेय मिलता है?
- प्रधान (पंचायत समिति का मुखिया) को ₹10,626 और जिला प्रमुख (जिला परिषद का मुखिया) को ₹15,180 मासिक मानदेय मिलता है — दोनों 1 अप्रैल 2024 से लागू। इससे पहले ये क्रमशः ₹9,660 और ₹13,800 थे। दोनों पद सीधे जनता नहीं चुनती: प्रधान को पंचायत समिति सदस्य और जिला प्रमुख को जिला परिषद सदस्य चुनते हैं।
- क्या सरपंच को विधायक की तरह कोई निधि मिलती है?
- नहीं। विधायक को विधायक कोष मिलता है, सरपंच को उस तरह की कोई तय निजी निधि नहीं मिलती। गांव के काम ग्राम पंचायत के अपने बजट और ऊपर से आने वाली योजनाओं (वित्त आयोग की राशि, नरेगा आदि) से होते हैं, और वह प्रस्ताव ग्राम सभा व पंचायत की बैठक में पास होता है। इसीलिए सरपंच की असली ताकत पैसा नहीं, प्रस्ताव पास कराने की क्षमता है।
- सरपंच बनने के लिए 8वीं पास होना ज़रूरी है क्या?
- नहीं। 2015 में लगाई गई 8वीं पास (अनुसूचित क्षेत्र में 5वीं पास) की शर्त हटाई जा चुकी है, और फरवरी 2026 में सरकार ने विधानसभा में साफ किया कि इसे वापस लाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसी तरह दो से ज़्यादा बच्चों वाली रोक भी मार्च 2026 से खत्म हो चुकी है। ध्यान रहे — राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पड़ा पुराना FAQ अब भी दोनों पुरानी शर्तें दिखाता है; वह 2015 के नियमों का दस्तावेज़ है।
