✅ सीधा जवाब: राज्य निर्वाचन आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को सात तरह के पदों पर मार्गदर्शन भेजा है। राजस्थान संविदा नियम 2022 के तहत लगे कार्मिकों का पद "लाभ का पद" माना जाना अपेक्षित है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन नामांकन से नतीजे तक अवैतनिक अवकाश लेकर, और जीतने पर शपथ से पहले इस्तीफा देकर। राशन डीलर का पद लाभ का पद नहीं माना गया है। आशा सहयोगिनी, साथिन और विद्या संबल वालों का फैसला रिटर्निंग अधिकारी नियुक्ति की शर्तें देखकर करेंगे।

🗓️ यह अभी क्यों ज़रूरी है: सरपंच और वार्ड पंच के नामांकन की जांच नामांकन वाले दिन ही 11:30 बजे होती है (पहला चरण 23 अक्टूबर), और पंचायत समिति व जिला परिषद के नामांकन अलग-अलग जिलों में 4 नवंबर तक चल रहे हैं। जांच में नामांकन खारिज हुआ तो दोबारा मौका नहीं मिलता — अपने जिले के नामांकन की तारीखें देखें →

पंचायत चुनाव में हर गांव से ऐसे कई उम्मीदवार होते हैं जो किसी न किसी सरकारी योजना में मानदेय पर काम करते हैं — आंगनबाड़ी, आशा, साथिन, संविदा कर्मी या राशन डीलर। सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि ऐसे लोग चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं, क्योंकि पंचायती राज अधिनियम की धारा 19 सरकारी नियंत्रण वाले वेतनभोगी पद पर बैठे व्यक्ति को अयोग्य मानती है। नागौर के जिला निर्वाचन अधिकारी ने 6 अक्टूबर को आयोग से सात खास पदों पर मार्गदर्शन मांगा था। आयोग ने 9 अक्टूबर को जवाब दिया और उसकी प्रति राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को भेजी, यानी नामांकन की जांच पूरे राज्य में इसी आधार पर होगी।

किस पद पर क्या फैसला: आयोग का मार्गदर्शन

पदआयोग ने क्या कहाउम्मीदवार क्या करे
संविदा कार्मिक (राजस्थान संविदा नियम 2022)नियुक्ति राज्य सरकार या विभाग करता है और सेवा शर्तें व हटाने का अधिकार सरकार के पास है, इसलिए यह लाभ का पद माना जाना अपेक्षित हैपद पर रहते हुए नामांकन पर आपत्ति लग सकती है; नामांकन से पहले अपनी स्थिति तय कर लें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकालाभ का पद नहीं (बॉम्बे हाईकोर्ट, रिट याचिका 8022/2021)। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग के परिपत्र (12.01.2023) के अनुसार नामांकन तिथि से परिणाम तक अवैतनिक अवकाश लेना होगानामांकन से पहले अवकाश लें; जीतने पर शपथ से पहले पद से त्याग पत्र देना होगा
आशा सहयोगिनीलाभ का पद है या नहीं, इसका फैसला रिटर्निंग अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के मापदंडों और चिकित्सा विभाग के 13.07.2022 के दिशा-निर्देशों से करेंगे — नियुक्ति पत्र, मानदेय, अवधि और सरकारी नियंत्रण देखकरनियुक्ति पत्र और मानदेय के कागज़ साथ रखें; संदेह हो तो पहले रिटर्निंग अधिकारी से पूछें
साथिनमहिला अधिकारिता विभाग ने कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए; आशा सहयोगिनी की तरह ही फैसला होगावही जो आशा सहयोगिनी के लिए
विद्या संबल योजना के शिक्षककोई बाध्यकारी अदालती फैसला नहीं; रिटर्निंग अधिकारी नियुक्ति पत्र, मानदेय और सरकारी नियंत्रण देखेंगे। आयोग के अनुसार संशय होने पर चुनाव से पहले त्याग पत्र लेना उचित होगासंदेह की स्थिति में त्याग पत्र देकर ही नामांकन करें
राशन डीलर (उचित मूल्य दुकानदार)लाभ का पद नहीं। राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (4 दिसंबर 2014) में कहा था कि सिर्फ राशन की दुकान चलाने से कोई धारा 19 में अयोग्य नहीं होताचुनाव लड़ सकते हैं
प्रशासकआयोग के पहले जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार रिटर्निंग अधिकारी फैसला करेंगेपुराने आदेश के अनुसार

"लाभ का पद" कैसे तय होता है: सुप्रीम कोर्ट के 5 सवाल

आयोग ने रिटर्निंग अधिकारियों से कहा है कि नामांकन की जांच के समय सुप्रीम कोर्ट के प्रद्युत बारदोलोई बनाम स्वपन रॉय (2001) फैसले के पांच मापदंडों से फैसला करें:

  1. क्या नियुक्ति सरकार ने की है?
  2. क्या सरकार को उसे हटाने का अधिकार है?
  3. क्या उस पद से कोई वेतन, मानदेय या दूसरा आर्थिक लाभ जुड़ा है?
  4. पद पर बैठा व्यक्ति काम किस तरह का करता है?
  5. सरकार उस पद पर कितना नियंत्रण रखती है?

