राजस्थान का नाम सुनते ही रेगिस्तान याद आता है, लेकिन माउंट आबू में घूमने की जगह ढूँढ़ रहे लोगों के लिए यह राज्य का इकलौता हिल स्टेशन एक हरा-भरा सरप्राइज़ है। सिरोही ज़िले में अरावली पर्वतमाला की गोद में, समुद्र तल से करीब 1220 मीटर ऊँचाई पर बसा माउंट आबू नक्की झील, गुरु शिखर, दिलवाड़ा के संगमरमरी जैन मंदिर और सनसेट पॉइंट जैसी जगहों से भरा है। इस गाइड में हम माउंट आबू की 10 सबसे ख़ास जगहें, वहाँ कब जाना चाहिए, कैसे पहुँचें और किन बातों का ध्यान रखें — सब विस्तार से बता रहे हैं।
🔄 अपडेट — जून 2026: इस साल मानसून जल्दी दस्तक दे रहा है और बारिश में माउंट आबू बादलों से घिर जाता है। हिल स्टेशन प्लान करने से पहले हमारी मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड और सिरोही का मौसम ज़रूर देख लें।
माउंट आबू घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?
माउंट आबू साल भर घूमा जा सकता है, पर सबसे सुहावना समय फ़रवरी से जून और फिर जुलाई से अक्टूबर (मानसून के बाद) माना जाता है:
- गर्मियों (अप्रैल–जून) में जब पूरा राजस्थान 45°C में तप रहा होता है, तब माउंट आबू का तापमान 23–33°C के आसपास सुहावना बना रहता है — यही वजह है कि गर्मी की छुट्टियों में यहाँ सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है।
- मानसून (जुलाई–सितंबर) में हिल स्टेशन बादलों, झरनों और घनी हरियाली से ढक जाता है — सबसे जादुई पर सबसे फिसलन भरा मौसम।
- सर्दियों (दिसंबर–जनवरी) में तापमान कभी-कभी 0°C तक गिर जाता है और गुरु शिखर पर हल्की पाला/ओस जमती है — राजस्थान में बर्फ़ीली ठंड का अहसास यहीं मिलता है। ठंड का अंदाज़ा सिरोही का मौसम से पहले ही लगाया जा सकता है।
यात्रा से पहले सिरोही का मौसम और 7-दिन का पूर्वानुमान देखकर ही निकलें, क्योंकि पहाड़ी मौसम तेज़ी से बदलता है।
एक नज़र में — माउंट आबू की 10 बेस्ट जगहें
| जगह | खासियत | टिप |
|---|---|---|
| नक्की झील | राजस्थान की एकमात्र प्राकृतिक झील, बोटिंग | सुबह जल्दी जाएँ; मौसम देखें |
| गुरु शिखर | अरावली की सबसे ऊँची चोटी (1722 मी) | सूर्योदय का नज़ारा सबसे शानदार |
| दिलवाड़ा जैन मंदिर | 11वीं–13वीं सदी के संगमरमरी मंदिर | दोपहर 12–6 बजे ही दर्शन, फ़ोटो मना |
| सनसेट पॉइंट | अरावली पर ढलता सूरज | शाम 5 बजे तक पहुँच जाएँ |
| हनीमून पॉइंट | वैली व्यू, "अंडा रॉक" | नवविवाहितों का पसंदीदा |
| अचलगढ़ किला + अचलेश्वर महादेव | परमार–राणा कुम्भा का किला, शिव मंदिर | नक्की झील से ~11 किमी |
| वन्यजीव अभयारण्य | 288 वर्ग किमी, तेंदुआ–भालू | सुबह की सफारी बुक करें |
| टॉड रॉक | मेंढक के आकार की चट्टान | नक्की झील के किनारे, फ़ोटो पॉइंट |
| ब्रह्माकुमारीज़ (ॐ शांति भवन) | ध्यान व आध्यात्म केंद्र | निःशुल्क प्रवेश, शांत माहौल |
| पीस पार्क | ब्रह्माकुमारीज़ का बगीचा | परिवार के साथ आराम के लिए |
💡 राजस्थान की सभी मानसून जगहों की पूरी सूची के लिए हमारी मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड देखें, और निकलने से पहले सिरोही का मौसम ज़रूर जाँच लें।
