🔴 सीधा जवाब: राजस्थान में पार्षद को कोई मासिक वेतन नहीं मिलता। उसे सिर्फ बैठक भत्ता मिलता है — नगर निगम में ₹911 प्रति बैठक, और महीने में अधिकतम ₹2,732 (यानी ज्यादा से ज्यादा तीन बैठकों का)। इंटरनेट पर जो “पार्षद की सैलरी ₹6,000–10,000” लिखा मिलता है, वह दूसरे राज्यों का आंकड़ा है। मासिक मानदेय सिर्फ निकाय प्रमुख को मिलता है — महापौर को ₹30,360।
14 सितंबर को राजस्थान के 309 निकायों के 10,245 वार्डों में नए पार्षद चुने जाएंगे। जीतने वाले और वोट देने वाले, दोनों के मन में यही सवाल रहता है — पार्षद को मिलता क्या है, और वह आपके मोहल्ले के लिए कर क्या सकता है। नीचे दोनों का सीधा हिसाब है, सरकारी आदेशों के आंकड़ों के साथ।
पार्षद को कितने पैसे मिलते हैं?
स्वायत्त शासन विभाग के 1 अप्रैल 2024 से लागू आदेश के मुताबिक भत्तों में करीब 10% बढ़ोतरी हुई थी। मौजूदा दरें:
| निकाय | प्रति बैठक भत्ता | महीने में अधिकतम |
|---|---|---|
| नगर निगम | ₹911 | ₹2,732 |
| नगर परिषद | ₹759 | ₹2,277 |
| नगर पालिका | ₹607 | ₹1,822 |
महीने की अधिकतम राशि तीन बैठकों के बराबर है — यानी महीने में चार बैठकें हो जाएं तो भी चौथी का भत्ता नहीं मिलता। और बैठक न हो तो उस महीने कुछ नहीं। यह वेतन नहीं है, उपस्थिति का भत्ता है।
निकाय प्रमुख का मानदेय अलग है
पार्षदों से अलग, निकाय के प्रमुख को हर महीने तय मानदेय मिलता है:
| पद | निकाय | मासिक मानदेय |
|---|---|---|
| महापौर | नगर निगम | ₹30,360 |
| सभापति | नगर परिषद | ₹18,216 |
| अध्यक्ष | नगर पालिका | ₹11,385 |
यही वजह है कि 21 सितंबर को होने वाला महापौर/सभापति/अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के लिए इतना अहम होता है — पद के साथ मानदेय, गाड़ी और दफ्तर सब बदल जाता है।
“पार्षद निधि” का सच
सबसे बड़ी गलतफहमी यही है। विधायक को विधायक कोष (MLA-LAD) और सांसद को सांसद निधि मिलती है — पार्षद को उस तरह की कोई तय निजी निधि नहीं मिलती। वार्ड के काम निकाय के अपने बजट से होते हैं, और वह बजट बोर्ड की बैठक में पास होता है।
इसका सीधा मतलब यह है कि पार्षद की असली ताकत पैसा नहीं, वोट है — बोर्ड में प्रस्ताव पास कराने की क्षमता। इसीलिए किस दल का बोर्ड बना, यह हर वार्ड के विकास पर असर डालता है, भले आपका पार्षद किसी भी दल का हो।
पार्षद होता कौन है, और मनोनीत पार्षद क्या है
- पार्षद (वार्ड सदस्य): हर वार्ड से जनता द्वारा सीधे चुना गया प्रतिनिधि। कार्यकाल 5 साल।
- मनोनीत/नामित पार्षद: चुनाव नहीं लड़ते, सरकार/निकाय द्वारा विशेष अनुभव के आधार पर मनोनीत किए जाते हैं। इनका बोर्ड की बैठक में मत देने का अधिकार नहीं होता — यही चुने हुए पार्षद से सबसे बड़ा फर्क है।
- एल्डरमैन: कुछ राज्यों में मनोनीत सदस्य के लिए यही शब्द चलता है।
- सभासद और पार्षद: मतलब एक ही है — उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में “सभासद” और राजस्थान/मध्य प्रदेश में “पार्षद” कहा जाता है।
पार्षद के अधिकार और काम
पार्षद का दायरा उसके वार्ड तक है, और ज्यादातर वही काम हैं जिनके लिए लोग रोज परेशान होते हैं:
- सफाई व कचरा उठाव — गली की सफाई, कचरा गाड़ी का नियमित आना
- स्ट्रीट लाइट — नई लाइट लगवाना, खराब बदलवाना
- पेयजल व सीवर — लाइन, लीकेज, सीवर जाम
