थार के द्वार पर बसा जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जिसे "नीला शहर" (Blue City) और "सूर्यनगरी" (Sun City) दोनों नामों से जाना जाता है। जोधपुर में घूमने की जगह ढूँढ़ रहे हर यात्री के मन में सबसे पहले विशाल मेहरानगढ़ क़िला आता है, लेकिन यह शहर इससे कहीं ज़्यादा है — संगमरमर की छतरियाँ, राजसी महल, सदियों पुरानी बावड़ियाँ, हलचल भरे बाज़ार और पास ही रेगिस्तान के बीच खड़े हज़ार साल पुराने मंदिर। इस गाइड में हम जोधपुर की 11 सबसे शानदार जगहें, वहाँ कब और कैसे जाना चाहिए, और किन बातों का ध्यान रखें — सब विस्तार से बता रहे हैं।

🔄 अपडेट — जून 2026: मानसून के दिनों में जोधपुर एक अलग ही रूप में दिखता है। अगर आप बारिश के मौसम में पूरे राज्य का प्लान बना रहे हैं तो मानसून में राजस्थान घूमने की जगह ज़रूर पढ़ें — झीलों, झरनों और हरे किलों की पूरी लिस्ट वहीं मिलेगी।

जोधपुर घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?

जोधपुर थार के किनारे बसा है, इसलिए यहाँ गर्मी काफ़ी तेज़ पड़ती है। घूमने के लिहाज़ से अक्टूबर से मार्च का समय सबसे बढ़िया है, जब दिन का तापमान 20–28°C के बीच रहता है और किले-महल पैदल घूमना आरामदेह रहता है।

  • सर्दी (अक्टूबर–फ़रवरी): सबसे लोकप्रिय सीज़न — मौसम सुहावना, आसमान साफ़, फ़ोटोग्राफ़ी के लिए बेहतरीन।
  • मानसून (जुलाई–सितंबर): हल्की फुहारें, क़िले के नीचे हरियाली और कम भीड़ — रोमांटिक और किफ़ायती।
  • गर्मी (अप्रैल–जून): तापमान 42–46°C तक चला जाता है; सुबह जल्दी और शाम को ही घूमना ठीक रहता है।

यात्रा की सही तारीख़ चुनने के लिए निकलने से पहले जोधपुर का लाइव मौसम और 7-दिन का पूर्वानुमान ज़रूर देख लें।

एक नज़र में — जोधपुर की बेस्ट जगहें

जगहखासियतटिप
मेहरानगढ़ क़िला125 मीटर ऊँची चट्टान पर खड़ा विशाल दुर्ग, संग्रहालयसुबह जल्दी पहुँचें, ज़िपलाइन के लिए अलग बुकिंग
जसवंत थड़ासफ़ेद संगमरमर की राजसी छतरी, झीलकिले से पैदल 10 मिनट, सूर्यास्त का बेस्ट व्यू
उम्मेद भवन पैलेसदुनिया के सबसे बड़े निजी आवासों में से एकसिर्फ़ संग्रहालय वाला हिस्सा खुला; ताज होटल भाग बंद
घंटाघर व सरदार मार्केटपुराने शहर का दिल, मसाले व बंधेजसुबह की रौनक और स्ट्रीट फ़ूड के लिए जाएँ
मंडोर गार्डनप्राचीन राजधानी, राजसी छतरियाँ, बंदरफ़्री एंट्री, सुबह घूमना अच्छा
राव जोधा डेज़र्ट रॉक पार्कदेशी रेगिस्तानी पौधे, किले के पीछे की पगडंडियाँअच्छे जूते पहनें, गाइडेड ट्रेल लें
कायलाना झीलशहर के पश्चिम में कृत्रिम झील, सूर्यास्तशाम का समय और हल्का नाश्ता साथ
माचिया जैविक उद्यानवन्यजीव, हिरण, मोर, किले का व्यू पॉइंटशाम को जानवर ज़्यादा दिखते हैं
तूरजी का झालराखूबसूरती से बहाल पुरानी बावड़ीआसपास कैफ़े; शाम को रोशनी में सुंदर
ओसियाँ65 किमी दूर, 8वीं–11वीं सदी के मंदिरआधे दिन का ट्रिप, सूर्यास्त सफ़ारी संभव

