🕉️ सावन स्पेशल: जयपुर से भी पुराना स्वयंभू शिवधाम — परकोटे की आस्था का केंद्र। राजस्थान के और प्रसिद्ध महादेव मंदिर → पूरी सूची

जयपुर। चौड़ा रास्ता की चहल-पहल के बीच एक ऐसा शिवालय है जिसकी परंपरा गुलाबी नगरी से भी पुरानी है — ताड़केश्वर महादेव। मान्यता है कि यहां का स्वयंभू शिवलिंग जयपुर की स्थापना (1727 ई.) से पहले से पूजित है; सवाई जयसिंह के नगर-नियोजन में शहर इस शिवधाम के इर्द-गिर्द बसा। नाम की कहानी भी निराली — कभी यहां ताड़ के पेड़ों का झुरमुट था, इसीलिए महादेव 'ताड़केश्वर' कहलाए।

एक नज़र में

विवरणजानकारी
स्थानचौड़ा रास्ता, परकोटा (Walled City), जयपुर
खासियतस्वयंभू शिवलिंग — जयपुर की स्थापना से भी पुरानी परंपरा
नाम का मूलताड़ (Palm) के पेड़ों का क्षेत्र → 'ताड़केश्वर'
समय~सुबह 6:00 – रात 8:00 (सावन में विस्तारित); प्रवेश निःशुल्क
कैसे पहुंचेंबड़ी चौपड़/त्रिपोलिया से पैदल; मेट्रो: बड़ी चौपड़ स्टेशन

परकोटे की पहली हाज़िरी

जयपुर के पुराने बाज़ारों की सुबह ताड़केश्वर बाबा से शुरू होती है — चौड़ा रास्ता, जौहरी बाज़ार और किशनपोल के व्यापारी दुकान खोलने से पहले यहां शीश नवाने की परंपरा पीढ़ियों से निभा रहे हैं। शादी का पहला कार्ड बाबा को चढ़ाने की परंपरा भी परकोटे के परिवारों में आज तक जीवित है।

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सावन में ताड़केश्वर

सावन (30 जुलाई – 28 अगस्त 2026) के हर सोमवार भोर से जलाभिषेक की कतारें लगती हैं; सावन शिवरात्रि (11 अगस्त) पर विशेष शृंगार-आरती होती है। पास ही वैशाली नगर का झाड़खंड महादेव — एक ही दिन में जयपुर के दोनों बड़े शिवधामों के दर्शन हो सकते हैं।

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