साथ ही जया बच्चन बनाम भारत संघ (2006) के फैसले के अनुसार यह निर्णायक नहीं कि व्यक्ति को असल में कोई पैसा मिला या नहीं; अहम यह है कि वह पद आर्थिक लाभ या मानदेय दिला सकता है या नहीं।

नामांकन वाले दिन क्या साथ रखें

  1. नियुक्ति पत्र और सेवा शर्तों के कागज़, ताकि रिटर्निंग अधिकारी पद की प्रकृति देख सकें।
  2. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका हैं तो अवैतनिक अवकाश की स्वीकृति या आवेदन की प्रति।
  3. पद छोड़ा है तो त्याग पत्र और उसकी स्वीकृति की प्रति।
  4. बाकी सभी दस्तावेज़ और योग्यता की शर्तें — सरपंच बनने के लिए योग्यता और डॉक्यूमेंट 2026।

नियमित सरकारी कर्मचारी पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते; यह मार्गदर्शन उन पदों के लिए है जो मानदेय या संविदा पर हैं और जिन पर अब तक सबसे ज़्यादा भ्रम रहता था।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

क्या संविदा कर्मचारी पंचायत चुनाव लड़ सकता है?
राज्य निर्वाचन आयोग के 9 अक्टूबर 2026 के मार्गदर्शन के अनुसार राजस्थान संविदा नियम 2022 के तहत नियुक्त कार्मिक का पद लाभ का पद माना जाना अपेक्षित है, इसलिए पद पर रहते हुए उसके नामांकन पर आपत्ति लग सकती है।

क्या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरपंच का चुनाव लड़ सकती है?
हां। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका का पद लाभ का पद नहीं माना गया है, लेकिन उन्हें नामांकन तिथि से परिणाम तक अवैतनिक अवकाश लेना होगा और जीतने पर शपथ से पहले पद से त्याग पत्र देना होगा।

क्या आशा सहयोगिनी पंचायत चुनाव लड़ सकती है?
इसका फैसला रिटर्निंग अधिकारी नामांकन की जांच के समय नियुक्ति पत्र, मानदेय की प्रकृति, अवधि और सरकारी नियंत्रण देखकर करेंगे। आयोग ने कोई सीधा हां या ना नहीं लिखा है।

क्या राशन डीलर चुनाव लड़ सकता है?
हां। राजस्थान हाईकोर्ट के मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (2014) फैसले के आधार पर आयोग ने राशन डीलर के पद को लाभ का पद नहीं माना है।

लाभ का पद क्या होता है?
ऐसा पद जिस पर नियुक्ति और हटाने का अधिकार सरकार के पास हो, जिससे वेतन या मानदेय जुड़ा हो और जिस पर सरकार का नियंत्रण हो। सुप्रीम कोर्ट के प्रद्युत बारदोलोई फैसले के पांच मापदंडों से यह तय होता है।

नामांकन खारिज होने का फैसला कौन करता है?
रिटर्निंग अधिकारी, नामांकन पत्रों की जांच (संवीक्षा) के समय। सरपंच और वार्ड पंच के लिए यह जांच नामांकन वाले दिन ही सुबह 11:30 बजे होती है।

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स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान — पत्र क्रमांक एफ.7(1)(1)पंचा/रानिआ/2024/10297, दिनांक 09.10.2026 ("पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव, 2026 में विभिन्न संविदा/नियत मानदेय/योजनांतर्गत पदों के लाभ के पद होने के संबंध में"), प्रतिलिपि क्रमांक 10298–300 (सभी जिला निर्वाचन अधिकारी व रिटर्निंग अधिकारी); उसमें उद्धृत — प्रद्युत बारदोलोई बनाम स्वपन रॉय (2001) 2 SCC 1, जया बच्चन बनाम भारत संघ (2006) 5 SCC 266, बॉम्बे हाईकोर्ट रिट याचिका 8022/2021, राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) मांगी देवी बनाम राजस्थान राज्य (04.12.2014), महिला एवं बाल विकास विभाग परिपत्र 4244 (12.01.2023), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग आदेश 186 (13.07.2022); राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 19। फोटो: जयपुर के बस्सी में मतदान केंद्र पर कतार में महिला मतदाता, 2013 — भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।