✅ सीधा जवाब: पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सीधे जनता के वोट से चुने जाते हैं, लेकिन सरपंच की तरह मतपेटी से नहीं बल्कि ईवीएम से, और पार्टी के चुनाव चिन्ह पर। 2026 में राजस्थान में 457 पंचायत समितियों के 8,245 और 41 जिला परिषदों के 1,403 सदस्य चुने जा रहे हैं। योग्यता सरपंच वाली ही है: 21 साल उम्र, कोई शैक्षणिक योग्यता नहीं, बच्चों की संख्या पर कोई रोक नहीं। इन्हें मासिक वेतन नहीं, बैठक भत्ता मिलता है, और यही सदस्य आगे प्रधान और जिला प्रमुख चुनते हैं।

🗓️ 2026 का कार्यक्रम: मतदान (ईवीएम) चार चरणों में 22 अक्टूबर, 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर को, और सभी चरणों की मतगणना 20 नवंबर को जिला मुख्यालय पर। नामांकन सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक होता है और हर जिले की तारीखें अलग हैं: पंचायत समिति के दूसरे चरण का नामांकन 16 अक्टूबर तक, तीसरे का 19–23 अक्टूबर और चौथे का 31 अक्टूबर–4 नवंबर। अपने जिले की तारीख — नामांकन की जिलेवार तारीखें देखें →

पंचायत चुनाव की चर्चा में सबसे ज़्यादा सरपंच का नाम आता है, लेकिन इसी चुनाव में करीब 9,600 सदस्य दो ऊपरी स्तरों के लिए भी चुने जा रहे हैं: ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद। आम मतदाता सरपंच-पंच वाले मतदान से अलग दिन, एक साथ इन दोनों के लिए ईवीएम पर वोट देता है। ये पद क्या हैं, कौन लड़ सकता है और चुने जाने के बाद इनके पास क्या अधिकार होते हैं, नीचे हर बात राज्य निर्वाचन आयोग के 3 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 के आधार पर है।

पंचायत समिति सदस्य बनाम जिला परिषद सदस्य: एक नज़र में

बातपंचायत समिति सदस्यजिला परिषद सदस्य
स्तरब्लॉक (पंचायत समिति)जिला
2026 में कुल सीटें8,245 (457 पंचायत समितियां)1,403 (41 जिला परिषदें)
एक संस्था में सदस्यकम से कम 15; औसत करीब 18कम से कम 17; औसत करीब 34
मतदान का तरीकाईवीएमईवीएम
पार्टी चिन्हहां — मान्यता प्राप्त दलों के आरक्षित चिन्हहां
नामांकन पर प्रस्तावकपार्टी उम्मीदवार: 1; निर्दलीय: 5 (उसी क्षेत्र के मतदाता)पार्टी उम्मीदवार: 1; निर्दलीय: 5
जमानत राशि₹500; महिला, SC, ST, OBC के लिए ₹250₹500; महिला, SC, ST, OBC के लिए ₹250
चुनाव खर्च सीमा₹1.5 लाख₹3 लाख
बैठक कितनी बारकम से कम हर महीनेकम से कम हर तीन महीने
बैठक भत्ता (मासिक वेतन नहीं)₹483 प्रति बैठक₹690 प्रति बैठक
मुखिया कौन चुनते हैंप्रधान और उप-प्रधानजिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख

बैठक भत्ते की दरें 1 अप्रैल 2023 के संशोधन की हैं; उसके बाद की बढ़ोतरी सिर्फ सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख के मानदेय में हुई। पूरा हिसाब — पंचायत के हर पद का मानदेय 2026।

चुनाव लड़ने की योग्यता

पंचायती राज अधिनियम की धारा 19 पंच, सरपंच और पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य, सब पर एक जैसी लागू होती है:

  • उम्र 21 साल और उस पंचायत समिति या जिला परिषद क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम।
  • पढ़ाई की कोई शर्त नहीं। 2015 में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के लिए 10वीं पास की शर्त जोड़ी गई थी, जिसे 2019 के संशोधन ने हटा दिया।
  • बच्चों की संख्या पर कोई रोक नहीं। दो-संतान की शर्त पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम 2026 (अधिनियम संख्या 6) से 25 मार्च 2026 को खत्म हो गई; आयोग के 6 अक्टूबर 2026 के नामांकन आदेश में भी यही लिखा है।
  • घर में चालू शौचालय की शर्त अब भी लागू है, और इसका घोषणा पत्र नामांकन के साथ लगता है।
  • पंचायती राज संस्था का कर या बकाया न हो, और किसी अपराध में 6 महीने या ज़्यादा की सज़ा न हुई हो या 5 साल से ज़्यादा सज़ा वाले अपराध में आरोप तय न हुए हों।
  • संविदा कर्मी, आंगनबाड़ी, आशा, राशन डीलर: इन पदों पर आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को अलग मार्गदर्शन दिया है — संविदा नियम 2022 के कार्मिकों का पद "लाभ का पद" माना जाना अपेक्षित है, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका लड़ सकती हैं लेकिन अवैतनिक अवकाश लेकर, और राशन डीलर का पद लाभ का पद नहीं माना गया है।

सभी अयोग्यताओं की पूरी सूची — सरपंच बनने के लिए योग्यता 2026 (धारा 19)।

नामांकन में क्या अलग है

  1. फॉर्म: नामांकन प्रपत्र 4-क और घोषणा प्रपत्र 4-घ; संतान वाले कॉलम को छोड़कर कोई कॉलम खाली नहीं छोड़ा जा सकता। ₹50 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र (परिशिष्ट-1अ) भी लगता है।
  2. प्रस्तावक: मान्यता प्राप्त दल के उम्मीदवार के लिए उसी निर्वाचन क्षेत्र का 1 प्रस्तावक काफी है; निर्दलीय या गैर-मान्यता प्राप्त दल के उम्मीदवार को 5 प्रस्तावक चाहिए।
  3. पार्टी का पत्र: पार्टी उम्मीदवार को दल के प्रदेश अध्यक्ष या उसके अधिकृत व्यक्ति का पत्र नामांकन के आखिरी दिन दोपहर 3 बजे तक देना होता है, तभी पार्टी का चिन्ह मिलता है।
  4. जमानत: ₹500 (महिला, SC, ST, OBC के लिए ₹250, प्रमाण पत्र के साथ)। हारने वाले उम्मीदवार को कुल वैध वोटों का छठा हिस्सा भी न मिले तो जमानत ज़ब्त हो जाती है।

मान्यता प्राप्त दलों के आरक्षित चिन्ह और निर्दलीयों के मुक्त चिन्ह — पंचायत चुनाव चिन्ह 2026।

सीटें कैसे बनती हैं और आरक्षण

  • हर पंचायत समिति में कम से कम 15 और हर जिला परिषद में कम से कम 17 निर्वाचन क्षेत्र होते हैं, और हर क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है। पंचायत समिति के निर्वाचन क्षेत्र आस-पास की ग्राम पंचायतों को मिलाकर बनते हैं। 2026 की सीटें राज्य सरकार के 2025–26 के परिसीमन और पुनर्गठन के बाद तय हुई हैं, जिससे जिला परिषदें 33 से 41 और पंचायत समितियां 352 से 457 हो गईं।
  • SC और ST को आबादी के अनुपात में आरक्षण, OBC को अधिकतम 21% तक, और कम से कम आधी सीटें महिलाओं के लिए (आरक्षित वर्गों के भीतर भी)।

पंचायत समिति और जिला परिषद क्या करती हैं

  • पंचायत समिति (धारा 51 और द्वितीय अनुसूची, 30 कार्य-क्षेत्र): ग्राम पंचायतों की योजनाओं को जोड़कर ब्लॉक की सालाना योजना और बजट, कृषि, छोटी सिंचाई, गरीबी उन्मूलन, पेयजल, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला-बाल कल्याण और ग्राम पंचायतों की निगरानी।
  • जिला परिषद (धारा 52 और तृतीय अनुसूची, 19 कार्य-क्षेत्र): जिले की विकास योजना और पंचायत समितियों के काम का समन्वय।
  • स्थायी समितियां: दोनों संस्थाओं में पांच स्थायी समितियां होती हैं — प्रशासन व स्थापना, वित्त व कराधान, विकास व उत्पादन, शिक्षा, और सामाजिक सेवाएं व सामाजिक न्याय। हर निर्वाचित सदस्य को कम से कम एक समिति में रहना होता है, और यहीं सदस्य का असली काम होता है।
  • पदेन सदस्य: पंचायत समिति में क्षेत्र के विधायक और समिति की सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच भी सदस्य होते हैं; जिला परिषद में सांसद, विधायक और सभी प्रधान। ये बैठकों में वोट देते हैं, लेकिन प्रधान या जिला प्रमुख के चुनाव और उन्हें हटाने में नहीं।
  • सदस्यता जाने का खतरा: बिना लिखित सूचना के लगातार 3 बैठकों से गैरहाज़िर रहने पर सदस्यता खत्म हो सकती है (धारा 39)।