1. मेहरानगढ़ क़िला — जोधपुर की पहचान

जोधपुर की यात्रा की शुरुआत मेहरानगढ़ क़िले से ही होती है। शहर से करीब 125 मीटर ऊँची एक खड़ी चट्टान पर बना यह दुर्ग 1459 में राव जोधा ने बसाया था और यह भारत के सबसे विशाल व सुरक्षित किलों में गिना जाता है। इसकी मोटी दीवारें कहीं-कहीं 36 मीटर ऊँची और 21 मीटर चौड़ी हैं। सात विशाल दरवाज़ों — जयपोल, फ़तेहपोल, लोहापोल आदि — से होकर भीतर पहुँचते हैं।

किले के भीतर मोती महल, फूल महल, शीश महल और झाँकी महल जैसे शानदार कक्ष हैं, और इसका संग्रहालय राजस्थान के बेहतरीन म्यूज़ियमों में से एक माना जाता है — पालकियाँ, हौदे, राजसी पालने और हथियारों का संग्रह यहाँ देखने लायक है। किले की प्राचीर से नीचे फैला नीला शहर एक अविस्मरणीय नज़ारा देता है। रोमांच पसंद यात्री यहाँ चलने वाली फ़्लाइंग फ़ॉक्स ज़िपलाइन का आनंद भी ले सकते हैं। गर्मी से बचने के लिए सुबह जल्दी पहुँचना सबसे अच्छा रहता है — निकलने से पहले जोधपुर का मौसम देखकर दिन तय करें।

2. जसवंत थड़ा — मारवाड़ का "ताजमहल"

मेहरानगढ़ से सिर्फ़ कुछ मिनट की दूरी पर बना जसवंत थड़ा सफ़ेद मकराना संगमरमर से बनी एक राजसी छतरी (स्मारक) है, जिसे 1899 में महाराजा सरदार सिंह ने अपने पिता जसवंत सिंह द्वितीय की याद में बनवाया था। इसके पतले संगमरमर के पत्थर इतने बारीक हैं कि धूप में अंदर से चमकते हैं — इसीलिए इसे अक्सर "मारवाड़ का ताजमहल" कहा जाता है। सामने की छोटी झील और हरे-भरे बगीचे इसे शांति और फ़ोटोग्राफ़ी के लिए बेहतरीन जगह बनाते हैं। किले से उतरते वक़्त इसे ज़रूर देखें — सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य सबसे सुंदर होता है। मानसून के दिनों में झील भरने पर यह नज़ारा और निखर जाता है; तब का प्लान बनाने से पहले मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड देख लें।

3. उम्मेद भवन पैलेस — दुनिया के सबसे बड़े निजी महलों में से एक

उम्मेद भवन पैलेस दुनिया के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक है। इसका निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह ने 1929 से 1943 के बीच अकाल के दौरान लोगों को रोज़गार देने के लिए करवाया था, इसलिए स्थानीय लोग इसे "छित्तर पैलेस" भी कहते हैं। पीले बलुआ पत्थर से बना यह भव्य महल आज तीन हिस्सों में बँटा है — एक हिस्सा शाही परिवार का आवास, एक ताज समूह का लग्ज़री होटल, और एक संग्रहालय जो आम पर्यटकों के लिए खुला है। संग्रहालय में पुरानी घड़ियाँ, विंटेज कारें और शाही जीवनशैली की झलक देखने को मिलती है। आर्ट-डेको और राजपूत शैली का यह मेल वास्तुकला प्रेमियों के लिए ख़ास है। खुले बगीचों में घूमना हो तो साफ़ मौसम वाला दिन चुनें — जोधपुर का मौसम पहले देख लें।

