सीधा जवाब: मुर्गी पालन पर केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सब्सिडी राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) में है: प्रोजेक्ट की लागत का 50%, एक बार, अधिकतम ₹25 लाख। पर यह छोटे फार्म के लिए नहीं है। यूनिट में कम से कम 1,000 पैरेंट मुर्गियां, अपनी हैचरी और चूज़े पालने की मदर यूनिट होनी चाहिए, और बाकी पैसा बैंक लोन या अपनी जेब से लगता है। आवेदन व्यक्ति, SHG, FPO, किसान सहकारी समिति, JLG या Section 8 कंपनी कर सकती है। दाना, दवा और मज़दूरी जैसे चालू खर्च पर यह सब्सिडी नहीं मिलती; उसके लिए KCC (पशुपालन) है, जिसमें ₹2 लाख तक के लोन पर बैंक गिरवी (कोलैटरल) नहीं मांगते।
आज की स्थिति (25 अक्टूबर 2026): NLM में नए प्रस्ताव अभी मंज़ूर नहीं हो रहे। केंद्र के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) ने 24 सितंबर 2026 के आदेश में कहा है कि मौजूदा NLM उद्यमिता कार्यक्रम (NLM-EDP) में अब कोई नया प्रस्ताव मंज़ूर नहीं होगा, राज्य एजेंसी या राज्य समिति के पास पड़े सभी प्रस्ताव पोर्टल पर लौटाए जाएंगे, और योजना का संशोधन चल रहा है। संशोधित दिशानिर्देश आने और पोर्टल उनके हिसाब से चालू होने पर प्रस्ताव दोबारा भेजा जा सकेगा। 25 अक्टूबर तक NLM पोर्टल पर संशोधित दिशानिर्देश नहीं आए हैं। जिनका प्रोजेक्ट 31 मार्च 2026 तक केंद्र से मंज़ूर हो चुका है, उन्हें काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करके कागज़ जमा करने हैं।
जयपुर। मुर्गी पालन के लिए सरकारी लोन और सब्सिडी की बात आते ही ₹25 लाख का आंकड़ा सामने आता है। यह रकम केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के ग्रामीण मुर्गी पालन उद्यमिता हिस्से की अधिकतम सब्सिडी है, जिसे राजस्थान में राज्य का पशुपालन विभाग लागू करता है। इसमें अंडे देने वाला पैरेंट फार्म, उन अंडों से चूज़े निकालने वाली हैचरी, और चूज़ों को 4 हफ्ते तक पालने वाली मदर यूनिट, तीनों एक साथ चाहिए। यानी यह गांव के मुर्गी पालकों को चूज़े सप्लाई करने वाले कारोबार की योजना है, 100-200 मुर्गियों के घरेलू फार्म की नहीं। बकरी पालन की यूनिट भी इसी योजना में है (बकरी पालन लोन व सब्सिडी)। नीचे मुर्गी पालन की हर शर्त NLM के संशोधित दिशानिर्देश (जनवरी 2025) और DAHD के 2026 के आदेशों की कॉपी के साथ है।
मुर्गी पालन सब्सिडी: एक नज़र में
| NLM ग्रामीण मुर्गी पालन उद्यमिता | |
|---|---|
| क्या बनाना है | पैरेंट फार्म + ग्रामीण हैचरी + ब्रूडर-कम-मदर यूनिट |
| न्यूनतम आकार | 1,000 पैरेंट लेयर (मानक यूनिट: 1,000 मादा + 100 नर) |
| नस्ल | लो इनपुट टेक्नोलॉजी वाली, खुले में पलने वाली नस्लें |
| सब्सिडी | कुल प्रोजेक्ट लागत का 50%, एक बार, अधिकतम ₹25 लाख प्रति यूनिट |
| कौन आवेदन कर सकता है | व्यक्ति, SHG, FPO, किसान सहकारी (FCO), JLG, Section 8 कंपनी |
| बाकी पैसा | बैंक या NCDC जैसी संस्था का लोन, या अपना पैसा (तब 3 साल की बैंक गारंटी) |
| अपना हिस्सा | प्रोजेक्ट लागत का कम से कम 10% मार्जिन मनी |
| सब्सिडी किसमें नहीं | चालू खर्च (वर्किंग कैपिटल), निजी वाहन, ज़मीन खरीद, किराया या लीज़ |
| अभी की स्थिति | 24.09.2026 से नए प्रस्ताव मंज़ूर नहीं, योजना का संशोधन जारी |
1. यूनिट कैसी होनी चाहिए: 1,000 पैरेंट मुर्गियां, हैचरी और मदर यूनिट
