✅ सीधा जवाब: सरपंच का कोई तय "बजट" नहीं होता। पैसा सरपंच को नहीं, ग्राम पंचायत के खाते में आता है, और उसकी मात्रा गांव की आबादी से तय होती है। 16वें वित्त आयोग ने 2026-27 से 2030-31 के लिए राजस्थान के ग्रामीण निकायों को ₹31,467 करोड़ तय किए हैं। इस हिसाब से एक औसत ग्राम पंचायत को इन 5 सालों में केंद्र से करीब ₹1.6 से ₹1.75 करोड़ मिल सकते हैं, यानी पहले साल ₹21–22 लाख और आखिरी साल ₹43–46 लाख। इसके ऊपर राज्य वित्त आयोग का पैसा और योजनाओं (जैसे जी राम जी) का पैसा अलग से आता है।

🗳️ चुनाव से सीधा रिश्ता: वित्त आयोग का पैसा पाने की पहली शर्त है कि पंचायत में विधिवत चुनी हुई संस्था हो। राजस्थान में 14,403 ग्राम पंचायतों के चुनाव 24 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 के बीच चार चरणों में हो रहे हैं, और जो सरपंच अब चुने जाएंगे, वे ठीक इसी 2026–31 वाले पैसे को खर्च करेंगे। अपनी पंचायत किस चरण में है — जिलेवार चरण सूची देखें →

पंचायत चुनाव के बीच गांव-गांव में एक सवाल पूछा जा रहा है: "सरपंच को पांच साल में कितना बजट मिलता है?" सोशल मीडिया पर इसके जवाब में ₹50 लाख से लेकर ₹5 करोड़ तक के आंकड़े घूम रहे हैं, ज़्यादातर बिना किसी आधार के। असल में यह पैसा कई स्रोतों से आता है, हर पंचायत का अलग होता है, और इसका बड़ा हिस्सा पहले से तय कामों के लिए बंधा होता है। नीचे हर स्रोत का हिसाब 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट और राज्य सरकार के अपने दस्तावेज़ से है।

ग्राम पंचायत को पैसा कहां-कहां से आता है

स्रोतक्या हैखर्च पर शर्त
केंद्रीय वित्त आयोग अनुदानकेंद्र सरकार से, आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से। 2026–31 के लिए 16वां वित्त आयोगबेसिक अनुदान का आधा हिस्सा पानी और स्वच्छता के लिए बंधा (टाइड)
राज्य वित्त आयोग अनुदानराज्य के अपने कर राजस्व का हिस्सा (2024-25 में 7%), पंचायतों और निकायों में बंटता है55% मूलभूत सुविधाओं के लिए
योजनाओं का पैसाजी राम जी (पहले मनरेगा), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी योजनाओं के स्वीकृत कामों के लिएसिर्फ उसी योजना के काम पर
अपनी आयपंचायत के अपने कर, शुल्क, किरायापंचायत के निर्णय से — लेकिन यह राशि बहुत कम होती है

रिज़र्व बैंक के जनवरी 2024 के अध्ययन के मुताबिक देशभर की ग्राम पंचायतों की कुल प्राप्तियों (2022-23) में करीब 80% हिस्सा केंद्र के अनुदान का और करीब 15% राज्य के अनुदान का था, जबकि पंचायतों का अपना कर सिर्फ 1% के आसपास था। यानी गांव के विकास का पैसा मुख्य रूप से वित्त आयोगों से आता है।

1. केंद्र का पैसा: 16वां वित्त आयोग, राजस्थान को ₹31,467 करोड़

16वें वित्त आयोग ने पूरे देश के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 2026-27 से 2030-31 तक ₹4,35,236 करोड़ की सिफारिश की है, जो 15वें वित्त आयोग के ₹2,36,805 करोड़ से करीब 84% ज़्यादा है। राज्यों में बंटवारा 90% ग्रामीण आबादी (2026 का अनुमान) और 10% क्षेत्रफल के आधार पर हुआ है, जिसमें राजस्थान का हिस्सा 7.23% है। सरकार ने आयोग की ये सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं। राजस्थान के ग्रामीण निकायों (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, तीनों मिलाकर) का साल-दर-साल हिस्सा:

वर्षबेसिक अनुदानप्रदर्शन अनुदानकुल (राजस्थान)
2026-27₹4,042 करोड़—₹4,042 करोड़
2027-28₹4,487 करोड़₹668 करोड़₹5,155 करोड़
2028-29₹4,980 करोड़₹1,684 करोड़₹6,664 करोड़
2029-30₹5,528 करोड़₹1,868 करोड़₹7,396 करोड़
2030-31₹6,136 करोड़₹2,074 करोड़₹8,210 करोड़
कुल 5 साल₹25,173 करोड़₹6,294 करोड़₹31,467 करोड़

इसमें से ग्राम पंचायतों का हिस्सा कितना होगा, यह राज्य वित्त आयोग की सिफारिश से तय होता है। आयोग का डिफ़ॉल्ट नियम है: तीन-स्तरीय व्यवस्था में 80% ग्राम पंचायतों, 10% पंचायत समितियों और 10% जिला परिषदों को। राजस्थान ने अपने राज्य वित्त आयोग के पैसे का बंटवारा 75% ग्राम पंचायत, 20% पंचायत समिति और 5% जिला परिषद के अनुपात में किया है। इसलिए नीचे दोनों अनुपातों से हिसाब दिया गया है।

एक ग्राम पंचायत को औसतन कितना: पूरा हिसाब

राजस्थान में 14,403 ग्राम पंचायतें हैं (राज्य निर्वाचन आयोग, 2026)। राज्य के कुल अनुदान को ग्राम पंचायतों के हिस्से से गुणा करके पंचायतों की संख्या से भाग देने पर औसत निकलता है:

वर्षऔसत प्रति ग्राम पंचायत (75% हिस्सा)औसत प्रति ग्राम पंचायत (80% हिस्सा)
2026-27₹21.0 लाख₹22.5 लाख
2027-28₹26.8 लाख₹28.6 लाख
2028-29₹34.7 लाख₹37.0 लाख
2029-30₹38.5 लाख₹41.1 लाख
2030-31₹42.8 लाख₹45.6 लाख
5 साल में≈ ₹1.64 करोड़≈ ₹1.75 करोड़

गणना (2026-27, 80% हिस्सा): ₹4,042 करोड़ × 80% = ₹3,233.6 करोड़; इसे 14,403 पंचायतों में बांटें तो एक पंचायत का औसत करीब ₹22.45 लाख आता है।

ध्यान रखें, ये पूरी राशि पक्की नहीं है। 2027-28 से हर साल का एक हिस्सा "प्रदर्शन अनुदान" है। इसके आधे हिस्से के लिए ग्राम पंचायत को अपनी आय (कर, शुल्क, किराया आदि) हर साल बढ़ानी होगी — पिछले साल से कम से कम 2.5% (या 2025-26 की आय पर 2.5% सालाना की दर, जो भी कम हो), और कुल अपनी आय कम से कम ₹1,200 प्रति परिवार प्रति वर्ष के बराबर हो। आयोग ने साफ लिखा है कि इसका मतलब हर परिवार से ₹1,200 वसूलना नहीं, बल्कि सभी स्रोतों की कुल आय है। बाकी आधा हिस्सा राज्य सरकार के प्रदर्शन से जुड़ा है। बेसिक अनुदान के लिए भी राज्य को तीन शर्तें पूरी करनी होती हैं: विधिवत चुनी हुई पंचायतें, सभी निकायों के खाते ऑनलाइन, और राज्य वित्त आयोग का समय पर गठन। सिर्फ बेसिक अनुदान गिनें तो 5 साल का औसत ₹1.31 से ₹1.40 करोड़ बनता है। पिछला अनुभव भी यही बताता है: 15वें वित्त आयोग के दौर में ग्रामीण निकायों के लिए तय राशि का पूरे देश में सिर्फ 74% ही जारी हो पाया (जुलाई 2025 तक के आंकड़े)।

आपकी पंचायत को कितना: आबादी से अंदाज़ा

हर पंचायत को औसत नहीं मिलता। राज्य के भीतर बंटवारा भी आबादी (90%) और क्षेत्रफल (10%) के आधार पर होता है, जब तक राज्य वित्त आयोग कोई और फॉर्मूला तय न करे। राजस्थान की 2026 की अनुमानित ग्रामीण आबादी करीब 6.13 करोड़ है, इसलिए 5 साल का केंद्रीय अनुदान प्रति ग्रामीण व्यक्ति करीब ₹5,137 बैठता है (तीनों स्तर मिलाकर)। इससे अपनी पंचायत का मोटा अंदाज़ा लगाएं:

पंचायत की आबादी5 साल में ग्राम पंचायत का हिस्सा (75%)(80%)
2,000≈ ₹77 लाख≈ ₹82 लाख
5,000≈ ₹1.93 करोड़≈ ₹2.05 करोड़
10,000≈ ₹3.85 करोड़≈ ₹4.11 करोड़

यह अंदाज़ा सिर्फ आबादी पर है; क्षेत्रफल वाला 10% हिस्सा बड़े इलाके वाली पंचायतों (जैसे पश्चिमी राजस्थान) का हिस्सा थोड़ा बढ़ा देता है। अपनी पंचायत की आबादी और गांवों के नाम ग्राम पंचायत लिस्ट में देखें।

2. राज्य का पैसा: राज्य वित्त आयोग

  • राजस्थान सरकार ने 2020–24 में अपने शुद्ध कर राजस्व का 6.75% पंचायतों और नगर निकायों को दिया; 2024-25 में इसे 7% किया गया।
  • इसमें पंचायतों (ग्रामीण) और नगर निकायों का अनुपात 2020–24 में 75.1 : 24.9 था, जो 2024-25 में 73.2 : 26.8 किया गया।
  • पंचायतों वाले हिस्से में से 75% ग्राम पंचायतों, 20% पंचायत समितियों और 5% जिला परिषदों को जाता है।
  • पंचायतों को मिले पैसे का 55% मूलभूत सुविधाओं के लिए तय है। हर ग्राम पंचायत को सामाजिक मुद्दों के शिविर और जागरूकता अभियानों के लिए ₹1 लाख सालाना का प्रावधान भी है।
  • राज्य ने इस पैसे से गांव की सड़कों पर LED रोशनी और नई पंचायतों के भवन बनाने व पुराने भवनों की मरम्मत की अनुमति दी है, और स्कूल-आंगनबाड़ी में लड़कियों के अलग शौचालय को प्राथमिकता में रखा है।
  • अगले पांच साल का फॉर्मूला 7वां राज्य वित्त आयोग तय करेगा, जिसका गठन अगस्त 2025 में हुआ (अध्यक्ष: अरुण चतुर्वेदी)।

3. योजनाओं का पैसा और 4. अपनी आय

ग्राम पंचायत के जरिए कई योजनाओं का पैसा भी खर्च होता है, जैसे जी राम जी (पहले मनरेगा) के तहत मजदूरी और सामग्री, या स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के काम। यह पैसा स्वीकृत कामों के हिसाब से आता है और सिर्फ उसी योजना पर खर्च होता है, इसलिए इसे "सरपंच का बजट" कहना सही नहीं। पंचायत की अपनी आय (कर, शुल्क, किराया) राजस्थान समेत ज़्यादातर राज्यों में बहुत छोटी है।

सरपंच यह पैसा कैसे खर्च कर सकता है: नियम

  1. पैसा पंचायत का, सरपंच का नहीं: अनुदान ग्राम पंचायत के खाते में आता है और भुगतान ऑनलाइन (PFMS से जुड़े eGramSwaraj के जरिए) होता है।
  2. योजना ग्राम सभा से: साल भर के काम ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में तय होते हैं, जिसे ग्राम सभा में रखा जाता है।
  3. आधा बंधा हुआ: 16वें वित्त आयोग के बेसिक अनुदान का 50% "स्वच्छता व ठोस कचरा प्रबंधन" और/या "जल प्रबंधन" पर ही खर्च हो सकता है। बाकी 50% और पूरा प्रदर्शन अनुदान "अनटाइड" है, यानी पंचायत अपनी ज़रूरत से तय करती है।
  4. सड़क पर सीमा: अनटाइड राशि का 20% से ज़्यादा सड़क बनाने और मरम्मत पर खर्च नहीं हो सकता।
  5. वेतन नहीं: अनटाइड अनुदान से कर्मचारियों का वेतन या स्थापना खर्च नहीं दिया जा सकता। सरपंच का अपना मानदेय अलग व्यवस्था से मिलता है — सरपंच और वार्ड पंच का मानदेय देखें।

