🪔 सीधा जवाब (5 सितंबर 2026 — मुहूर्त अपडेट): हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर को है — भाद्रपद शुक्ल तृतीया। प्रातःकाल पूजा मुहूर्त सिर्फ 06:05 से 07:06 बजे तक है, यानी कुल 1 घंटा 1 मिनट — क्योंकि तृतीया तिथि उसी सुबह 7:06 बजे समाप्त हो रही है। व्रत निर्जला है और इस बार शिवजी के अपने वार सोमवार को पड़ रहा है। इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है — दोनों का क्रम नीचे समझाया है।

जयपुर। सावन की हरियाली तीज और भाद्रपद की कजरी तीज के बाद तीज-त्रयी का सबसे कठोर व्रत आता है — हरतालिका तीज। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए यही व्रत किया था; सखियां उन्हें हरण कर वन ले गई थीं, इसीलिए नाम पड़ा 'हरत-आलिका'। राजस्थान के घरों में इस दिन की तैयारी हफ्ते भर पहले शुरू हो जाती है — यह पेज उसी तैयारी के लिए है।

तिथि और समय

ब्योराविवरण
व्रत की तारीखसोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद शुक्ल तृतीया
तृतीया तिथि प्रारंभ13 सितंबर 2026, प्रातः 07:08
तृतीया तिथि समाप्त14 सितंबर 2026, प्रातः 07:06
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त06:05 – 07:06 (14 सितंबर) · अवधि 1 घंटा 1 मिनट
पारण (व्रत खोलना)अगली सुबह, प्रतिमा-विसर्जन के बाद

इस बार मुहूर्त बहुत छोटा है: तृतीया 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे खत्म हो रही है, इसलिए प्रातःकाल पूजा की खिड़की सिर्फ 06:05 से 07:06 तक है। जो परिवार प्रदोष काल में पूजा करते हैं, वे इस बार 13 सितंबर की शाम का प्रदोष लें — क्योंकि 14 की शाम तक तृतीया रहेगी ही नहीं। पंचांग-भेद संभव है, अपने पुरोहित से एक बार मिलान कर लें।

तीनों तीज का फर्क — एक नजर में

तीजतिथि2026 में
हरियाली तीजसावन शुक्ल तृतीयाजुलाई में हो चुकी
कजरी/बड़ी तीज (सातुड़ी)भाद्रपद कृष्ण तृतीयासितंबर की शुरुआत
हरतालिका तीजभाद्रपद शुक्ल तृतीया14 सितंबर

व्रत के नियम (और सहूलियत की बात)

  • व्रत निर्जला है — अन्न-जल दोनों का त्याग; अगली सुबह पारण।
  • सुहागिनें पति की दीर्घायु और कुंवारी कन्याएं उत्तम वर की कामना से रखती हैं।
  • सेहत पहले: गर्भावस्था, मधुमेह या बीमारी में फलाहार/जल सहित व्रत की छूट परंपरा में स्वीकार्य है — भावना कठोरता से बड़ी है।
  • एक बार व्रत शुरू करने पर हर वर्ष निभाने की मान्यता है, इसलिए पहली बार रखने से पहले घर की परंपरा समझ लें।

पूजा विधि — घर पर ऐसे करें

  • चौकी पर बालू/शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती व गणेश की प्रतिमाएं बनाएं-स्थापित करें; केले के पत्तों और फूलों से फुलेरा सजाएं।
  • माता पार्वती को सुहाग की 16 सामग्री (सिंदूर, मेहंदी, चूड़ी, बिंदी…) अर्पित करें; शिवजी को बेलपत्र-धतूरा।
  • हरतालिका व्रत कथा सुनें/पढ़ें — कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
  • रात्रि जागरण व भजन की परंपरा है; अगली सुबह प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ व्रत का पारण।

इसी दिन गणेश चतुर्थी भी — पहले कौन-सी पूजा?

2026 में तिथियां इस तरह बैठी हैं कि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तृतीया समाप्त होते ही चतुर्थी शुरू हो जाती है। यानी एक ही दिन में दोनों — पहले हरतालिका तीज, फिर गणेश चतुर्थी।

समय (14 सितंबर)क्या करें
06:05 – 07:06हरतालिका तीज की प्रातःकाल पूजा — तृतीया इसी समय तक है
07:06 के बादचतुर्थी आरंभ — गणपति स्थापना की तैयारी
11:02 – 13:31मध्याह्न गणेश पूजा/स्थापना मुहूर्त — अवधि 2 घंटे 28 मिनट

व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए इसका मतलब साफ है: तीज की पूजा सुबह जल्दी निपटानी है, उसके बाद ही गणपति की स्थापना का समय आता है। निर्जला व्रत का पारण परंपरा के अनुसार अगली सुबह ही होगा।

🗳️ और एक बात: 14 सितंबर को ही राजस्थान के 309 नगरीय निकायों की मतगणना भी है — यानी त्योहार और चुनावी नतीजे एक ही दिन। नतीजे यहां लाइव मिलेंगे

राजस्थान में तीज का रंग

मारवाड़-शेखावाटी में इस दिन नवविवाहिताएं पीहर में तीज मनाती हैं, मेहंदी-झूलों और घेवर-सत्तू की परंपरा कजरी तीज से चली आती है। जयपुर की सावन वाली तीज सवारी भले हरियाली तीज पर निकलती हो, घर-घर की पूजा का सबसे बड़ा दिन हरतालिका ही है।

त्योहारों की तारीखों के और पेज: राजस्थान सरकारी अवकाश कैलेंडर 2026 — छुट्टियों की पूरी लिस्ट (गणेश चतुर्थी 14 सितंबर की ऐच्छिक छुट्टी समेत) और पितृ पक्ष 2026 की तिथिवार सूची