NLM के दिशानिर्देश में मुर्गी पालन का हिस्सा "ग्रामीण मुर्गी पालन की नस्ल सुधार के लिए उद्यमी" के नाम से है। इसमें केंद्र सरकार पैरेंट फार्म, ग्रामीण हैचरी और मदर यूनिट वाले प्रोजेक्ट की लागत पर 50% पूंजीगत सब्सिडी देती है, और शर्त है कम से कम 1,000 पैरेंट लेयर (अंडा देने वाली मुर्गियां)। पैरेंट फार्म की मुर्गियां लो इनपुट टेक्नोलॉजी वाली होनी चाहिए, यानी ऐसी नस्लें जो खुले में चरकर पल सकें।

दिशानिर्देश के अनुबंध-I में मानक यूनिट का सामान लिखा है। पैरेंट फार्म: 1,100 पैरेंट पक्षी (1,000 मादा + 100 नर), जिनसे रोज़ करीब 500 हैचिंग अंडे मिलें; 30x100 फुट (3,000 वर्ग फुट) का शेड, 2 इलेक्ट्रिक ब्रूडर और दाना-पानी के बर्तन। हैचरी: 3,000 वर्ग फुट का भवन, 15,000 अंडों का इनक्यूबेटर, 5,000 अंडों का हैचर और 15 KVA का जनरेटर, ताकि हर हफ्ते 3,000 अंडों से 2,250 एक दिन के चूज़े निकलें। मदर यूनिट: 20x50 फुट के 4 शेड (कुल 4,000 वर्ग फुट) और 6 ब्रूडर, जहां चूज़े 4 हफ्ते तक पलते हैं।
नस्लें कहां से मिलें, इसकी सूची दिशानिर्देश के अनुबंध-IX में है: सरकारी संस्थानों की वनराजा और ग्रामप्रिया (ICAR, हैदराबाद), कैरी गोल्ड (केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर), कलिंगा ब्राउन (केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन; इसके मुंबई केंद्र पर कड़कनाथ भी), और कुछ निजी संस्थाओं की कुरोइलर जैसी नस्लें। विभाग यह सूची बदल सकता है।
2. सब्सिडी कितनी और किसे: 50%, अधिकतम ₹25 लाख
सब्सिडी कुल प्रोजेक्ट लागत का 50% है, एक बार मिलती है, और एक यूनिट पर ₹25 लाख से ज़्यादा नहीं हो सकती। आवेदन अकेला व्यक्ति भी कर सकता है और स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान सहकारी संस्था (FCO), संयुक्त देयता समूह (JLG) या Section 8 कंपनी भी।

सब्सिडी सिर्फ पूंजीगत खर्च पर है: शेड, ब्रूडर, इनक्यूबेटर, हैचर, जनरेटर, बर्तन और पैरेंट पक्षी। NLM पोर्टल के मॉडल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में भी साफ लिखा है कि सब्सिडी पूंजीगत लागत का 50% है, जबकि पहले साल का दाना, मज़दूरी, बिजली-पानी जैसा खर्च प्रोजेक्ट की कुल लागत में तो जुड़ता है पर सब्सिडी में नहीं।

3. पात्रता: ट्रेनिंग या अनुभव, ज़मीन और 10% अपना हिस्सा
दिशानिर्देश की पात्रता सूची में ये बातें हैं: आवेदक ने इस काम की ट्रेनिंग ली हो, या उसके साथ ट्रेंड विशेषज्ञ हों, या उसे फार्म चलाने का पर्याप्त अनुभव हो; बैंक से प्रोजेक्ट का लोन मंज़ूर हो, या खुद पैसा लगाने पर बैंक गारंटी हो; प्रोजेक्ट की जगह अपनी ज़मीन हो या लीज़ पर ली हुई (FPO, FCO, SHG, JLG के लिए अलग प्रक्रिया तय होनी है); प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कम से कम 3 साल चलाने की क्षमता; KYC के सभी कागज़; और प्रोजेक्ट लागत का कम से कम 10% मार्जिन मनी देने की क्षमता।

NLM पोर्टल की FAQ के अनुसार आवेदन के साथ ये कागज़ अपलोड होते हैं: प्रोजेक्ट में अपने हिस्से का सबूत, जुड़े किसानों की सूची, पते का सबूत, पिछले 3 साल का इनकम टैक्स रिटर्न, 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट, PAN और आधार, जाति प्रमाण पत्र (अगर लागू हो), ट्रेनिंग और अनुभव प्रमाण पत्र, फोटो और हस्ताक्षर। कंपनी हो तो 3 साल का ऑडिट किया हिसाब भी। FAQ के अनुसार कागज़ हाथ से जमा करने की ज़रूरत नहीं, सब पोर्टल पर अपलोड होते हैं; बस अपने पैसे वाले प्रोजेक्ट में बैंक गारंटी की मूल कॉपी राज्य एजेंसी के पास रखी जाती है।
