अजमेर ज़िले की अरावली पहाड़ियों के बीच बसा पुष्कर हिंदुओं के सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है, और पुष्कर में घूमने की जगह ढूँढ़ रहे हर यात्री के लिए यह छोटा-सा कस्बा किसी अध्यात्म और रंगों के मेले जैसा है। यहाँ देश का दुर्लभतम ब्रह्मा मंदिर, 52 घाटों से घिरी पवित्र पुष्कर झील, पहाड़ी पर बसी सावित्री माता और दुनिया भर में मशहूर पुष्कर ऊँट मेला — सब एक ही जगह सिमटे हैं। इस गाइड में हम पुष्कर की 10 सबसे खूबसूरत जगहें, घूमने का सही समय और पास के अजमेर शरीफ़ को जोड़ने का तरीका — सब विस्तार से बता रहे हैं।
🔄 अपडेट — जून 2026: मानसून सिर पर है और अरावली जल्द हरी होने वाली है। बारिश में राज्य के दूसरे कोनों को भी कवर करना हो तो मानसून में राजस्थान घूमने की जगह ज़रूर पढ़ें — पुष्कर भी उस सूची में शामिल है।
पुष्कर क्यों खास है — तीर्थराज और रंगों की नगरी
पुष्कर को "तीर्थराज" यानी सभी तीर्थों का राजा कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने यहीं यज्ञ किया था और उसी से पुष्कर झील का जन्म हुआ। अजमेर शहर से सिर्फ़ करीब 14 किमी दूर, नाग पहाड़ के उस पार बसा यह कस्बा अरावली की पहाड़ियों से घिरा है। यहाँ झील के किनारे आरती, गलियों में भजन-मंडलियाँ और रंग-बिरंगे बाज़ार एक साथ मिलते हैं — इसीलिए यह तीर्थयात्रियों के साथ-साथ विदेशी सैलानियों का भी पसंदीदा ठिकाना है। यात्रा से पहले अजमेर का मौसम देख लेना समझदारी है, क्योंकि गर्मी, सर्दी और मानसून का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। और अगर बारिश में राज्य के दूसरे ठिकाने भी जोड़ने हों तो हमारी मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड साथ रखें।
एक नज़र में — पुष्कर की टॉप जगहें
| जगह | खासियत | टिप |
|---|---|---|
| पुष्कर झील व 52 घाट | पवित्र स्नान, संध्या आरती | सुबह/शाम जाएँ; घाट पर जूते बाहर |
| ब्रह्मा मंदिर | देश का दुर्लभ ब्रह्मा मंदिर | सुबह दर्शन; भीड़ कम रहती है |
| सावित्री माता मंदिर | पहाड़ी से पूरे पुष्कर का नज़ारा | रोपवे लें; सनराइज़ बेस्ट |
| वराह मंदिर | विष्णु के वराह अवतार का मंदिर | झील के पास; आधा घंटा |
| रंगजी मंदिर | दक्षिण-भारतीय द्रविड़ शैली | ऊँचा गोपुरम ज़रूर देखें |
| पाप मोचनी मंदिर | "पाप धोने" की मान्यता | शांत, भीड़ रहित |
| मान महल | झील किनारे राजसी हवेली | अब हेरिटेज होटल; व्यू बेहतरीन |
| पुष्कर ऊँट मेला | विश्वप्रसिद्ध मेला (कार्तिक) | अक्टूबर–नवंबर; पहले बुकिंग |
| अजमेर शरीफ़ दरगाह | सूफ़ी संत की प्रसिद्ध दरगाह (पास) | अजमेर में; आधा दिन |
| लोकल कैफे/बाज़ार | रूफ़टॉप व्यू, हस्तशिल्प बाज़ार | सादर बाज़ार; शाकाहारी ही |
1. पुष्कर झील और 52 घाट — आस्था का केंद्र
