✅ सीधा जवाब: पहले चरण में 24 अक्टूबर को शाम 6 बजे मतदान खत्म होते ही उसी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर गिनती शुरू होगी, और जैसे-जैसे किसी पद की गिनती पूरी होगी, रिटर्निंग अधिकारी उसका नतीजा वहीं घोषित करेगा। जीतने वाले को वहीं शपथ और प्रमाण पत्र मिलता है। बराबर वोट हों तो लॉटरी से फैसला होता है, और दोबारा गिनती की मांग गिनती के दौरान लिखित में करनी होती है। आयोग ने हर गांव का नतीजा वेबसाइट पर डालने की कोई घोषणा नहीं की है, इसलिए पहली पक्की खबर पंचायत मुख्यालय से ही आएगी।
🗓️ पंच-सरपंच का मतदान और गिनती: पहला चरण 24 अक्टूबर (उप-सरपंच 25 अक्टूबर), दूसरा 30 अक्टूबर (31 अक्टूबर), तीसरा 5 नवंबर (6 नवंबर), चौथा 16 नवंबर (17 नवंबर)। हर बार गिनती उसी दिन, मतदान के तुरंत बाद। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती 20 नवंबर को। जिलेवार नतीजों की जानकारी: पंचायत चुनाव परिणाम 2026 →
सरपंच के चुनाव में नतीजे के लिए कई दिन इंतज़ार नहीं करना पड़ता। पंचायत के सभी बूथों की मतपेटियां जिला मुख्यालय नहीं, बल्कि उसी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर लाई जाती हैं और गिनती वहीं होती है। इसलिए मतदान वाली रात ही गांव को अपना सरपंच मिल जाता है। नीचे वह पूरी प्रक्रिया है जो राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश 1323 और पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 में लिखी है: गिनती कैसे होती है, कांटे की टक्कर में दोबारा गिनती और लॉटरी का नियम, किसकी जमानत जब्त होती है, और नतीजे के बाद क्या-क्या होता है। गिनती में कौन-सा मतपत्र खारिज होता है, यह एक मिनट के इस वीडियो में देखिए:
नतीजा कब आएगा: मतदान खत्म होते ही उसी पंचायत में गिनती
आयोग के 6 अक्टूबर के आदेश 10090 की समय-सारणी में पंच और सरपंच की मतगणना का समय सीधे लिखा है: “मतदान समाप्ति के तुरन्त पश्चात्”, जगह ग्राम पंचायत मुख्यालय। पहले चरण में यानी 24 अक्टूबर (शनिवार) की शाम। उप-सरपंच का चुनाव अगले दिन, 25 अक्टूबर को होगा।

नतीजे की कोई तय घड़ी आयोग ने नहीं बताई है, और बताई भी नहीं जा सकती। सरपंच की गिनती तभी शुरू होती है जब पंचायत के सारे बूथों की मतपेटियां मतगणना केंद्र पर पहुंच जाएं, इसलिए जिस पंचायत में बूथ ज़्यादा और दूर-दूर हैं, वहां नतीजा देर से आता है।

गिनती कैसे होती है: गुलाबी और सफेद मतपत्रों के 50-50 के बंडल
आयोग के आदेश 1323 में पंच-सरपंच की गिनती का पूरा तरीका लिखा है:
- रिटर्निंग अधिकारी सभी बूथों के मतदान दल के कर्मचारियों से दो दल बनाता है: पहला दल सरपंच की गिनती करता है, दूसरा पंचों की।
- सरपंच की गिनती शुरू करने से पहले यह पक्का किया जाता है कि सभी बूथों की मतपेटियां पहुंच गई हैं।
- दूसरा दल एक-एक मतपेटी खोलकर वार्ड के हिसाब से गुलाबी (पंच) मतपत्रों के 50-50 के बंडल बनाता है, और पहला दल सरपंच के सफेद मतपत्रों के।
- हर बूथ पर मिले मतपत्रों की गिनती उस बूथ पर पड़े वोटों की संख्या से मिलाई जाती है।
- फिर उम्मीदवार के हिसाब से (नोटा सहित) मतपत्र छांटे जाते हैं और वैध-अवैध का फैसला रिटर्निंग अधिकारी करता है।

