✅ सीधा जवाब: सरपंच और वार्ड पंच का वोट मतपत्र पर मुहर से पड़ता है, इसलिए यहां वोट खारिज भी हो सकता है। वोट तभी खारिज होता है जब नियम 50 की कोई वजह हो: मुहर की जगह टिक या अंगूठा, दो उम्मीदवारों पर या उम्मीदवार के साथ नोटा पर निशान, पीछे निशान, नाम, साइन या क्रमांक लिखना, कोई निशान नहीं, या यह साफ न होना कि वोट किसे दिया। एक ही खाने में दो मुहर, हल्की मुहर या मोड़ने से छपी स्याही से वोट नहीं कटता।

🗓️ सरपंच-पंच का मतदान (मतपत्र से): पहला चरण 24 अक्टूबर (शनिवार), दूसरा 30 अक्टूबर, तीसरा 5 नवंबर, चौथा 16 नवंबर 2026, सुबह 7 से शाम 6 बजे तक। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य का वोट इससे दो दिन पहले EVM पर होता है। आपकी पंचायत किस चरण में है: जिलेवार चरण सूची देखें →

31 जनवरी 2000 को पाली जिले की धाबर ग्राम पंचायत (पंचायत समिति रोहट) में सरपंच का फैसला 651 बनाम 650 वोट से हुआ। उसी गिनती में रिटर्निंग अधिकारी ने 32 वोट खारिज किए थे। हारने वाली उम्मीदवार चुनाव याचिका लेकर चुनाव अधिकरण (जिला जज, पाली) के पास गईं और 2002 में दोबारा गिनती हुई। उन 32 खारिज मतपत्रों पर किसी पक्ष ने आपत्ति तक नहीं की, क्योंकि हाईकोर्ट के शब्दों में वे “कानून के मुताबिक” ही खारिज हुए थे। यानी जिस पंचायत में एक वोट से हार-जीत हुई, वहां 32 लोगों का वोट गिनती में आया ही नहीं।

EVM में बटन दबाने के बाद वोट खारिज होने का सवाल नहीं उठता, लेकिन सरपंच और पंच का चुनाव मतपत्र और मतपेटी से होता है। मतपत्र पर हर निशान गिनती के समय जांचा जाता है। नीचे वही नियम हैं जिनसे यह जांच होती है, और राज्य निर्वाचन आयोग की उस पुस्तिका के असली पन्ने जिसमें आयोग ने खुद बताया है कि कौन-सा मतपत्र गिना जाएगा और कौन-सा नहीं। एक मिनट का वीडियो पहले देख लीजिए:

वीडियो: 3 मतपत्र, सिर्फ 1 वोट गिना गया: कौन-सा?

एक नज़र में: कब खारिज, कब नहीं

मतपत्र पर क्या हुआवोटआधार
मुहर की जगह पेन से टिक, या अंगूठे का निशान❌ खारिजनियम 50(1)(iii); अवैध उदाहरण 2, 3
दो अलग उम्मीदवारों पर मुहर❌ खारिजनियम 50(1)(ii); अवैध उदाहरण 5
किसी उम्मीदवार और नोटा, दोनों पर मुहर❌ खारिजनियम 50(1)(ii); अवैध उदाहरण 11
मतपत्र के पीछे निशान❌ खारिजनियम 50(1)(iii); अवैध उदाहरण 10
मतपत्र पर अपना नाम, हस्ताक्षर या मतदाता क्रमांक लिखा❌ खारिजनियम 50(1)(i); अवैध उदाहरण 6, 7, 8
कोई निशान ही नहीं❌ खारिजनियम 50(1)(iii); अवैध उदाहरण 1
मुहर किसी खाने में नहीं, खाली जगह पर❌ खारिजअवैध उदाहरण 4
मुहर ऐसी जगह कि साफ न हो वोट किसे दिया❌ खारिजनियम 50(1)(iv); अवैध उदाहरण 9
एक ही उम्मीदवार के खाने में दो मुहर✅ गिना जाएगावैध उदाहरण 5
हल्की मुहर, पर सही खाने में✅ गिना जाएगावैध उदाहरण 7
मुहर का कुछ हिस्सा बीच की छायांकित पट्टी पर, बाकी साफ एक खाने में✅ गिना जाएगावैध उदाहरण 3, 4
सही खाने में मुहर, कहीं और स्याही का धब्बा✅ जांच के बाद गिना जाएगावैध उदाहरण 1
मोड़ने से मुहर की छाप दूसरे खाने में आ गई✅ जांच के बाद गिना जाएगावैध उदाहरण 2

