✅ सीधा जवाब: ज़िला प्रमुख और प्रधान को आप सीधे वोट से नहीं चुनते। ईवीएम पर आप सिर्फ जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य चुनते हैं। फिर जिला परिषद के चुने हुए सदस्य अपने में से ज़िला प्रमुख चुनते हैं, और पंचायत समिति के चुने हुए सदस्य अपने में से प्रधान। यह चुनाव गुप्त मतदान से होता है, जिसमें डाक या किसी और के हाथ वोट नहीं भेजा जा सकता, मतपत्र पर नोटा भी होता है, और मान्यता प्राप्त पार्टी के उम्मीदवार को पार्टी का चुनाव चिन्ह मिलता है। ज़िला प्रमुख को हर महीने ₹18,368 और प्रधान को ₹12,858 मानदेय मिलता है।

🗓️ तारीखें (राज्य निर्वाचन आयोग का कार्यक्रम): जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मतदान ईवीएम से 22 अक्टूबर (हो चुका), 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर को, सभी चरणों की गिनती एक साथ 20 नवंबर को। फिर ज़िला प्रमुख 25 नवंबर, उप ज़िला प्रमुख 26 नवंबर, प्रधान 27 नवंबर और उप प्रधान 28 नवंबर 2026 को चुने जाएंगे। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा में प्रमुख-प्रधान का चुनाव अलग तारीख पर होगा। अपने जिले के जिला परिषद वार्ड और उम्मीदवार: जिला परिषद चुनाव 2026 →

28 अक्टूबर को दूसरे चरण के गांवों में वोटर ईवीएम पर दो बटन दबाएगा: एक जिला परिषद सदस्य के लिए, एक पंचायत समिति सदस्य के लिए। बहुत से लोग मानते हैं कि इसी वोट से ज़िला प्रमुख या प्रधान चुना जाता है। ऐसा नहीं है। ये दोनों कुर्सियां एक महीने बाद, सदस्यों की बैठक में, सदस्यों के वोट से भरी जाती हैं। नीचे पूरा तरीका राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पंचायती राज अधिनियम 1994 और आयोग के आदेशों की असली कटिंग के साथ है। पहले एक मिनट का वीडियो देख लीजिए:

वीडियो: ज़िला प्रमुख कौन चुनता है

प्रमुख और प्रधान को कौन चुनता है

नियम 59(1) साफ कहता है कि पंचायत समिति का प्रधान उसके चुने हुए सदस्य अपने में से चुनते हैं। नियम 62 यही पूरी प्रक्रिया ज़िला प्रमुख पर लागू करता है: जहां "प्रधान" लिखा है वहां "प्रमुख" और जहां "पंचायत समिति" लिखा है वहां "जिला परिषद" पढ़िए। यानी ज़िला प्रमुख वही बन सकता है जो पहले जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीत चुका हो, और उसे प्रमुख बनाने वाले वोट उसके साथी सदस्यों के होंगे, गांव के वोटरों के नहीं।

पंचायती राज निर्वाचन नियम 59(1) की कटिंग: प्रधान को पंचायत समिति के चुने हुए सदस्य अपने में से चुनेंगे
नियम 59(1): प्रधान को पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य अपने में से चुनते हैं। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका, पेज 125
नियम 62 की कटिंग: प्रमुख का चुनाव उसी प्रक्रिया से, प्रधान की जगह प्रमुख और पंचायत समिति की जगह जिला परिषद पढ़ा जाए
नियम 62: प्रमुख का चुनाव नियम 59 की ही प्रक्रिया से, "प्रधान" की जगह "प्रमुख" और "पंचायत समिति" की जगह "जिला परिषद" पढ़कर। स्रोत: वही पुस्तिका, पेज 127

कब और कहां: 20 नवंबर की गिनती के बाद सदस्यों की बैठक

नियम 59(2) के मुताबिक प्रधान चुनने के लिए चुने हुए सदस्यों की बैठक पंचायत समिति के दफ्तर में, राज्य निर्वाचन आयोग की तय तारीख और समय पर होती है, और बैठक की अध्यक्षता रिटर्निंग अधिकारी करता है, जिसे जिला निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है। आयोग ने 3 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट में यह तारीख भी तय कर दी है: चारों चरणों के जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती 20 नवंबर को जिला मुख्यालय पर, फिर ज़िला प्रमुख का चुनाव 25 नवंबर, उप ज़िला प्रमुख 26 नवंबर, प्रधान 27 नवंबर और उप प्रधान 28 नवंबर को। 6 अक्टूबर के संशोधित आदेश ने सिर्फ मतदान की तारीखें बदलीं, बाकी कार्यक्रम "यथावत" रखा।

