प्रतापगढ़ जिले के अरनोद थाना क्षेत्र में पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर लोगों को भारी मुनाफा देने का लालच देकर ठगी करने वाले इस गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने धर दबोचा है। यह कार्रवाई पुलिस के विशेष अभियान 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' के तहत की गई है। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कैसे साइबर अपराधी आम लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं।
कैसे काम करता था 'म्यूल अकाउंट' का जाल
साइबर ठगों के इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद संगठित और खतरनाक था। ये अपराधी सीधे तौर पर अपने खातों का इस्तेमाल नहीं करते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सकें। इसके लिए उन्होंने 'म्यूल अकाउंट' का सहारा लिया। म्यूल अकाउंट का मतलब होता है किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते को किराए पर लेना या उसे पैसों का लालच देकर इस्तेमाल करना।
इस मामले में, आरोपी स्थानीय लोगों को निशाना बनाते थे और उनसे महज एक हजार रुपये के बदले उनका बैंक खाता और उससे जुड़ी नेट बैंकिंग की जानकारी ले लेते थे। फिर इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। जब कोई व्यक्ति शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगा जाता, तो वह पैसा सीधे इन म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर होता। इसके बाद, आरोपी तुरंत एटीएम के जरिए उन पैसों को निकाल लेते थे, जिससे पुलिस के लिए ट्रेल का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। राज्य में बढ़ते हुए अपराध के आंकड़ों को देखते हुए यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे छोटे लालच के लिए लोग अपनी पहचान और बैंक खातों का दुरुपयोग होने दे रहे हैं।
'ऑपरेशन म्यूल हंटर' और पुलिस की सख्ती
प्रतापगढ़ पुलिस को इस मामले की भनक तब लगी जब महाराष्ट्र के एक पीड़ित ने ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के साथ शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी हुई थी। जांच के दौरान जब पुलिस ने पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) को ट्रैक किया, तो तार प्रतापगढ़ के अरनोद इलाके से जुड़ते नजर आए।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अरनोद थाना पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' शुरू किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लोगों और खातों को चिन्हित करना था, जिनका उपयोग साइबर अपराधी अपनी अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए कर रहे थे। पुलिस ने गहन तकनीकी जांच और मुखबिरों की सूचना के आधार पर दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरोह के मुख्य सरगनाओं के लिए काम करते थे और कमीशन के बदले अपने या दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए करवाते थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां तक फैले हैं और इनके पीछे कौन से बड़े मास्टरमाइंड काम कर रहे हैं।
बैंक खाता बेचना है गंभीर अपराध
अक्सर लोग चंद पैसों के लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या यूपीआई आईडी अनजान लोगों को दे देते हैं। उन्हें लगता है कि इसमें कोई हर्ज नहीं है, लेकिन वे यह नहीं जानते कि वे अनजाने में एक बड़े अपराध का हिस्सा बन रहे हैं। साइबर कानून के जानकारों के अनुसार, यदि आपके बैंक खाते का उपयोग किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए होता है, तो इसके लिए खाताधारक को जिम्मेदार माना जाता है।
खाता किराए पर देना या बेचना 'मनी म्यूलिंग' की श्रेणी में आता है, जिसके लिए जेल की सजा हो सकती है और बैंक खाते को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। अपराधी अक्सर बेरोजगार युवाओं, छात्रों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। उन्हें 'पार्ट टाइम जॉब' या 'आसान कमाई' का झांसा देकर उनके केवाईसी (KYC) दस्तावेजों का उपयोग फर्जी बैंक खाते खुलवाने में किया जाता है।
निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान
आज के डिजिटल युग में शेयर मार्केट में निवेश का चलन बहुत बढ़ा है, लेकिन इसी के साथ फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति या अनधिकृत ऐप के जरिए निवेश करने से पहले इन सावधानियों का पालन जरूर करें:
- कभी भी किसी ऐसे ऐप या प्लेटफॉर्म पर निवेश न करें जो सेबी (SEBI) से पंजीकृत न हो।
- 'रातों-रात पैसा डबल' या 'गारंटीड रिटर्न' का वादा करने वाले विज्ञापनों से हमेशा बचें। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है और इसमें गारंटी जैसा कुछ नहीं होता।
- अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, नेट बैंकिंग पासवर्ड या ओटीपी कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- यदि कोई व्यक्ति आपको अपने बैंक खाते के उपयोग के बदले पैसे देने का प्रस्ताव देता है, तो समझ जाएं कि वह आपको किसी अपराध में फंसाने की कोशिश कर रहा है।
- साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
प्रतापगढ़ की यह घटना हमें यह सीख देती है कि सतर्कता ही साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच है। जहां एक ओर पुलिस प्रशासन 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' जैसे अभियानों के जरिए अपराधियों पर नकेल कस रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों की जिम्मेदारी भी है कि वे सतर्क रहें। बैंक खाते बेचना या किराए पर देना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। किसी भी अनजान व्यक्ति के बहकावे में आकर अपने वित्तीय विवरण साझा न करें। याद रखें, डिजिटल दुनिया में सुरक्षा का मतलब केवल पासवर्ड बदलना नहीं, बल्कि अपने वित्तीय संसाधनों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहना भी है।




