जोधपुर का तापमान जब 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर जाता है, तो पूरा शहर लू के थपेड़ों और चिलचिलाती धूप की चपेट में आ जाता है। हालांकि, थार मरुस्थल के द्वार पर बसे इस ऐतिहासिक शहर में सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि माचिया सफारी पार्क में रहने वाले बेजुबान वन्यजीव भी इस भीषण गर्मी का सामना करते हैं। माचिया सफारी पार्क, जो अपनी जैव विविधता और विशेष रूप से भालुओं तथा तेंदुओं के लिए जाना जाता है, इन दिनों जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए 'मिशन कूलिंग' मोड पर है। पार्क प्रशासन ने एक सुव्यवस्थित समर एक्शन प्लान तैयार किया है ताकि वन्यजीवों की जीवनशैली और स्वास्थ्य पर गर्मी का प्रतिकूल असर न पड़े।

थार की तपन और वन्यजीवों का संघर्ष

जोधपुर की भौगोलिक स्थिति के कारण यहाँ का तापमान मई और जून के महीनों में असहनीय स्तर तक पहुंच जाता है। माचिया सफारी पार्क के पास स्थित कायलाना झील क्षेत्र की नमी हालांकि कुछ हद तक राहत देती है, लेकिन रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण दोपहर में हवाएं आग उगलने लगती हैं। ऐसे में बाड़ों में रहने वाले वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक छाया और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

जानकारों का मानना है कि वन्यजीवों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है। यदि समय रहते उनके परिवेश में बदलाव न किया जाए, तो उनके व्यवहार में सुस्ती आ सकती है और वे बीमार पड़ सकते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए, पार्क प्रबंधन ने इस वर्ष गर्मी शुरू होने से पहले ही अपने सभी संसाधनों को सक्रिय कर दिया है।

विशेष 'समर कूलिंग सिस्टम' का जाल

पार्क प्रशासन ने जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया है। सबसे पहले, बाड़ों की संरचनाओं को इस तरह से अपग्रेड किया गया है कि सीधी धूप जानवरों तक न पहुंच सके। बाड़ों के ऊपर घास-फूस की मोटी परत वाली छतरियां और शेड्स बनाए गए हैं, जो प्राकृतिक इन्सुलेटर का काम करते हैं और बाड़े के अंदर के तापमान को बाहरी वातावरण से काफी कम रखते हैं।

इतना ही नहीं, भालुओं और अन्य संवेदनशील जानवरों के बाड़ों में हाई-पावर कूलर और फव्वारे (स्प्रिंकलर) लगाए गए हैं। ये उपकरण चौबीसों घंटे चल रहे हैं, जिससे बाड़ों के आसपास एक कृत्रिम 'माइक्रो-क्लाइमेट' तैयार हो जाता है। पानी के कुंडों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले के मुकाबले अब इन कुंडों में दिन में कई बार ठंडा और स्वच्छ पानी भरा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि साफ और ठंडा पानी न केवल जानवरों की प्यास बुझाता है, बल्कि उनके शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। कर्मचारी लगातार निगरानी कर रहे हैं कि पानी की क्वालिटी हमेशा बरकरार रहे।

खान-पान में बदलाव: हाइड्रेशन पर विशेष जोर

सिर्फ बाड़ों का तापमान ही नहीं, बल्कि जानवरों की डाइट भी पूरी तरह बदल दी गई है। गर्मियों के दौरान जानवरों की ऊर्जा की खपत और पाचन प्रक्रिया अलग होती है, जिसे देखते हुए पार्क के पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने 'समर डाइट चार्ट' तैयार किया है।

विशेष रूप से भालुओं के आहार में पानी की प्रचुर मात्रा वाले फलों को प्राथमिकता दी गई है। तरबूज, खरबूजा और खीरे जैसे मौसमी फल अब उनके दैनिक भोजन का हिस्सा बन गए हैं। ये फल न केवल उन्हें हाइड्रेटेड रखते हैं, बल्कि जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करते हैं। इसके अलावा, मांस खाने वाले जानवरों के लिए भोजन के समय में बदलाव किया गया है, ताकि उन्हें दिन की भीषण गर्मी के बजाय सुबह-शाम के समय सक्रिय रखा जा सके। यह बदलाव वन्यजीवों को सुस्त होने से बचाता है और उन्हें प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है।

जैव विविधता का केंद्र: माचिया सफारी का महत्व

यह जानना महत्वपूर्ण है कि माचिया सफारी पार्क केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के 'एक्स-सीटू' (Ex-situ) संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ तेंदुओं और भालुओं का सफल प्रजनन और संरक्षण किया जाता है, जो इसे पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाता है। यह पार्क अरावली पर्वतमाला की अंतिम श्रृंखलाओं और थार के रेगिस्तान के मिलन स्थल पर स्थित है, जो इसे विशेष बनाता है।

पार्क प्रबंधन इस बात को बखूबी समझता है कि एक छोटी सी लापरवाही भी वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए, कर्मचारियों की ड्यूटी को रोटेशन पर रखा गया है, ताकि पानी की आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम और जानवरों के व्यवहार पर 24/7 नजर रखी जा सके। किसी भी जानवर के व्यवहार में थोड़ा सा भी असामान्य बदलाव दिखने पर तुरंत वेटनरी टीम को सतर्क किया जाता है।

निष्कर्ष

जोधपुर के माचिया सफारी पार्क द्वारा अपनाई गई यह सक्रिय रणनीति यह दर्शाती है कि वन्यजीवों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता कितनी आवश्यक है। भीषण गर्मी की चुनौतियों के बावजूद, आधुनिक तकनीकों, उचित खान-पान और समर्पित प्रबंधन के तालमेल से वन्यजीवों को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा रहा है। यह प्रयास न केवल जानवरों को राहत देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव विविधता के संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी देता है। माचिया सफारी पार्क का यह 'समर एक्शन प्लान' इस बात का प्रमाण है कि सही योजना और तत्परता के साथ विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन की रक्षा संभव है।