आज शनिवार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है — राजस्थान में जिसे लोग देवसोनी ग्यारस भी कहते हैं। और इसी के साथ आज से चातुर्मास शुरू हो जाएगा, यानी अगले करीब चार महीने विवाह, गृह-प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त बंद रहेंगे। पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई सुबह 9:12 बजे शुरू हुई और आज सुबह 11:34 बजे समाप्त होगी — उदयातिथि के नियम से व्रत आज ही रखा जाएगा। जो लोग "एकादशी 24 या 25?" के भ्रम में थे, उनके लिए जवाब साफ है: आज।
व्रत का पारण कब — यही सबसे जरूरी समय है
| बिंदु | समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि | 24 जुलाई सुबह 9:12 से 25 जुलाई सुबह 11:34 बजे तक |
| व्रत पारण (व्रत तोड़ना) | 26 जुलाई (रविवार) सुबह 5:39 से 8:22 बजे के बीच |
| द्वादशी समाप्त | 26 जुलाई दोपहर 1:57 बजे |
पारण का यह समय ध्यान से देखें — शास्त्र परंपरा में द्वादशी के भीतर पारण करना जरूरी माना गया है, और सुबह 8:22 के बाद पारण करने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता कहा जाता है। इसीलिए एकादशी का व्रत रखने वालों के लिए कल सुबह का यह ढाई घंटे का समय सबसे अहम है।
चातुर्मास: चार महीने क्या रुकेगा, क्या नहीं
मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं — इसीलिए इसे देवशयनी (देव + शयन) कहा जाता है। इसे पद्मा, हरिशयनी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इसका सीधा असर परिवारों की योजनाओं पर पड़ता है:
- बंद: विवाह, सगाई, गृह-प्रवेश, मुंडन, नए वाहन-दुकान का शुभारंभ जैसे मांगलिक कार्यों के मुहूर्त — नवंबर में देवउठनी एकादशी तक।
- जारी: पूजा-पाठ, व्रत, जप-तप, दान और तीर्थ यात्रा — परंपरा में चातुर्मास को साधना का सबसे उत्तम काल माना गया है। सावन के सोमवार, तीज-त्योहार सब इसी अवधि में आते हैं।
जिन परिवारों में शादी की बात चल रही है, उनके लिए व्यावहारिक बात यह है कि अगला विवाह-मुहूर्त सीजन नवंबर से शुरू होगा — यानी तैयारी के लिए पूरे चार महीने हैं।
खाटूश्यामजी में आज से दो दिन का मेला
राजस्थान के लिए इस एकादशी का एक और खास पहलू है — सीकर के खाटूश्यामजी में हर शुक्ल पक्ष की एकादशी-द्वादशी को लगने वाला मासिक मेला परंपरा के अनुसार आज और कल (25-26 जुलाई) भरेगा। रींगस से खाटू तक करीब 18 किलोमीटर का रास्ता निशान-यात्रा करते श्रद्धालुओं से भर जाता है — कई भक्त यह दूरी नंगे पैर तय करते हैं। मानसून के इस दौर में जा रहे हों तो बारिश और फिसलन का ध्यान रखें; मेले की व्यवस्थाओं व मार्ग की ताजा स्थिति जिला प्रशासन/मंदिर कमेटी की सूचना से जांच लें।
आगे का कैलेंडर — अगली एकादशी और सावन
| तारीख | पर्व |
|---|---|
| 29 जुलाई (बुधवार) | गुरु पूर्णिमा |
| 30 जुलाई | सावन माह शुरू (28 अगस्त तक, 4 सोमवार: 3, 10, 17, 24 अगस्त) |
| 9 अगस्त (रविवार) | कामिका एकादशी — तिथि 8 अगस्त 1:59 PM से 9 अगस्त 11:04 AM तक; पारण 10 अगस्त सुबह 5:47 से 8:00 बजे तक (समय कम है, ध्यान रखें) |
| 11 अगस्त | सावन शिवरात्रि — कांवड़ का जल चढ़ाने की मुख्य तिथि |
| 12 अगस्त | हरियाली अमावस्या — उदयपुर का अनोखा मेला |
| 15 अगस्त | हरियाली तीज (स्वतंत्रता दिवस के साथ) |
| 17 अगस्त | नाग पंचमी (सावन सोमवार भी) |
| 28 अगस्त | रक्षाबंधन — श्रावण पूर्णिमा, सावन का समापन |
व्रत की सरल विधि
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन, पीले फूल-पीतांबर व तुलसी दल अर्पण, विष्णु सहस्रनाम या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप और सामर्थ्य अनुसार दान — यही एकादशी की सामान्य परंपरा है। व्रत रखने वाले चावल और अन्न से परहेज करते हैं; फलाहार या एक समय सात्विक भोजन लेते हैं। स्वास्थ्य कारणों से पूरा उपवास संभव न हो तो फलाहार के साथ पूजन-जप भी परंपरा में स्वीकार्य है। सावन के व्रतों की पूरी सूची यहां देखें और शिवधामों की योजना बना रहे हों तो अलवर का नीलकंठ महादेव मंदिर पढ़ें।
⚠️ नोट: तिथि व पारण के समय प्रमुख पंचांगों (दृक पंचांग आदि, नई दिल्ली समय) के अनुसार हैं — स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। खाटूश्यामजी मेले की तिथियां परंपरागत क्रम पर आधारित हैं; यात्रा से पहले मंदिर कमेटी/जिला प्रशासन की ताजा सूचना अवश्य देखें।






💬 टिप्पणियाँ
इस खबर पर अपनी राय साझा करें। कृपया शालीन भाषा का प्रयोग करें।
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आप कीजिए!