🗳️ 13 अगस्त को क्या तय हुआ: प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के अध्यक्ष/महापौर पदों और 41 जिला प्रमुखों का आरक्षण लॉटरी से तय हो गया। चारों बड़े निगम — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर — अनारक्षित; कोटा OBC महिला। अब आगे: वार्ड स्तर का आरक्षण जिला कलेक्टर जिला मुख्यालयों पर निकाल रहे हैं, और निर्वाचन कार्यक्रम (मतदान की तारीखें) अभी घोषित नहीं हुआ है — वह आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद आएगा।
राजस्थान के शहरी और ग्रामीण दोनों चुनावों का सबसे बड़ा सवाल 13 अगस्त को हल हो गया — किस शहर की कुर्सी किस वर्ग के लिए है। स्वायत्त शासन निदेशालय में सुबह 10:30 बजे 309 निकायों के अध्यक्ष पदों की लॉटरी निकाली गई, और उसी दिन दोपहर 3:15 बजे इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान, जेएलएन मार्ग पर 41 जिला प्रमुखों के आरक्षण की। प्रक्रिया स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा और विभाग सचिव डॉ. रवि जैन की मौजूदगी में हुई।
नीचे दसों नगर निगमों की स्थिति, पूरे प्रदेश का वर्गवार हिसाब, पंचायत की तरफ OBC आरक्षण की तस्वीर — और वह हिस्सा जो हर संभावित उम्मीदवार को अभी पढ़ना चाहिए: इस बार चुनाव लड़ने के नियम बदल चुके हैं, और ज्यादातर जगह पुराना नियम ही छपा हुआ मिल रहा है।
दसों नगर निगमों में महापौर पद का आरक्षण
| नगर निगम | महापौर पद |
|---|---|
| जयपुर | अनारक्षित (सामान्य) |
| जोधपुर | अनारक्षित (सामान्य) |
| उदयपुर | अनारक्षित (सामान्य) |
| बीकानेर | अनारक्षित (सामान्य) |
| अजमेर | सामान्य महिला |
| अलवर | सामान्य महिला |
| भरतपुर | सामान्य महिला |
| भीलवाड़ा | सामान्य महिला |
| पाली | सामान्य महिला |
| कोटा | OBC महिला |
यानी दस निगमों में से छह की कुर्सी महिला के लिए तय हो गई है, और कोटा में वह महिला OBC वर्ग से ही होगी। चार बड़े शहरों के अनारक्षित रहने से वहां दोनों बड़े दलों में टिकट की दौड़ सबसे तेज रहेगी।
पूरे प्रदेश का हिसाब — 309 निकायों में वर्गवार
प्रदेश में कुल 309 नगरीय निकाय हैं — 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिका। अध्यक्ष पदों का आरक्षण इस तरह बंटा:
| वर्ग | कुल निकाय | इनमें महिला के लिए |
|---|---|---|
| अनारक्षित (सामान्य) | 188 | 62 |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 60 | 21 |
| अनुसूचित जाति (SC) | 50 | 16 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 11 | 3 |
| कुल | 309 | 102 |
एक बात ध्यान देने की — यह आरक्षण अध्यक्ष/महापौर की कुर्सी का है, वार्ड सीटों का नहीं। वार्डों का आरक्षण अलग से जिला स्तर पर निकाला जा रहा है, इसलिए इन आंकड़ों को "पूरे चुनाव में महिलाओं का आरक्षण" समझने की गलती न करें।
लॉटरी ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन निकाली गई — वजह भी दिलचस्प है
इस बार लॉटरी ऑफलाइन, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में निकाली गई। कारण यह बताया गया कि कुछ दलों ने ऑनलाइन लॉटरी की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। जिला प्रमुखों की लॉटरी के दौरान थोड़ी नोकझोंक भी हुई, जब मौजूद लोगों ने हर संभाग में कम से कम एक महिला जिला प्रमुख रखने के संवैधानिक आधार पर सवाल किया — अधिकारियों ने इसे राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के अनुरूप बताया। जिला प्रमुख के स्तर पर 20 जिलों में यह पद महिला के लिए आरक्षित हुआ है, जिनमें अजमेर और सीकर भी हैं।
पंचायत की तरफ: 1,403 में से 192 सीटें OBC के लिए प्रस्तावित
