🐘 सीधा जवाब: गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर को है। घर में गणपति स्थापना का मध्याह्न मुहूर्त 11:02 से 01:31 बजे तक है (अवधि 2 घंटे 28 मिनट)। इसी दिन चंद्रमा देखना वर्जित माना गया है — सुबह 09:06 से रात 08:04 बजे तक। विसर्जन अनंत चतुर्दशी, शुक्रवार 25 सितंबर को।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणपति का जन्मोत्सव मनाया जाता है — और 2026 में यह दिन कई मायनों में खास है। एक ही सुबह में हरतालिका तीज की पूजा निपटती है और फिर गणेश चतुर्थी शुरू होती है, क्योंकि तृतीया तिथि उसी दिन 7:06 बजे समाप्त हो रही है। नीचे स्थापना का सही समय, चंद्र-दर्शन वाला नियम, विसर्जन की तारीख और घर पर पूजा की पूरी विधि दी गई है।
तिथि और मुहूर्त — एक नजर में
| ब्योरा | विवरण |
|---|---|
| गणेश चतुर्थी | सोमवार, 14 सितंबर 2026 |
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 14 सितंबर, प्रातः 07:06 |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 15 सितंबर, प्रातः 07:44 |
| मध्याह्न स्थापना/पूजा मुहूर्त | 11:02 – 13:31 · अवधि 2 घंटे 28 मिनट |
| वर्जित चंद्रदर्शन का समय | 09:06 – 20:04 · अवधि 10 घंटे 58 मिनट |
| गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 |
समय मध्य भारत के मानक पंचांग गणना पर आधारित हैं; स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है — अपने पुरोहित या स्थानीय पंचांग से मिलान कर लें।
🟢 स्थापना मध्याह्न में क्यों? मान्यता है कि गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए मूर्ति स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा के लिए यही समय सबसे उपयुक्त माना जाता है — सुबह जल्दी या शाम को नहीं।
इसी दिन हरतालिका तीज भी — कौन-सी पूजा पहले?
2026 में तिथियां ऐसे बैठी हैं कि 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे तृतीया समाप्त होते ही चतुर्थी शुरू हो जाती है। जिन घरों में तीज का निर्जला व्रत भी है, उनके लिए दिन का क्रम यह रहेगा:
| समय (14 सितंबर) | क्या करें |
|---|---|
| 06:05 – 07:06 | हरतालिका तीज की प्रातःकाल पूजा — सिर्फ 1 घंटा 1 मिनट की खिड़की |
| 07:06 के बाद | चतुर्थी आरंभ — गणपति स्थापना की तैयारी, मूर्ति व सामग्री जुटाना |
| 11:02 – 13:31 | मध्याह्न मुहूर्त में गणपति की स्थापना व पूजा |
यानी तीज की पूजा सुबह जल्दी निपटानी है, उसके बाद ही स्थापना का समय आता है। तीज का निर्जला व्रत परंपरा के अनुसार अगली सुबह ही खुलेगा। तीज की पूरी विधि और नियम यहां पढ़ें।
चंद्रमा क्यों नहीं देखना चाहिए — मिथ्या दोष की कथा
गणेश चतुर्थी की सबसे प्रचलित मान्यता यही है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। कथा के अनुसार भगवान कृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था, क्योंकि उन्होंने अनजाने में इसी तिथि को चंद्रमा देख लिया था। नारद जी ने बताया कि गणेश जी ने चंद्रमा को शाप दिया था कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को जो भी चंद्र-दर्शन करेगा, वह मिथ्या दोष (झूठे आरोप) से अभिशापित होगा। कृष्ण ने यही व्रत कर उस दोष से मुक्ति पाई।
2026 में यह अवधि 14 सितंबर को सुबह 09:06 से रात 08:04 बजे तक है — यानी लगभग 11 घंटे। परंपरा कहती है कि अगर गलती से चंद्रमा दिख जाए तो स्यमंतक मणि की कथा सुनना या पढ़ना ही उपाय है।
घर पर गणपति स्थापना — विधि
- स्थापना से पहले घर व पूजा-स्थान की सफाई; चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
- मूर्ति को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थापित करने की परंपरा है।
- मध्याह्न मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठा, फिर षोडशोपचार पूजा — स्नान, वस्त्र, जनेऊ, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप।
