
राजस्थान: बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा, 56 हजार यात्री करेंगे सफर
राजस्थान सरकार की 'वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026-27' के तहत करीब 56 हजार बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थ यात्रा का मौका मिलेगा। आवेदन 27 मई से शुरू हो चुके हैं।

राजस्थान सरकार की 'वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026-27' के तहत करीब 56 हजार बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थ यात्रा का मौका मिलेगा। आवेदन 27 मई से शुरू हो चुके हैं।

नागौर के मकराना में गुर्जर समाज ने मृत्यु भोज और पेरावणी जैसी कुरीतियों को छोड़ा। अब युवाओं ने बच्चों की शिक्षा, सरकारी योजनाओं और पशुपालन पर ध्यान केंद्रित किया है।

पद्मिनी एकादशी 2026 कब है? जानें इस पावन दिन का महत्व, कथा और व्रत विधि। यह मलमास में आती है और पुण्यदायी मानी जाती है।

राजस्थान का सांवलिया सेठ मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। जानिए, किस स्थान पर है यह कृष्णधाम और इसका वार्षिक चढ़ावा कितना है।

उदयपुर के कलाकार मांगीलाल भील ने मोर पंखों पर अपनी अद्भुत कलाकारी से भील संस्कृति को जीवंत कर दिया है। उनकी इस अनूठी शैली की हर तरफ चर्चा हो रही है।

बाड़मेर के गडरारोड़ में 150 साल पुराना एक रहस्यमयी कुआं मिला है, जो ब्रिटिश कालीन सुरंग से जुड़ा है। यह ऐतिहासिक जल-तंत्र अपनी बनावट और पाकिस्तान तक पानी की सप्लाई के दावों को लेकर चर्चा में है।

गुलाबी नगरी जयपुर में स्ट्रीट फूड का अंदाज बदल रहा है। अब स्वाद के साथ-साथ डिशेज के अनोखे नाम ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

धौलपुर की 'छप्पर उठाने' की परंपरा कभी सामुदायिक एकता का प्रतीक हुआ करती थी। आधुनिक निर्माण शैली के बीच यह सामाजिक उत्सव अब इतिहास के पन्नों में सिमट रहा है।

राजस्थान के जालौर जिले की 125 साल पुरानी राठी रबड़ी भीषण गर्मी में लोगों को राहत देने वाला एक पारंपरिक कूलिंग एजेंट बनी हुई है। अपने अनोखे स्वाद के कारण यह आम लोगों के साथ-साथ वीआईपी लोगों की भी पहली पसंद है।

जैन धर्म में मौन को एक महत्वपूर्ण साधना माना गया है। यह लेख बताता है कि पूजा और भोजन के समय अनुशासन का पालन करना क्यों आवश्यक है।

भीलवाड़ा में आयोजित पद संकीर्तन यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजन के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं और विरोध देखने को मिला।

उदयपुर में आयोजित क्लासिकल डांस फेस्टिवल में 400 से अधिक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भव्यता को एक नई पहचान दी है।