“अवैध/वैध उदाहरण” राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका “विधिमान्य और प्रतिक्षेपित मतपत्रों के सचित्र उदाहरण” के क्रमांक हैं। आयोग ने ये उदाहरण पंचायत समिति सदस्य के मतपत्र पर बनाए थे, जब वह चुनाव भी मतपत्र से होता था। मतपत्र खारिज करने का नियम 50 हर मतपत्र पर एक ही है, इसलिए यही उदाहरण आज सरपंच और पंच के मतपत्र पर लागू होते हैं।

1. निशान सिर्फ बूथ पर मिली मुहर से

मतदान कक्ष में आपको मतपत्र के साथ निशान लगाने की मुहर मिलती है। नियम 50(1)(iii) कहता है कि जो वोट दिए गए उपकरण के अलावा किसी और तरीके से लगाया गया, वह मतपत्र खारिज होगा। यानी अपने पेन से सही का निशान, क्रॉस, गोला या अंगूठे का निशान, सब बेकार है, चाहे वह सही उम्मीदवार के सामने ही क्यों न हो।

पंचायती राज निर्वाचन नियम 1994 का नियम 50(1)(iii), जिसमें दिए गए उपकरण के अलावा लगाया गया वोट खारिज बताया गया है
नियम 50(1)(iii): “otherwise than with the instrument supplied for the purpose” यानी दिए गए उपकरण के अलावा किसी और तरीके से लगा वोट खारिज। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका, पृष्ठ 120
राज्य निर्वाचन आयोग का अवैध मतपत्र उदाहरण 2, जिसमें उम्मीदवार के सामने मुहर की जगह पेन से टिक लगाया गया है
अवैध उदाहरण 2: उम्मीदवार के सामने पेन से टिक। आयोग का नोट: “प्रदत्त किये गये उपकरण से निशान नहीं लगाया गया”, इसलिए मतपत्र संदेहपूर्ण बंडल में जाएगा और जांच में रिटर्निंग अधिकारी उसे अस्वीकृत करेगा। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, वैध और अवैध मतपत्रों के सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 11
राज्य निर्वाचन आयोग का अवैध मतपत्र उदाहरण 3, जिसमें उम्मीदवार के सामने अंगूठे का निशान लगाया गया है
अवैध उदाहरण 3: मुहर की जगह अंगूठे का निशान। यह भी दिए गए उपकरण से नहीं लगा, इसलिए खारिज। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 12

2. मुहर एक ही उम्मीदवार पर, और नोटा के साथ नहीं

मतपत्र पर आखिरी खाना नोटा (उपर्युक्त में से कोई नहीं) का होता है। नियम 50(1)(ii) में 2014 के संशोधन के बाद साफ लिखा है कि एक से ज़्यादा उम्मीदवारों पर, या किसी उम्मीदवार और नोटा दोनों पर निशान हो तो मतपत्र खारिज होगा। कई लोग सोचते हैं कि नोटा पर एक्स्ट्रा मुहर लगाने से कुछ नहीं बिगड़ता। बिगड़ता है: पूरा वोट चला जाता है।

नियम 50(1)(ii), जिसमें एक से अधिक उम्मीदवार या उम्मीदवार और नोटा पर निशान वाला मतपत्र खारिज बताया गया है
नियम 50(1)(ii): “marking for more than one candidate or a candidate and NOTA”। साथ में 50(1)(i): पहचान वाला कोई निशान, और 50(1)(iii): पीछे की तरफ वोट। स्रोत: पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पृष्ठ 120
राज्य निर्वाचन आयोग का अवैध मतपत्र उदाहरण 11, जिसमें एक उम्मीदवार और नोटा दोनों पर मुहर लगी है
अवैध उदाहरण 11: एक मुहर उम्मीदवार पर, दूसरी नोटा पर। आयोग का नोट: “एक से अधिक मत दिया गया है”, इसलिए जांच में खारिज। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 20

