हरियाली तीज 2026: सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरियाली तीज इस साल शनिवार, 15 अगस्त 2026 को है। राजस्थान में इसे शृंगार तीज / सिंजारा तीज भी कहते हैं और यह प्रदेश के सबसे बड़े व रंगीन पर्वों में से एक है। सुहागिनें पति की दीर्घायु और कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना से इस दिन व्रत रखती हैं। इस लेख में हरियाली तीज की तिथि, व्रत व पूजा विधि, सिंजारा परंपरा, और जयपुर की विश्वप्रसिद्ध तीज माता की सवारी — सब कुछ दिया गया है।

🌿 हरियाली तीज 2026 एक नज़र में: तिथि — शनिवार, 15 अगस्त 2026 (श्रावण शुक्ल तृतीया) · राजस्थान में नाम — शृंगार/सिंजारा तीज · इसके 2 दिन बाद नाग पंचमी (17 अगस्त)। यह सावन का पर्व है — सावन 2026 की पूरी तिथि सूची देखें

हरियाली तीज का महत्व

हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है — मान्यता है कि इसी दिन कठोर तप के बाद पार्वती जी को शिव पति रूप में प्राप्त हुए। इसलिए सुहागिनें अखंड सौभाग्य व पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। सावन की हरियाली, झूले, मेहंदी और हरे वस्त्र इस पर्व की पहचान हैं।

राजस्थान की सिंजारा परंपरा

राजस्थान में तीज से एक दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है — इस दिन बेटी/बहू के ससुराल या मायके से घेवर, मेहंदी, चूड़ियां, लहरिया/हरी साड़ी, शृंगार का सामान और मिठाइयां भेजी जाती हैं। घेवर तीज की सबसे खास मिठाई है। महिलाएं हाथों पर मेहंदी रचाती हैं, हरे वस्त्र व लहरिया पहनती हैं और झूला झूलते हुए तीज के गीत गाती हैं।

हरियाली तीज व्रत व पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर हरे वस्त्र पहनें और निर्जला या फलाहार व्रत का संकल्प लें।
  2. माता पार्वती व भगवान शिव की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें; पार्वती जी को सुहाग का सामान (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी) अर्पित करें।
  3. शिव-पार्वती व गणेश जी का विधिवत पूजन करें; बेलपत्र, फूल, धूप-दीप अर्पित करें।
  4. हरियाली तीज व्रत कथा सुनें और "ॐ नमः शिवाय" तथा पार्वती मंत्र का जाप करें।
  5. रात्रि जागरण व झूला झूलने की परंपरा है; अगले दिन पूजन कर व्रत का पारण करें।

जयपुर की तीज माता की सवारी — राजस्थान का सबसे भव्य आयोजन

जयपुर की तीज माता की सवारी देश-विदेश में प्रसिद्ध है। परंपरा के अनुसार तीज माता (पार्वती) की भव्य पालकी शाही ठाठ के साथ त्रिपोलिया बाजार होते हुए निकाली जाती है — हाथी, घोड़े, ऊंट, गजबग्गी, लोक कलाकार और बैंड इसमें शामिल होते हैं। यह सवारी दो दिन निकलती है — पहले दिन तीज की सवारी और दूसरे दिन बूढ़ी तीज की सवारी। हजारों पर्यटक व श्रद्धालु इसे देखने उमड़ते हैं; जयपुर की यह सवारी राजस्थान पर्यटन का प्रमुख आकर्षण है।

📍 नोट: सवारी का सटीक समय व मार्ग हर साल जयपुर प्रशासन/पर्यटन विभाग द्वारा तीज से कुछ दिन पहले घोषित किया जाता है (आम तौर पर शाम को त्रिपोलिया गेट से)। 2026 की आधिकारिक घोषणा आते ही हम यह जानकारी यहां अपडेट करेंगे — पेज बुकमार्क करें।

तीज पर घूमने से पहले मौसम देखें

हरियाली तीज सावन का पर्व है और अगस्त में राजस्थान में अच्छी बारिश होती है। सवारी या मेले में जाने से पहले मौसम अपडेट जरूर देखें — जयपुर का मौसम

निष्कर्ष

हरियाली तीज 2026 (15 अगस्त) राजस्थान की संस्कृति, सुहाग और सावन की हरियाली का उत्सव है। व्रत, सिंजारा, मेहंदी, घेवर और जयपुर की तीज सवारी इसे खास बनाते हैं। सटीक मुहूर्त व जयपुर सवारी के समय के लिए यह पेज बुकमार्क करें।

स्रोत: हिंदू पंचांग (श्रावण शुक्ल तृतीया 2026) व राजस्थान की पारंपरिक तीज मान्यताएं। तिथि/मुहूर्त स्थानीय पंचांग अनुसार 1 दिन आगे-पीछे संभव।