राजस्थान के दक्षिण में बसा उदयपुर "झीलों का शहर" (City of Lakes) कहलाता है, और उदयपुर में घूमने की जगह ढूँढ़ रहे हर यात्री के लिए यह शहर किसी सपने जैसा है — झिलमिलाती झीलें, संगमरमर के महल, अरावली की हरी पहाड़ियाँ और हर मोड़ पर बिखरा इतिहास। चाहे आप परिवार के साथ हों, हनीमून पर हों या अकेले इतिहास खोजने निकले हों, उदयपुर के पर्यटन स्थल हर किसी को कुछ न कुछ देते हैं। इस गाइड में हम उदयपुर की 11 सबसे खूबसूरत जगहें, उनके टिकट-समय और घूमने का सही तरीका — सब विस्तार से बता रहे हैं।

🔄 अपडेट — जून 2026: मानसून सिर पर है और उदयपुर की झीलें जल्द ही लबालब भरने वाली हैं। अगर आप बारिश में राज्य घूमने का मन बना रहे हैं तो मानसून में राजस्थान घूमने की जगह ज़रूर पढ़ें — उदयपुर वहाँ नंबर एक पर है।

उदयपुर क्यों खास है — झीलों का शहर

उदयपुर की स्थापना 1559 में महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने की थी, जिसके नाम पर इसका नाम पड़ा। मेवाड़ राजवंश की यह राजधानी पाँच मुख्य झीलों — पिछोला, फतेह सागर, स्वरूप सागर, उदय सागर और दूध तलाई — के इर्द-गिर्द बसी है, इसीलिए इसे "झीलों का शहर" कहते हैं। पश्चिम में अरावली की पहाड़ियाँ और झीलों के बीच तैरते सफ़ेद संगमरमर के महल इसे भारत के सबसे रोमांटिक शहरों में गिनवाते हैं। यात्रा से पहले उदयपुर का मौसम देख लेना समझदारी है, क्योंकि गर्मियों और मानसून का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। और अगर बारिश में राज्य के दूसरे कोनों को भी कवर करना हो तो हमारी मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड साथ रखें।

एक नज़र में — उदयपुर की टॉप जगहें

जगहखासियतसमय / टिकट टिप
सिटी पैलेसराजस्थान का सबसे बड़ा महल परिसरसुबह 9:30–5:30; भारतीय ₹300, संग्रहालय अलग
पिछोला झील व लेक पैलेसबोट राइड, जल में तैरते महलशाम की बोटिंग बेस्ट; सनसेट के समय जाएँ
फतेह सागर झीलनेहरू गार्डन द्वीप, बोटिंगशाम का समय; ओवरफ़्लो मानसून में
जग मंदिरझील के बीच का महल-द्वीपबोट से पहुँचें; दोपहर भीड़ कम
जगदीश मंदिर1651 का इंडो-आर्यन विष्णु मंदिरसुबह आरती; प्रवेश निःशुल्क
सहेलियों की बाड़ीफव्वारे और कमल कुंडसुबह 9–6; टिकट ₹10
सज्जनगढ़ (मानसून पैलेस)पहाड़ी से शहर का पैनोरमासनसेट बेस्ट; अभयारण्य शुल्क लगता है
बागोर की हवेलीलोकनृत्य "धरोहर" शाम का शोशाम 7 बजे शो; टिकट अलग
गुलाब बाग़शहर का सबसे बड़ा बगीचा व लाइब्रेरीसुबह की सैर; प्रवेश सस्ता
एकलिंगजी–नाथद्वाराशिव व श्रीनाथजी मंदिर (पास)आधा दिन; दर्शन समय जाँच लें
कुंभलगढ़विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवारडे-ट्रिप; सुबह जल्दी निकलें

1. सिटी पैलेस — राजस्थान का सबसे भव्य महल परिसर

पिछोला झील के किनारे ऊँचाई पर बना सिटी पैलेस राजस्थान का सबसे बड़ा महल परिसर है — इसे लगभग 400 वर्षों में 22 महाराणाओं ने मिलकर बनवाया। ग्रेनाइट और संगमरमर से बने इस परिसर में 11 छोटे-बड़े महल, आँगन, छज्जे और झरोखे हैं। अंदर का मोर चौक (शीशे और रंगीन कांच से सजे मोर), शीश महल और राज आँगन ज़रूर देखें। ऊपरी मंज़िलों से पिछोला झील और लेक पैलेस का नज़ारा पूरे उदयपुर में सबसे बेहतरीन माना जाता है। टिकट सुबह 9:30 बजे से मिलते हैं; क्रिस्टल गैलरी और संग्रहालय का शुल्क अलग लगता है, इसलिए कम-से-कम दो घंटे हाथ में रखें। खुली छत वाले हिस्सों में घूमना है तो उस दिन का उदयपुर का मौसम पहले देख लें।