4. घंटाघर और सरदार मार्केट — पुराने शहर का धड़कता दिल

जोधपुर की असली रूह उसके पुराने शहर में बसती है, और उसका केंद्र है घंटाघर (क्लॉक टावर) और उसके चारों ओर फैला सरदार मार्केट। यह बाज़ार महाराजा सरदार सिंह के नाम पर बना और आज भी मसालों, बंधेज की चुनरियों, मारवाड़ी जूतियों, चूड़ियों और हस्तशिल्प के लिए मशहूर है। यहाँ की मशहूर मिर्च-मसाला और मठरी-कचौरी की दुकानें स्ट्रीट फ़ूड प्रेमियों को खींच लाती हैं। तंग गलियों में फैले नीले घर — जिनकी वजह से जोधपुर को "नीला शहर" कहा जाता है — इसी इलाके में सबसे ज़्यादा दिखते हैं। बाज़ार घूमने का सबसे अच्छा समय सुबह या शाम है, जब रौनक चरम पर होती है। दिनभर पैदल घूमने का प्लान हो तो गर्मी से बचने के लिए जोधपुर का मौसम देखकर ठंडे दिन चुनें।

5. मंडोर गार्डन — जोधपुर से पहले की राजधानी

शहर से करीब 9 किमी दूर मंडोर कभी मारवाड़ की राजधानी हुआ करता था, इससे पहले कि राव जोधा ने जोधपुर बसाया। आज यहाँ का मंडोर गार्डन अपनी ऊँची-ऊँची राजसी छतरियों (राजाओं के स्मारक), "हॉल ऑफ़ हीरोज़" और पुराने मंदिरों के लिए जाना जाता है। बगीचे में घूमते बंदर और हरियाली इसे परिवार के साथ घूमने की अच्छी जगह बनाते हैं। यहाँ प्रवेश आमतौर पर निःशुल्क रहता है, इसलिए कम बजट में इतिहास देखने वालों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है। मानसून में यह बाग़ सबसे हरा-भरा रहता है — बारिश का प्लान बनाते समय जोधपुर में मानसून कब आएगा ज़रूर देखें।

6. राव जोधा डेज़र्ट रॉक पार्क — किले के पीछे का जंगल

मेहरानगढ़ किले से सटा राव जोधा डेज़र्ट रॉक पार्क करीब 70 हेक्टेयर में फैला एक पारिस्थितिक उद्यान है, जिसे चट्टानी थार ज़मीन पर देशी रेगिस्तानी पौधों को फिर से बसाने के लिए विकसित किया गया है। यहाँ की पगडंडियों पर चलते हुए आपको स्थानीय वनस्पतियाँ, छोटे जलकुंड और किले के नाटकीय दृश्य मिलते हैं। प्रकृति और शांति पसंद करने वालों के लिए यह जगह आदर्श है। चलने में आसानी के लिए अच्छे जूते पहनें और गाइडेड वॉक लेना बेहतर रहता है। खुले में लंबी वॉक है, इसलिए जोधपुर का मौसम देखकर सुबह का ठंडा समय चुनें।

7. कायलाना झील — सूर्यास्त का ठिकाना

शहर के पश्चिम में करीब 8 किमी दूर बनी कायलाना झील एक कृत्रिम झील है, जो जोधपुर के एक बड़े हिस्से की पेयजल आपूर्ति करती है। चट्टानी पहाड़ियों और बबूल के पेड़ों से घिरी यह झील शाम को सूर्यास्त देखने और बोटिंग के लिए मशहूर है। सर्दियों में यहाँ प्रवासी पक्षी भी दिखते हैं और मानसून के बाद झील लबालब रहती है। शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के कुछ घंटे बिताने के लिए यह बढ़िया जगह है — शाम को हल्का नाश्ता साथ ले जाएँ और जोधपुर का मौसम देखकर साफ़ शाम चुनें।

8. माचिया जैविक उद्यान — शहर के पास वन्यजीव

कायलाना झील के पास ही बना माचिया जैविक उद्यान (बायोलॉजिकल पार्क) एक छोटा वन्यजीव पार्क है, जहाँ हिरण, नीलगाय, लोमड़ी, मोर और कई पक्षी देखे जा सकते हैं। यहाँ एक ऊँचा व्यू पॉइंट भी है जहाँ से मेहरानगढ़ किले और कायलाना झील का खूबसूरत नज़ारा मिलता है। बच्चों और प्रकृति प्रेमियों के साथ घूमने के लिए यह अच्छी जगह है। जानवर सबसे ज़्यादा सुबह या शाम के ठंडे समय में सक्रिय रहते हैं — जाने से पहले जोधपुर का मौसम देख लें।

