✅ सीधा जवाब: उप-सरपंच को जनता सीधे नहीं चुनती। सरपंच और वार्ड पंच के मतदान के अगले दिन पंचायत में बैठक होती है, जिसमें नए चुने गए सभी वार्ड पंच और सरपंच वोट डालते हैं। उम्मीदवार सिर्फ कोई चुना हुआ वार्ड पंच हो सकता है। एक ही उम्मीदवार हो तो वह निर्विरोध चुना जाता है, एक से ज़्यादा हों तो गुप्त मतदान होता है, और बराबर वोट होने पर लॉटरी से फैसला होता है।
🗓️ उप-सरपंच चुनाव 2026 की तारीखें: पहला चरण 25 अक्टूबर, दूसरा 31 अक्टूबर, तीसरा 6 नवंबर और चौथा 17 नवंबर — यानी हर चरण में सरपंच-पंच के मतदान (24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर, 16 नवंबर) के अगले दिन। आपकी पंचायत किस चरण में है — जिलेवार चरण सूची देखें →
राजस्थान की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच का मतदान 24 अक्टूबर से चार चरणों में होगा, और हर पंचायत में अगले ही दिन उप-सरपंच चुना जाएगा। यह चुनाव जितना छोटा दिखता है, गांव की राजनीति में उतना ही अहम होता है, क्योंकि सरपंच की गैरमौजूदगी में पंचायत की कमान उप-सरपंच के हाथ में होती है। इंटरनेट पर इसकी प्रक्रिया को लेकर कई गलत बातें मिलती हैं, जैसे "सरपंच के पास निर्णायक वोट होता है" या "हाथ उठाकर चुनाव होता है" — ये दूसरे राज्यों के नियम हैं। नीचे पूरी प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 के नियम 65–66 और राज्य निर्वाचन आयोग के आदेशों के आधार पर है।
उप-सरपंच चुनाव: एक नज़र में
| सवाल | जवाब | आधार |
|---|---|---|
| चुनाव कब | सरपंच-पंच के मतदान के अगले दिन (25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर, 17 नवंबर 2026) | नियम 65(1); आयोग का कार्यक्रम |
| वोट कौन देता है | नए चुने गए सभी वार्ड पंच और सरपंच | नियम 65(2), 66(1) |
| उम्मीदवार कौन | सिर्फ कोई चुना हुआ वार्ड पंच | नियम 66(1) |
| आरक्षण | उप-सरपंच पद आरक्षित नहीं होता | अधिनियम धारा 16 |
| बैठक की अध्यक्षता | रिटर्निंग अधिकारी — वह वोट नहीं देता | नियम 65–66 |
| मतदान का तरीका | एक से ज़्यादा उम्मीदवार हों तो गुप्त मतदान, मतपत्र पर नोटा भी | नियम 66(7); आयोग आदेश 142/2026 |
| बराबर वोट | लॉटरी से फैसला | नियम 59(14) |
| कार्यकाल | जब तक वार्ड पंच बना रहे, यानी पूरे 5 साल | अधिनियम धारा 30 |
उप-सरपंच का चुनाव कैसे होता है: क्रम से
- बैठक की सूचना: वार्ड पंचों के नतीजे घोषित होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी नए पंचों और सरपंच की बैठक बुलाता है। बैठक का समय और स्थान पंचायत कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है और मौजूद सरपंच-पंचों को बताया जाता है। रिटर्निंग अधिकारी लिखित कारण दर्ज करके चुनाव किसी बाद के दिन भी रख सकता है।
- नाम का प्रस्ताव: बैठक में कोई भी पंच या सरपंच किसी पंच का नाम लिखित में प्रस्तावित कर सकता है। सभी प्रस्ताव बैठक शुरू होने के एक घंटे के भीतर देने होते हैं, उसके बाद कोई प्रस्ताव नहीं लिया जाता। उम्मीदवार बैठक में मौजूद न हो तो उसकी लिखित सहमति प्रस्ताव के साथ लगानी होती है।
- जांच: रिटर्निंग अधिकारी प्रस्ताव पढ़कर आपत्तियां सुनता है। उम्मीदवार अयोग्य हो या नियम का पालन न हुआ हो तो प्रस्ताव खारिज हो सकता है, और इसका कारण दर्ज किया जाता है।
