✅ सीधा जवाब: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 32 के तहत सरपंच ग्राम सभा और पंचायत की बैठकें बुलाता और उनकी अध्यक्षता करता है, पंचायत के रिकॉर्ड का ज़िम्मेदार होता है और पंचायत के वित्तीय व कार्यकारी प्रशासन की सामान्य ज़िम्मेदारी उसी की होती है। लेकिन वह अकेले पैसा नहीं निकाल सकता: हर निकासी पर सरपंच और सचिव (ग्राम विकास अधिकारी) के संयुक्त हस्ताक्षर ज़रूरी हैं, और काम पंचायत के प्रस्ताव से मंज़ूर होते हैं। सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव (तीन-चौथाई निर्वाचित सदस्यों से, और पद संभालने के 2 साल बाद ही) या राज्य सरकार (जांच के बाद, धारा 38) हटा सकती है।

🗳️ नए सरपंच कब से: राजस्थान की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच का मतदान 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर और 16 नवंबर 2026 को चार चरणों में है, और मतगणना उसी दिन होती है। चुने गए सरपंच को चुनाव के 3 महीने के भीतर शपथ लेनी होती है, नहीं तो सदस्यता खत्म हो सकती है (धारा 39)। अपनी पंचायत का चरण — जिलेवार चरण सूची →

अगले कुछ हफ्तों में राजस्थान को करीब 14 हज़ार नए सरपंच मिलेंगे। गांवों में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही है कि सरपंच के पास असल में कितनी ताकत होती है, वह अकेले क्या फैसला कर सकता है, और गड़बड़ी करे तो उसे कैसे हटाया जाता है। इंटरनेट पर इसके जवाब में अक्सर मध्य प्रदेश या हरियाणा के कानून की बातें राजस्थान के नाम से लिखी मिलती हैं। नीचे हर बात राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 की धाराओं के साथ है।

सरपंच के 8 अधिकार और कर्तव्य (धारा 32)

अधिकार / कर्तव्यमतलब
ग्राम सभा बुलाना और अध्यक्षताग्राम सभा की बैठक बुलाने की ज़िम्मेदारी सरपंच की है, और वही अध्यक्षता करता है
पंचायत की बैठकेंपंचायत की बैठक बुलाना, उसकी अध्यक्षता और संचालन। पंचायत की बैठक कम से कम हर पखवाड़े होनी चाहिए
रिकॉर्डपंचायत के रिकॉर्ड रखने की ज़िम्मेदारी
वित्तीय और कार्यकारी प्रशासनपंचायत के पैसे और कामकाज की सामान्य ज़िम्मेदारी; पंचायत का बजट सरपंच तैयार करवाता है
कर्मचारियों पर नियंत्रणपंचायत के कर्मचारियों और पंचायत को सौंपे गए अधिकारियों-कर्मचारियों के काम का प्रशासनिक पर्यवेक्षण
पंचायत की शक्तियों का प्रयोगअधिनियम और नियमों के तहत पंचायत के कामकाज के लिए आदेश करना
रिपोर्ट भेजनासरकार को तय रिपोर्ट, रिटर्न और रिकॉर्ड भेजना
अन्य कर्तव्यपंचायत प्रस्ताव से या सरकार नियम बनाकर जो काम सौंपे

नियम 33 में सरपंच के कुछ और कर्तव्य लिखे हैं, जिनमें गांव की सफाई, रोशनी और पीने के पानी की व्यवस्था, आबादी और गोचर भूमि पर अतिक्रमण रोकना, बाल विवाह और मृत्युभोज रोकना, और हर पंचायत बैठक में आय-व्यय का ब्योरा रखना शामिल है। पंचायत के कामों और उन पर खर्च राशि को सूचना पट्ट पर दिखाना भी इन्हीं कर्तव्यों में है।

उप-सरपंच (धारा 32(2)) वे काम करता है जो सरपंच उसे लिखित आदेश से सौंपे, और सरपंच की गैरमौजूदगी या पद खाली होने पर सरपंच की सारी शक्तियां उसी के पास आ जाती हैं।