- सड़क, नाली व नालियों की सफाई
- बोर्ड में प्रस्ताव — वार्ड के कामों को बजट में शामिल कराना, यही उसका सबसे बड़ा अधिकार है
- प्रमाण पत्र व पट्टे से जुड़े आवेदनों में अनुशंसा — जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, नामांतरण
जो काम पार्षद के दायरे में नहीं हैं: पुलिस, बिजली कंपनी (डिस्कॉम), स्कूल-अस्पताल का प्रशासन और राजस्व/तहसील के मामले — इनके लिए संबंधित विभाग ही सही रास्ता है।
पार्षद या निकाय की शिकायत कैसे करें
- पहले लिखित शिकायत दर्ज कराएं — राजस्थान संपर्क पोर्टल या हेल्पलाइन 181 पर। यहीं से शिकायत नंबर मिलता है, जिससे मामला ट्रैक होता है।
- शिकायत नंबर के साथ वार्ड पार्षद और निकाय के संबंधित अनुभाग (सफाई/प्रकाश/जल) को बताएं।
- निकाय कार्यालय में लिखित आवेदन दें और पावती (रिसीविंग) जरूर लें — बिना पावती की शिकायत का कोई रिकॉर्ड नहीं रहता।
- सुनवाई न हो तो आयुक्त/अधिशासी अधिकारी और फिर संभागीय स्तर पर शिकायत की जा सकती है।
- पार्षद के आचरण से जुड़ी शिकायत निकाय के प्रमुख और स्वायत्त शासन विभाग को की जाती है।
व्यावहारिक सलाह: फोन पर की गई शिकायत का कोई सबूत नहीं होता। संपर्क पोर्टल का नंबर + व्हाट्सऐप पर भेजा लिखित संदेश — यह दोनों मिलकर काम कराने का सबसे तेज तरीका हैं।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
राजस्थान में पार्षद की सैलरी कितनी है?
कोई मासिक वेतन नहीं मिलता। नगर निगम के पार्षद को ₹911 प्रति बैठक, नगर परिषद में ₹759 और नगर पालिका में ₹607 प्रति बैठक भत्ता मिलता है — महीने में अधिकतम क्रमशः ₹2,732, ₹2,277 और ₹1,822।
महापौर को कितना वेतन मिलता है?
महापौर को ₹30,360 प्रति माह, नगर परिषद सभापति को ₹18,216 और नगर पालिका अध्यक्ष को ₹11,385 प्रति माह मानदेय मिलता है (1 अप्रैल 2024 से लागू दरें)।
क्या पार्षद को विधायक की तरह वार्ड निधि मिलती है?
नहीं। विधायक कोष और सांसद निधि की तरह पार्षद को कोई तय निजी निधि नहीं मिलती। वार्ड के काम निकाय के बजट से होते हैं, जो बोर्ड की बैठक में पास होता है।
मनोनीत पार्षद और चुने हुए पार्षद में क्या अंतर है?
मनोनीत पार्षद चुनाव नहीं लड़ते और उन्हें बोर्ड की बैठक में मत देने का अधिकार नहीं होता, जबकि चुना हुआ पार्षद वार्ड की जनता का प्रतिनिधि होता है और मतदान कर सकता है।
पार्षद का कार्यकाल कितने साल का होता है?
पांच साल।
पार्षद काम न करे तो क्या करें?
राजस्थान संपर्क पोर्टल या 181 पर शिकायत दर्ज कर शिकायत नंबर लें, निकाय कार्यालय में लिखित आवेदन देकर पावती लें, और सुनवाई न होने पर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी के स्तर पर शिकायत करें।
इसे भी पढ़ें
- 14 सितंबर के नतीजे — आपके निकाय में किसका बोर्ड
- पार्षद का चुनाव कैसे लड़ें — पात्रता, कागज व खर्च सीमा
- अपने वार्ड की वोटर लिस्ट व वार्ड नंबर देखें
स्रोत: स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान के मानदेय/बैठक भत्ता आदेश (1 अप्रैल 2024 से प्रभावी, लगभग 10% वृद्धि) तथा उससे पूर्व की 20% वृद्धि की अधिसूचना; राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के अंतर्गत निकाय व वार्ड सदस्य के कार्य व अधिकार।






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