4. लोन, बैंक गारंटी और सब्सिडी की दो किस्तें
बाकी पैसा तीन तरह से जुटा सकते हैं: किसी भी शेड्यूल्ड बैंक से लोन, NCDC जैसी वित्तीय संस्था से लोन, या अपना पैसा। ब्याज दर और गिरवी (कोलैटरल) बैंक तय करता है, योजना नहीं। अपना पैसा लगाने पर भी बैंक प्रोजेक्ट की जांच करता है, और आवेदक को बाकी लागत (सब्सिडी से ऊपर का हिस्सा) की 3 साल वैध बैंक गारंटी DAHD के नाम देनी होती है।
सब्सिडी सीधे आवेदक के हाथ में नहीं आती। केंद्र की समिति (PAC) मंज़ूरी देती है, फिर पैसा SIDBI के ज़रिए उस बैंक में जाता है जिसने लोन दिया है। पहली किस्त तब, जब बैंक मंज़ूर लोन का कम से कम 25% जारी कर दे (अपने पैसे वाले प्रोजेक्ट में जब आवेदक 25% खर्च कर दे और राज्य एजेंसी जांच ले)। दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होकर चालू होने के बाद।

सब्सिडी लेकर प्रोजेक्ट बंद नहीं कर सकते। दिशानिर्देश के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा न हो, या व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के 3 साल के अंदर बंद हो जाए, तो DAHD सब्सिडी वापस ले सकता है, और वसूली 10% सालाना ब्याज के साथ होती है।
5. 2026 में क्या बदला: पुराने प्रोजेक्ट की समय-सीमा, नए पर रोक
15 अप्रैल 2026 का आदेश: DAHD ने राज्यों से कहा कि राज्य समिति (SLEC) के पास पड़े प्रोजेक्ट में से सिर्फ चारा, ग्रामीण मुर्गी पालन, सूअर, ऊंट और घोड़े वाले प्रोजेक्ट 30 अप्रैल 2026 तक केंद्र को भेजे जाएं। इनकी सब्सिडी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद एक ही किस्त में मिलेगी, और दावा 31 दिसंबर 2026 तक करना होगा, नहीं तो प्रोजेक्ट रद्द।

24 सितंबर 2026 का आदेश: मौजूदा NLM-EDP में कोई नया प्रस्ताव मंज़ूर नहीं होगा। राज्य एजेंसी (SIA) या SLEC के स्तर पर पड़े सारे प्रस्ताव पोर्टल पर लौटाए जाएंगे, और भेड़-बकरी के वे प्रोजेक्ट भी जो केंद्र की समिति के पास थे। योजना का संशोधन चल रहा है; संशोधित दिशानिर्देश जारी होने और पोर्टल उनके हिसाब से चालू होने पर आवेदक प्रस्ताव दोबारा भेज सकते हैं। यह आदेश स्कैन की हुई कॉपी है: DAHD OM, 24.09.2026 (NLM पोर्टल)।
पोर्टल की सूचना: NLM पोर्टल के होम पेज पर लिखा है कि 2022-23 से 2025-26 के बीच पहली किस्त पाने वाले, और 31 मार्च 2026 तक मंज़ूर पर बिना किस्त वाले, दोनों तरह के लाभार्थी 31 दिसंबर 2026 तक प्रोजेक्ट पूरा करके कागज़ जमा करें; इसके बाद समय नहीं बढ़ेगा। ऐसा न करने पर प्रोजेक्ट रद्द हो सकता है, और पहली किस्त ले चुके लाभार्थी को वह रकम 10% सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी।
आगे क्या: केंद्रीय बजट 2026-27 (1 फरवरी 2026) के भाषण के पैरा 77 में पशुपालन में उद्यमिता के लिए "क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम" और पशुधन, डेयरी व पोल्ट्री पर केंद्रित वैल्यू चेन की घोषणा थी। यह नया कार्यक्रम NLM के संशोधित रूप में आएगा या अलग, सब्सिडी कितनी होगी और न्यूनतम यूनिट क्या होगी, इसका आधिकारिक आदेश 25 अक्टूबर 2026 तक नहीं आया है। इसलिए ऊपर की सारी शर्तें अभी तक लागू दिशानिर्देश की हैं, और नए दिशानिर्देश में बदल सकती हैं।