1. नक्की झील — माउंट आबू का दिल
नक्की झील माउंट आबू का सबसे मशहूर आकर्षण और राजस्थान की इकलौती प्राकृतिक झील है। मान्यता है कि देवताओं ने इसे अपने नाखूनों (नख) से खोदा था, इसी से इसका नाम पड़ा। पहाड़ियों से घिरी यह झील पैडल बोट और शिकारा राइड के लिए मशहूर है। झील के किनारे टहलते हुए आप टॉड रॉक, नन रॉक और राजा-रानी की चट्टानों के अनोखे आकार देख सकते हैं। यहीं महात्मा गांधी की अस्थियाँ विसर्जित की गई थीं, जिसकी याद में गांधी घाट बना है। शाम के समय झील किनारे का बाज़ार चाट, आइसक्रीम और हस्तशिल्प से गुलज़ार रहता है।
2. गुरु शिखर — अरावली की सबसे ऊँची चोटी
समुद्र तल से 1722 मीटर ऊँचा गुरु शिखर अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी है और पूरे राजस्थान का सबसे ऊँचा बिंदु भी। यहाँ भगवान दत्तात्रेय और उनकी माँ अनुसूया को समर्पित प्राचीन मंदिर है, साथ ही एक पुरानी घंटी जिसे श्रद्धालु बजाते हैं। चोटी से चारों ओर अरावली की लहरदार हरी पहाड़ियों और बादलों का 360 डिग्री नज़ारा दिखता है — सूर्योदय के समय यह दृश्य सबसे शानदार होता है। मानसून और सर्दियों में यहाँ तापमान बाकी कस्बे से कई डिग्री कम रहता है, इसलिए एक गर्म कपड़ा साथ रखें और सिरोही का मौसम देखकर ही ऊपर जाएँ। नक्की झील से गुरु शिखर करीब 15 किमी दूर है।
3. दिलवाड़ा जैन मंदिर — संगमरमर पर कला की पराकाष्ठा
दिलवाड़ा जैन मंदिर माउंट आबू की वह जगह है जिसे देखे बिना यात्रा अधूरी है। 11वीं से 13वीं सदी के बीच बने ये पाँच मंदिर सफ़ेद संगमरमर पर की गई इतनी बारीक नक्काशी के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं कि छत और खंभों पर उकेरे फूल-पत्ते लगभग पारदर्शी दिखते हैं। इनमें विमल वसही (आदिनाथ) और लूण वसही (नेमिनाथ) मंदिर सबसे भव्य हैं। मंदिर परिसर में फ़ोटोग्राफ़ी पूरी तरह मना है और दर्शन का समय आम तौर पर दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक रहता है (सुबह का समय जैन श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित)। प्रवेश निःशुल्क है, पर चमड़े की चीज़ें अंदर ले जाना वर्जित है।
4. सनसेट पॉइंट — ढलते सूरज का सबसे सुंदर नज़ारा
सनसेट पॉइंट माउंट आबू का सबसे रोमांटिक और लोकप्रिय व्यूपॉइंट है। यहाँ से अरावली की घाटियों के पार डूबते सूरज को देखने हर शाम सैकड़ों पर्यटक जुटते हैं। पार्किंग से पॉइंट तक हल्की चढ़ाई है, जहाँ पालकी (डोली) की सुविधा भी मिलती है। शाम का नज़ारा चूकना न पड़े, इसके लिए सूर्यास्त से कम-से-कम आधा घंटा पहले पहुँच जाएँ; बादल वाले दिन का अंदाज़ा सिरोही का मौसम से लगा सकते हैं। रास्ते में स्थानीय खानपान और मक्के के भुट्टे के ठेले इस सैर को और मज़ेदार बना देते हैं।
5. हनीमून पॉइंट — वैली व्यू और "अंडा रॉक"