पैसे पर सरपंच का अधिकार: अकेले कुछ नहीं

  1. संयुक्त हस्ताक्षर: पंचायत निधि से हर निकासी पर सरपंच और सचिव दोनों के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं (धारा 64 और नियम 213)। सचिव न हो तो पंचायत समिति का विकास अधिकारी सरपंच के साथ हस्ताक्षर करता है।
  2. भुगतान का तरीका: नियम 211 के अनुसार पैसा चेक से निकलता है और ₹1,000 से ज़्यादा का किसी तीसरे पक्ष को भुगतान अकाउंट-पेयी चेक से होता है। केंद्र की योजनाओं और वित्त आयोग के अनुदान का भुगतान अब eGramSwaraj–PFMS से ऑनलाइन होता है।
  3. काम की मंज़ूरी: निर्माण कार्य सरपंच अकेले नहीं, पंचायत प्रस्ताव से सरकार की तय सीमा तक मंज़ूर करती है (नियम 176)। पंचायत के कामों में ठेकेदार नहीं लगाए जा सकते (नियम 181)।
  4. ग्राम सभा की मंज़ूरी: योजनाएं और काम प्राथमिकता के साथ ग्राम सभा मंज़ूर करती है, और ग्राम सभा सरपंच से आय-व्यय पर जवाब मांग सकती है (धारा 8E)।
  5. निजी वसूली: सरपंच की लापरवाही या गड़बड़ी से पंचायत को हुआ नुकसान उससे भू-राजस्व की बकाया की तरह वसूला जा सकता है (धारा 111)।

ग्राम पंचायत को 5 साल में कितना पैसा मिलता है, यह हिसाब यहां देखें — सरपंच का बजट कितना होता है 2026।

ग्राम पंचायत के काम (प्रथम अनुसूची)

अधिनियम की धारा 50 और प्रथम अनुसूची में ग्राम पंचायत के 33 कार्य-क्षेत्र दिए गए हैं। मुख्य हैं:

  • योजना और बजट: गांव की सालाना विकास योजना और बजट बनाना
  • पंजीकरण: जन्म, मृत्यु और विवाह का पंजीकरण
  • पानी, सड़क, रोशनी: पेयजल, गांव की सड़कें और पुलिया, सड़क रोशनी
  • सफाई और स्वास्थ्य: ग्रामीण स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य
  • खेती और पशुपालन: कृषि, पशुपालन, छोटी सिंचाई, सामाजिक वानिकी
  • आवास और कल्याण: आवास के लिए भूखंड, गरीबी उन्मूलन योजनाओं के लाभार्थी ग्राम सभा से चुनना, पेंशन जैसी सामाजिक कल्याण योजनाएं
  • शिक्षा और बाल विकास: प्राथमिक व प्रौढ़ शिक्षा, आंगनबाड़ियों की निगरानी
  • राशन: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) की निगरानी

ग्राम सभा और वार्ड सभा: सरपंच पर गांव की निगरानी

  • ग्राम सभा साल में कम से कम 2 बार (धारा 8A): एक वित्त वर्ष की पहली तिमाही में और एक आखिरी तिमाही में। सदस्यों के दसवें हिस्से से ज़्यादा लिखित मांग करें तो 15 दिन के भीतर विशेष बैठक बुलानी होती है।
  • कोरम: कुल सदस्यों का दसवां हिस्सा, जिसमें SC, ST, OBC और महिलाओं की आबादी के अनुपात में उपस्थिति हो।
  • ग्राम सभा के अधिकार: योजनाओं और कामों को मंज़ूरी, लाभार्थियों का चयन, पैसे के उपयोग का प्रमाण पत्र, और सरपंच से आय-व्यय का हिसाब मांगना।
  • वार्ड सभा (हर वार्ड में, साल में कम से कम 2 बार, अध्यक्षता वार्ड पंच): लाभार्थियों की पहचान, पेंशन पात्रता की जांच और वार्ड के सभी कामों का सामाजिक अंकेक्षण।
  • सरपंच तय ग्राम सभाएं न बुलाए तो नियम 10 के तहत इसकी रिपोर्ट धारा 38 की कार्रवाई के लिए भेजी जाती है।

सरपंच को कैसे हटाया जा सकता है: 4 रास्ते

1. अविश्वास प्रस्ताव (धारा 37)

शर्तनियम
नोटिस पर हस्ताक्षरसीधे चुने गए सदस्यों में से कम से कम एक-तिहाई
बैठक कबनोटिस मिलने के 30 दिन के भीतर; बैठक स्थगित नहीं हो सकती
अध्यक्षतासरकार का नामित सक्षम अधिकारी — वह न बहस में बोलता है, न वोट देता है
बहसअधिकतम 2 घंटे, फिर मतदान
कोरमवोट देने के हकदार सदस्यों का एक-तिहाई
पास होने के लिएपंचायत के कुल निर्वाचित सदस्यों का तीन-चौथाई (मौजूद सदस्यों का नहीं)
कब नहीं आ सकतापद संभालने के 2 साल के भीतर नहीं; प्रस्ताव गिरे तो 1 साल तक दोबारा नहीं