राज्य निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट की समय-सारणी: गिनती 20 नवंबर 2026, जिला प्रमुख का चुनाव 25 नवंबर 2026
आयोग की समय-सारणी, पंक्ति 7 और 8: गिनती 20.11.2026 (शुक्रवार), ज़िला प्रमुख का चुनाव 25.11.2026 (बुधवार)। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, प्रेस नोट क्रमांक 9836, 3 अक्टूबर 2026
नियम 59(2) की कटिंग: बैठक आयोग की तय तारीख और समय पर, रिटर्निंग अधिकारी की अध्यक्षता में
नियम 59(2): बैठक का दिन और समय राज्य निर्वाचन आयोग तय करता है। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पेज 125

बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा जिला परिषदों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है, इसलिए वहां प्रमुख और प्रधान का चुनाव आयोग के अलग आदेश (क्रमांक 9867, 3 अक्टूबर 2026) के कार्यक्रम से होगा, 25-27 नवंबर को नहीं।

वोट कैसे पड़ता है: गुप्त मतदान, डाक या प्रॉक्सी नहीं

बैठक में पहले नामांकन होता है: हर उम्मीदवार का नामांकन पत्र (फॉर्म IV-B) कोई एक सदस्य प्रस्तावक के तौर पर साइन करता है और उम्मीदवार खुद खड़े होने की सहमति लिखता है। नाम वापसी के बाद तीन स्थितियां बनती हैं, नियम 59(8) में:

  • एक ही उम्मीदवार बचा तो मतदान नहीं होता, वही निर्विरोध प्रधान या प्रमुख घोषित होता है।
  • दो या ज़्यादा उम्मीदवार हों तो गुप्त मतदान होता है, और सिर्फ बैठक में मौजूद सदस्यों के वोट लिए जाते हैं। कोई सदस्य डाक से या किसी और के हाथ (प्रॉक्सी) वोट नहीं भेज सकता।
  • कोई वैध नामांकन नहीं आया तो पूरी प्रक्रिया आयोग की तय नई तारीख पर फिर से शुरू होती है।
नियम 59(8)(b) की कटिंग: दो या अधिक उम्मीदवार हों तो गुप्त मतदान, कोई सदस्य डाक या प्रॉक्सी से वोट नहीं दे सकता
नियम 59(8)(b): दो या ज़्यादा उम्मीदवार हों तो गुप्त मतदान; डाक या प्रॉक्सी से वोट की इजाज़त नहीं। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पेज 126

सदस्यों के मतपत्र पर भी नोटा

नियम 59(12)(b) के मुताबिक मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम हिंदी में, नाम-सूची के क्रम में छपते हैं, और आखिरी उम्मीदवार के बाद नोटा (इनमें से कोई नहीं) का खाना होता है। यानी किसी सदस्य को कोई उम्मीदवार पसंद न हो तो वह नोटा पर निशान लगा सकता है। नियम 59(13) रिटर्निंग अधिकारी को मतपत्र की गोपनीयता का इंतज़ाम करने का आदेश देता है।

नियम 59(12)(b) की कटिंग: मतपत्र पर आखिरी उम्मीदवार के बाद नोटा दिखाया जाएगा
नियम 59(12)(b): मतपत्र पर आखिरी उम्मीदवार के बाद NOTA (none of the above)। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पेज 126

पार्टी का चुनाव चिन्ह: हर पद पर एक ही उम्मीदवार

सरपंच का चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं होता, पर प्रधान और प्रमुख का होता है। नियम 59(10)(b) कहता है कि चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के तहत राज्य में मान्यता प्राप्त पार्टी जिस उम्मीदवार को खड़ा करे, उसे पार्टी का आरक्षित चिन्ह मिलेगा, बशर्ते पार्टी उस पद के लिए सिर्फ एक उम्मीदवार खड़ा करे। पार्टी का उम्मीदवार माने जाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष या उनके अधिकृत व्यक्ति का पत्र नाम वापसी की समय-सीमा से पहले देना होता है। बाकी उम्मीदवारों को आयोग की सूची से अलग-अलग चिन्ह मिलते हैं, और एक ही चिन्ह दो लोग मांगें तो फैसला पर्ची से होता है।