- एक उम्मीदवार: सिर्फ एक वैध उम्मीदवार हो तो वह उसी समय निर्विरोध उप-सरपंच घोषित हो जाता है।
- एक से ज़्यादा उम्मीदवार: गुप्त मतदान होता है। मतपत्र पर हर उम्मीदवार के नाम के साथ चुनाव चिन्ह होता है और आखिरी पैनल "इनमें से कोई नहीं" (नोटा) का होता है। वोट सिर्फ बैठक में मौजूद सदस्य दे सकते हैं, डाक या किसी और के जरिए नहीं।
- गिनती और नतीजा: वोटों की गिनती उसी बैठक में होती है और सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला उप-सरपंच घोषित होता है।
- बराबर वोट: दो उम्मीदवारों के वोट बराबर हों तो चुनाव कराने वाला अधिकारी लॉटरी निकालकर फैसला करता है। सरपंच के पास कोई अतिरिक्त "निर्णायक वोट" नहीं होता।
उदाहरण: किसी पंचायत में 9 वार्ड हैं। उप-सरपंच के चुनाव में 9 वार्ड पंच और 1 सरपंच, यानी 10 मतदाता होंगे (राज्य निर्वाचन आयोग ने 2020 के निर्देश में यही गिनती समझाई थी: 6 वार्ड हों तो सरपंच सहित 7 मतपत्र)। दो उम्मीदवार हों और दोनों को 5-5 वोट मिलें, तो फैसला लॉटरी से होगा।
बैठक किस समय होगी?
2026 के आम चुनाव के लिए आयोग के कार्यक्रम में उप-सरपंच चुनाव की तारीख दी गई है, लेकिन बैठक का अलग समय सार्वजनिक आदेश में नहीं मिला। पिछले उप-चुनावों (2020 और 2021) में आयोग की समय-सारणी यह थी: सुबह 10 बजे बैठक, 11 बजे तक नामांकन, 11:30 तक जांच और नाम वापसी, फिर चुनाव चिन्ह का आवंटन, और दोपहर 12 से 1 बजे तक मतदान, उसके तुरंत बाद गिनती। अपनी पंचायत का सही समय रिटर्निंग अधिकारी के नोटिस से ही पक्का करें।
कोई उम्मीदवार न हो तो?
अगर कोई प्रस्ताव न आए और पंचायत उप-सरपंच न चुन पाए, तो रिटर्निंग अधिकारी पंचायत प्रभारी अधिकारी और कलेक्टर को सूचना देता है, और राज्य सरकार अधिनियम की धारा 26(2) के तहत उप-सरपंच नियुक्त करती है। यह नियुक्ति तब तक रहती है जब तक छह महीने के भीतर चुनाव से पद न भर जाए। 2020 के चुनाव के बाद भी आयोग ने ऐसे खाली रहे उप-सरपंच पदों के उप-चुनाव कराए थे।
उप-सरपंच के अधिकार
- सरपंच लिखित आदेश से जो अधिकार और काम सौंपे, उप-सरपंच वही करता है (धारा 32(2))।
- सरपंच की गैरमौजूदगी में, या सरपंच का पद खाली होने पर, सरपंच की सारी शक्तियां उप-सरपंच के पास आ जाती हैं।
- ग्राम सभा की बैठक में सरपंच न हो तो अध्यक्षता उप-सरपंच करता है।
- उप-सरपंच के लिए अलग मासिक मानदेय तय नहीं है; वह वार्ड पंच के रूप में बैठक भत्ता पाता है — सरपंच, उप-सरपंच और वार्ड पंच का मानदेय देखें।
सरपंच के अधिकारों की पूरी सूची — सरपंच के अधिकार और कार्य 2026।
कार्यकाल, इस्तीफा और हटाना
- कार्यकाल: उप-सरपंच तब तक पद पर रहता है जब तक वह पंचायत का सदस्य (वार्ड पंच) है। पंचायत का 5 साल का कार्यकाल इसी उप-सरपंच चुनाव वाली बैठक से गिना जाता है, क्योंकि कानून इसे पंचायत की पहली बैठक मानता है (धारा 17)।
- इस्तीफा: पंचायत समिति के विकास अधिकारी को लिखकर; 15 दिन बाद लागू, अगर वापस न लिया जाए। वार्ड पंच न रहने पर उप-सरपंच का पद भी अपने आप खाली हो जाता है (धारा 36)।
