🌾 सीधा जवाब (7 अगस्त 2026): राजस्थान में कोई नई मूलधन कर्ज-माफी घोषित नहीं हुई है — वायरल '₹2 लाख माफ' वाले मैसेज राजस्थान के नहीं हैं। असली और काम की चीज है मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत (एकमुश्त समझौता) योजना: सहकारी/भूमि विकास बैंक के डिफॉल्टर किसान मूलधन चुकाएं तो 100% बकाया ब्याज-पेनल्टी माफ। विंडो 30 जून 2026 तक बढ़ी थी — ताजा स्थिति अपनी समिति/बैंक से पूछें। पुरानी 2018-19 माफी की लिस्ट देखने का तरीका भी नीचे है।
जयपुर। 'कर्ज माफी' राजस्थान के गांवों में सबसे ज्यादा खोजा और सबसे ज्यादा भुनाया जाने वाला शब्द है — हर कुछ महीने में कोई वायरल मैसेज, कोई फर्जी लिस्ट। इस पेज पर तीन काम की चीजें हैं: जो योजना सच में चल रही है उसका फायदा लेने का तरीका, पुरानी माफी का रिकॉर्ड देखने का पता, और झूठ पहचानने की कसौटी।
असली योजना: अवधिपार ब्याज राहत (OTS) — किसके लिए, क्या मिलता है
- किसके लिए: सहकारी बैंकों (PACS/जिला सहकारी) और भूमि विकास बैंकों के वे किसान सदस्य जिनके ऋण खाते अवधिपार (डिफॉल्ट) हो चुके हैं — तय कट-ऑफ तिथि (1 जुलाई 2024 की स्थिति) के बकायेदार।
- क्या मिलता है: समझौते के तहत मूलधन चुकाने पर बकाया ब्याज, दंडनीय ब्याज और वसूली खर्च में शत-प्रतिशत राहत — यानी सालों का चढ़ा ब्याज शून्य।
- असली फायदा सिर्फ माफी नहीं: खाता नियमित होते ही किसान नई फसल-ऋण लाइन के पात्र बन जाते हैं — डिफॉल्टर रहते यह दरवाजा बंद रहता है।
- विंडो: योजना 2025-26 की अवधि बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए 30 जून 2026 तक बढ़ाई गई थी। उसके बाद के विस्तार की आधिकारिक पुष्टि हमें नहीं मिली — अपनी समिति/बैंक शाखा से मौजूदा स्थिति जरूर पूछें; ऐसे समझौता-विंडो अक्सर आगे बढ़ते रहे हैं। नई घोषणा होते ही यह पेज अपडेट होगा।
फायदा लेने के 3 स्टेप
- 1. अपनी ग्राम सेवा सहकारी समिति (PACS) या जिला सहकारी/भूमि विकास बैंक शाखा जाएं — खाते का बकाया-विवरण (मूलधन बनाम ब्याज) निकलवाएं।
- 2. समझौता-पत्र (OTS) पर मूलधन जमा करने की सहमति दें — एकमुश्त या बैंक की तय व्यवस्था से।
- 3. जमा की रसीद और 'खाता नियमित' होने का प्रमाण संभालें — यही अगली KCC/फसल-ऋण की चाबी है।
पुरानी कर्ज माफी (2018-19) की लिस्ट कैसे देखें
- सहकारिता विभाग का ऋण माफी पोर्टल — lwa.rajasthan.gov.in — पर जिला → बैंक → समिति चुनकर लाभार्थियों की सूची देखी जा सकती है।
- उस दौर में जिनकी माफी सत्यापन में अटकी रह गई थी, वे समिति में जाकर अपने आवेदन/आधार-सत्यापन की स्थिति पूछें — कई मामले सिर्फ बायोमेट्रिक न होने से लटके थे।
- राष्ट्रीयकृत (SBI, PNB जैसे) बैंकों का कर्ज उस माफी में शामिल नहीं था — यह भ्रम आज भी सबसे आम है; वह माफी सहकारी क्षेत्र की थी।
झूठ पहचानने की कसौटी
- '₹2 लाख माफ', '₹50,000 प्रोत्साहन' जैसे आंकड़े दूसरे राज्यों की योजनाओं से उठाए जाते हैं — राजस्थान की घोषणा सिर्फ सरकारी विज्ञप्ति/बजट भाषण से मानें।
- 'कर्ज माफी लिस्ट 2026 में नाम चेक करें' वाली प्राइवेट वेबसाइटें ट्रैफिक-दुकानें हैं — असली रिकॉर्ड सिर्फ lwa पोर्टल और आपकी समिति के पास है।
- माफी के नाम पर फीस, OTP या बैंक विवरण मांगना = ठगी; कर्ज-राहत का हर वैध काम बैंक शाखा में, रसीद के साथ होता है।
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