नियम 59(10)(b) की कटिंग: मान्यता प्राप्त पार्टी के उम्मीदवार को आरक्षित चिन्ह, पार्टी एक पद पर एक ही उम्मीदवार खड़ा करे
नियम 59(10)(b): मान्यता प्राप्त पार्टी के उम्मीदवार को पार्टी का आरक्षित चिन्ह, एक पद पर एक ही उम्मीदवार की शर्त पर। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, पेज 126

सांसद और विधायक जिला परिषद में बैठते हैं, पर प्रमुख नहीं चुनते

पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 14(1) के मुताबिक जिला परिषद में सीधे चुने हुए सदस्यों के अलावा उस इलाके के लोकसभा और विधानसभा सदस्य, जिले में वोटर के तौर पर दर्ज राज्यसभा सदस्य और सभी पंचायत समितियों के प्रधान भी सदस्य होते हैं। लेकिन उसी धारा का परंतुक कहता है कि ये सदस्य जिला परिषद की हर बैठक में वोट दे सकते हैं, सिवाय प्रमुख और उप प्रमुख के चुनाव और हटाने वाली बैठकों के। यानी 25 नवंबर को प्रमुख सिर्फ वही सदस्य चुनेंगे जिन्हें आपने ईवीएम पर चुना है।

कुर्सी की कीमत: ₹18,368 और ₹12,858 हर महीने

पंचायती राज विभाग की 24 मार्च 2026 की अधिसूचना से 1 अप्रैल 2026 से ज़िला प्रमुख का मानदेय ₹16,698 से बढ़कर ₹18,368 प्रतिमाह और प्रधान का ₹11,689 से बढ़कर ₹12,858 प्रतिमाह हो गया है। तुलना के लिए, सरपंच का मानदेय ₹7,347 है।

पंचायती राज विभाग की 24 मार्च 2026 की अधिसूचना की कटिंग: जिला प्रमुख 18368 और प्रधान 12858 रुपये प्रतिमाह
संशोधित मानदेय: जिला प्रमुख ₹18,368 और प्रधान ₹12,858 प्रतिमाह, 1 अप्रैल 2026 से। स्रोत: पंचायती राज विभाग, राजस्थान, अधिसूचना क्रमांक F.951(19)(41)/2026-27, 24 मार्च 2026

इसलिए 28 अक्टूबर के वोट का मतलब

जिस जिला परिषद सदस्य को आप चुनते हैं, वही आपके ज़िला प्रमुख का वोटर है, और जिस पंचायत समिति सदस्य को चुनते हैं, वही प्रधान का। प्रमुख और प्रधान जिले और ब्लॉक के विकास के पैसे, योजनाओं की मंजूरी और बैठकों की अध्यक्षता संभालते हैं। इसलिए सदस्य चुनते समय यह भी देखिए कि वह प्रमुख या प्रधान की कुर्सी के लिए किसके साथ खड़ा होगा। अपने जिले के जिला परिषद वार्ड, आरक्षण और उम्मीदवारों की सूची यहां है: जिला परिषद चुनाव 2026, जिलेवार →

इसी सीरीज़ में:

स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994: नियम 59 (उपनियम 1, 2, 4, 8, 10, 12, 13) और नियम 62 (राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका, पेज 125-127); राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994: धारा 14(1) और उसका परंतुक (पंचायती राज मंत्रालय की प्रति); पंचायती राज विभाग की मानदेय अधिसूचना, 24 मार्च 2026; राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: प्रेस नोट 9836 (3 अक्टूबर 2026) की समय-सारणी, संशोधित आदेश 10090 (6 अक्टूबर 2026), आदेश 9867 (3 अक्टूबर 2026)। फोटो: दौसा के एक मतदान केंद्र पर कतार में खड़ी महिला मतदाता, लोकसभा चुनाव 2014 (24 अप्रैल 2014), भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।