ग्रामीण चुनावों का आरक्षण OBC आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तय हो रहा है। राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने करीब 900 पन्नों की रिपोर्ट 5 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपी, जिसमें 92 पिछड़ी जातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अध्ययन है — और यह निष्कर्ष कि 90 से ज्यादा समुदाय राजनीतिक भागीदारी में काफी पीछे हैं, जबकि कुछ चुनिंदा जातियों का प्रतिनिधित्व लगातार मजबूत बना हुआ है।
इसी आधार पर जिला परिषद वार्डों के लिए सिफारिश यह है:
- 41 जिलों की कुल 1,403 जिला परिषद वार्ड सीटों में से 192 सीटें OBC के लिए — यानी 13.68%।
- सबसे ज्यादा: जयपुर और सीकर में 10-10 सीटें; जोधपुर, जालोर और भीलवाड़ा में 9-9।
- शून्य आरक्षण चार जिलों में — बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सालूंबर। वजह यह कि इन जिलों में अनुसूचित जनजाति की आबादी बहुत अधिक है और SC-ST आरक्षण के बाद OBC के लिए सीट बचती ही नहीं।
अब आगे क्या — और तारीखों पर सावधानी
वार्ड स्तर का आरक्षण जिला कलेक्टरों द्वारा जिला मुख्यालयों पर निकाला जा रहा है, जिसमें SC, ST, OBC और महिला वर्ग तय होंगे। इसकी तारीखों को लेकर अलग-अलग समाचार स्रोत अलग-अलग बता रहे हैं — किसी में 14 से 16 अगस्त, किसी में 17 अगस्त (वार्ड व पंचायत समिति) और 18 अगस्त (सरपंच व वार्ड पंच)। चूंकि यह लॉटरी जिला स्तर पर होती है, सही तारीख आपके जिला कलेक्टर कार्यालय की सूचना ही है — किसी वायरल तारीख पर न चलें।
मतदान के बारे में अब तक जो पक्का है: चुनाव दो चरणों में 39 जिलों में होंगे, जबकि फलोदी और सालूंबर में एक ही चरण में। निर्वाचन कार्यक्रम यानी मतदान और नामांकन की तारीखें राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी जारी नहीं की हैं — वह आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद आएगा।
आयोग की तैयारी कहां तक पहुंची, यह उसके आदेशों से साफ है — 6 अगस्त को बजट आवंटन, 8 अगस्त को आरक्षित EVM तैयार करने के निर्देश, 10 अगस्त को चुनाव प्रक्रिया संबंधी परिपत्र और 11 अगस्त को आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों की पालना का आदेश। आचार संहिता से जुड़ा आदेश आ जाना इस बात का संकेत है कि कार्यक्रम की घोषणा दूर नहीं। पंचायत चुनाव कब होंगे, इसका पूरा विश्लेषण यहां पढ़ें।
चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं? नियम बदल चुके हैं
यह हिस्सा सबसे जरूरी है, क्योंकि आरक्षण तय होते ही सबसे पहला सवाल यही उठता है कि "मैं लड़ सकता हूं या नहीं" — और यहीं सबसे ज्यादा पुरानी जानकारी चल रही है।
दो बच्चों वाला नियम अब लागू नहीं है — पंचायत और नगरीय निकाय, दोनों में। दो संशोधन अधिनियमों को राज्यपाल की स्वीकृति 24 मार्च 2026 को मिली और वे 25 मार्च 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होकर तुरंत प्रभावी हो गए:
| अधिनियम | किसमें संशोधन | असर |
|---|---|---|
| राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम 2026 — अधिनियम संख्या 6 / 2026 | पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 19 | खण्ड (ठ), परन्तुक खण्ड (iv) और स्पष्टीकरण-I विलोपित — संतान संबंधी प्रावधान हटा दिए गए |
| राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 — अधिनियम संख्या 7 / 2026 | नगरपालिका अधिनियम 2009, धारा 2 व 24 | धारा 24 खण्ड (xvii), परन्तुक खण्ड (ड) व स्पष्टीकरण विलोपित — निकाय चुनाव में भी वही असर |
राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 जुलाई 2026 के पत्र क्रमांक 4831 से अपने ही पुराने आदेश क्रमांक 4149 दिनांक 21.10.2019 को अधिक्रमित करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। इसलिए जो भी स्रोत आज भी दो बच्चों की शर्त बता रहा है, वह मार्च 2026 से पहले की नियम-पुस्तिका पर चल रहा है।
एक और बदलाव जिसकी चर्चा नहीं हुई: अधिनियम 7 ने नगरपालिका अधिनियम की धारा 2 से "कुष्ठ" (कुष्ठ रोग) शब्द भी हटा दिया — यानी कुष्ठ रोग अब निकाय चुनाव में अयोग्यता का आधार नहीं है।
तो अब किन कारणों से अयोग्यता बनी हुई है
नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 के तहत, आयोग के पत्र 4831 के अनुसार:
- नैतिक अधमता वाले अपराध में, या किसी भी अपराध में 6 माह या अधिक की सजा — रिहाई से 6 वर्ष तक अयोग्य।
- नगरपालिका अधिनियम की धारा 245 या खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 के तहत दोषसिद्धि।
- 5 वर्ष या अधिक की सजा वाले मामले में न्यायालय ने संज्ञान लेकर आरोप विरचित कर दिए हों — मामला लंबित रहने तक अयोग्य।
- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 की कार्यवाही में धारा 117 का आदेश, जो पलटा न गया हो — बंधपत्र अवधि तक।
- जो विधानसभा के लिए अयोग्य है, वह यहां भी अयोग्य — पर 21 वर्ष या अधिक उम्र का व्यक्ति सिर्फ 25 से कम होने के कारण अयोग्य नहीं होगा। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 भी लागू होती है।
नामांकन की वह चूक जिससे पर्चा खारिज हो जाता है
यह सबसे व्यावहारिक चेतावनी है। नामांकन पत्र के साथ घोषणा पत्र और परिशिष्ट-II देना अनिवार्य है। अगर यह छूट जाए तो रिटर्निंग अधिकारी परिशिष्ट-III में नोटिस देता है, और घोषणा पत्र संवीक्षा (scrutiny) शुरू होने से पहले जमा करना होता है — वरना नामांकन खारिज हो सकता है। हर चुनाव में कुछ पर्चे इसी तकनीकी चूक से रद्द होते हैं।
अपने निकाय का आरक्षण कहां देखें
ईमानदारी से बता दें — 51 नगर परिषदों और 248 नगर पालिकाओं की निकाय-वार पूरी सूची अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। स्वायत्त शासन विभाग की वेबसाइट (dlb.rajasthan.gov.in) इस समय खुल नहीं रही है, और किसी भी समाचार स्रोत ने तीनों सौ से ज्यादा निकायों की पूरी तालिका प्रकाशित नहीं की है। इसलिए अपने निकाय की स्थिति के लिए:
- जिला कलेक्टर कार्यालय / जिला निर्वाचन अधिकारी की सूचना पट्टिका — वार्ड आरक्षण की लॉटरी यहीं हो रही है, और अध्यक्ष पद की सूची भी जिले को भेजी जाती है।
- अपने नगर पालिका / परिषद कार्यालय में लगी सूचना।
- राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट sec.rajasthan.gov.in — निर्वाचन कार्यक्रम और आदेश यहीं चढ़ते हैं।
पूरी निकाय-वार सूची सामने आने पर हम इसी पेज पर तालिका जोड़ देंगे। राजनीति और चुनाव से जुड़े अपडेट राजनीति सेक्शन में मिलते रहेंगे।
⚠️ नोट: महापौर पदों का आरक्षण, 309 निकायों का वर्गवार हिसाब और जिला प्रमुख/OBC संबंधी आंकड़े 13 अगस्त 2026 की लॉटरी की समाचार रिपोर्टों पर आधारित हैं (एक से अधिक स्रोतों में समान)। वार्ड आरक्षण की तारीखों पर स्रोतों में अंतर है, इसलिए उन्हें अंतिम न मानें — जिला कलेक्टर कार्यालय की सूचना ही अधिकृत है। दो बच्चों के नियम व अयोग्यता संबंधी जानकारी राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम 2026 व राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 के राजपत्र तथा राज्य निर्वाचन आयोग के पत्र क्रमांक 4831 दिनांक 15.07.2026 से है। निर्वाचन कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है — मतदान की कोई तारीख बताने वाला संदेश अफवाह है।






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