🕉️ कांवड़ यात्रा 2026: सावन 30 जुलाई (गुरुवार) से शुरू — मुख्य जलाभिषेक सावन शिवरात्रि, 11 अगस्त को। सोमवार व्रत: 3, 10, 17, 24 अगस्त। पूरी सावन गाइड: सावन 2026 सोमवार व्रत लिस्ट।
जयपुर। सावन 2026 की शुरुआत के साथ ही कांवड़ यात्रा भी 30 जुलाई से शुरू हो जाएगी। राजस्थान से हर साल लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल अपने क्षेत्र के शिवालयों तक आते हैं और सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक करते हैं। इस लेख में कांवड़ यात्रा 2026 की तिथियां, कांवड़ के प्रकार, नियम और राजस्थान के प्रमुख शिव मंदिरों की पूरी जानकारी दी गई है।
कांवड़ यात्रा 2026: एक नज़र में
| विवरण | तिथि |
|---|---|
| सावन प्रारंभ / यात्रा शुरू | 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) |
| सावन सोमवार | 3, 10, 17, 24 अगस्त |
| मुख्य जलाभिषेक (सावन शिवरात्रि) | 11 अगस्त 2026 |
| सावन समापन (पूर्णिमा/रक्षाबंधन) | 28 अगस्त 2026 |
कांवड़ के प्रकार
- सामान्य कांवड़: यात्री विश्राम कर सकते हैं; विश्राम के समय कांवड़ स्टैंड/ऊंचे स्थान पर रखी जाती है, जमीन पर नहीं।
- डाक कांवड़: जल लेने के बाद बिना रुके निर्धारित समय में शिवालय पहुंचकर जलाभिषेक — सबसे कठिन और तेज़।
- खड़ी कांवड़: कांवड़ हर समय कंधे पर रहती है; साथी बारी-बारी से कंधा देते हैं, कांवड़ कभी नीचे नहीं रखी जाती।
- दांडी कांवड़: दंडवत करते हुए यात्रा — सबसे दुर्लभ और कठोर साधना।
कांवड़ यात्रा के नियम
- बिना स्नान कांवड़ का स्पर्श वर्जित।
- कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता — विश्राम पर स्टैंड या पेड़ की डाल का उपयोग।
- यात्रा के दौरान नशा, मांसाहार व चमड़े की वस्तुएं (बेल्ट, पर्स, जूते) पूर्ण वर्जित।
- पूरी यात्रा में सात्विक आहार व "बोल बम" के जयकारे की परंपरा।
- जल किसी पवित्र नदी/घाट से ही लिया जाता है — रास्ते में कांवड़ खंडित हो जाए तो जल पुनः लाना पड़ता है।
राजस्थान से कांवड़ यात्रा: कहां से जल, कहां अभिषेक?
राजस्थान के कांवड़िये मुख्यतः हरिद्वार (हर की पौड़ी) से गंगाजल लाते हैं। जयपुर, अलवर, भरतपुर व सीकर से हजारों जत्थे हर साल पैदल/डाक कांवड़ से हरिद्वार जाते हैं। जलाभिषेक के लिए राजस्थान के प्रमुख शिव मंदिर:
- घुश्मेश्वर महादेव, शिवाड़ (सवाई माधोपुर) — यहां द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल होने की स्थानीय मान्यता है; सावन में विशाल मेला।
- परशुराम महादेव (पाली) — अरावली की गुफा में स्थित, 'राजस्थान का अमरनाथ' कहा जाता है।
- एकलिंगजी (उदयपुर) — मेवाड़ के आराध्य देव।
- अचलेश्वर महादेव (माउंट आबू) — जहां शिव के अंगूठे की पूजा होती है।
जल कब चढ़ाएं?
मुख्य जलाभिषेक सावन शिवरात्रि (11 अगस्त 2026) को होता है — जल चढ़ाने के मुहूर्त की विस्तृत जानकारी के लिए देखें: सावन शिवरात्रि 2026: जल चढ़ाने का समय। सावन सोमवार को भी जलाभिषेक अत्यंत शुभ है — व्रत विधि के लिए पढ़ें: सावन सोमवार व्रत कथा व विधि।






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