🪔 सीधा जवाब (5 अगस्त 2026): हरतालिका तीज 2026 में सोमवार, 14 सितंबर को है — भाद्रपद शुक्ल तृतीया। इस बार व्रत शिवजी के अपने वार सोमवार को पड़ रहा है, जिसे विशेष संयोग माना जा रहा है। व्रत निर्जला होता है, पूजा परंपरा से प्रातःकाल (कई परिवारों में प्रदोष काल) — सटीक मुहूर्त हम तीज के नजदीक इसी पेज पर अपडेट करेंगे।

जयपुर। सावन की हरियाली तीज और भाद्रपद की कजरी तीज के बाद तीज-त्रयी का सबसे कठोर व्रत आता है — हरतालिका तीज। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए यही व्रत किया था; सखियां उन्हें हरण कर वन ले गई थीं, इसीलिए नाम पड़ा 'हरत-आलिका'। राजस्थान के घरों में इस दिन की तैयारी हफ्ते भर पहले शुरू हो जाती है — यह पेज उसी तैयारी के लिए है।

तिथि और समय

ब्योराविवरण
व्रत की तारीखसोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद शुक्ल तृतीया
पूजा का समयपरंपरा से प्रातःकाल; कई परिवारों में प्रदोष काल — स्थानीय पंचांग से मिलान करें
पारण (व्रत खोलना)अगली सुबह, प्रतिमा-विसर्जन के बाद

पंचांग-भेद से तिथि के आरंभ-समापन समय में अंतर हो सकता है — अपने पुरोहित/स्थानीय पंचांग से एक बार मिलान जरूर करें। पूजा का मिनट-दर-मिनट मुहूर्त हम तीज से पहले यहीं अपडेट कर देंगे।

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तीनों तीज का फर्क — एक नजर में

तीजतिथि2026 में
हरियाली तीजसावन शुक्ल तृतीयाजुलाई में हो चुकी
कजरी/बड़ी तीज (सातुड़ी)भाद्रपद कृष्ण तृतीयासितंबर की शुरुआत
हरतालिका तीजभाद्रपद शुक्ल तृतीया14 सितंबर

व्रत के नियम (और सहूलियत की बात)

  • व्रत निर्जला है — अन्न-जल दोनों का त्याग; अगली सुबह पारण।
  • सुहागिनें पति की दीर्घायु और कुंवारी कन्याएं उत्तम वर की कामना से रखती हैं।
  • सेहत पहले: गर्भावस्था, मधुमेह या बीमारी में फलाहार/जल सहित व्रत की छूट परंपरा में स्वीकार्य है — भावना कठोरता से बड़ी है।
  • एक बार व्रत शुरू करने पर हर वर्ष निभाने की मान्यता है, इसलिए पहली बार रखने से पहले घर की परंपरा समझ लें।

पूजा विधि — घर पर ऐसे करें

  • चौकी पर बालू/शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती व गणेश की प्रतिमाएं बनाएं-स्थापित करें; केले के पत्तों और फूलों से फुलेरा सजाएं।
  • माता पार्वती को सुहाग की 16 सामग्री (सिंदूर, मेहंदी, चूड़ी, बिंदी…) अर्पित करें; शिवजी को बेलपत्र-धतूरा।
  • हरतालिका व्रत कथा सुनें/पढ़ें — कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
  • रात्रि जागरण व भजन की परंपरा है; अगली सुबह प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ व्रत का पारण।

राजस्थान में तीज का रंग

मारवाड़-शेखावाटी में इस दिन नवविवाहिताएं पीहर में तीज मनाती हैं, मेहंदी-झूलों और घेवर-सत्तू की परंपरा कजरी तीज से चली आती है। जयपुर की सावन वाली तीज सवारी भले हरियाली तीज पर निकलती हो, घर-घर की पूजा का सबसे बड़ा दिन हरतालिका ही है।

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