उदाहरण: किसी पंचायत में कुल 12 निर्वाचित सदस्य हैं। नोटिस के लिए कम से कम 4 सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए, और प्रस्ताव पास होने के लिए कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन। अक्टूबर-नवंबर 2026 में चुने गए सरपंच के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव 2028 के आखिर से पहले नहीं लाया जा सकता।

2. राज्य सरकार द्वारा हटाना (धारा 38)

राज्य सरकार सुनवाई का मौका देकर और जांच के बाद उस सरपंच को हटा सकती है जो काम करने से इनकार करे या काम करने में असमर्थ हो, या कर्तव्य में दुराचार या अशोभनीय आचरण का दोषी हो। हटाए गए सरपंच पर 5 साल तक कोई चुनाव लड़ने की रोक लगती है। जांच चलने के दौरान, या नैतिक अधमता वाले अपराध का मुकदमा अदालत में होने पर, सरकार सरपंच को निलंबित कर सकती है, और निलंबन में वह पंचायत की किसी कार्यवाही में भाग नहीं ले सकता। जांच की प्रक्रिया नियम 22 में है: आरोप पत्र, जवाब के लिए समय और गवाहों से जिरह का अधिकार।

पिछले दो सालों में ऐसी कार्रवाइयां कई जिलों में हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कोटा, डीडवाना-कुचामन और जयपुर जिलों में सरपंच निलंबित किए गए, सिरोही की एक पंचायत में अवैध पट्टों के मामले में सरपंच, उप-सरपंच और 4 वार्ड पंच निलंबित हुए, और अजमेर की एक पंचायत में 20 अवैध पट्टों के मामले में सरपंच, उप-सरपंच और 6 वार्ड पंच पद से हटाए गए।

3. ग्राम सभा की मांग पर निलंबन

ग्राम सभा सरपंच के निलंबन का प्रस्ताव पास कर सकती है। सरकार इसे कलेक्टर को भेजती है, कलेक्टर विशेष ग्राम सभा बुलाता है जिसकी अध्यक्षता उसका नामित अधिकारी करता है, और वहां मौजूद व मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव दोबारा पास होना चाहिए। यह भी सरपंच के 2 साल पूरे होने से पहले नहीं हो सकता, और इससे निलंबन होता है, सीधे पद से हटाना नहीं।

4. सदस्यता अपने आप खत्म (धारा 39)

सरपंच की सदस्यता खत्म हो सकती है अगर वह धारा 19 की किसी अयोग्यता में आ जाए, बिना लिखित सूचना के पंचायत की लगातार 3 बैठकों से गैरहाज़िर रहे, या चुनाव के 3 महीने के भीतर शपथ न ले। सक्षम अधिकारी सुनवाई के बाद यह घोषणा करता है, और घोषणा होने तक वह पद पर बना रहता है।

सरपंच का इस्तीफा

सरपंच, उप-सरपंच या पंच अपना इस्तीफा लिखकर पंचायत समिति के विकास अधिकारी को देते हैं (धारा 36)। इस्तीफा मिलने के 15 दिन बाद लागू होता है, अगर इस बीच वापस न लिया जाए।

"सरपंच पति" का कोई अधिकार नहीं

सरपंच के अधिकार सिर्फ चुने हुए सरपंच के हैं, उसके रिश्तेदारों के नहीं। 2010 में राजस्थान सरकार ने निर्देश दिए थे कि महिला सरपंच और प्रधान अपना काम रिश्तेदारों को न सौंपें, और ऐसा करना कर्तव्य में लापरवाही मानकर धारा 38 के तहत कार्रवाई हो सकती है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की एक सलाहकार समिति ने भी फरवरी 2025 में "प्रॉक्सी" प्रतिनिधित्व रोकने के लिए राज्यों को कानूनी प्रावधान, दंड और सामाजिक अंकेक्षण जैसे उपाय सुझाए हैं।

