जयपुर। सोमवार, 21 सितंबर को राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में प्रमुख चुने गए — और पांच नगर निगमों में से चार पर भाजपा का महापौर बना, जबकि कांग्रेस सिर्फ बीकानेर बचा पाई। दिन की सबसे बड़ी कहानी अजमेर और पाली की रही, जहां पार्षदों की गिनती में कांग्रेस आगे थी, फिर भी महापौर की कुर्सी भाजपा को मिल गई। पाली में तो कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को सिर्फ 3 वोट मिले। मतदान सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक हुआ और गिनती तुरंत बाद।
🟢 एक लाइन में: 5 निगमों में वोट — भाजपा 4 (अजमेर, पाली, अलवर, उदयपुर), कांग्रेस 1 (बीकानेर) · भीलवाड़ा व भरतपुर में महापौर पहले ही निर्विरोध (दोनों भाजपा) · यानी 7 में से 6 निगम भाजपा के · 32 निकायों में अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए थे — भाजपा 28, कांग्रेस 2, भाजपा-समर्थित निर्दलीय 2 · बारां परिषद में आप की सभापति · उप-प्रमुख 22 सितंबर, जयपुर-जोधपुर-कोटा-सुकेत 25 सितंबर।
पांचों निगमों का नतीजा
| निगम (वार्ड · बहुमत) | महापौर | वोट | पार्षदों का गणित |
|---|---|---|---|
| अजमेर (80 · 41) | अनामिका शर्मा (भाजपा) | 43 — कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 | कांग्रेस 37, भाजपा 32, निर्दलीय 11 — उलटफेर |
| पाली (65 · 33) | नमिता बुबकिया (भाजपा) | 33 — निर्दलीय राजबाला हिंगड़ 29, कांग्रेस की सुमित्रा जैन 3 | कांग्रेस 29, भाजपा 21, निर्दलीय 15 — उलटफेर |
| अलवर (65 · 33) | सुमनलता अग्रवाल (भाजपा) | 42 | भाजपा 28, कांग्रेस 23, निर्दलीय 13, बसपा 1 |
| उदयपुर (80 · 41) | पारस सिंघवी (भाजपा) | 55 | भाजपा 53 — बहुमत पहले से |
| बीकानेर (80 · 41) | अनिल कल्ला (कांग्रेस) | — | कांग्रेस 42 — बहुमत पहले से |
अजमेर और पाली: ज़्यादा पार्षद, फिर भी हार
अजमेर में 80 वार्डों में कांग्रेस के 37 और भाजपा के 32 पार्षद थे; बहुमत 41 का था और 11 निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में। नतीजा — भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 और कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट। यानी निर्दलीयों का लगभग पूरा खेमा भाजपा के साथ गया और कांग्रेस अपने ही आंकड़े पर अटकी रह गई। 35 साल में यह पहला मौका था जब अजमेर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी नहीं थी, फिर भी महापौर उसी का बना।
पाली का नतीजा इससे भी तीखा रहा। 65 वार्डों में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय थे। भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले — ठीक बहुमत का आंकड़ा। कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय लड़ीं राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को सिर्फ 3। मतलब साफ है — कांग्रेस के लगभग सारे पार्षद अपनी ही पार्टी की प्रत्याशी को छोड़कर बागी के साथ चले गए, और उस बंटवारे का फायदा भाजपा को मिला। पाली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह क्षेत्र है।
अलवर में भाजपा के पास 28 पार्षद थे और बहुमत 33 का — सुमनलता अग्रवाल को 42 वोट मिले, यानी निर्दलीयों का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ आया। यह नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है, और अलवर नगर निगम को अपनी पहली महापौर मिली।
कहां कांग्रेस टिकी
बीकानेर में कांग्रेस के 42 पार्षद थे — 80 वार्डों में स्पष्ट बहुमत — और अनिल कल्ला महापौर बने। नाम वापसी के दिन पार्टी के बागी नवरतन डागा को मना लेना यहां निर्णायक साबित हुआ; डागा निर्दलीय मैदान में डटे रहते तो पाली जैसा बंटवारा यहां भी हो सकता था। यह केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का शहर है, जहां भाजपा वार्ड चुनाव में ही पिछड़ गई थी।
परिषद-पालिकाओं में क्या हुआ
- बारां नगर परिषद: आम आदमी पार्टी की शीतल राठौर सभापति चुनी गईं — 60 में से आप के 31, कांग्रेस के 18, भाजपा के 9 और 2 निर्दलीय पार्षद थे। सभापति चुनाव में उन्हें 31 और कांग्रेस प्रत्याशी को दो निर्दलीयों सहित 20 वोट मिले। यह बारां में आप का पहला बोर्ड है और कांग्रेस के करीब 15 साल के कब्जे का अंत।
- 32 निकायों में अध्यक्ष पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे — भाजपा 28, कांग्रेस 2 और भाजपा-समर्थित निर्दलीय 2। इसीलिए 305 में से मतदान 273 निकायों में ही हुआ।
- निगमों में भीलवाड़ा (जसवंत कंवर) और भरतपुर (अनुराधा सिंह) की महापौर 17 और 18 सितंबर को ही निर्विरोध चुनी जा चुकी थीं — दोनों भाजपा की।
हमने 20 सितंबर को आयोग की दलवार तालिका से गिना था कि 143 निकायों में किसी दल के पास बहुमत नहीं था और 47 निकाय बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर थे — आज के नतीजे उसी गणित का जवाब हैं, और अजमेर-पाली दिखाते हैं कि गुप्त मतदान में पार्षदों की संख्या अकेले कुछ तय नहीं करती।
अब आगे क्या
- 22 सितंबर: उप-महापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष का चुनाव — बैठक सुबह 10 बजे से।
- 25 सितंबर: जयपुर, जोधपुर, कोटा निगम और सुकेत पालिका में महापौर/अध्यक्ष का मतदान, सुबह 10 से दोपहर 2 — जयपुर में सुनील कोठारी बनाम सुनीता महावर, जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता बनाम राजेंद्र सिंह सोलंकी, कोटा में अनसुइया गोस्वामी बनाम सुनीता सुमन।
- 26 सितंबर: इन चारों निकायों में उप-प्रमुख का चुनाव।
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स्रोत: नतीजे समाचार रिपोर्टों के अनुसार — दैनिक नवज्योति, अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, द सूत्र, ईटीवी भारत व यूएनआई वार्ता (21 सितंबर 2026); पार्षदों का दलवार गणित राज्य निर्वाचन आयोग की विजेता तालिका (17 सितंबर, अंतिम) से। राज्य निर्वाचन आयोग अध्यक्षीय नतीजों की एकीकृत सूची अलग से जारी करता है — वह आने पर यह पेज अपडेट होगा।






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