इसी नियम का एक और रूप है वह मतपत्र जिसमें मुहर ऐसी जगह लगी हो कि पता ही न चले कि वोट किसे दिया। नियम 50(1)(iv) इसे “अनिश्चितता के कारण शून्य” मानता है।

राज्य निर्वाचन आयोग का अवैध मतपत्र उदाहरण 9, जिसमें मुहर दो उम्मीदवारों के बीच लगी है और साफ नहीं कि वोट किसे दिया
अवैध उदाहरण 9: दोनों मुहरें उम्मीदवारों के बीच की पट्टी पर। आयोग का नोट: “स्पष्ट नहीं होता है कि किस अभ्यर्थी को मत दिया गया है”, इसलिए खारिज। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 18

3. पीछे निशान, या ऐसा कुछ जिससे आप पहचाने जाएं

मतदान गुप्त होता है, इसलिए नियम 50(1)(i) के तहत जिस मतपत्र पर ऐसा कोई निशान हो जिससे मतदाता पहचाना जा सके, वह खारिज होता है। आयोग की पुस्तिका में तीन ऐसे उदाहरण हैं: मतपत्र पर अपना नाम, हस्ताक्षर, या मतदाता सूची का क्रमांक लिखना। और मतपत्र के पीछे लगी मुहर का भी यही हाल है, क्योंकि वोट मतपत्र के सामने वाले हिस्से पर दर्ज होना चाहिए।

राज्य निर्वाचन आयोग का अवैध मतपत्र उदाहरण 10, जिसमें मतपत्र के पीछे मुहर लगी है
अवैध उदाहरण 10: मतपत्र के पीछे की तरफ मुहर। आयोग का नोट: “मतपत्र के पीछे निशान है”, इसलिए जांच में खारिज। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 19

डरिए मत: ये वोट गिने जाते हैं

नियम 50(2) उतना ही अहम है जितना 50(1): इन वजहों के अलावा किसी और आधार पर मतपत्र खारिज नहीं किया जा सकता। इसलिए आयोग की पुस्तिका में 7 ऐसे मतपत्र भी हैं जो देखने में गड़बड़ लगते हैं, पर गिने जाते हैं:

  • एक ही उम्मीदवार के खाने में दो मुहर (वैध उदाहरण 5): गणना-दल खुद इसे वैध मान लेता है। खारिज तब होता है जब दूसरी मुहर किसी दूसरे उम्मीदवार या नोटा पर हो।
  • हल्की मुहर (वैध उदाहरण 7): सही खाने में है तो उसी उम्मीदवार का वोट।
  • मुहर आधी पट्टी पर (वैध उदाहरण 3, 4): मुहर का कुछ हिस्सा उम्मीदवार के खाने में साफ दिखे और बाकी बीच की छायांकित पट्टी पर चला जाए, तब भी वोट उसी उम्मीदवार को।
  • कहीं और स्याही का धब्बा (वैध उदाहरण 1): मुहर सही खाने में है, तो धब्बे से वोट नहीं कटता। ऐसा मतपत्र पहले संदेहपूर्ण बंडल में जाता है और रिटर्निंग अधिकारी जांच के बाद उसे वैध मानता है।
  • मोड़ने से छप गई स्याही (वैध उदाहरण 2): मुहर गीली हो और मतपत्र मोड़ते ही उसकी छाप दूसरे उम्मीदवार के खाने में आ जाए, तब भी वोट असली मुहर वाले उम्मीदवार का है। आयोग बताता है कि असली निशान घड़ी की उल्टी दिशा (anti-clockwise) में होता है, और मोड़ने से बनी छाप उसकी उल्टी, इसी से पहचान होती है।
राज्य निर्वाचन आयोग का वैध मतपत्र उदाहरण 5, जिसमें पहले उम्मीदवार के खाने में दो मुहरें हैं और मतपत्र वैध है
वैध उदाहरण 5 (अभ्यर्थी 1 के लिए मान्य): एक ही खाने में दो मुहर। आयोग का नोट: “यह मतपत्र स्वयं गणन-दल द्वारा वैध स्वीकार कर लिया जायेगा।” स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 7
राज्य निर्वाचन आयोग का वैध मतपत्र उदाहरण 2, जिसमें मोड़ने से मुहर की छाप तीसरे उम्मीदवार के खाने में आ गई पर वोट पहले उम्मीदवार को गिना गया
वैध उदाहरण 2 (अभ्यर्थी 1 के लिए मान्य): असली मुहर पहले उम्मीदवार पर, मोड़ने से बनी उल्टी छाप तीसरे पर। रिटर्निंग अधिकारी की जांच में वैध। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, सचित्र उदाहरण, पृष्ठ 4
नियम 50(2): उप-नियम 1 में गिनाए आधारों के अलावा कोई मतपत्र खारिज नहीं किया जाएगा
नियम 50(2): “No ballot paper shall be rejected otherwise than on any of the grounds enumerated in sub-rule (1)”। स्रोत: पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पृष्ठ 120

