राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में सुबह 6 बजे फावड़ा और तगारी लेकर काम पर निकलने वाले मजदूरों के लिए बड़ी खबर है। वर्ष 2026 में नरेगा राजस्थान के तहत अब अकुशल श्रमिकों को प्रतिदिन ₹300 की नई मजदूरी दर दी जा रही है, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर हो रही है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मस्टरोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा नरेगा मजदूरी दरों में संशोधन के बाद प्रदेश के लाखों परिवारों को राहत मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की बढ़ती मांग को देखते हुए अब 100 दिन का न्यूनतम रोजगार और राज्य स्तर पर अतिरिक्त दिनों का काम दिया जा रहा है। यदि आप भी ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से जुड़े हैं, तो मजदूरी के नए नियम और भुगतान चक्र को समझना बेहद जरूरी है।

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नरेगा राजस्थान 2026: नई मजदूरी दरें और दर तालिका

राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के लिए मजदूरी की दरों को पुनरीक्षित किया है। अब नरेगा राजस्थान के अंतर्गत कार्य करने वाले प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक को तय माप-तौल (टास्क) पूरा करने पर ₹300 प्रतिदिन की दर से भुगतान मिलता है। महिला व पुरुष श्रमिकों के लिए समान मजदूरी दर लागू की गई है।

श्रमिक श्रेणीपुरानी मजदूरी (प्रतिदिन)नई मजदूरी दर 2026 (प्रतिदिन)भुगतान का माध्यम
अकुशल श्रमिक (Unskilled)₹275₹300ABPS / DVT (डायरेक्ट बैंक अकाउंट)
नरेगा मेट (Mate)₹271₹285डीबीटी बैंक ट्रांसफर
कुशल/अर्धकुशल श्रमिक₹290 - ₹310₹320 - ₹350बैंक अकाउंट ट्रांसफर

लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती... कई बार मजदूरों को शिकायत रहती है कि काम करने के बावजूद उन्हें कम पैसा मिला है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नरेगा में मजदूरी 'टास्क-आधारित' (Piece-rate) होती है। यदि कोई गैंग पूरे दिन में निर्धारित गढ्ढा या मिट्टी का काम पूरा नहीं करती, तो उसी अनुपात में हाजिरी कटती है।

नरेगा भुगतान कब और कैसे मिलता है?

नरेगा कानून के अनुसार, कार्यस्थल पर हाजिरी दर्ज होने के बाद मस्टरोल (Attendance Sheet) बंद होती है। मस्टरोल बंद होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर डीएफटी (FTO - Fund Transfer Order) जनरेट करके मजदूरों के खातों में राशि भेज दी जाती है। यदि 15 दिन से अधिक की देरी होती है, तो नियमानुसार मुआवजा देने का प्रावधान है।

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हाल ही में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम (ABPS) अनिवार्य कर दिया गया है। यानी आपका नरेगा जॉब कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाता आपस में लिंक होना अनिवार्य है। एनपीसीआई (NPCI) मैपिंग न होने पर एफटीओ रिजेक्ट हो जाता है और भुगतान अटक जाता है।

नरेगा में काम मांगने का सही तरीका (फॉर्म-6)

अब असली बात। गांव में सरपंच या मेट केवल मौखिक कहने पर काम नहीं देते। अगर आप काम पाना चाहते हैं, तो आपको ग्राम पंचायत में लिखित आवेदन जमा करना होगा:

  • ग्राम पंचायत कार्यालय या ई-मित्र केंद्र से फॉर्म-6 प्राप्त करें।
  • फॉर्म में काम मांगने वाले सदस्यों के नाम, जॉब कार्ड संख्या और पसंदीदा समय भरें।
  • पंचायत सचिव या ग्राम विकास अधिकारी (VDO) से रसीद (Acknowledgement Receipt) अवश्य लें।
  • आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर पंचायत को आपको काम देना ही होगा। यदि काम नहीं मिलता, तो आप बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।

प्रदेश के जयपुर, बाड़मेर, जोधपुर और उदयपुर समेत सभी जिलों में राजनीति व सरकारी योजनाएं अनुभाग के तहत नरेगा कार्यों की नियमित ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप के जरिए दिन में दो बार लाइव लोकेशन और फोटो के साथ डिजिटल हाजिरी लगाई जाती है।

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भुगतान न आने पर आपको क्या करना है

यदि आपने काम किया है और 15 दिन बीत जाने के बाद भी पैसा खाते में नहीं आया है, तो सबसे पहले अपने नजदीकी ई-मित्र पर जाकर जॉब कार्ड का एफटीओ स्टेटस (FTO Status) चेक कराएं। यदि एफटीओ 'Rejected' आ रहा है, तो तुरंत अपने बैंक जाकर आधार सीडिंग और डीबीटी (DBT) एक्टिवेट करवाएं। इसके अलावा आप टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6127 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नरेगा राजस्थान से जुड़ी हर अपडेट के लिए अपनी ग्राम पंचायत के नोटिस बोर्ड को नियमित रूप से देखते रहें।