- भोग में मोदक प्रमुख; साथ में दूर्वा (21 गांठ) और लाल फूल — दूर्वा के बिना गणपति की पूजा अधूरी मानी जाती है।
- पूजा के अंत में आरती और गणपति अथर्वशीर्ष या “वक्रतुण्ड महाकाय” का पाठ।
- जितने दिन प्रतिमा घर में रहे, रोज दोनों समय भोग व आरती की परंपरा है।
विसर्जन कब करें
घरों में परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3, 5, 7 या 11 दिन बाद विसर्जन किया जाता है। पूरे 11 दिन रखने वालों के लिए विसर्जन अनंत चतुर्दशी — शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को होगा (चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर रात 11:18 से 25 सितंबर रात 11:06 तक)।
पर्यावरण की बात: मिट्टी की प्रतिमा और घर पर बाल्टी/टब में विसर्जन अब कई शहरों में चलन में है — प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां जल स्रोतों में घुलती नहीं। कई निकाय कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाते हैं; अपने शहर की व्यवस्था निकाय कार्यालय से पूछ लें।
राजस्थान में गणेश चतुर्थी
राजस्थान में यह दिन खासतौर पर जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर से पहचाना जाता है, जहां गणेश चतुर्थी पर मेला लगता है और दर्शन के लिए रातभर कतारें रहती हैं। सवाई माधोपुर के रणथंभौर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर भी इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु खींचता है — यहां देशभर से लोग शादी-ब्याह के निमंत्रण पत्र भेजते हैं।
छुट्टी: राजस्थान सरकार के कैलेंडर में गणेश चतुर्थी (14 सितंबर) और अनंत चतुर्दशी (25 सितंबर) दोनों ऐच्छिक अवकाश हैं — यानी ये अपने-आप नहीं मिलतीं, साल में कोई दो चुनकर विभागीय प्रक्रिया से लेनी होती हैं। पूरी सूची अवकाश कैलेंडर में है।
🗳️ 14 सितंबर को एक और बड़ी बात: इसी दिन राजस्थान के 309 नगरीय निकायों की मतगणना है — गणपति स्थापना के साथ-साथ शहर के पार्षद और बोर्ड की तस्वीर भी साफ होगी। नतीजे यहां लाइव।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
सोमवार, 14 सितंबर 2026 को। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
मध्याह्न मुहूर्त 11:02 से 13:31 बजे तक, कुल 2 घंटे 28 मिनट। मान्यता है कि गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए स्थापना इसी समय की जाती है।
गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखते?
मान्यता है कि इस तिथि पर चंद्र-दर्शन से मिथ्या दोष यानी झूठे आरोप का शाप लगता है — भगवान कृष्ण पर स्यमंतक मणि चोरी का झूठा आरोप इसी कारण लगा था। 2026 में यह अवधि 14 सितंबर को सुबह 9:06 से रात 8:04 बजे तक है।
गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?
परंपरा के अनुसार स्यमंतक मणि की कथा सुनना या पढ़ना इसका उपाय बताया गया है।
गणेश विसर्जन 2026 कब है?
अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को। घरों में डेढ़ दिन, 3, 5, 7 या 11 दिन की परंपरा के अनुसार भी विसर्जन किया जाता है।
क्या 14 सितंबर को सरकारी छुट्टी रहेगी?
राजस्थान में गणेश चतुर्थी ऐच्छिक अवकाश है, सार्वजनिक नहीं — कर्मचारी साल में कोई दो ऐच्छिक अवकाश चुनकर विभागीय प्रक्रिया से ले सकते हैं।
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- हरतालिका तीज 2026 — इसी दिन, पूजा का मुहूर्त सिर्फ 61 मिनट
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स्रोत: तिथि, मुहूर्त एवं वर्जित चंद्रदर्शन का समय मानक पंचांग गणना के अनुसार; ऐच्छिक अवकाश की जानकारी राजस्थान सरकार के अवकाश कैलेंडर 2026 से।






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