गलती हो गई? पेटी में डालने से पहले नया मतपत्र

मुहर गलत खाने में लग गई, या मतपत्र पर स्याही फैल गई, तो उसे मोड़कर पेटी में मत डालिए। नियम 42 के मुताबिक जिस मतदाता से अनजाने में मतपत्र खराब हो गया, वह उसे मतदान अधिकारी को लौटाकर और उसे यह भरोसा दिलाकर कि गलती अनजाने में हुई, दूसरा मतपत्र ले सकता है। खराब मतपत्र पर अधिकारी “रद्द” लिख देता है। यह मौका सिर्फ तब तक है जब तक मतपत्र पेटी में नहीं गया।

नियम 42: खराब हुआ मतपत्र मतदान अधिकारी को लौटाकर दूसरा मतपत्र लिया जा सकता है
नियम 42 (Spoiled ballot papers): खराब मतपत्र “on delivering it to polling officer” और उसे संतुष्ट करने पर “obtain another ballot paper”। स्रोत: पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पृष्ठ 115

दो दिन, दो वोट: इस बार स्याही किस हाथ पर

हर चरण में आप दो बार बूथ जाएंगे: पहले जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए EVM पर, फिर दो दिन बाद सरपंच और पंच के लिए मतपत्र पर। आयोग का निर्देश है कि जब ये मतदान अलग-अलग दिन हों और पहले मतदान की अमिट स्याही अब भी दिख रही हो, तो दूसरे मतदान में स्याही दाएं हाथ की तर्जनी उंगली पर लगेगी। तो शनिवार को बूथ पर अधिकारी दायां हाथ मांगे, तो हैरान मत होइए।

राज्य निर्वाचन आयोग का निर्देश: पूर्ववर्ती निर्वाचन का स्याही निशान दिखने पर अगले निर्वाचन में स्याही दाएं हाथ की तर्जनी पर
आयोग का पत्र 2235 (25 जून 2019): पूर्ववर्ती निर्वाचन का अमिट स्याही का निशान दृष्टव्य रहने पर पश्चात्वर्ती निर्वाचन में निशान “दायें हाथ की तर्जनी अंगुली (Right Hand Fore-Finger)” पर। 2026 के चुनाव के लिए आदेश 1408 के साथ फिर जारी। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, आदेश 1408: निर्वाचकों की अंगुली पर अमिट स्याही लगाने के संबंध में

गिनती की मेज़ पर क्या होता है

आयोग की पुस्तिका के मुताबिक गणना-दल साफ मतपत्र सीधे गिन लेता है और जिन पर ज़रा भी शक हो, उन्हें संदेहपूर्ण मतपत्रों के अलग बंडल में रखता है। उस बंडल का हर मतपत्र रिटर्निंग अधिकारी खुद जांचता है। नियम 50(3) के तहत जो मतपत्र वह खारिज करता है, उस पर उसे संक्षेप में कारण लिखना होता है, और नियम 50(4) कहता है कि वैध-अवैध पर उसका फैसला अंतिम है। उस फैसले के खिलाफ रास्ता चुनाव याचिका का है।

