✅ सीधा जवाब: पंच-सरपंच चुनाव में नोटा को सबसे ज़्यादा वोट मिल जाएं, तब भी कुर्सी खाली नहीं रहती। नोटा के वोट गिने जाते हैं और नतीजे के कागज़ (प्रपत्र 7) में अलग से लिखे जाते हैं (नियम 52(1)(c)), लेकिन रिटर्निंग अधिकारी उम्मीदवारों में से सबसे ज़्यादा वोट वाले को जीता घोषित करता है (नियम 52(1)(d))। मतपत्र पर नोटा के साथ किसी उम्मीदवार पर भी मुहर लगी, तो मतपत्र खारिज हो सकता है (नियम 50(1)(ii))।

🗓️ मतपत्र से मतदान (पंच-सरपंच): दूसरा चरण 30 अक्टूबर 2026, फिर 5 नवंबर और 16 नवंबर, अपने चरण के हिसाब से। पूरी समय-सारणी और अपनी पंचायत: पंचायत चुनाव 2026 →

पंचायत चुनाव में एक सवाल हर बार उठता है: अगर गांव के ज़्यादातर लोग किसी उम्मीदवार को न चुनकर नोटा पर मुहर लगा दें, तो क्या चुनाव दोबारा होगा? राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994 में इसका जवाब साफ है, और यही नियम सरपंच के चुनाव पर भी लागू होते हैं (नियम 56(3))।

वीडियो: 3 मतपत्र, सिर्फ 1 वोट गिना गया: कौन-सा?

मतपत्र पर नोटा कहां होता है

राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 जनवरी 2026 के आदेश (क्रमांक 21, सा.आ. 139/2026) में पंच और सरपंच के मतपत्र का प्रारूप तय किया है। उसके नमूने में सब उम्मीदवारों के नाम और चिन्ह के बाद, सबसे आखिरी खाना "नोटा (इनमें से कोई नहीं)" का है। इसका चिन्ह क्रॉस लगा हुआ मतपत्र है, जो आयोग ने 2018 में तय किया (आदेश 1670)।

राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश 21/2026 में सरपंच चुनाव के मतपत्र का नमूना: आखिरी खाना नोटा (इनमें से कोई नहीं), क्रॉस लगे मतपत्र के चिन्ह के साथ
सरपंच चुनाव के मतपत्र का नमूना (परिशिष्ट-3), आखिरी खाना नोटा। स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान, आदेश क्रमांक 21, दिनांक 1 जनवरी 2026

नोटा के वोट गिने जाते हैं, और नतीजे में अलग से लिखे जाते हैं

गिनती पूरी होने पर रिटर्निंग अधिकारी प्रपत्र 7 में नतीजा तैयार करता है। नियम 52(1)(c) के मुताबिक इसमें हर उम्मीदवार के वैध वोट के साथ, नोटा को मिले वैध वोटों की संख्या भी लिखी जाती है।

नियम 52(1)(c) की कटिंग: प्रपत्र 7 में हर उम्मीदवार के वोट और नोटा को मिले वोटों की संख्या
नियम 52(1)(c)(iii), (iv): "the number of valid votes cast for each candidate" और "the number of valid votes given to NOTA"। स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका

जीतता कौन है: उम्मीदवारों में सबसे ज़्यादा वोट वाला

नियम 52(1)(d) रिटर्निंग अधिकारी को कहता है कि जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा वोट मिले, उसे जीता घोषित करे। नोटा उम्मीदवार नहीं है, इसलिए वह जीत नहीं सकता। वोट बराबर हों, तो फैसला लॉटरी से होता है (नियम 51)।

नियम 52(1)(d) की कटिंग: सबसे ज़्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार को जीता घोषित किया जाएगा
नियम 52(1)(d): "declare the candidates who has secured the largest number of votes … to be elected"। स्रोत: वही पुस्तिका

उदाहरण (मान लीजिए): किसी पंचायत में नोटा को 400 वोट मिले, रमेश को 300 और सुरेश को 250। नोटा सबसे आगे है, फिर भी सरपंच रमेश बनेंगे, क्योंकि उम्मीदवारों में सबसे ज़्यादा वोट उन्हीं के हैं।

तो नोटा पर मुहर लगाने का मतलब क्या है

नोटा कुर्सी नहीं रोकता, लेकिन आपकी नाराज़गी दर्ज होती है। नियम 52(2)(i) के मुताबिक नतीजे की एक कॉपी, नोटा की गिनती समेत, पंचायत दफ्तर भेजी जाती है। यानी गांव के सामने रिकॉर्ड रहता है कि कितने लोगों ने किसी उम्मीदवार को नहीं चुना।

नियम 52(2)(i) की कटिंग: नतीजे की एक कॉपी पंचायत के दफ्तर को
नियम 52(2)(i): "One copy of the return … to the office of the Panchayat"। स्रोत: वही पुस्तिका

एक गलती, और पूरा मतपत्र खारिज हो सकता है

नियम 50(1)(ii) के मुताबिक जिस मतपत्र पर एक से ज़्यादा उम्मीदवारों पर, या किसी उम्मीदवार और नोटा दोनों पर निशान हो, वह खारिज किया जा सकता है। मुहर सिर्फ बूथ पर मिली मुहर से, और एक ही खाने में लगाइए। कौन-सा मतपत्र गिना जाता है और कौन-सा नहीं, इस पर हमारी पूरी रिपोर्ट: वोट कब खारिज होता है →

नियम 50(1)(ii) की कटिंग: एक से ज़्यादा उम्मीदवार, या उम्मीदवार और नोटा दोनों पर निशान वाला मतपत्र खारिज हो सकता है
नियम 50(1)(ii): "marking for more than one candidate or a candidate and NOTA"। स्रोत: वही पुस्तिका

इसलिए 30 अक्टूबर को बूथ पर

  • मतपत्र पूरा पढ़िए, नोटा सबसे आखिरी खाने में होगा।
  • किसी उम्मीदवार को चुनना है तो उसी के खाने में, नहीं चुनना तो सिर्फ नोटा पर मुहर लगाइए, दोनों पर नहीं।
  • याद रखिए: नोटा को सबसे ज़्यादा वोट मिलें, तब भी सबसे ज़्यादा वोट वाला उम्मीदवार ही पंच या सरपंच बनेगा।

स्रोत: राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम 1994, नियम 50(1)(ii), 51, 52(1)(c), (d), 52(2)(i), 56(3) (राज्य निर्वाचन आयोग की पुस्तिका); राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: आदेश 21/2026 (सा.आ. 139/2026, 1 जनवरी 2026, पंच-सरपंच मतपत्र का प्रारूप), आदेश 8129 (17 नवंबर 2014) और 1670 (20 अप्रैल 2018, नोटा), प्रेस नोट 9836 (3 अक्टूबर 2026) और आदेश 10090 (6 अक्टूबर 2026)। उदाहरण के नाम और आंकड़े काल्पनिक हैं। फोटो: जयपुर ग्रामीण में वोट डालने के बाद स्याही लगी उंगली दिखाती ग्रामीण महिला मतदाता, लोकसभा चुनाव 2014, भारत निर्वाचन आयोग (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स के जरिए (प्रतीकात्मक)।