सावन सोमवार व्रत कथा व पूजा विधि: सावन के सोमवार भगवान शिव की आराधना का सबसे शुभ दिन माने जाते हैं। इस दिन व्रत रखने, विधिपूर्वक शिव पूजन करने और सोमवार व्रत कथा सुनने से मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है। यहां संपूर्ण पूजा विधि, सामग्री सूची, "ॐ नमः शिवाय" जाप का महत्व और प्रचलित सोमवार व्रत कथा दी गई है। सावन 2026 के चारों सोमवार — 3, 10, 17 व 24 अगस्त — पर यह विधि अपनाएं। (पूरी तिथि सूची: सावन 2026 सोमवार व्रत लिस्ट।)
सावन सोमवार व्रत पूजा सामग्री
| शिवलिंग/शिव प्रतिमा | जल, गंगाजल, कच्चा दूध |
| बेलपत्र (3 दल वाले) | धतूरा, भांग, आक के फूल |
| सफेद व सुगंधित फूल | चंदन, अक्षत (चावल), भस्म |
| दीपक, धूप, कपूर | शहद, दही, घी, शक्कर (पंचामृत हेतु) |
| फल, मिठाई (भोग) | सफेद वस्त्र (पूजा हेतु) |
सावन सोमवार व्रत व पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
- प्रातः स्नान व संकल्प: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें, स्वच्छ (सफेद) वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- अभिषेक: शिवलिंग पर पहले शुद्ध जल, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और अंत में गंगाजल से अभिषेक करें। "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
- अर्पण: बेलपत्र (चिकनी तरफ नीचे), धतूरा, आक-सफेद फूल, चंदन, अक्षत और भस्म अर्पित करें।
- दीप-धूप व भोग: दीपक व धूप जलाएं; फल-मिठाई का भोग लगाएं। सफेद मिठाई शिव को प्रिय मानी जाती है।
- कथा व आरती: सोमवार व्रत कथा पढ़ें/सुनें, फिर शिव आरती "ॐ जय शिव ओंकारा" करें।
- व्रत पारण: दिनभर निराहार या फलाहार रहें; शाम की पूजा व कथा के बाद सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
🕉️ मुख्य मंत्र: "ॐ नमः शिवाय" — कम से कम 108 बार जाप करें। संतान/आरोग्य हेतु महामृत्युंजय मंत्र "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्..." का जाप शुभ माना जाता है।
सावन सोमवार व्रत कथा (प्रचलित कथा)
प्राचीन कथा के अनुसार, एक नगर में एक धनी साहूकार रहता था। धन-वैभव की कोई कमी न थी, पर उसकी कोई संतान नहीं थी, जिससे वह दुखी रहता था। संतान प्राप्ति की इच्छा से वह हर सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करता था।
उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती प्रसन्न हुईं और उन्होंने भगवान शिव से साहूकार को पुत्र का वरदान देने का आग्रह किया। शिवजी बोले — "इसे पुत्र तो मिल जाएगा, पर वह केवल बारह वर्ष तक ही जीवित रहेगा।" कुछ समय बाद साहूकार के घर एक सुंदर पुत्र ने जन्म लिया।
जब पुत्र ग्यारह वर्ष का हुआ, तो साहूकार ने उसे पढ़ाई के लिए मामा के साथ काशी भेज दिया। रास्ते में एक नगर में राजा की कन्या का विवाह हो रहा था, परंतु जिस राजकुमार से विवाह होना था वह एक आंख से काना था। उसके पिता ने साहूकार के सुंदर पुत्र को दूल्हे की जगह मंडप में बैठाकर विवाह करा दिया। ईमानदार बालक ने कन्या की चुनरी पर सच लिख दिया — "तुम्हारा विवाह मुझसे हुआ है, पर असली दूल्हा काना है; मैं तो काशी पढ़ने जा रहा हूं।" कन्या ने सच जानकर उस राजकुमार से जाने से मना कर दिया।
काशी पहुंचकर बालक ने यज्ञ किया, पर बारहवें वर्ष की आयु पूरी होते ही सोते समय उसके प्राण निकल गए। मामा विलाप करने लगा। उसी समय वहां से शिव-पार्वती गुजर रहे थे। पार्वती जी ने बालक पर दया कर शिवजी से उसे पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने — उस माता के सोमवार व्रत और साहूकार की भक्ति से प्रसन्न होकर — बालक को दीर्घायु का वरदान देकर पुनर्जीवित कर दिया।
पढ़ाई पूरी कर लौटते समय वह उसी नगर पहुंचा जहां उसका विवाह हुआ था। राजा ने उसे पहचान लिया और अपनी पुत्री को विदा कर उसके साथ भेज दिया। घर पर साहूकार दंपति पुत्र की कुशलता की प्रार्थना में व्रत पर बैठे थे — पुत्र को सकुशल वधू सहित लौटा देख उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। मान्यता है कि जो भी श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखता और यह कथा सुनता है, भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
सोमवार व्रत के नियम
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखें; एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- व्रत में नमक (कुछ परंपराओं में) व अनाज से परहेज़; फल, दूध, साबूदाना ले सकते हैं।
- मन, वचन व कर्म से शुद्धता रखें; क्रोध व झूठ से बचें।
- सोलह सोमवार व्रत (16 somwar) विशेष फलदायी माना जाता है — इसे सावन से शुरू करना शुभ है।
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निष्कर्ष
सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व है। ऊपर दी गई विधि से शिव का अभिषेक करें, कथा सुनें और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें। सावन 2026 के चारों सोमवार (3, 10, 17, 24 अगस्त) पर यह व्रत रखकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।
नोट: यह पारंपरिक/प्रचलित कथा व विधि है; क्षेत्र व परिवार की परंपरा अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।






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