- अविश्वास प्रस्ताव (धारा 37): नोटिस पर सीधे चुने गए सदस्यों में से कम से कम एक-तिहाई के हस्ताक्षर, और प्रस्ताव पास होने के लिए कुल निर्वाचित सदस्यों का तीन-चौथाई समर्थन। पद संभालने के 2 साल के भीतर ऐसा प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- राज्य सरकार द्वारा हटाना (धारा 38): दुराचार या कर्तव्य में लापरवाही पर, जांच और सुनवाई के बाद।
भ्रम बनाम सच
| भ्रम | राजस्थान का नियम |
|---|---|
| उप-सरपंच को गांव के लोग वोट देकर चुनते हैं | नहीं — सिर्फ नए चुने गए वार्ड पंच और सरपंच वोट देते हैं |
| सिर्फ वार्ड पंच वोट देते हैं | सरपंच भी वोट देता है |
| बराबर वोट पर सरपंच का निर्णायक वोट | राजस्थान में बराबरी पर लॉटरी होती है |
| हाथ उठाकर चुनाव होता है | एक से ज़्यादा उम्मीदवार हों तो हमेशा गुप्त मतदान |
| सरपंच सामान्य हो तो उप-सरपंच आरक्षित वर्ग का होगा | राजस्थान में उप-सरपंच पद आरक्षित नहीं होता |
| सरपंच अपना उप-सरपंच मनोनीत करता है | नहीं — उप-सरपंच बैठक में चुनाव से बनता है |
सामान्य प्रश्न (FAQ)
उप-सरपंच का चुनाव कैसे होता है?
सरपंच-पंच के मतदान के अगले दिन पंचायत में बैठक होती है। कोई भी पंच या सरपंच किसी वार्ड पंच का नाम लिखित में प्रस्तावित करता है; एक उम्मीदवार हो तो निर्विरोध, एक से ज़्यादा हों तो गुप्त मतदान से फैसला होता है।
उप-सरपंच का चुनाव कौन करता है?
नए चुने गए सभी वार्ड पंच और सरपंच। बैठक की अध्यक्षता रिटर्निंग अधिकारी करता है, जो वोट नहीं देता।
उप-सरपंच का चुनाव 2026 में कब है?
पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे में 31 अक्टूबर, तीसरे में 6 नवंबर और चौथे में 17 नवंबर 2026 — हर चरण में सरपंच-पंच के मतदान के अगले दिन।
क्या सरपंच उप-सरपंच के चुनाव में वोट देता है?
हां। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार वार्ड पंचों के साथ सरपंच भी वोट देता है, इसलिए 6 वार्ड वाली पंचायत में 7 मतपत्र लगते हैं।
उप-सरपंच कौन बन सकता है?
सिर्फ उसी पंचायत का कोई चुना हुआ वार्ड पंच। सरपंच खुद उप-सरपंच नहीं बन सकता, और यह पद किसी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होता।
उप-सरपंच चुनाव में बराबर वोट हों तो क्या होता है?
चुनाव कराने वाला अधिकारी लॉटरी निकालकर फैसला करता है।
उप-सरपंच को कितना मानदेय मिलता है?
उप-सरपंच के लिए अलग मासिक मानदेय तय नहीं है; वह वार्ड पंच के रूप में पंचायत बैठक का भत्ता पाता है।
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स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 — नियम 59, 60, 65, 66, 67; राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 — धारा 16, 17, 26, 30, 32, 36, 37, 38; राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान — आदेश सा.आ. 142/2026 (1 जनवरी 2026, उप-सरपंच मतपत्र का प्रारूप), पत्र 208 (7 जनवरी 2020), पत्र 2166 (20 फरवरी 2020) व 1285 (22 फरवरी 2021) (उप-चुनाव की समय-सारणी), चुनाव कार्यक्रम 03.10.2026 व संशोधन आदेश 10090 (06.10.2026); राजस्थान पत्रिका, भीलवाड़ा (5 अक्टूबर 2020)। फोटो: अलवर के जकराना गांव के मतदान केंद्र पर पहचान पत्र के साथ कतार में महिला मतदाता, 2009 — भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।







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