पुष्कर की आत्मा इसकी पवित्र पुष्कर झील है, जिसके चारों ओर 52 घाट बने हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर इस झील में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं, इसलिए हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ डुबकी लगाने आते हैं। ब्रह्म घाट, गऊ घाट और वराह घाट सबसे प्रमुख हैं। सूर्योदय के समय जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं और शाम की संध्या आरती में दीप झिलमिलाते हैं, तो दृश्य अविस्मरणीय हो जाता है। घाट पर जूते-चप्पल और फ़ोटोग्राफ़ी को लेकर कुछ नियम हैं — झील के पास जूते उतारकर ही जाएँ और स्थानीय पुजारियों के "पूजा शुल्क" के दबाव से सावधान रहें। मानसून में अरावली से बहकर आता पानी झील को भर देता है; अच्छी बारिश के बाद का नज़ारा देखने से पहले अजमेर का मौसम ज़रूर देख लें।
2. ब्रह्मा मंदिर — भारत का दुर्लभतम मंदिर
पुष्कर का सबसे प्रसिद्ध आकर्षण जगतपिता ब्रह्मा मंदिर है — यह भारत में भगवान ब्रह्मा को समर्पित गिने-चुने और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। संगमरमर और पत्थर से बना यह मंदिर अपने लाल शिखर और हंस (ब्रह्मा का वाहन) के प्रतीक के लिए पहचाना जाता है। गर्भगृह में ब्रह्मा की चतुर्मुखी प्रतिमा स्थापित है और सामने उनकी पत्नी सावित्री व गायत्री की मूर्तियाँ हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं और मुख्य द्वार चाँदी के कछुओं तथा सिक्कों से सजा है। सुबह जल्दी दर्शन करना बेहतर रहता है, क्योंकि दोपहर में मंदिर कुछ घंटे बंद रहता है और छुट्टियों में भारी भीड़ होती है।
3. सावित्री माता मंदिर — रोपवे और पहाड़ी से पैनोरमा
पुष्कर के पीछे रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी पर बना सावित्री माता मंदिर ब्रह्मा की पहली पत्नी देवी सावित्री को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार यज्ञ में देरी से नाराज़ होकर सावित्री इसी पहाड़ी पर आ बैठी थीं। ऊपर तक पहुँचने के दो रास्ते हैं — करीब 650 सीढ़ियों की चढ़ाई, या फिर पुष्कर रोपवे (केबल कार), जो कुछ ही मिनटों में चोटी तक पहुँचा देता है। ऊपर से पूरे पुष्कर कस्बे, झील और अरावली की पहाड़ियों का पैनोरमा दिखता है — सूर्योदय के समय का नज़ारा सबसे शानदार होता है, इसलिए सुबह जल्दी पहुँचने की कोशिश करें। चढ़ाई या रोपवे से पहले उस दिन का अजमेर का मौसम देख लें।
4. वराह मंदिर — विष्णु के वराह अवतार का प्राचीन मंदिर
झील के पास बना वराह मंदिर पुष्कर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और भगवान विष्णु के वराह (सूअर) अवतार को समर्पित है। मान्यता है कि मूल मंदिर 12वीं सदी में राजा अर्णोराज ने बनवाया था; बाद में इसका जीर्णोद्धार हुआ। मंदिर की वास्तुकला और भीतर स्थापित वराह प्रतिमा श्रद्धालुओं और इतिहास-प्रेमियों दोनों को आकर्षित करती है। यह झील और ब्रह्मा मंदिर के पास ही है, इसलिए इसे आधे घंटे में आराम से देखा जा सकता है — पुष्कर के मंदिर-दर्शन रूट में इसे ज़रूर जोड़ें।
