🏞️ सीधा जवाब (2 अगस्त 2026): राजस्थान में जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) अब बिना तहसील के चक्कर लगाए apnakhata.rajasthan.gov.in से ऑनलाइन हो जाता है — आवेदन पर टोकन नंबर मिलता है और स्थिति भी वहीं दिखती है। याद रखें: रजिस्ट्री से हक मिलता है, पर जमाबंदी में नाम नामांतरण से ही चढ़ता है — और विरासत के केस में पहला दस्तावेज मृत्यु प्रमाण पत्र है।
जयपुर। जमीन खरीद ली, रजिस्ट्री भी हो गई — पर जमाबंदी निकाली तो नाम पुराने मालिक का। या पिता के जाने के बाद खेत आज भी उन्हीं के नाम चल रहा है। दोनों ही हालात में जो एक काम बाकी है, वह है नामांतरण — और यही वह काम है जिसके नाम पर तहसील के सबसे ज्यादा चक्कर लगते हैं। अब इसका आवेदन घर बैठे होता है; पूरा तरीका नीचे।
नामांतरण कब-कब कराना पड़ता है
- विरासत: खातेदार की मृत्यु के बाद वारिसों के नाम चढ़ाने के लिए — सबसे आम केस।
- बिक्री/रजिस्ट्री: जमीन खरीदने के बाद अपना नाम चढ़ाने के लिए।
- हकत्याग: किसी वारिस के अपना हिस्सा छोड़ने (रिलीज डीड) पर।
- रहन/मुक्त रहन: जमीन गिरवी रखने या छुड़ाने पर बैंक के पक्ष में एंट्री।
ऑनलाइन आवेदन: अपना खाता से (बिना तहसील गए)
- स्टेप 1: apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें और 'नामांतरण के लिये आवेदन करें' पर क्लिक करें।
- स्टेप 2: आवेदक का नाम-मोबाइल भरें, फिर जिला → तहसील → गांव और खाता/खसरा चुनें।
- स्टेप 3: नामांतरण का प्रकार (विरासत/बिक्री/हकत्याग…) चुनकर मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
- स्टेप 4: सबमिट करते ही टोकन नंबर मिलेगा — संभालकर रखें।
- ऑनलाइन सहज न हो तो यही आवेदन ई-मित्र या सीधे तहसील में भी होता है।
किस केस में कौन-से दस्तावेज
| केस | मुख्य दस्तावेज |
|---|---|
| विरासत | मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिसान विवरण/शपथ पत्र, जमाबंदी नकल, आधार/जन आधार |
| बिक्री | रजिस्ट्री (विक्रय पत्र) की कॉपी, जमाबंदी नकल, आधार/जन आधार |
| हकत्याग | पंजीकृत हकत्याग विलेख, जमाबंदी, पहचान दस्तावेज |
| रहन | बैंक का रहन दस्तावेज/ऋण मुक्ति प्रमाण |
आवेदन के बाद क्या होता है (तहसील का सफर)
- पटवारी मौका-जांच और रिकॉर्ड मिलान करता है।
- गिरदावर (भू-अभिलेख निरीक्षक) रिपोर्ट लगाता है।
- तहसीलदार आदेश करता है — आपत्ति का समय देने के बाद। कोई आपत्ति आ जाए तो मामला राजस्व न्यायालय की प्रक्रिया में चला जाता है।
- आदेश के बाद नामांतरण रिकॉर्ड में दर्ज होकर नई जमाबंदी में नाम चढ़ जाता है।
बिना विवाद के मामले आम तौर पर कुछ हफ्तों में निपट जाते हैं। आखिरी और जरूरी कदम: नामांतरण के बाद नई जमाबंदी नकल निकालकर देख लें कि नाम, हिस्सा और खसरा सही चढ़े हैं — गलती दिखे तो तुरंत तहसील में संशोधन का आवेदन दें।
स्थिति कैसे देखें और अटकने पर क्या करें
- अपना खाता पोर्टल पर 'आवेदन की वर्तमान स्थिति' में टोकन नंबर डालें — फाइल किस टेबल पर है, दिख जाता है।
- लंबा अटके तो टोकन नंबर लेकर तहसील कार्यालय में लिखित में पूछें।
- सुनवाई न हो — या कोई 'फीस' के नाम पर पैसे मांगे — तो 181/राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
जमीन के कागजों की बाकी गाइडें: गिरदावरी ऑनलाइन कैसे देखें, भू-नक्शा राजस्थान — अपने खेत का नक्शा डाउनलोड करें और खेत से जुड़े मुआवजे-बीमा के लिए फसल बीमा क्लेम गाइड।






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