🕉️ सावन स्पेशल: सरिस्का के जंगल में छिपा 1000+ साल पुराना शिवधाम — इतिहास, ट्रेक और आस्था एक साथ। राजस्थान के और प्रसिद्ध महादेव मंदिर → पूरी सूची

अलवर। सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में, टहला की पहाड़ी पर एक ऐसा शिवधाम है जो कभी पूरा नगर हुआ करता था — नीलकंठ महादेव। 961 ई. के शिलालेख वाले इस स्थल (प्राचीन नाम राज्यपुरा) पर आज भी करीब 200 मंदिरों के अवशेष बिखरे मिलते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह 'राजस्थान का खजुराहो' जैसा अनुभव है, और शिवभक्तों के लिए सावन का विशेष धाम।

एक नज़र में

विवरणजानकारी
स्थानटहला (राजगढ़ तहसील), अलवर — सरिस्का बफर ज़ोन
निर्माण काल6वीं–9वीं सदी (961 ई. का शिलालेख — गुर्जर-प्रतिहार युग)
खासियतमुख्य शिव मंदिर + ~200 मंदिरों के अवशेष, उत्कृष्ट शिल्पकला
पहुंचतलहटी से ~1.5 किमी की चढ़ाई/ट्रेक
समय~सुबह 5:30 – रात 9:00 (दिन में यात्रा करें — वन क्षेत्र)
दूरीअलवर से ~70-72 किमी; जयपुर से ~120-150 किमी

इतिहास: राज्यपुरा की खोई हुई मंदिर-नगरी

शिलालेखों के अनुसार यह क्षेत्र गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के सामंत महाराजाधिराज मथनदेव के अधीन समृद्ध नगर 'राज्यपुरा' था। सैकड़ों मंदिरों वाली यह नगरी परंपरागत मान्यता के अनुसार औरंगज़ेब की सेना के हमलों में ध्वस्त हुई — बचा मुख्य नीलकंठ महादेव मंदिर, जिसमें आज भी नियमित पूजा होती है। बिखरे तोरण, नक्काशीदार स्तंभ और प्रतिमाएं इस वैभव की गवाही देती हैं।

यात्रा कैसे करें?

  • रूट: अलवर या जयपुर से राजगढ़/टहला होते हुए; आखिरी हिस्सा पहाड़ी रास्ता है।
  • ट्रेक: तलहटी से ~1.5 किमी की चढ़ाई — पानी साथ रखें, आरामदायक जूते पहनें।
  • ज़रूरी: वन क्षेत्र है — सूर्यास्त से पहले लौटें, कचरा न छोड़ें, वन्यजीवों से दूरी रखें।
  • साथ में देखें: सरिस्का सफारी, पांडुपोल हनुमान, भानगढ़-अजबगढ़, सिलीसेढ़ झील।

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