5. रंगजी मंदिर — दक्षिण भारतीय शैली का अनूठा मंदिर
पुष्कर की संकरी गलियों के बीच खड़ा रंगजी मंदिर यहाँ के बाकी मंदिरों से एकदम अलग दिखता है। 19वीं सदी में बना यह मंदिर भगवान रंगजी (विष्णु का एक स्वरूप) को समर्पित है और इसकी वास्तुकला में दक्षिण-भारतीय द्रविड़ शैली की झलक मिलती है — ऊँचा गोपुरम (प्रवेश द्वार) दूर से ही नज़र आ जाता है। इसमें राजपूत और मुगल शैली का भी मिश्रण है, जो इसे स्थापत्य की दृष्टि से बेहद दिलचस्प बनाता है। पुष्कर बाज़ार में घूमते हुए इस मंदिर का ऊँचा गोपुरम ज़रूर देखें।
6. पाप मोचनी मंदिर — "पाप धोने" की मान्यता वाला तीर्थ
पुष्कर के एक छोर पर बसा पाप मोचनी मंदिर अपने नाम के अनुरूप — "पापों को धोने वाला" — माना जाता है। श्रद्धालु यहाँ अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा और श्राद्ध-कर्म करने आते हैं। मुख्य भीड़भाड़ वाली जगहों से थोड़ा हटकर होने के कारण यहाँ का माहौल शांत रहता है, जो सुकून से दर्शन करने वालों के लिए आदर्श है। पुष्कर के अध्यात्मिक रूप को गहराई से महसूस करना हो तो इस मंदिर को अपनी सूची में रखें।
7. मान महल — झील किनारे राजसी विरासत
मान महल पुष्कर का सबसे बड़ा महल है, जिसे आमेर के राजा मान सिंह प्रथम ने अपने गेस्ट हाउस के रूप में बनवाया था। झील के किनारे ऊँचाई पर बना यह महल अब एक हेरिटेज होटल (RTDC सरोवर) में बदल चुका है, लेकिन इसके आँगन और छज्जों से पुष्कर झील और घाटों का नज़ारा बेहद खूबसूरत दिखता है। राजपूत स्थापत्य का यह नमूना फ़ोटोग्राफ़ी और सनसेट व्यू के लिए शानदार है — झील पर ढलते सूरज का रंग यहाँ से देखने लायक होता है।
8. पुष्कर ऊँट मेला — दुनिया भर में मशहूर रंगारंग मेला
पुष्कर की सबसे बड़ी पहचान है पुष्कर ऊँट मेला (Pushkar Camel Fair), जो हर साल कार्तिक माह (अक्टूबर–नवंबर) में कार्तिक पूर्णिमा के आसपास लगता है। यह दुनिया के सबसे बड़े पशु-मेलों में से एक है, जहाँ हज़ारों ऊँट, घोड़े और मवेशी सजे-धजे आते हैं। ऊँट दौड़, "मूँछ प्रतियोगिता", लोकनृत्य, हॉट-एयर बैलून और हस्तशिल्प बाज़ार इसे एक रंगारंग सांस्कृतिक उत्सव बना देते हैं — यही वह समय है जब पुष्कर पूरी दुनिया के सैलानियों से भर जाता है। मेले के दिनों में होटल बहुत पहले बुक हो जाते हैं, इसलिए अक्टूबर–नवंबर की यात्रा के लिए महीनों पहले बुकिंग कर लें। तारीख़ें तय करने से पहले अजमेर का मौसम भी देख लें।
9. अजमेर शरीफ़ दरगाह — पुष्कर के पास का सूफ़ी तीर्थ
