🐄 सीधा जवाब (8 अगस्त 2026): मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में पशुपालक से एक रुपया प्रीमियम नहीं लिया जाता — पूरा खर्च सरकार उठाती है। बीमा सीमा: गाय, भैंस और ऊंट ₹40,000 तक; बकरी और भेड़ ₹4,000 तक। शर्तें दो — जन आधार और पशु के कान में टैग। आवेदन mmpby2526.rajasthan.gov.in / MMPBY ऐप / ई-मित्र से। पर एक जरूरी सावधानी: 2026-27 के नए राउंड की कोई सरकारी अधिसूचना अब तक नहीं है और क्लेम भुगतान की रफ्तार सुस्त रही है — दोनों बातें नीचे आंकड़ों के साथ।
जयपुर। राजस्थान के लाखों घरों में गाय-भैंस सिर्फ पशु नहीं, चलती-फिरती पूंजी है — और उसकी मौत एक झटके में परिवार को कर्ज में धकेल देती है। मंगला पशु बीमा योजना इसी झटके के खिलाफ ढाल है, वह भी बिना प्रीमियम। योजना की तारीफ हर जगह छपी है; यह पेज तारीफ के साथ वह हिस्सा भी बताता है जो आमतौर पर नहीं छपता — कि पॉलिसी बनने और क्लेम मिलने के बीच फासला कितना है।
कितने का बीमा, किस पशु का
| पशु | अधिकतम बीमा राशि | उम्र सीमा |
|---|---|---|
| दुधारू गाय | ₹40,000 | 3 से 12 वर्ष |
| दुधारू भैंस | ₹40,000 | 4 से 12 वर्ष |
| ऊंट | ₹40,000 | 2 से 15 वर्ष |
| बकरी (मादा) | ₹4,000 | 1 से 6 वर्ष |
| भेड़ (मादा) | ₹4,000 | 1 से 6 वर्ष |
राशि पशु के प्रचलित बाजार मूल्य के हिसाब से तय होती है (नस्ल, उम्र, दूध उत्पादन और सेहत देखकर) — ऊपर दी गई रकम अधिकतम सीमा है, हर पशु पर उतनी ही मिलेगी, यह जरूरी नहीं।
पात्रता और परिवार की सीमा
- जन आधार कार्ड धारक पशुपालक ही पात्र हैं।
- ईयर टैगिंग अनिवार्य — बीमा से पहले पशु के कान में टैग लगा होना चाहिए; टैग गिर जाए तो एक दिन के भीतर विभाग को सूचित कर दोबारा लगवाना जरूरी है। टैग के बिना न पॉलिसी बनती है, न क्लेम।
- प्रति परिवार सीमा: अधिकतम 2 दुधारू गाय, या 2 भैंस, या 1 गाय + 1 भैंस, या 10 बकरी, या 10 भेड़।
- ऊंट पर सावधानी: विभाग के दो पोर्टलों पर ऊंट की संख्या अलग-अलग लिखी है (एक जगह 1, दूसरी जगह 10) — इसलिए हम कोई एक आंकड़ा नहीं छाप रहे; ऊंट पालक 0141-2742709 पर पुष्टि कर लें।
- 2025-26 राउंड में चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर है (2024-25 में लॉटरी थी), जिसमें गोपाल क्रेडिट कार्ड धारक, लखपति दीदी और पिछली प्रतीक्षा सूची को प्राथमिकता तथा SC को 16% व ST को 12% स्थान आरक्षित हैं।
आवेदन कहां करें — और आज की स्थिति
- पोर्टल: mmpby2526.rajasthan.gov.in का सर्वे फॉर्म · ऐप: MMPBY मोबाइल ऐप · ऑफलाइन: नजदीकी ई-मित्र कियोस्क।
- ईमानदार चेतावनी: 8 अगस्त 2026 तक वित्त वर्ष 2026-27 के नए राउंड की कोई सरकारी अधिसूचना नहीं मिली है। 2025-26 का पोर्टल चालू दिख रहा है और उस पर 'पंजीकरण बंद' जैसा कोई सूचना-पट्ट नहीं है — पर विभाग का अपना नियम है कि लक्ष्य पूरा होते ही पंजीकरण अपने आप बंद हो जाता है। इसलिए घर से निकलने से पहले उसी दिन पोर्टल देख लें या फोन कर लें।