9. तूरजी का झालरा — बावड़ी जो फिर जी उठी

पुराने शहर में बसी तूरजी का झालरा एक खूबसूरत बावड़ी (स्टेपवेल) है, जिसे 1740 के दशक में महाराजा अभय सिंह की रानी ने बनवाया था। सालों तक मिट्टी और कचरे से भरी यह बावड़ी कुछ साल पहले बेहद सलीके से बहाल की गई, और आज यह जोधपुर की सबसे फ़ोटोजेनिक जगहों में से एक है। गुलाबी बलुआ पत्थर पर उकेरी नक्काशी, हाथियों और शेरों की आकृतियाँ देखने लायक हैं। आसपास खुले कुछ कैफ़े इसे शाम बिताने की मस्त जगह बनाते हैं — रात में रोशनी में यह और भी सुंदर दिखती है। मानसून में बावड़ी पानी से भरी हो तो नज़ारा और ख़ास होता है; जोधपुर में मानसून कब आएगा देखकर समय तय करें।

10. ओसियाँ — रेगिस्तान में हज़ार साल पुराने मंदिर

जोधपुर से करीब 65 किमी दूर बसा ओसियाँ एक प्राचीन रेगिस्तानी कस्बा है, जिसे "राजस्थान का खजुराहो" भी कहा जाता है। यहाँ 8वीं से 11वीं सदी के बीच बने हिंदू और जैन मंदिरों का समूह है, जिनमें सच्चियाय माता मंदिर और महावीर जैन मंदिर सबसे प्रसिद्ध हैं। बारीक नक्काशी वाले ये मंदिर भारत के सबसे पुराने जीवित मंदिर समूहों में गिने जाते हैं। ओसियाँ में रेत के टीलों पर ऊँट सफ़ारी और सूर्यास्त का अनुभव भी लिया जा सकता है। यह आधे दिन की एक शानदार साइड-ट्रिप है। यहाँ से आगे रेगिस्तान घूमने का मन हो तो जैसलमेर का मौसम देखकर सोनार किले की ओर बढ़ा जा सकता है।

11. मानसून में जोधपुर — बादलों के बीच नीला शहर

मानसून में जोधपुर एक नया रूप ले लेता है। जब काले बादल मेहरानगढ़ किले के ऊपर मँडराते हैं और नीचे फैला नीला शहर हल्की फुहारों में भीगता है, तो यह नज़ारा फ़ोटोग्राफ़रों का पसंदीदा बन जाता है। मंडोर गार्डन, राव जोधा रॉक पार्क और किले के आसपास की चट्टानी ढलानें इन दिनों हरी हो उठती हैं। थार के किनारे बसे इस शहर में बारिश कम लेकिन बेहद राहत देने वाली होती है।

यात्रा से पहले जोधपुर का मौसम देखकर ही निकलें और जोधपुर में मानसून कब आएगा पढ़कर सही तारीख़ चुनें। मानसून में अगर तेंदुओं की धरती देखने का मन हो तो जोधपुर को पानी देने वाला जवाई बांध (पाली ज़िला) एक शानदार साइड-ट्रिप है — यहाँ की पहाड़ियाँ तेंदुओं के लिए मशहूर हैं और बांध भरने पर पूरा इलाका जीवंत हो उठता है। पूरे राज्य का बारिश वाला प्लान बनाना हो तो मानसून में राजस्थान घूमने की जगह गाइड देखें।

जोधपुर में कितने दिन और कैसे घूमें

  • 1 दिन: मेहरानगढ़ क़िला + जसवंत थड़ा + घंटाघर–सरदार मार्केट।
  • 2 दिन: ऊपर के साथ उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय, मंडोर गार्डन और तूरजी का झालरा।
  • 3 दिन: कायलाना झील, माचिया उद्यान और एक आधा दिन ओसियाँ के मंदिरों व रेगिस्तान सफ़ारी के लिए।

जोधपुर से आगे का सफ़र भी आसान है — पश्चिम में जैसलमेर (रेगिस्तान), और बारिश के मौसम में दक्षिण में जवाई बांध (तेंदुआ देश)। मौसम के हिसाब से रूट तय करने के लिए जोधपुर का मौसम ज़रूर देख लें।