अपनी ग्राम पंचायत का बजट कैसे देखें

  1. eGramSwaraj पोर्टल (egramswaraj.gov.in): यहां पंचायतों की विकास योजना (GPDP), वित्तीय प्रगति और खर्च की सार्वजनिक रिपोर्ट्स हैं, जिनमें राज्य, जिला और पंचायत समिति चुनकर अपनी पंचायत तक पहुंचा जा सकता है।
  2. मेरी पंचायत ऐप (केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय): पंचायत की योजनाएं, काम और उनकी प्रगति देखने के लिए।
  3. ग्राम सभा: सबसे सीधा तरीका। ग्राम सभा की बैठक में पंचायत की योजना और खर्च पर सवाल पूछना हर मतदाता का अधिकार है।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

सरपंच का 5 साल का बजट कितना होता है?
कोई तय बजट नहीं होता; पैसा आबादी के हिसाब से ग्राम पंचायत को मिलता है। 16वें वित्त आयोग के अनुसार 2026–31 में राजस्थान की एक औसत ग्राम पंचायत को केंद्र से करीब ₹1.64 से ₹1.75 करोड़ मिल सकते हैं (प्रदर्शन अनुदान की शर्तें पूरी होने पर)। राज्य वित्त आयोग और योजनाओं का पैसा इसके अलावा है।

2026-27 में एक ग्राम पंचायत को कितना पैसा मिलेगा?
16वें वित्त आयोग से राजस्थान के ग्रामीण निकायों को 2026-27 में ₹4,042 करोड़ मिलने हैं। इसका 75–80% ग्राम पंचायतों में बंटे तो औसत करीब ₹21 से ₹22.5 लाख प्रति पंचायत बनता है।

ग्राम पंचायत को पैसा कहां से आता है?
चार स्रोतों से: केंद्रीय वित्त आयोग का अनुदान, राज्य वित्त आयोग का अनुदान, योजनाओं (जैसे जी राम जी, स्वच्छ भारत मिशन) का पैसा, और पंचायत की अपनी आय।

क्या सरपंच यह पैसा अपनी मर्जी से खर्च कर सकता है?
नहीं। काम ग्राम पंचायत विकास योजना में तय होते हैं, बेसिक अनुदान का आधा हिस्सा पानी और स्वच्छता के लिए बंधा है, अनटाइड राशि का 20% से ज़्यादा सड़कों पर और कोई भी हिस्सा वेतन पर खर्च नहीं हो सकता, और भुगतान ऑनलाइन होता है।

बड़ी पंचायत को ज़्यादा पैसा मिलता है?
हां। बंटवारे में 90% वज़न आबादी और 10% क्षेत्रफल को दिया जाता है। 5,000 आबादी वाली पंचायत का 5 साल का हिस्सा मोटे तौर पर ₹1.9 से ₹2 करोड़ बैठता है।

अपनी ग्राम पंचायत का बजट कैसे चेक करें?
eGramSwaraj पोर्टल की सार्वजनिक रिपोर्ट्स में, मेरी पंचायत ऐप पर, या ग्राम सभा की बैठक में पंचायत की योजना और खर्च का ब्योरा मांगकर।

क्या सरपंच की सैलरी इसी बजट से आती है?
नहीं। वित्त आयोग का अनटाइड अनुदान वेतन या स्थापना खर्च पर इस्तेमाल नहीं हो सकता। सरपंच के मानदेय की जानकारी हमारे मानदेय पेज पर है।

इसे भी पढ़ें

स्रोत: सोलहवां वित्त आयोग, रिपोर्ट 2026–31, खंड I (अध्याय 10, तालिका 10.1, 10.5, 10.6) और खंड II (अनुलग्नक 10.3, 10.5, 10.6); भारत सरकार — 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई का व्याख्यात्मक ज्ञापन (बजट 2026-27); राजस्थान सरकार — छठा राज्य वित्त आयोग (2020–25), सिफारिशों पर कार्रवाई और 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुति; भारतीय रिज़र्व बैंक — पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति (जनवरी 2024); राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान — पंचायत चुनाव कार्यक्रम 2026 (14,403 ग्राम पंचायतें); राजस्थान पत्रिका, 1 अगस्त 2025 (राज्य वित्त आयोग का गठन)। फोटो: बीकानेर के पास एक गांव की कच्ची गली — Jakub Hałun, CC BY-SA 4.0, विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।