हनीमून पॉइंट (जिसे अंडा पॉइंट भी कहते हैं) नवविवाहित जोड़ों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहाँ से सामने फैली हरी घाटी और दूर अरावली की चोटियों का विहंगम दृश्य दिखता है। पास ही एक अंडे के आकार की विशाल चट्टान ("अंडा रॉक") इसे पहचान देती है। सनसेट पॉइंट से थोड़ी कम भीड़ होने के कारण यहाँ शांति से सूर्यास्त का आनंद लिया जा सकता है। मानसून में जब घाटी बादलों से भर जाती है, तो यह नज़ारा किसी सपने जैसा लगता है — इस मौसम की और जगहों के लिए मानसून में राजस्थान घूमने की जगह देखें।
6. अचलगढ़ किला और अचलेश्वर महादेव मंदिर
नक्की झील से करीब 11 किमी दूर, उदयपुर से जुड़ी मेवाड़ी विरासत का हिस्सा रहा अचलगढ़ किला परमार राजाओं ने बनवाया और बाद में मेवाड़ के महाराणा कुम्भा ने 15वीं सदी में इसका पुनर्निर्माण कराया। किले की चढ़ाई पर बसा अचलेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के पदचिह्न (अंगूठे के निशान) के लिए प्रसिद्ध है — यहाँ शिवलिंग के बजाय शिव के पैर के अंगूठे की पूजा होती है। मंदिर परिसर में पीतल के विशाल नंदी और मंदाकिनी कुंड के पास खड़ी तीन भैंसों की पत्थर की मूर्तियाँ एक प्राचीन कथा से जुड़ी हैं। इतिहास और आस्था में रुचि रखने वालों के लिए यह जगह ज़रूर देखने लायक है।
7. माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य
अरावली की हरी ढलानों पर फैला माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य करीब 288 वर्ग किलोमीटर में फैला है और 1960 में स्थापित हुआ था। यहाँ तेंदुआ, स्लॉथ भालू, जंगली सूअर, साँभर और 250 से ज़्यादा पक्षी प्रजातियाँ मिलती हैं। दुर्लभ औषधीय पौधों और जंगली गुलाब के लिए भी यह अभयारण्य जाना जाता है। ट्रेवर्स टैंक (Trevor's Tank) यहाँ का प्रमुख बर्ड-वॉचिंग स्पॉट है, जहाँ मानसून में रंग-बिरंगे पक्षी और मगरमच्छ देखे जा सकते हैं। सुबह की सफारी या नेचर वॉक बुक करना सबसे अच्छा रहता है; बारिश के दिनों में जाने से पहले सिरोही का मौसम देख लें।
8. टॉड रॉक — मेंढक के आकार की अनोखी चट्टान
नक्की झील के किनारे खड़ी टॉड रॉक (Toad Rock) एक विशाल प्राकृतिक चट्टान है जो हूबहू पानी में कूदते मेंढक जैसी दिखती है। माउंट आबू की यह सबसे फ़ोटो खींची जाने वाली जगहों में से एक है। चट्टान पर थोड़ी चढ़ाई करके ऊपर पहुँचने पर पूरी नक्की झील और कस्बे का शानदार नज़ारा दिखता है। आसपास नन रॉक और कैमल रॉक जैसी और भी मज़ेदार आकार वाली चट्टानें हैं, जो प्रकृति की अनोखी कारीगरी का नमूना हैं।
9. ब्रह्माकुमारीज़ (ॐ शांति भवन) — आध्यात्म और शांति का केंद्र
माउंट आबू दुनिया भर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मुख्यालय के रूप में भी जाना जाता है। शहर के बीच स्थित ॐ शांति भवन और मधुबन परिसर में देश-विदेश से लोग ध्यान, राजयोग और मन की शांति की तलाश में आते हैं। यहाँ का सफ़ेद, शांत वातावरण और सादगी भरा माहौल भागदौड़ भरी ज़िंदगी से थोड़ा ठहराव देता है। प्रवेश निःशुल्क है और परिसर में निर्देशित ध्यान-सत्र भी होते हैं — आध्यात्म में रुचि रखने वालों के लिए यह माउंट आबू का एक अलग ही पहलू है।
10. पीस पार्क — परिवार के साथ सुकून के पल
