नई दिल्ली: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे पद्मिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। 


पद्मिनी एकादशी 2026 का व्रत इस बार को पड़ रहा है। यह एकादशी मलमास (अधिक मास) में आती है, जो इसे और भी अधिक पुण्यदायी बनाती है। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र स्वरूप की पूजा की जाती है।


पद्मिनी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत अत्यंत दुर्लभ माना जाता है क्योंकि यह मलमास में पड़ता है, जो स्वयं में शुभता का प्रतीक है। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को धन, संतान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर तीन लोकों का सुख भोगने का अवसर मिलता है।


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पद्मिनी एकादशी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृतवीर्य नामक राजा के पास एक अद्भुत स्त्री थी, जिसका नाम पद्मिनी था। वह अत्यंत सुंदर और सुशील थी। राजा अपनी पत्नी के साथ वन में तपस्या करने चले गए, लेकिन उनकी पत्नी उनके साथ नहीं जा सकी क्योंकि वह राजा के पिता की सेवा करती थी। वन में राजा की मृत्यु हो गई, और उनकी पत्नी सती हो गई। राजा कृतवीर्य ने कई वर्षों तक तपस्या की, लेकिन उन्हें कोई पुत्र नहीं हुआ। तब उन्होंने नारद मुनि से उपाय पूछा। नारद मुनि ने उन्हें पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। राजा ने विधि-विधान से इस व्रत का पालन किया, जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई।

एक अन्य कथा के अनुसार, प्राचीन काल में महादानव कार्तवीर्य अर्जुन ने भगवान शिव को प्रसन्न कर सहस्त्रबाहु प्राप्त किए थे। लेकिन वह अपनी स्त्री से प्रेम नहीं कर पाता था। तब उसकी स्त्री ने उसे श्रीहरि की आराधना करने को कहा। तब उसने पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उसकी इच्छा पूरी की।


पद्मिनी एकादशी 2026 की तारीख

इस वर्ष पद्मिनी एकादशी 2026 का व्रत को रखा जाएगा। एकादशी तिथि को प्रारंभ होगी और को समाप्त होगी।


व्रत विधि

पद्मिनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाता है। इस दिन व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद धूप, दीप, फल, फूल और नैवेद्य आदि से विधि-विधान पूर्वक पूजा करें।:

  • भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें।
  • भगवान को तुलसी दल अर्पित करें।
  • व्रत कथा का श्रवण करें।
  • रात में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
  • द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दक्षिणा दें।
  • इसके बाद स्वयं पारण करें।

इस दिन क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • भगवान विष्णु की आराधना करें।
  • सत्य बोलें और मन में शुभ विचार रखें।
  • दान-पुण्य करें।
  • निर्जल व्रत रखने का प्रयास करें।
  • रात में जागरण करें।

क्या न करें:

  • इस दिन चावल का सेवन बिल्कुल न करें।
  • क्रोध, झूठ और हिंसा से बचें।
  • किसी भी जीव की हत्या न करें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें।

AI और डीपफेक का खतरा

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निष्कर्ष

पद्मिनी एकादशी 2026 का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस व्रत को विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह मलमास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना होकर मिलता है।

FAQ

पद्मिनी एकादशी कब है?
पद्मिनी एकादशी 2026 में को मनाई जाएगी।
पद्मिनी एकादशी का महत्व क्या है?
यह एकादशी मलमास में आती है और इसका व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है, जिससे समस्त पापों का नाश होता है।
पद्मिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
पद्मिनी एकादशी की कथा राजा कृतवीर्य और उनकी पत्नी पद्मिनी से जुड़ी है, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन किया था।
पद्मिनी एकादशी पर क्या खाना चाहिए?
इस दिन चावल का सेवन वर्जित है। सात्विक भोजन करें और व्रत नियमों का पालन करें।