6. छोटे मुर्गी पालक: KCC (पशुपालन) से चालू खर्च का लोन
100-500 मुर्गियों के फार्म के लिए NLM की यह सब्सिडी नहीं है। ऐसे पालकों का सरकारी रास्ता किसान क्रेडिट कार्ड (पशुपालन) है। RBI के 4 फरवरी 2019 के परिपत्र के अनुसार KCC पशु, पक्षी और मछली पालन की अल्पकालिक ज़रूरत के लिए है; पात्र लोगों में अपने, किराए या लीज़ के शेड वाले मुर्गी पालक शामिल हैं, और लोन दाना, पशु चिकित्सा, मज़दूरी, पानी और बिजली के खर्च के लिए होता है।
- ब्याज: RBI के 13 जनवरी 2026 के परिपत्र के अनुसार 2025-26 में KCC पर किसान से 7% ब्याज, और समय पर चुकाने वाले को 3% की अतिरिक्त छूट, यानी असल में 4%। यह छूट कुल ₹3 लाख तक के लोन पर है, और जो किसान सिर्फ पशुपालन, डेयरी या मछली पालन करते हैं उनके लिए ₹2 लाख तक। 2026-27 के लिए RBI का नया परिपत्र 25 अक्टूबर 2026 तक हमें नहीं मिला, इसलिए इस साल की दर बैंक शाखा से पूछ लें।
- गारंटी: RBI के 6 दिसंबर 2024 के परिपत्र के अनुसार 1 जनवरी 2025 से खेती और उससे जुड़े कामों के ₹2 लाख तक के लोन पर बैंक गिरवी (कोलैटरल) और मार्जिन नहीं मांगेंगे।
- आवेदन: अपने बैंक की शाखा में। किसान पहचान पत्र साथ रखना काम आता है: Farmer ID कैसे बनाएं।
जनजातीय पट्टाधारकों के लिए छोटी यूनिट: इन्हीं NLM दिशानिर्देशों के अनुबंध-XVII में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JUGA) के तहत वन अधिकार कानून (FRA) में पट्टा पाने वाले अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए 200 मुर्गियों की अंडा यूनिट पर 90% तक, अधिकतम ₹50,000 की सहायता लिखी है (100 मुर्गियों की छोटी यूनिट का भी प्रावधान है)। इसमें लाभार्थी खुद आवेदन नहीं करता; ज़िले की संयुक्त समिति, जिसकी अगुवाई जनजातीय विभाग करता है, सूची बनाती है। राजस्थान में इस अभियान की इस साल की लाभार्थी सूची हमें नहीं मिली।
7. उदाहरण: सब्सिडी, बैंक लोन और अपना हिस्सा
दिशानिर्देश हर यूनिट की तय लागत नहीं लिखते; असली लागत आपकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट से तय होती है, जिसे बैंक और राज्य एजेंसी जांचते हैं। नीचे की लागत सिर्फ हिसाब समझाने के लिए मानी गई है, और बंटवारा NLM पोर्टल के मॉडल DPR के ढांचे पर है: सब्सिडी 50%, अपना हिस्सा 10%, बाकी बैंक लोन।
| पूंजीगत लागत ₹40 लाख | पूंजीगत लागत ₹60 लाख | |
|---|---|---|
| 50% सब्सिडी | ₹20 लाख | ₹30 लाख बनती, पर सीमा ₹25 लाख, तो ₹25 लाख |
| अपना हिस्सा (कम से कम 10%) | ₹4 लाख | ₹6 लाख |
| बैंक लोन (बाकी) | ₹40 − 20 − 4 = ₹16 लाख | ₹60 − 25 − 6 = ₹29 लाख |
| पहली किस्त कब | बैंक ₹4 लाख (लोन का 25%) जारी करे, तब ₹10 लाख | बैंक ₹7.25 लाख (लोन का 25%) जारी करे, तब ₹12.5 लाख |
| दूसरी किस्त | प्रोजेक्ट चालू होने पर ₹10 लाख | प्रोजेक्ट चालू होने पर ₹12.5 लाख |
₹50 लाख से ऊपर की हर अतिरिक्त लागत पूरी की पूरी आपकी या बैंक की है, क्योंकि सब्सिडी ₹25 लाख पर रुक जाती है। दाना, दवा और मज़दूरी का पहले साल का खर्च इस तालिका से अलग जोड़ना होगा, उस पर सब्सिडी नहीं। और ध्यान रहे, 15 अप्रैल 2026 के आदेश वाले लंबित प्रोजेक्ट में सब्सिडी दो किस्तों की जगह पूरा होने के बाद एक ही किस्त में मिलनी है।
8. आवेदन कैसे होता था, और अभी क्या करें