पाली का धाबर मामला ठीक यही रास्ता है। 650 वोट पाने वाली उम्मीदवार ने चुनाव याचिका में आरोप लगाया कि उसके वैध वोट अवैध घोषित किए गए। चुनाव अधिकरण (जिला जज, पाली) ने 10 जुलाई 2002 को अपने कक्ष में दोबारा गिनती कराई। विजेता के 651 में से 8 और दूसरे स्थान वाली उम्मीदवार के 650 में से 6 वोट संदिग्ध माने गए और अलग सील पैकेट में रखे गए। रिटर्निंग अधिकारी के खारिज किए 32 मतपत्र भी जांचे गए: अधिकरण ने माना कि वे सही खारिज हुए थे, और किसी पक्ष ने उन पर आपत्ति नहीं की। हाईकोर्ट का 16 जुलाई 2003 का फैसला प्रक्रिया पर था: अधिकरण ने तय मुद्दों पर फैसला नहीं सुनाया था, इसलिए मामले को दोबारा फैसले के लिए जिला जज को भेजने का आदेश बरकरार रहा।

राजस्थान हाईकोर्ट के 2003 के फैसले का अंश: धाबर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति रोहट, जिला पाली में 31 जनवरी 2000 का सरपंच चुनाव, 651 और 650 वोट
हाईकोर्ट के फैसले का अंश: ग्राम पंचायत धाबर, पंचायत समिति रोहट, जिला पाली, मतदान 31 जनवरी 2000; विजेता को 651 और दूसरे स्थान पर 650 वैध वोट। स्रोत: राजस्थान हाईकोर्ट, डी.बी. सिविल स्पेशल अपील (रिट) 687/2002, फैसला 16 जुलाई 2003 (राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर)
हाईकोर्ट के फैसले का अंश: रिटर्निंग अधिकारी के खारिज किए 32 वोट दोबारा जांचे गए और सही खारिज पाए गए
उसी फैसले का अंश: “32 votes rejected by the returning officer were also checked … rightly rejected those 32 votes as being invalid votes”। स्रोत: राजस्थान हाईकोर्ट, फैसला 16 जुलाई 2003

शनिवार को बूथ पर जाने से पहले, 5 बातें

  1. निशान सिर्फ बूथ पर मिली मुहर से लगाइए। अपना पेन, टिक या अंगूठा नहीं।
  2. मुहर एक ही उम्मीदवार के खाने में, साफ अंदर। नोटा पर तभी, जब किसी उम्मीदवार को वोट नहीं देना।
  3. मतपत्र पर नाम, साइन, क्रमांक या कुछ भी लिखिए मत, और पीछे की तरफ कोई निशान नहीं।
  4. गलती हो जाए तो मतपत्र पेटी में डालने से पहले मतदान अधिकारी को लौटाइए, नया मिल सकता है।
  5. मुहर के बाद मोड़ने से स्याही इधर-उधर छप जाए तो घबराइए मत, वोट असली मुहर वाले उम्मीदवार को ही जाता है।

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स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994: नियम 42 (खराब मतपत्र) और नियम 50 (मतपत्रों की अस्वीकृति), राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका के पृष्ठ 115 व 120; राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: “विधिमान्य और प्रतिक्षेपित मतपत्रों के सचित्र उदाहरण” (7 वैध, 11 अवैध), पत्र 2235 (25.06.2019) और आदेश 1408 (अमिट स्याही), चुनाव कार्यक्रम 03.10.2026 व संशोधन आदेश 10090 (06.10.2026); राजस्थान हाईकोर्ट, डी.बी. सिविल स्पेशल अपील (रिट) 687/2002, फैसला 16 जुलाई 2003। फोटो: दौसा के एक मतदान केंद्र पर नाम दर्ज कराते बुज़ुर्ग मतदाता, लोकसभा चुनाव 2014, भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।