2. पिछोला झील और लेक पैलेस — उदयपुर की आत्मा

1362 में बनी पिछोला झील उदयपुर की सबसे पुरानी और सबसे प्रसिद्ध झील है। इसी झील के बीच दो द्वीप हैं — एक पर सफ़ेद संगमरमर का लेक पैलेस (ताज लेक पैलेस होटल) और दूसरे पर जग मंदिर। शाम के समय की बोट राइड उदयपुर का सबसे यादगार अनुभव है — डूबते सूरज की रोशनी में जब महल पानी में चमकते हैं तो दृश्य किसी पेंटिंग जैसा लगता है। बोटिंग के टिकट सिटी पैलेस के बागोर घाट से मिलते हैं; सनसेट स्लॉट जल्दी भर जाता है, इसलिए पहले से बुक करना बेहतर है। उदयपुर का मौसम साफ़ हो तो शाम की बोटिंग और भी सुहानी रहती है।

3. फतेह सागर झील — शहर का सबसे चहल-पहल वाला किनारा

महाराणा फतेह सिंह के नाम पर बनी फतेह सागर झील स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों की पसंदीदा जगह है। झील के बीच नेहरू गार्डन नाम का एक हरा-भरा द्वीप है, जहाँ बोट से पहुँचा जा सकता है। किनारे पर बनी सड़क (फतेह सागर पाल) शाम की सैर, चाट और गरमा-गरम कॉफ़ी के लिए मशहूर है। पास ही सोलर ऑब्ज़र्वेटरी और मोती मगरी (प्रताप स्मारक) भी हैं। मानसून में अच्छी बारिश के बाद यह झील ओवरफ़्लो होती है और इसका नज़ारा देखने पूरा शहर उमड़ पड़ता है — ओवरफ़्लो कब होगा, इसका अंदाज़ा उदयपुर में मानसून कब आएगा पेज से लगा सकते हैं।

4. जग मंदिर — झील के बीच का "लेक गार्डन पैलेस"

पिछोला झील के दक्षिणी द्वीप पर बना जग मंदिर 17वीं सदी का एक सुंदर महल-द्वीप है, जिसे "लेक गार्डन पैलेस" भी कहते हैं। कहा जाता है कि शाहजहाँ ने राजकुमार खुर्रम रहते हुए यहीं कुछ समय बिताया था और इसी की सफ़ेद संगमरमरी सुंदरता ने आगे चलकर ताजमहल की वास्तुकला को प्रेरित किया। द्वीप पर हाथियों की संगमरमरी प्रतिमाएँ, गुल महल और बगीचा है। यहाँ बोट से ही पहुँचा जाता है; दोपहर में भीड़ कम रहती है और फ़ोटो अच्छी आती हैं। बोटिंग खुले आसमान में होती है, इसलिए तेज़ बारिश के दिन उदयपुर का मौसम देखकर ही प्लान बनाएँ।

5. जगदीश मंदिर — शहर के बीचों-बीच आस्था का केंद्र

सिटी पैलेस के मुख्य द्वार से कुछ ही कदम दूर बना जगदीश मंदिर 1651 में महाराणा जगत सिंह ने बनवाया था। यह इंडो-आर्यन शैली का भगवान विष्णु (जगन्नाथ) को समर्पित मंदिर है, जिसकी ऊँची शिखर-संरचना और बारीक नक्काशी देखते ही बनती है। मंदिर तक पहुँचने के लिए संगमरमर की 32 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जिनके दोनों ओर पत्थर के हाथी खड़े हैं। सुबह की आरती के समय यहाँ का माहौल बेहद जीवंत रहता है और प्रवेश निःशुल्क है — पुराने शहर की सैर इसी से शुरू करना बढ़िया रहता है। पुराने शहर की गलियाँ ज़्यादातर खुली हैं, इसलिए मानसून में उदयपुर का मौसम देखकर पैदल सैर का समय तय करें।

