
राजस्थान: बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा, 56 हजार यात्री करेंगे सफर
राजस्थान सरकार की 'वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026-27' के तहत करीब 56 हजार बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थ यात्रा का मौका मिलेगा। आवेदन 27 मई से शुरू हो चुके हैं।

मैं मोहनलाल बिश्नोई — Rajasthan365 का संस्थापक और मुख्य संपादक। डिजिटल मीडिया उद्यमी होने के नाते मेरा उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि राजस्थान की हर महत्वपूर्ण खबर — चाहे वह जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत हो, उदयपुर के प्राचीन मंदिर हों, पुष्कर का मेला हो, या जयपुर की राजनीति — हिंदी में, सही और निष्पक्ष रूप से हर पाठक तक पहुँचे। मेरी विशेष रुचि राजस्थान की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर, पर्यटन स्थलों और त्योहारों में है। मेरा मानना है कि एक ज़मीनी पत्रकार वही होता है जो हर खबर को उसकी मिट्टी की महक के साथ पाठक तक पहुँचाए — और यही सोच Rajasthan365 की हर रिपोर्ट में झलकती है। Rajasthan365 की शुरुआत मैंने इस उद्देश्य से की थी कि राज्य के तीस से अधिक जिलों — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ — की हर छोटी-बड़ी खबर एक भरोसेमंद हिंदी प्लेटफ़ॉर्म पर मिले। व्यक्तिगत रुचि: राजस्थान का इतिहास, बिश्नोई समुदाय की पर्यावरण-संरक्षण परंपरा, पारंपरिक संगीत और गाँव-गाँव की लोककथाएँ। संपर्क: bishnoimohan502@gmail.com
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राजस्थान सरकार की 'वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026-27' के तहत करीब 56 हजार बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थ यात्रा का मौका मिलेगा। आवेदन 27 मई से शुरू हो चुके हैं।

पद्मिनी एकादशी 2026 कब है? जानें इस पावन दिन का महत्व, कथा और व्रत विधि। यह मलमास में आती है और पुण्यदायी मानी जाती है।

राजस्थान का सांवलिया सेठ मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। जानिए, किस स्थान पर है यह कृष्णधाम और इसका वार्षिक चढ़ावा कितना है।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सांवरिया सेठ मंदिर अपनी अलौकिक शक्तियों और व्यापारिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है। इस गाइड में सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन, समय और यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।

जोधपुर की प्राचीन जल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए 5.75 करोड़ रुपये का विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस पहल से शहर के ऐतिहासिक जलस्रोतों का कायाकल्प किया जाएगा।

जयपुर के मशहूर शिल्पग्राम को 15 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक हैंडीक्राफ्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत परिसर में नई दुकानें और फूड कोर्ट का निर्माण होगा।

उदयपुर के कलाकार मांगीलाल भील ने मोर पंखों पर अपनी अद्भुत कलाकारी से भील संस्कृति को जीवंत कर दिया है। उनकी इस अनूठी शैली की हर तरफ चर्चा हो रही है।

बाड़मेर के गडरारोड़ में 150 साल पुराना एक रहस्यमयी कुआं मिला है, जो ब्रिटिश कालीन सुरंग से जुड़ा है। यह ऐतिहासिक जल-तंत्र अपनी बनावट और पाकिस्तान तक पानी की सप्लाई के दावों को लेकर चर्चा में है।

जोधपुर में भीषण गर्मी के चलते माचिया सफारी पार्क प्रशासन ने वन्यजीवों की जीवनशैली में बदलाव किए हैं। लू और चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

जयपुर की भीषण गर्मी से बचने के लिए 'जलधारा' एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है। मात्र 15 रुपये के प्रवेश शुल्क में यहां आपको शिमला और मेघालय जैसा अहसास मिलेगा।

गुलाबी नगरी जयपुर में स्ट्रीट फूड का अंदाज बदल रहा है। अब स्वाद के साथ-साथ डिशेज के अनोखे नाम ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

धौलपुर की 'छप्पर उठाने' की परंपरा कभी सामुदायिक एकता का प्रतीक हुआ करती थी। आधुनिक निर्माण शैली के बीच यह सामाजिक उत्सव अब इतिहास के पन्नों में सिमट रहा है।

जयपुर में आयोजित ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार (GITB) में ओडिशा पर्यटन ने अपनी समृद्ध विरासत का प्रदर्शन करते हुए दो बड़े अवार्ड अपने नाम किए। इस उपलब्धि ने पर्यटन क्षेत्र में ओडिशा की बढ़ती साख को साबित किया है।

राजस्थान के जालौर जिले की 125 साल पुरानी राठी रबड़ी भीषण गर्मी में लोगों को राहत देने वाला एक पारंपरिक कूलिंग एजेंट बनी हुई है। अपने अनोखे स्वाद के कारण यह आम लोगों के साथ-साथ वीआईपी लोगों की भी पहली पसंद है।

जैन धर्म में मौन को एक महत्वपूर्ण साधना माना गया है। यह लेख बताता है कि पूजा और भोजन के समय अनुशासन का पालन करना क्यों आवश्यक है।

भीलवाड़ा में आयोजित पद संकीर्तन यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजन के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं और विरोध देखने को मिला।

उदयपुर में आयोजित क्लासिकल डांस फेस्टिवल में 400 से अधिक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भव्यता को एक नई पहचान दी है।

जयपुर के राजघराने में मौजूद 17वीं सदी का एक अद्भुत यंत्र आज भी वैज्ञानिकों को हैरान करता है। बिना बिजली के चलने वाला यह यंत्र प्राचीन भारत की उन्नत तकनीक का प्रतीक है।

राजस्थान की चिलचिलाती गर्मी और लू से बचने के लिए ग्रामीण अंचलों का पारंपरिक खान-पान सबसे कारगर उपाय है। जानिए कैसे ये देसी सुपरफूड आधुनिक कूलिंग सिस्टम को भी मात दे देता है।

राजस्थान में भीषण गर्मी के कारण वन्यजीवों का बुरा हाल है। नाहरगढ़ और हाथी गांव में जानवरों को लू से बचाने के लिए कूलर और स्प्रिंकलर लगाए गए हैं।

झीलों की नगरी उदयपुर में एक शाही शादी का 22 लाख का लग्जरी केक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे बनाने में 3500 घंटे की कड़ी मेहनत लगी है।

राजस्थान के उदयपुर में एक पिता ने फाइव-स्टार होटल के बजाय गोशाला को विवाह मंडप बनाया। इस अनोखी शादी में गायों को विशेष रूप से 'छप्पन भोग' परोसा गया।

उदयपुर के लग्जरी होटलों में पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिससे 90 फीसदी बुकिंग फुल हो चुकी है। झीलों की नगरी लगातार पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई है।

झीलों की नगरी उदयपुर में अब शाही होटलों का अनुभव आम पर्यटकों के लिए भी किफायती हो गया है। होटलों ने गर्मियों के सीजन में किराए में 90% तक की भारी कटौती की है।