मौजूदा दिशानिर्देश और NLM पोर्टल के "Application Steps" के अनुसार तरीका यह था। संशोधित योजना में यह बदल सकता है।
- nlm.udyamimitra.in पर मोबाइल नंबर और OTP से रजिस्ट्रेशन, फिर ऑनलाइन आवेदन, प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और कागज़ अपलोड।
- राज्य एजेंसी (राजस्थान में पशुपालन विभाग) आवेदन जांचकर बैंक को लोन के लिए सिफारिश करती है।
- बैंक लोन मंज़ूर करके मंज़ूरी पत्र पोर्टल पर डालता है।
- राज्य समिति (SLEC) प्रस्ताव केंद्र को भेजती है, और DAHD की समिति (PAC) सब्सिडी मंज़ूर करती है।
- बैंक लोन जारी करता है, और सब्सिडी SIDBI के ज़रिए उसी बैंक में आती है। आवेदन की स्थिति पोर्टल के TRACK STATUS से दिखती है।
अभी (25 अक्टूबर 2026) क्या करें: नया प्रस्ताव पोर्टल पर भेजने से मंज़ूरी नहीं मिलेगी, इसलिए ज़मीन, ट्रेनिंग प्रमाण पत्र, 10% मार्जिन का इंतज़ाम और प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार रखें। आपका प्रस्ताव लौटा दिया गया है तो उसके कागज़ संभालकर रखें, क्योंकि आदेश के अनुसार संशोधित दिशानिर्देश आने पर प्रस्ताव उन्हीं के हिसाब से दोबारा भेजा जा सकेगा। मुर्गी पालन के लिए राजस्थान सरकार की अपनी अलग सब्सिडी योजना का कोई आधिकारिक आदेश हमें नहीं मिला। राजस्थान में NLM की राज्य एजेंसी पशुपालन विभाग है; उसके नोडल अधिकारियों के फोन और ईमेल NLM पोर्टल के Contact Us पेज पर हैं, और पोर्टल की तकनीकी दिक्कत के लिए हेल्प डेस्क का ईमेल nlm.support@sidbi.in है।
9. आम गलतियां
- "₹25 लाख का लोन मिलेगा" मान लेना: ₹25 लाख अधिकतम सब्सिडी है, लोन नहीं, और वह भी कम से कम ₹50 लाख की पूंजीगत लागत वाले प्रोजेक्ट पर ही पूरी बनती है।
- छोटे या ब्रॉयलर फार्म के लिए NLM में आवेदन: इस हिस्से में सिर्फ 1,000 पैरेंट लेयर, हैचरी और मदर यूनिट वाला प्रोजेक्ट है, और पैरेंट फार्म में लो इनपुट टेक्नोलॉजी नस्लें चाहिए। सिर्फ ब्रॉयलर या पिंजरे वाले अंडा फार्म का अलग घटक इन दिशानिर्देशों में नहीं है।
- ज़मीन का पैसा सब्सिडी में जोड़ना: ज़मीन खरीद, किराया और लीज़ सब्सिडी से बाहर हैं, पर ज़मीन (अपनी या लीज़ की) होना ज़रूरी है।
- चालू खर्च भूल जाना: दाना और मज़दूरी सब्सिडी में नहीं हैं; इसके लिए अलग से KCC या अपना पैसा चाहिए।
- 3 साल से पहले फार्म बंद करना: सब्सिडी 10% सालाना ब्याज के साथ वापस देनी पड़ सकती है।
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स्रोत: राष्ट्रीय पशुधन मिशन के संशोधित समेकित दिशानिर्देश (जनवरी 2025), पैरा 5.3, 5.5, 5.14, गतिविधि-I, अनुबंध I, IX और XVII; DAHD कार्यालय ज्ञापन 15 अप्रैल 2026 और 24 सितंबर 2026; NLM पोर्टल का होम पेज, FAQ, Application Steps, मॉडल DPR और Contact Us (25 अक्टूबर 2026); केंद्रीय बजट 2026-27 का भाषण, पैरा 77; RBI परिपत्र RBI/2025-26/193 (13 जनवरी 2026), RBI/2018-19/112 (4 फरवरी 2019) और RBI/2024-2025/96 (6 दिसंबर 2024)। कवर फोटो: नमक्कल (तमिलनाडु) का एक मुर्गी फार्म (2010), Matthew T Rader, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 4.0; यह पिंजरे वाला अंडा फार्म है, NLM की यूनिट नहीं। Rajasthan365 सरकारी वेबसाइट नहीं है; आवेदन से पहले NLM पोर्टल और पशुपालन विभाग से ताज़ा स्थिति पूछ लें।







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