6. सहेलियों की बाड़ी — रानियों का फव्वारा-बाग़

सहेलियों की बाड़ी यानी "सहेलियों का बगीचा" 18वीं सदी में महाराणा संग्राम सिंह ने अपनी रानी और उनके साथ आई 48 दासियों के मनोरंजन के लिए बनवाया था। यहाँ की खास बात इसके फव्वारे हैं, जो बिना किसी पंप के सिर्फ़ पानी के प्राकृतिक दबाव से चलते हैं — संगमरमर के हाथियों और कमल-कुंड के बीच चलते ये फव्वारे आज भी अचंभित करते हैं। मानसून में जब फतेह सागर का पानी भरपूर होता है, ये फव्वारे अपने पूरे शबाब पर रहते हैं — इसीलिए मानसून में राजस्थान घूमने की जगह की सूची में उदयपुर सबसे ऊपर है। टिकट मात्र ₹10 का है और परिसर सुबह 9 से शाम 6 बजे तक खुला रहता है।

7. सज्जनगढ़ (मानसून पैलेस) — बादलों को निहारने वाला महल

शहर के पश्चिम में बंसदरा पहाड़ी पर बना सज्जनगढ़, जिसे मानसून पैलेस भी कहते हैं, महाराणा सज्जन सिंह ने 1884 में बनवाया था — मुख्य रूप से मानसून के बादलों को निहारने और झीलों का पैनोरमा देखने के लिए। यहाँ से पूरा उदयपुर, पिछोला और फतेह सागर झीलें और अरावली की पहाड़ियाँ एक फ्रेम में दिखती हैं। सनसेट के समय का नज़ारा सबसे शानदार होता है। महल सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के भीतर है, इसलिए प्रवेश के लिए वन-विभाग का अलग शुल्क लगता है और ऊपर तक जीप/टैक्सी से जाना पड़ता है। मानसून में यह जगह अपने नाम को सच साबित करती है — बादलों का समंदर देखना है तो उदयपुर में मानसून कब आएगा देखकर सही हफ़्ते में पहुँचें और उस दिन का उदयपुर का मौसम भी जाँच लें।

8. बागोर की हवेली — लोकनृत्य और मेवाड़ी विरासत

पिछोला झील के गणगौर घाट पर बनी बागोर की हवेली 18वीं सदी की एक भव्य हवेली है, जो अब संग्रहालय है। इसके 100 से ज़्यादा कमरों में मेवाड़ की जीवनशैली, राजसी पोशाकें, गहने और लोक-कलाएँ प्रदर्शित हैं। यहाँ की सबसे बड़ी कशिश है हर शाम होने वाला "धरोहर" लोकनृत्य शो — घूमर, भवाई (सिर पर कई घड़े रखकर नृत्य), कठपुतली और राजस्थानी लोकगीतों का जीवंत प्रदर्शन। शो आमतौर पर शाम 7 बजे होता है; टिकट अलग से लेना पड़ता है और कैमरे का शुल्क भी जुड़ता है। शो का बड़ा हिस्सा खुले आँगन में होता है, इसलिए मानसून के दिनों में जाने से पहले उदयपुर का मौसम ज़रूर देख लें।

9. गुलाब बाग़ (सज्जन निवास गार्डन) — शहर की हरी फेफड़ा

उदयपुर का सबसे बड़ा बगीचा गुलाब बाग़ (आधिकारिक नाम सज्जन निवास उद्यान) करीब 100 एकड़ में फैला है। इसे 1881 में महाराणा सज्जन सिंह ने बनवाया था और गुलाब की क्यारियों की भरमार के कारण इसका लोकप्रिय नाम पड़ा। अंदर एक छोटा चिड़ियाघर, खिलौना ट्रेन, कमल-तालाब और ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय है, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियाँ और प्राचीन ग्रंथ रखे हैं। सुबह की सैर और परिवार के साथ कुछ शांत पल बिताने के लिए यह जगह आदर्श है; प्रवेश शुल्क बहुत मामूली है। बारिश में बाग़ की हरियाली और भी खिल जाती है — सुबह जाने से पहले उदयपुर का मौसम पर नज़र डाल लें।

