सावन शिवरात्रि 2026: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली सावन शिवरात्रि इस साल मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को है। यह भगवान शिव की आराधना की सबसे पवित्र रात मानी जाती है — इसी रात कांवड़िए शिवलिंग पर जल व गंगाजल चढ़ाते हैं और रातभर चार प्रहर की पूजा होती है। इस लेख में सावन शिवरात्रि की तिथि, निशिता काल पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, जल चढ़ाने का समय और व्रत पारण — सब कुछ दिया गया है।
🕉️ सावन शिवरात्रि 2026 — मुख्य समय
| सावन शिवरात्रि | मंगलवार, 11 अगस्त 2026 |
| चतुर्दशी तिथि आरंभ | 11 अगस्त, प्रातः 4:54 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 12 अगस्त, रात्रि 1:52 बजे |
| निशिता काल पूजा मुहूर्त | रात्रि 12:05 – 12:48 बजे (11-12 अगस्त की मध्यरात्रि) |
| व्रत पारण | 12 अगस्त, प्रातः 5:49 बजे के बाद |
समय नई दिल्ली/उत्तर भारत पंचांग अनुसार; स्थानीय सूर्योदय अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव — अपने पंचांग से पुष्टि करें।
सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर
वर्ष में हर महीने एक शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि) आती है, पर दो सबसे महत्वपूर्ण हैं — महाशिवरात्रि (फाल्गुन मास, फरवरी-मार्च) और सावन शिवरात्रि (श्रावण मास, जुलाई-अगस्त)। सावन शिव का प्रिय महीना है, इसलिए इस मास की शिवरात्रि का विशेष महत्व है — खासकर कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक के लिए।
सावन शिवरात्रि पूजा विधि
- दिन में व्रत रखें; संध्या/रात्रि को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध और गंगाजल से अभिषेक करें; बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन व भस्म अर्पित करें।
- निशिता काल (रात्रि 12:05–12:48) में शिव पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है — इस मुहूर्त में रुद्राभिषेक व दीपदान करें।
- रातभर "ॐ नमः शिवाय" व महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव आरती करें; परंपरा में रात्रि के चारों प्रहर में पूजा होती है।
- अगले दिन (12 अगस्त) प्रातः 5:49 बजे के बाद स्नान कर व्रत का पारण करें।
जल/रुद्राभिषेक का महत्व
सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन की शांति और मनोकामना पूर्ति की मान्यता है। दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है। कांवड़िए दूर तीर्थों से गंगाजल लाकर इसी रात शिव को अर्पित करते हैं।
राजस्थान के शिव मंदिर जहां शिवरात्रि पर भारी भीड़
सावन शिवरात्रि पर राजस्थान के प्रमुख शिव मंदिरों — एकलिंगजी (उदयपुर), परशुराम महादेव (राजसमंद-पाली), घुश्मेश्वर (शिवाड़), अचलेश्वर (माउंट आबू) व नीलकंठ (अलवर) — में हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पूरी सूची व सावन की सभी तिथियां देखें — सावन 2026: सोमवार व्रत लिस्ट व शिव मंदिर। पूजा विधि व व्रत कथा के लिए — सावन सोमवार व्रत कथा व पूजा विधि।
निष्कर्ष
सावन शिवरात्रि 2026 (11 अगस्त) पर दिनभर व्रत रखकर निशिता काल (रात्रि 12:05–12:48) में शिव का अभिषेक करें और अगली सुबह 5:49 बजे के बाद पारण करें। सटीक मुहूर्त की पुष्टि अपने स्थानीय पंचांग से कर लें।
स्रोत: हिंदू पंचांग (श्रावण कृष्ण चतुर्दशी 2026), नई दिल्ली/उत्तर भारत समय। स्थानीय सूर्योदय अनुसार समय में मामूली अंतर संभव।






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