भ्रम बनाम सच

भ्रमराजस्थान का कानून
पंचों के साधारण बहुमत से सरपंच हट जाता हैनहीं — कुल निर्वाचित सदस्यों का तीन-चौथाई चाहिए, और पहले 2 साल प्रस्ताव आ ही नहीं सकता
कलेक्टर या जिला परिषद सरपंच को सीधे हटा देती हैदुराचार पर हटाने का अधिकार राज्य सरकार का है (धारा 38), जांच और सुनवाई के बाद
ग्राम सभा सरपंच को हटा सकती हैग्राम सभा सिर्फ निलंबन की प्रक्रिया शुरू करा सकती है, वह भी 2 साल बाद
"खाली कुर्सी–भरी कुर्सी" से सरपंच को वापस बुलाया जा सकता हैयह व्यवस्था मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की है; राजस्थान के पंचायती राज कानून में सरपंच को वापस बुलाने (रिकॉल) का प्रावधान नहीं है
साल में 4 ग्राम सभाएं कानूनन ज़रूरी हैंअधिनियम में कम से कम 2 ग्राम सभाएं ज़रूरी हैं
सरपंच अकेले लाखों के काम मंज़ूर कर देता हैकाम पंचायत प्रस्ताव से मंज़ूर होते हैं और भुगतान सरपंच-सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से

सामान्य प्रश्न (FAQ)

सरपंच के क्या-क्या अधिकार होते हैं?
धारा 32 के तहत सरपंच ग्राम सभा और पंचायत की बैठकें बुलाता और उनकी अध्यक्षता करता है, पंचायत के रिकॉर्ड और वित्तीय-कार्यकारी प्रशासन का ज़िम्मेदार होता है, पंचायत कर्मचारियों के काम का पर्यवेक्षण करता है और सरकार को रिपोर्ट भेजता है।

क्या सरपंच अकेले पंचायत का पैसा निकाल सकता है?
नहीं। पंचायत निधि से हर निकासी पर सरपंच और सचिव (ग्राम विकास अधिकारी) दोनों के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं, और निर्माण कार्य पंचायत प्रस्ताव से मंज़ूर होते हैं।

सरपंच को कैसे हटाया जाता है?
दो मुख्य रास्ते हैं: अविश्वास प्रस्ताव, जो कुल निर्वाचित सदस्यों के तीन-चौथाई समर्थन से पास होता है और पद संभालने के 2 साल बाद ही लाया जा सकता है; और राज्य सरकार की जांच के बाद धारा 38 के तहत हटाना, जिसके बाद 5 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगती है।

सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कब लाया जा सकता है?
पद संभालने के 2 साल बाद। नोटिस पर सीधे चुने गए सदस्यों में से कम से कम एक-तिहाई के हस्ताक्षर चाहिए, और प्रस्ताव गिर जाए तो एक साल तक दोबारा नहीं लाया जा सकता।

क्या ग्राम सभा सरपंच को हटा सकती है?
सीधे नहीं। ग्राम सभा निलंबन का प्रस्ताव पास कर सकती है, जिसे कलेक्टर की बुलाई विशेष ग्राम सभा में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से दोबारा पास होना चाहिए, और यह भी 2 साल बाद ही हो सकता है।

सरपंच इस्तीफा किसे देता है?
पंचायत समिति के विकास अधिकारी को, लिखकर। इस्तीफा 15 दिन बाद लागू होता है, अगर तब तक वापस न लिया जाए।

साल में कितनी ग्राम सभाएं ज़रूरी हैं?
कम से कम दो: एक वित्त वर्ष की पहली तिमाही में और एक आखिरी तिमाही में। हर वार्ड में वार्ड सभा भी साल में कम से कम दो बार होनी चाहिए।

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स्रोत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 — धारा 3–8 (वार्ड सभा), 8A–8E (ग्राम सभा), 32 (सरपंच व उप-सरपंच के अधिकार), 36 (इस्तीफा), 37 (अविश्वास प्रस्ताव), 38 (हटाना व निलंबन), 39 (सदस्यता की समाप्ति), 45, 50 व प्रथम अनुसूची, 64, 111; राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 — नियम 10, 22, 33, 176, 181, 211, 213; राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026; पंचायती राज मंत्रालय (PIB, 11 फरवरी 2026) — प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पर सलाहकार समिति; डेक्कन हेराल्ड (1 मार्च 2010); निलंबन और बर्खास्तगी के मामले — राजस्थान पत्रिका (14 अक्टूबर 2024, 26 दिसंबर 2024, 23 अप्रैल 2025, 14 मई 2025) व ईटीवी भारत (28 नवंबर 2024)। फोटो: जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में मतदान के बाद स्याही का निशान दिखाती महिलाएं, लोकसभा चुनाव 2014 — भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।