10. एकलिंगजी और नाथद्वारा — उदयपुर के पास के तीर्थ

उदयपुर से करीब 22 किमी दूर एकलिंगजी मंदिर मेवाड़ राजघराने के कुलदेवता भगवान शिव का मंदिर है — काले संगमरमर की चतुर्मुखी शिवलिंग वाला यह 8वीं सदी का मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। यहाँ से लगभग 25 किमी और आगे नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर है, जो भगवान कृष्ण के स्वरूप श्रीनाथजी को समर्पित है और देशभर के वैष्णव भक्तों का प्रमुख तीर्थ है। दोनों मंदिरों के दर्शन का समय बँटा हुआ (झाँकी आधारित) होता है, इसलिए निकलने से पहले समय ज़रूर जाँच लें — इन्हें एक साथ आधे दिन की यात्रा में कवर किया जा सकता है। रास्ता घुमावदार है, इसलिए बारिश के मौसम में उदयपुर का मौसम और राजसमंद का मौसम दोनों देखकर निकलें।

11. कुंभलगढ़ — एक दिन की यात्रा में अजेय किला

उदयपुर से करीब 85 किमी दूर, राजसमंद ज़िले में बसा कुंभलगढ़ किला एक शानदार डे-ट्रिप है। 15वीं सदी में महाराणा कुंभा द्वारा बनवाई गई इसकी 36 किमी लंबी दीवार दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है, इसीलिए इसे "भारत की महान दीवार" कहते हैं। यह महाराणा प्रताप की जन्मस्थली भी है। पास का कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य ट्रेकिंग और प्रकृति-प्रेमियों के लिए बढ़िया है। सुबह जल्दी निकलें ताकि किला और रास्ते में पड़ने वाला रणकपुर का जैन मंदिर दोनों कवर हो जाएँ। जाने से पहले राजसमंद का मौसम देख लें, क्योंकि घाट वाला रास्ता बारिश में फिसलन भरा हो सकता है। मानसून में कुंभलगढ़ की हरी अरावली का जादू देखने वाला हो जाता है — ऐसी ही और जगहों के लिए मानसून में राजस्थान घूमने की जगह देखें।

मानसून में उदयपुर — झीलों के शहर का सबसे सुंदर रूप

वैसे तो उदयपुर साल भर घूमा जा सकता है, लेकिन मानसून (जुलाई–सितंबर) में यह शहर अपने सबसे खूबसूरत रूप में होता है। बारिश से पिछोला, फतेह सागर और स्वरूप सागर झीलें लबालब भरकर अक्सर ओवरफ़्लो होती हैं, अरावली की पहाड़ियाँ हरी चादर ओढ़ लेती हैं और सज्जनगढ़ से बादलों का समंदर दिखता है। यात्रा से पहले उदयपुर का मौसम और उदयपुर में मानसून कब आएगा ज़रूर देखें — उदयपुर में मानसून राज्य में सबसे पहले (आमतौर पर 24–27 जून) पहुँचता है। बारिश में राज्य की बाकी बेहतरीन जगहों के लिए हमारी मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड पढ़ें।

उदयपुर घूमने का सही तरीका — टिप्स

  • कितने दिन: उदयपुर शहर के लिए 2 दिन और कुंभलगढ़/नाथद्वारा जैसे आसपास के स्थानों के लिए 1 दिन — कुल 3 दिन आदर्श हैं।
  • कैसे घूमें: पुराने शहर (सिटी पैलेस, जगदीश मंदिर, बागोर हवेली) पैदल या ऑटो से; बाहरी जगहों के लिए टैक्सी/स्कूटी किराये पर लें।
  • खाना: दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्ज़ी और रूफ़टॉप कैफ़े से झील का नज़ारा ज़रूर लें।
  • कैसे पहुँचें: महाराणा प्रताप एयरपोर्ट (डबोक) शहर से 22 किमी; उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन देश के बड़े शहरों से जुड़ा है; सड़क मार्ग से जयपुर ~6 घंटे, अहमदाबाद ~4 घंटे।
  • बेस्ट सीज़न: अक्टूबर–मार्च मौसम के लिहाज़ से सबसे आरामदायक; मानसून सबसे खूबसूरत; अप्रैल–जून गर्म रहता है। तारीख़ें तय करने से पहले उदयपुर का मौसम और उदयपुर में मानसून कब आएगा ज़रूर देख लें।
  • आसपास और राज्य: उदयपुर के साथ राजस्थान के दूसरे हरे-भरे ठिकाने जोड़ने हों तो मानसून में राजस्थान घूमने की जगह से रूट प्लान करें।