पुष्कर से सिर्फ़ करीब 14 किमी दूर, अजमेर शहर में स्थित ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह (अजमेर शरीफ़) भारत के सबसे प्रसिद्ध सूफ़ी तीर्थों में से एक है। हर धर्म के लाखों श्रद्धालु यहाँ चादर और मन्नत लेकर आते हैं, और सालाना उर्स के समय यहाँ देश-विदेश से भारी भीड़ उमड़ती है। पुष्कर और अजमेर इतने पास हैं कि दोनों को आराम से एक ही यात्रा में जोड़ा जा सकता है — सुबह पुष्कर के मंदिर और झील, फिर दोपहर बाद अजमेर शरीफ़ और आना सागर झील। दरगाह में सिर ढकने के लिए रूमाल/दुपट्टा साथ रखें और जूते निर्धारित स्थान पर ही उतारें।
10. लोकल कैफे और बाज़ार — रूफ़टॉप व्यू और हस्तशिल्प
पुष्कर सिर्फ़ मंदिरों का शहर नहीं, बल्कि एक जीवंत बैकपैकर और कैफे संस्कृति का केंद्र भी है। झील के किनारे बने रूफ़टॉप कैफे से सूर्यास्त के समय का नज़ारा बेहद सुकून भरा होता है — यहाँ इज़राइली, इतालवी से लेकर देसी थाली तक सब मिलता है (ध्यान रहे, पूरा पुष्कर पूर्ण शाकाहारी और मद्यनिषेध क्षेत्र है)। सादर बाज़ार चाँदी के गहने, रंगीन वस्त्र, चमड़े के सामान, घुंघरू और राजस्थानी हस्तशिल्प के लिए मशहूर है — मोलभाव करना न भूलें। शाम को यहाँ घूमना पुष्कर के असली रंगों से रूबरू कराता है।
पुष्कर घूमने का सबसे अच्छा समय
पुष्कर साल भर खुला रहता है, लेकिन घूमने के लिहाज़ से कुछ महीने बाकियों से बेहतर हैं:
- अक्टूबर से मार्च (बेस्ट सीज़न): मौसम सुहावना (15–28°C) रहता है और यही समय पुष्कर ऊँट मेले (कार्तिक) का भी है — इसलिए यह पीक टूरिस्ट सीज़न होता है।
- जुलाई–सितंबर (मानसून): अरावली हरी हो जाती है और कम भीड़ के बीच यह तीर्थनगरी बेहद शांत व सुहावनी लगती है। अजमेर–पुष्कर इलाके का मुख्य जल-स्रोत बीसलपुर बांध भी इन्हीं दिनों भरता है — यहीं से अजमेर और आसपास को पेयजल मिलता है। मानसून आगमन का अंदाज़ा अजमेर में मानसून कब आएगा पेज से लगा सकते हैं और हरियाली में राज्य के बाकी ठिकानों के लिए मानसून में राजस्थान घूमने की जगह देखें।
- अप्रैल–जून: गर्मी तेज़ (40°C के पार) रहती है, इसलिए दोपहर की धूप से बचें और सुबह-शाम ही घूमें।
तारीख़ तय करने से पहले अजमेर का मौसम और 7-दिन का पूर्वानुमान ज़रूर देख लें।
पुष्कर घूमने का सही तरीका — टिप्स
- कितने दिन: पुष्कर के मुख्य मंदिर, झील और बाज़ार 1 दिन में आराम से घूमे जा सकते हैं; अजमेर शरीफ़ जोड़ना हो तो 2 दिन रखें।
- कैसे पहुँचें: नज़दीकी रेलवे स्टेशन और बस-हब अजमेर (करीब 14 किमी) है, जो दिल्ली–जयपुर–अहमदाबाद रेल मार्ग पर है; अजमेर से पुष्कर के लिए टैक्सी और बसें आसानी से मिलती हैं। निकटतम बड़ा एयरपोर्ट जयपुर (~135 किमी) है।
- कैसे घूमें: पुष्कर कस्बा छोटा है और इसके अधिकतर मंदिर व बाज़ार पैदल घूमे जा सकते हैं; सावित्री मंदिर के लिए रोपवे लें।
- खाना: पूरा पुष्कर शाकाहारी है — मालपुआ, कचौरी, लस्सी और रूफ़टॉप कैफे की थाली ज़रूर चखें।
- आसपास और राज्य: पुष्कर के साथ राजस्थान के दूसरे ठिकाने जोड़ने हों तो राजस्थान में घूमने की जगह और झीलों के शहर उदयपुर में घूमने की जगह से रूट प्लान करें।





