सावन के हरे-भरे मौसम के बीच पितरों और प्रकृति — दोनों को समर्पित पर्व हरियाली अमावस्या इस साल बुधवार, 12 अगस्त 2026 को है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 12 अगस्त को तड़के 1:52 बजे शुरू होकर रात 11:06 बजे समाप्त होगी — यानी स्नान-दान, दर्श अमावस्या और श्राद्ध-तर्पण तीनों इसी दिन होंगे। राजस्थान के लिए इस पर्व का सबसे खास रंग उदयपुर में दिखता है, जहां फतहसागर की पाल पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले का दूसरा दिन सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित होता है — और इस बार उदयपुर जिला कलेक्टर ने 12 अगस्त को आधे दिन का स्थानीय अवकाश भी पहले ही घोषित कर रखा है।

एक नज़र में — हरियाली अमावस्या 2026

बिंदुजानकारी
तिथिबुधवार, 12 अगस्त 2026
अमावस्या तिथि12 अगस्त 01:52 AM से 11:06 PM तक
मुख्य कर्मपितृ तर्पण-श्राद्ध, पवित्र स्नान-दान, शिव पूजन-रुद्राभिषेक, पौधरोपण
उदयपुरफतहसागर पाल-सहेलियों की बाड़ी क्षेत्र में दो-दिनी मेला; 12 अगस्त को जिले में मध्याह्न पश्चात अवकाश (कलेक्टर आदेश)
आगे के पर्वहरियाली तीज 15 अगस्त — सावन शिवरात्रि 11 अगस्त

इस दिन पौधा लगाने की परंपरा — कौनसा पौधा किस कामना के लिए

'हरियाली' अमावस्या नाम ही मानसून की हरियाली के उत्सव से आया है — इस दिन पौधरोपण को पुण्यकारी माना गया है। परंपरा में अलग-अलग पौधे अलग कामनाओं से जुड़े हैं: नीम आरोग्य के लिए, केला संतान सुख के लिए, तुलसी सुख-शांति के लिए और आंवला लक्ष्मी-समृद्धि के लिए। किसान परिवारों में यह दिन अच्छे मानसून के आभार का भी है — खेतों में नई फसल की हरियाली इसी दौर में लहलहाती है।

उदयपुर का मेला: 1898 से चली आ रही अनोखी परंपरा

उदयपुर में हरियाली अमावस्या का मेला महाराणा फतेह सिंह के दौर (1898) से भरता आ रहा है — फतहसागर झील के निर्माण-विस्तार की खुशी में शुरू हुआ यह मेला आज भी नगर निगम की देखरेख में फतहसागर की पाल से सहेलियों की बाड़ी तक सजता है। झूले, खान-पान और सैकड़ों दुकानों वाले इस दो-दिनी मेले की सबसे अनोखी बात दूसरा दिन है — सिर्फ महिलाओं का दिन, जिसमें पुरुषों का प्रवेश वर्जित रहता है। लोक-परंपरा के अनुसार महारानी की इच्छा पर महिलाओं के लिए यह अलग दिन रखा गया था, और यह परंपरा 128 साल से कायम है — इसे देश का इकलौता ऐसा मेला कहा जाता है। परंपरा के अनुसार इस बार मेला 12 अगस्त को और महिलाओं का दिन 13 अगस्त को रहने की उम्मीद है — नगर निगम की आधिकारिक घोषणा आते ही यह पेज अपडेट होगा।

पितरों के लिए क्या करें

अमावस्या पितृ कार्यों की तिथि है — इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही जल में गंगाजल-तिल मिलाकर स्नान, पितरों के निमित्त तर्पण और यथाशक्ति अन्न-वस्त्र दान का विधान है। सावन की अमावस्या होने से शिव पूजन-रुद्राभिषेक का विशेष फल भी इसी दिन जुड़ जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पीपल और तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं।

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सावन 2026 का आगे का कैलेंडर

हरियाली अमावस्या से ठीक पहले सावन शिवरात्रि (11 अगस्त) है — कांवड़ का जल चढ़ाने की मुख्य तिथि, जिसकी पूरी जानकारी जल कब चढ़ेगा में है। अमावस्या के तीन दिन बाद हरियाली तीज (15 अगस्त) का त्योहार है। सावन के सोमवार व्रतों की पूरी सूची यहां देखें और सावन में शिव मंदिरों के दर्शन की योजना हो तो अलवर का 1000 साल पुराना नीलकंठ महादेव मंदिर भी पढ़ें।

⚠️ नोट: तिथि-समय प्रमुख पंचांगों (दृक पंचांग आदि) के अनुसार हैं; स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। उदयपुर मेले की आधिकारिक तिथियां नगर निगम की घोषणा से पुष्ट होंगी; अवकाश की जानकारी जिला कलेक्टर के स्थानीय अवकाश आदेश पर आधारित है।