🖥️ सीधा जवाब (7 अगस्त 2026): ई-मित्र कियोस्क खोलने के लिए चाहिए — 18+ उम्र, 10वीं पास, कंप्यूटर सेटअप, SSO ID और पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र। कियोस्क ID सीधे सरकार नहीं देती — आवेदन आपके जोन के अधिकृत LSP (सेवा प्रदाता कंपनी) के जरिए होता है (सूची emitra.rajasthan.gov.in पर)। एकमुश्त लागत मोटे तौर पर ₹40,000-70,000 (सेटअप + LSP सिक्योरिटी), कमाई प्रति-काम कमीशन से। 'लाखों में ID दिलाने' वाले दलालों से बचिए — पूरा गणित नीचे।
जयपुर। राजस्थान में सरकारी सेवाओं का असली काउंटर सचिवालय नहीं, गली का ई-मित्र है — प्रमाण पत्र, बिल, भर्ती फॉर्म, जन आधार, सब वहीं। इसीलिए हर कस्बे के युवाओं की सूची में यह सवाल ऊपर रहता है: अपना ई-मित्र कैसे खोलें? प्रक्रिया आसान है, पर बीच में दलालों की परत है — यह पेज सीधा रास्ता दिखाता है।
पहले जांचें: पात्रता और जरूरी सामान
| शर्त | ब्योरा |
|---|---|
| उम्र | 18 वर्ष या अधिक |
| पढ़ाई | कम से कम 10वीं पास; कंप्यूटर चलाना आना जरूरी |
| जगह | अपनी/किराए की दुकान या बैठक — भीड़ वाली जगह हो तो कमाई सीधी बढ़ती है |
| सेटअप | कंप्यूटर/लैपटॉप, प्रिंटर-स्कैनर, बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) डिवाइस, वेबकैम, इंटरनेट |
| दस्तावेज | आधार, PAN, 10वीं मार्कशीट, पते का प्रमाण, फोटो, बैंक विवरण, पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र, SSO ID |
आवेदन का असली रास्ता — LSP मॉडल समझिए
- ई-मित्र नेटवर्क सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT&C) चलाता है, पर कियोस्क ID जोन-वार अधिकृत निजी कंपनियों (LSP) के जरिए मिलती है — यही एक बात न जानने से लोग दलालों के हाथ पड़ते हैं।
- स्टेप 1: SSO ID बनाएं — कियोस्क का पूरा काम इसी लॉगिन से चलेगा।
- स्टेप 2: emitra.rajasthan.gov.in पर अपने जिले/जोन के अधिकृत LSP की सूची देखें — सिर्फ इसी सूची की कंपनी से बात करें।
- स्टेप 3: LSP को दस्तावेज दें, लिखित अनुबंध करें और सिक्योरिटी/पंजीकरण राशि की रसीद लें।
- स्टेप 4: सत्यापन और बुनियादी ट्रेनिंग के बाद कियोस्क ID चालू — पोर्टल पर सेवाएं, वॉलेट और कमीशन डैशबोर्ड मिल जाता है।
खर्च और कमाई — ईमानदार गणित
- एकमुश्त: कंप्यूटर-प्रिंटर-बायोमेट्रिक-फर्नीचर मिलाकर आम तौर पर ₹40,000-70,000 (पुराने उपकरणों से कम में भी शुरू होता है); LSP की सिक्योरिटी/पंजीकरण राशि कुछ हजार में — कंपनी-दर-कंपनी अलग, इसलिए रसीद अनिवार्य।
- चालू खर्च: इंटरनेट, बिजली, कागज-स्याही, किराया।
- आमदनी: हर लेनदेन (प्रमाण पत्र आवेदन, बिल भुगतान, भर्ती फॉर्म, जन आधार अपडेट…) पर तय कमीशन — यानी कमाई सीधे काम की गिनती से। भर्ती फॉर्म के सीजन (जैसे बड़ी भर्तियों के महीने) कियोस्कों के सबसे कमाऊ दिन होते हैं।
- सच्चाई भी: यह दुकान जैसा धंधा है — जगह, भरोसा और सेवा-स्पीड से चलता है; 'ID लेते ही बैठी कमाई' का दावा झूठ है।
तीन नियम जो ID बचाकर रखेंगे
- रेट-लिस्ट लगाएं और तय शुल्क ही लें — ज्यादा वसूली की शिकायत पर ID निलंबित/रद्द होती है।
- हर काम की रसीद दें — विवाद में यही आपका बचाव है।
- ग्राहक के OTP/दस्तावेजों का दुरुपयोग सीधी FIR का मामला है — आधार-जुड़े कामों में सावधानी सबसे ज्यादा।
दलाल-पहचान: तीन लाल झंडे
- 'सरकारी कोटे से ID दिला दूंगा' — ई-मित्र में कोई कोटा नहीं होता; रास्ता सिर्फ LSP सूची है।
- ₹50,000+ की 'रजिस्ट्रेशन फीस' — असली LSP राशि इसकी तुलना में छोटी है; बड़ा आंकड़ा सुनते ही हटें।
- बिना लिखित अनुबंध पैसा मांगना — अनुबंध और रसीद के बिना दिया पैसा वापसी का कोई रास्ता नहीं छोड़ता।
काम आने वाले और पेज: पीएम विश्वकर्मा — 18 पारंपरिक कामों को टूलकिट व सस्ता लोन, ई-श्रम कार्ड और 181/संपर्क पोर्टल पर शिकायत का तरीका।






💬 टिप्पणियाँ
इस खबर पर अपनी राय साझा करें। कृपया शालीन भाषा का प्रयोग करें।
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आप कीजिए!