उम्मीदवार के लिए सबसे ज़रूरी बात खारिज होने वाले मतपत्रों से जुड़ी है। खारिज मतपत्रों का अलग बंडल बनता है, उन्हें दोबारा देखा जाता है और उम्मीदवारों को बताकर अंतिम फैसला होता है। हर खारिज मतपत्र पर खारिज करने का कारण लिखकर सील लगाई जाती है और रिटर्निंग अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं। कोई उम्मीदवार खारिज मतपत्रों की क्रम संख्या जानना चाहे तो उसे नोट करवा दी जाती है। नियम 49 के मुताबिक हर उम्मीदवार को गिनती के समय मौजूद रहने का अधिकार है, और जिन मतपत्रों को अधिकारी खारिज करने लायक मानता है, उन्हें उम्मीदवार बिना छुए देख सकता है। कौन-सा मतपत्र खारिज होता है, आयोग के असली उदाहरणों के साथ: मतपत्र पर ये 11 गलतियां कीं तो वोट खारिज।

कांटे की टक्कर: दोबारा गिनती और लॉटरी
सरपंच के चुनाव अक्सर कुछ ही वोटों से तय होते हैं, इसलिए यह नियम जानना ज़रूरी है। नियम 49(6) के मुताबिक गिनती के समय मौजूद कोई भी उम्मीदवार गिनती के दौरान रिटर्निंग अधिकारी से लिखित में दोबारा गिनती की मांग कर सकता है। अधिकारी कारण दर्ज करके मांग खारिज भी कर सकता है या दोबारा गिनती का आदेश भी दे सकता है। नियम 49(7) के तहत अगर अधिकारी को खुद पिछली गिनती की सटीकता पर भरोसा न हो, तो वह अपनी ओर से एक या ज़्यादा बार दोबारा गिनती करा सकता है। ध्यान रहे: नियम में यह मांग गिनती के दौरान करने की बात है; नतीजा घोषित होने के बाद चुनौती का रास्ता चुनाव याचिका है (नियम 80)।


अगर सबसे आगे के दो उम्मीदवारों के वोट बिल्कुल बराबर हों, तो नियम 51 के मुताबिक नतीजा लॉटरी से तय होता है, उस तरीके से जिसे रिटर्निंग अधिकारी उचित समझे। लॉटरी का नतीजा भी परिणाम के प्ररूप में दर्ज होता है।

नतीजे की घोषणा, शपथ और प्रमाण पत्र
आदेश 1323 के मुताबिक जैसे-जैसे गिनती पूरी होती जाए, वैसे-वैसे पंच और सरपंच पद का परिणाम घोषित कर दिया जाता है, और किसी पद का परिणाम घोषित होने के बाद उस पद के बाकी उम्मीदवारों को मतगणना केंद्र पर रुकने नहीं दिया जाता। परिणाम प्ररूप-7 में दर्ज होता है। फिर निर्वाचित पंचों और सरपंच को प्ररूप-11 में शपथ दिलाई जाती है, उन्हें निर्वाचन का प्रमाण पत्र दिया जाता है और उनसे हस्ताक्षर वाली रसीद ली जाती है। नियम 52 के मुताबिक परिणाम की एक प्रति पंचायत कार्यालय, पंचायतों के प्रभारी अधिकारी और नए सरपंच को भेजी जाती है।

क्या हर गांव का रिजल्ट ऑनलाइन आएगा?
सच यह है कि अभी कोई पक्का नहीं कह सकता। 23 अक्टूबर तक राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर नामांकन की रिपोर्ट सिर्फ जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की है; सरपंच और पंच के उम्मीदवारों की सूची वहां नहीं है, क्योंकि उनका नामांकन, जांच और नाम वापसी पंचायत स्तर पर एक ही दिन होती है। आयोग ने यह घोषणा नहीं की है कि हर पंचायत का नतीजा वेबसाइट पर डाला जाएगा। इसलिए नतीजे का पहला और पक्का स्रोत है: ग्राम पंचायत मुख्यालय पर रिटर्निंग अधिकारी की घोषणा और पंचायत कार्यालय में भेजी जाने वाली परिणाम की प्रति। आयोग की वेबसाइट पर जैसे ही कोई जानकारी आएगी, हम उसे पंचायत चुनाव परिणाम पेज पर जोड़ेंगे।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मामला अलग है: उनका वोट EVM पर पड़ता है और सभी चरणों की गिनती एक साथ 20 नवंबर 2026 को सुबह 8 बजे से जिला मुख्यालय पर होगी।