प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव

प्रधान और जिला प्रमुख को जनता सीधे नहीं चुनती। मतगणना (20 नवंबर) के बाद चुने गए सदस्य आपस में से इन्हें चुनते हैं: जिला प्रमुख 25 नवंबर, उप जिला प्रमुख 26 नवंबर, प्रधान 27 नवंबर और उप-प्रधान 28 नवंबर 2026 को। इसमें पदेन सदस्य (विधायक, सांसद, सरपंच) वोट नहीं देते। अपवाद: बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा जिला परिषदों के जिला प्रमुख/उप जिला प्रमुख और इनकी पंचायत समितियों के प्रधान/उप-प्रधान का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होता है, इसलिए उनके चुनाव की तारीख आयोग अलग से घोषित करेगा; इन जिलों में सदस्यों का चुनाव इसी कार्यक्रम में हो रहा है। पंचायत समिति और जिला परिषद का 5 साल का कार्यकाल प्रधान या जिला प्रमुख के चुनाव वाली बैठक से गिना जाता है।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

पंचायत समिति सदस्य क्या होता है?
पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) के किसी निर्वाचन क्षेत्र से सीधे जनता द्वारा चुना गया सदस्य। राजस्थान में 2026 में 457 पंचायत समितियों के 8,245 सदस्य चुने जा रहे हैं, और यही सदस्य प्रधान व उप-प्रधान चुनते हैं।

पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
उम्र 21 साल और उस क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम। 10वीं पास की शर्त 2019 में और दो-संतान की शर्त मार्च 2026 में हट चुकी है; घर में चालू शौचालय की शर्त अब भी लागू है।

जिला परिषद सदस्य को कितना वेतन मिलता है?
कोई मासिक वेतन नहीं। जिला परिषद सदस्य को ₹690 और पंचायत समिति सदस्य को ₹483 प्रति बैठक का भत्ता मिलता है (1 अप्रैल 2023 की दर)।

पंचायत समिति और जिला परिषद का चुनाव कैसे होता है?
ईवीएम से, पार्टी के चुनाव चिन्ह पर। मतदान 22 अक्टूबर, 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर 2026 को चार चरणों में है, और सभी चरणों की मतगणना 20 नवंबर को जिला मुख्यालय पर होगी।

जिला परिषद सदस्य के चुनाव में कितना खर्च कर सकते हैं?
जिला परिषद सदस्य ₹3 लाख और पंचायत समिति सदस्य ₹1.5 लाख तक; खर्च का हिसाब परिणाम के 15 दिन के भीतर देना होता है।

निर्दलीय उम्मीदवार को कितने प्रस्तावक चाहिए?
5 प्रस्तावक, जो उसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता हों। मान्यता प्राप्त दल के उम्मीदवार के लिए 1 प्रस्तावक काफी है।

प्रधान और जिला प्रमुख कैसे चुने जाते हैं?
चुने गए पंचायत समिति सदस्य प्रधान को और जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख को चुनते हैं — जिला प्रमुख 25 नवंबर और प्रधान 27 नवंबर 2026 को। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा में ये चुनाव बाद में होंगे।

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स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान — प्रेस नोट 9836 (3 अक्टूबर 2026: सीटों की संख्या, चरणवार कार्यक्रम, खर्च सीमा, प्रमुख/प्रधान चुनाव की तिथियां व अपवाद), आदेश 10062 (6 अक्टूबर 2026: नामांकन के दस्तावेज़ व जमानत), पत्र 10297 (9 अक्टूबर 2026: लाभ का पद), संशोधन आदेश 10090 (6 अक्टूबर 2026); राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 — धारा 13, 14, 15, 17, 19, 28–30, 39, 46–48, 51, 52, 56–57 व द्वितीय-तृतीय अनुसूची; राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 — नियम 58; राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2019 व अधिनियम संख्या 6, 2026; बैठक भत्ता — ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की 1 अप्रैल 2023 की दरें। फोटो: जयपुर में ईवीएम और चुनाव सामग्री की जांच करते मतदान कर्मी, 2013 — भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।