🕉️ सावन स्पेशल: मान्यता के अनुसार यहां 12वां ज्योतिर्लिंग — जयपुर से सिर्फ 100 किमी। सावन 30 जुलाई से शुरू। और प्रसिद्ध महादेव मंदिर → पूरी सूची
सवाई माधोपुर। जयपुर-कोटा रेल लाइन के पास, देवगिरि पहाड़ी की गोद में बसा शिवाड़ गांव — जहां विराजते हैं घुश्मेश्वर महादेव। स्थानीय व शास्त्र-आधारित मान्यता है कि शिवपुराण में वर्णित 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग यही है (यही दावा महाराष्ट्र के घृष्णेश्वर, एलोरा से भी जुड़ा है — दोनों की अपनी परंपराएं हैं)। सावन में यह छोटा-सा कस्बा राजस्थान के सबसे बड़े शिवधामों में बदल जाता है।
एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | शिवाड़ (देवगिरि पहाड़ी), जिला सवाई माधोपुर |
| मान्यता | शिवपुराण का 12वां (अंतिम) ज्योतिर्लिंग |
| दर्शन समय | ~सुबह 5:00 – रात 9:00 (सुबह-शाम आरती) |
| जयपुर से दूरी | ~100 किमी |
| निकटतम स्टेशन | ईसरदा (जयपुर-कोटा लाइन) — मंदिर से ~3 किमी |
| इतिहास | मूल मंदिर ~10वीं सदी का माना जाता है; 18–19वीं सदी में जीर्णोद्धार |
घुश्मा की कथा
शिवपुराण के अनुसार शिवभक्त घुश्मा प्रतिदिन 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करती थी। ईर्ष्या में उसकी बहन सुदेहा ने घुश्मा के पुत्र की हत्या कर शव तालाब में फेंक दिया। घुश्मा फिर भी अविचल भाव से शिव-पूजा करती रही — उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने पुत्र को पुनर्जीवित किया और घुश्मा की प्रार्थना पर 'घुश्मेश्वर' नाम से यहीं ज्योति रूप में विराजने का वरदान दिया।
कैसे पहुंचें?
- रेल (सबसे आसान): जयपुर-कोटा लाइन पर ईसरदा स्टेशन उतरें — मंदिर सिर्फ ~3 किमी।
- सड़क: जयपुर से टोंक-चौथ का बरवाड़ा होते हुए ~100 किमी; कोटा/सवाई माधोपुर की ओर से भी सीधा रूट।
- साथ में: रणथंभौर (सवाई माधोपुर) और चौथ माता मंदिर पास ही हैं।
सावन में शिवाड़
पूरे श्रावण मास यहां मेले जैसा माहौल रहता है — सोमवार और सावन शिवरात्रि (11 अगस्त) पर विशेष अभिषेक व शृंगार होता है, और कांवड़िये दूर-दूर से जल चढ़ाने पहुंचते हैं। यात्रा की तिथियां प्लान करने के लिए देखें — सावन 2026 सोमवार व्रत लिस्ट।






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