किसकी जमानत जब्त होगी
सरपंच के नामांकन के साथ सामान्य उम्मीदवार ₹500 और महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार ₹250 जमानत जमा करते हैं (नियम 56(3))। यह राशि लौटा दी जाती है, सिवाय उस उम्मीदवार के जो नहीं जीतता और कुल वैध वोटों का कम से कम छठा हिस्सा (1/6) भी नहीं ले पाता। उदाहरण के लिए, किसी पंचायत में 1,200 वैध वोट पड़े हों, तो 200 से कम वोट पाने वाले हारे हुए उम्मीदवार की जमानत जब्त होगी।

नतीजे के बाद: जुलूस पर रोक, 15 दिन में खर्च का हिसाब, 30 दिन में याचिका
- विजय जुलूस पर रोक: आयोग ने पंच-सरपंच समेत सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के नतीजे के बाद विजय जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगाया है।
- खर्च का हिसाब 15 दिन में: चुनाव खर्च का पूरा विवरण नतीजे की घोषणा के 15 दिन के भीतर तय प्रारूप में जिला निर्वाचन अधिकारी या उसके अधिकृत अधिकारी को देना होता है। सरपंच के लिए खर्च की अधिकतम सीमा ₹1,00,000 है।
- अगले दिन उप-सरपंच: पहले चरण में 25 अक्टूबर को नए पंच और सरपंच मिलकर उप-सरपंच चुनते हैं। पूरी प्रक्रिया: उप-सरपंच का चुनाव कैसे होता है।
- चुनौती 30 दिन में: नियम 80 के मुताबिक उस चुनाव का कोई भी उम्मीदवार नतीजा घोषित होने के 30 दिन के भीतर जिला न्यायाधीश के पास चुनाव याचिका दायर कर सकता है, और नियम 81(2) के मुताबिक याचिका के साथ ₹500 सुरक्षा राशि जमा करनी होती है।




नतीजे वाली रात, 6 बातें याद रखें
- नतीजा पंचायत मुख्यालय पर: गिनती और घोषणा वहीं होती है; पक्की खबर रिटर्निंग अधिकारी की घोषणा ही है।
- कोई तय समय नहीं: सरपंच की गिनती सभी बूथों की मतपेटियां पहुंचने के बाद ही शुरू होती है।
- उम्मीदवार मौजूद रहें: गिनती के समय मौजूद रहने और खारिज होने लायक मतपत्र देखने का अधिकार उम्मीदवार को है।
- दोबारा गिनती लिखित में, गिनती के दौरान: घोषणा के बाद चुनौती 30 दिन में चुनाव याचिका से।
- बराबर वोट तो लॉटरी: नियम 51।
- जीत के बाद: शपथ और प्रमाण पत्र वहीं, विजय जुलूस पर रोक, खर्च का हिसाब 15 दिन में, और अगले दिन उप-सरपंच का चुनाव।
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स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: पंच-सरपंच मतगणना आदेश 1323 (3 फरवरी 2026), संशोधित समय-सारणी आदेश 10090 (6 अक्टूबर 2026), चुनाव कार्यक्रम प्रेस नोट और परिशिष्ट-A (9836, 3 अक्टूबर 2026); राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994: नियम 49, 51, 52, 56(3), 80, 81, राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका के पृष्ठ 119, 120, 129, 143 और 144। फोटो: मतगणना केंद्र पर वोटों की गिनती, लोकसभा चुनाव 2014, नई दिल्ली, भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।







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