🟢 अब तक (23 अगस्त): जयपुर के पास बगरू में CJP टीम पर हमले के बाद विवाद गहराया — संगठन ने शिक्षा मंत्री को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, एक वॉलंटियर के घर के बाहर पुलिस तैनाती के आरोप लगे, और इसी बीच सरकार ने विधानसभा में माना कि राजस्थान के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन ही नहीं है। जिस स्कूल पर विवाद शुरू हुआ, उसके बच्चों को अब एक खाली मकान में शिफ्ट कर दिया गया है।

जयपुर। सोशल मीडिया से लेकर विधानसभा तक — इन दिनों राजस्थान की सबसे चर्चित बहस एक अजीब से नाम वाले संगठन के इर्द-गिर्द घूम रही है: CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी। स्कूलों की जर्जर हालत दिखाने निकली इस टीम पर जयपुर के पास हमला हुआ, और उसके बाद से यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में है। यहां पूरी कहानी है — CJP है क्या, विवाद कैसे शुरू हुआ, और सरकारी आंकड़े खुद क्या कह रहे हैं।

CJP क्या है और यह नाम कहां से आया?

कॉकरोच जनता पार्टी कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक व्यंग्य-आधारित युवा दबाव समूह (सैटायरिकल प्रेशर ग्रुप) है। इसकी स्थापना 16 मई 2026 को अभिजीत दिपके ने की — वे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े पॉलिटिकल कम्युनिकेशन रणनीतिकार रह चुके हैं। नाम की कहानी भी उतनी ही असामान्य है: 15 मई 2026 को देश के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी में बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से किए जाने की चर्चा हुई — उसी टिप्पणी को व्यंग्य में अपनाकर युवाओं ने यह नाम रख लिया। संगठन का घोषित मकसद है सरकारी स्कूलों-संस्थानों की जमीनी हालत का "निरीक्षण" कर उसे सार्वजनिक करना। राजस्थान में इसका अभियान "स्कूल ठीक करो" नाम से चल रहा है।

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बगरू की घटना: विवाद कैसे भड़का

CJP की राजस्थान टीम — जिसका चेहरा सह-संयोजक आशुतोष रांका हैं — 21 अगस्त को जयपुर के पास बगरू क्षेत्र के एक गांव में सरकारी स्कूल देखने पहुंची। टीम का दावा था कि वहां स्कूल भैंसों के बाड़े जैसी जगह में, गोबर और चारे के बीच चल रहा है। आरोप है कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने टीम को दौड़ाया, मारपीट की और गाड़ियों में तोड़फोड़ की — वॉलंटियर्स ने हाथ टूटने तक की बात कही है। इसके वीडियो वायरल हुए और मामला राष्ट्रीय बन गया।

इसके बाद घटनाक्रम तेज़ी से बढ़ा:

  • CJP ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को कार्रवाई के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
  • संगठन ने आरोप लगाया कि एक वॉलंटियर के घर के बाहर 15 पुलिसकर्मी तैनात कर "डराने की रणनीति" अपनाई गई; CJP ने राजस्थान पुलिस को "मूकदर्शक" कहा।
  • दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत विपक्षी नेताओं ने हमले पर सवाल उठाए।
  • भाजपा ने पलटवार में संगठन का मज़ाक उड़ाया और उस पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया; शिक्षक संगठनों ने कहा कि स्कूलों को "राजनीतिक अखाड़ा" नहीं बनने दिया जाएगा।
  • विवाद वाले स्कूल के बच्चों को एक खाली मकान में शिफ्ट कर पढ़ाई शुरू कराई गई।

असली कहानी आंकड़ों में: सरकार ने खुद क्या माना

इसी विवाद के बीच जो सबसे बड़ी खबर निकली, वह किसी आरोप से नहीं — सरकार के अपने आंकड़ों से निकली। समग्र शिक्षा अभियान के तहत UDISE (2025-26) के आंकड़ों और विधानसभा में दिए गए जवाबों के अनुसार:

आंकड़ास्थिति
611 सरकारी स्कूलअपना भवन ही नहीं — कक्षाएं खुले मैदान, टिन शेड या किराये की जगहों पर
3,768 स्कूल भवनजर्जर घोषित (शिक्षा मंत्री का विधानसभा में बयान)
2,047 स्कूलभवन है पर चालू शौचालय नहीं
1,049 स्कूलपीने के पानी की बुनियादी सुविधा नहीं

यानी जिस सवाल से विवाद शुरू हुआ — "स्कूलों की हालत क्या है?" — उसका जवाब सरकारी रिकॉर्ड में पहले से दर्ज था। राज्य में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 64 हज़ार से अधिक है, और मरम्मत के लिए बजट प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी सरकार कह चुकी है।

दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं

CJP का पक्ष: संगठन कहता है कि वह किसी दल के लिए नहीं, स्कूलों की हालत सुधरवाने के लिए निरीक्षण कर रहा है; हमला और पुलिस तैनाती उसे चुप कराने की कोशिश है। 14 अगस्त को अलवर में संगठन ने प्राथमिक स्कूल के बच्चों के साथ धरना देकर अतिरिक्त कमरों, साफ शौचालय और पीने के पानी की मांग की थी।

सरकार/भाजपा का पक्ष: सत्ता पक्ष का कहना है कि संगठन राजनीति से प्रेरित है और "निरीक्षण" के नाम पर माहौल बनाया जा रहा है; स्कूलों की मरम्मत के लिए सर्वे और बजट की प्रक्रिया पहले से चल रही है। शिक्षक संगठन भी स्कूल परिसरों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ हैं।

दोनों दावों के बीच तथ्य यह है कि हमले की घटना की पुष्टि कई राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में हुई है, और स्कूल-भवनों के आंकड़े सरकार के अपने हैं। आगे क्या होगा — यह 48 घंटे के अल्टीमेटम, पुलिस जांच और विधानसभा सत्र (मानसून सत्र चल रहा है) पर निर्भर करेगा।

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