गुरु शिखर के रास्ते में, अचलगढ़ के पास ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा विकसित पीस पार्क एक करीने से सजा हुआ बगीचा है। हरे-भरे लॉन, रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियाँ और पहाड़ियों के बीच फैली शांति इसे परिवार और बच्चों के साथ कुछ पल बिताने की बेहतरीन जगह बनाती है। मानसून में हरियाली अपने चरम पर होती है, इसलिए जाने से पहले सिरोही का मौसम देख लें। यहाँ बैठने के लिए शेड, छोटा फ़ूड कोर्ट और ध्यान के लिए शांत कोने हैं। फ़ोटोग्राफ़ी और पिकनिक के शौक़ीनों के लिए पीस पार्क एक सुकून भरा ठिकाना है।
मानसून में माउंट आबू — बादलों में बसा हिल स्टेशन
मानसून (जुलाई–सितंबर) में माउंट आबू अपने सबसे जादुई रूप में होता है। पूरी अरावली घनी हरियाली से ढक जाती है, छोटे-छोटे झरने जीवित हो उठते हैं, और कस्बा अक्सर बादलों के बीच डूबा रहता है। नक्की झील लबालब भर जाती है और गुरु शिखर से बादलों का समंदर देखना अविस्मरणीय अनुभव होता है। यही वजह है कि माउंट आबू हमारी मानसून में राजस्थान घूमने की जगह सूची में सबसे ऊपर है।
बस कुछ सावधानियाँ ज़रूरी हैं — घाट वाले रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन का ख़तरा रहता है, इसलिए निकलने से पहले सिरोही का मौसम ज़रूर जाँच लें और भारी बारिश के अलर्ट वाले दिन ट्रैकिंग टालें। मानसून में दिलवाड़ा मंदिर और संग्रहालय जैसी इनडोर जगहें भी अच्छा विकल्प रहती हैं।
माउंट आबू कैसे पहुँचें?
- रेल मार्ग: सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड (Abu Road) है, जो माउंट आबू से करीब 27 किमी नीचे मैदानी इलाके में है। यह दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर से सीधी ट्रेनों से जुड़ा है। स्टेशन से माउंट आबू तक टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती है।
- सड़क मार्ग: माउंट आबू राजस्थान और गुजरात के प्रमुख शहरों से अच्छी सड़कों से जुड़ा है। उदयपुर से यह करीब 165 किमी और अहमदाबाद से करीब 220 किमी है — दोनों ओर से नियमित बस व कैब चलती हैं।
- हवाई मार्ग: सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा उदयपुर (महाराणा प्रताप एयरपोर्ट) करीब 185 किमी दूर है; अहमदाबाद एयरपोर्ट भी एक विकल्प है। उड़ान से पहले उदयपुर का मौसम देखकर आगे की प्लानिंग करें।
घाट सेक्शन (आबू रोड से ऊपर) के 27 किमी में करीब आधा घंटा लगता है; रात के सफ़र और तेज़ बारिश में सावधानी रखें।
माउंट आबू यात्रा — ज़रूरी टिप्स
- कितने दिन: माउंट आबू की मुख्य जगहें 2 दिन/1 रात में आराम से देखी जा सकती हैं। आसपास के उदयपुर जैसे शहरों को जोड़कर 3–4 दिन का प्लान बेहतर रहता है।
- कपड़े: सर्दियों में गर्म ऊनी कपड़े ज़रूरी हैं; गुरु शिखर पर साल भर एक हल्का जैकेट काम आता है। मानसून में रेनकोट/छाता और फिसलन-रोधी जूते रखें।
- स्थानीय परिवहन: कस्बे के भीतर पैदल या ऑटो से घूम सकते हैं; दूर की जगहों (गुरु शिखर, अचलगढ़, अभयारण्य) के लिए टैक्सी या लोकल पैकेज लें।
- लाइव मौसम: पहाड़ी मौसम तेज़ी से बदलता है, इसलिए हर सुबह सिरोही का मौसम देखकर ही दिन का प्लान बनाएँ।