- जो वेबसाइटें 'अंतिम तिथि 22 जनवरी' जैसी तारीखें आज भी दिखा रही हैं, वे 2024-25 वाले पहले राउंड की पुरानी तारीखें दोहरा रही हैं — उन्हें मौजूदा डेडलाइन न समझें।
क्लेम की प्रक्रिया — और 21 दिन वाले दो अलग नियम
- प्रतीक्षा अवधि: पॉलिसी बनने के बाद 21 दिन तक बीमारी से हुई मृत्यु कवर नहीं होती; दुर्घटना से मृत्यु पहले दिन से कवर है।
- प्रक्रिया: पशु की मृत्यु की सूचना → बीमा कंपनी प्रतिनिधि का सर्वे → सरकारी पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम (यह चरण छूटा तो क्लेम अटकना तय है) → सॉफ्टवेयर में प्रविष्टि → 21 कार्यदिवस में भुगतान।
- योजना का संचालन राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग (SIPF) ट्रस्ट मोड में करता है।
- हेल्पलाइन: सीएम हेल्पलाइन 181 · SIPF 0141-2740219 · पशुपालन विभाग 0141-2742709।
जमीनी हकीकत: पॉलिसी बनना और पैसा मिलना दो अलग बातें हैं
यह हिस्सा वह है जो योजना की प्रचार-सामग्री में नहीं मिलता, पर पशुपालक के लिए सबसे काम का है।
- विधानसभा में 26 फरवरी 2026 को पशुपालन मंत्री के जवाब के अनुसार: 42 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 31,10,743 आवेदन आए, 27,53,656 वैध पाए गए, और पॉलिसी 16,24,567 पशुओं की जारी हुईं — 5,97,202 आवेदन लंबित और 5,31,887 निरस्त।
- पत्रिका की 12 मई 2026 की पड़ताल के अनुसार दोनों वर्षों में 35,32,455 पशु पंजीकृत हुए पर पॉलिसी सिर्फ 20,52,643 की बनी — यानी पंजीकृत पशुओं में से लगभग 58% को ही कवर मिला।
- सबसे अहम आंकड़ा — 10 मई 2026 तक 46,755 बीमित पशुओं की मृत्यु पर क्लेम लगे, पर निपटे सिर्फ 16,962। यानी करीब 29,800 क्लेम लंबित। साल-वार देखें तो 2024-25 के 37,009 में से 16,842 का भुगतान हुआ, जबकि 2025-26 के 9,746 क्लेम में से सिर्फ 120 का। (ये आंकड़े 10 मई 2026 तक के हैं; उसके बाद की स्थिति की पुष्टि हमें नहीं मिली।)
- यह भी सच है कि योजना जमीन पर चल रही है — जुलाई 2026 में भी शिविरों में मुफ्त पॉलिसियां बंटीं और श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) के एक पशुपालक को ₹33,000 क्लेम मिलने की खबर आई।
इसका मतलब क्या निकालें? बीमा जरूर कराएं — मुफ्त है और नुकसान की भरपाई का इकलौता रास्ता है। पर उम्मीद यथार्थ के साथ रखें, और अपनी तरफ की तीन चीजें कभी न छोड़ें: टैग सलामत, मृत्यु पर तुरंत सूचना, और सरकारी पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम। क्लेम रुके तो 181 पर शिकायत दर्ज कराकर संपर्क पोर्टल की शिकायत ID बनवा लें — लिखित शिकायत का जवाब देना विभाग की मजबूरी है।
पशुपालकों और किसानों के और काम के पेज: फसल बीमा क्लेम — 72 घंटे वाला नियम, किसान कर्ज माफी का सच और ब्याज-राहत योजना, तारबंदी सब्सिडी और क्लेम का पैसा किस खाते में आएगा — 2 मिनट की जांच।






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