👓 क्या घोषित हुआ: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की विशेष नेत्र जांच होगी और लगभग 75 हजार जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त चश्मे दिए जाएंगे। क्या घोषित नहीं हुआ: जांच किस तारीख से शुरू होगी, किन कक्षाओं के बच्चे शामिल होंगे और किस जिले में कब कैंप लगेगा — इनका कोई कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। इसलिए तारीख बताने वाले किसी भी वायरल मैसेज पर भरोसा न करें।
बच्चे का बोर्ड पर लिखा दिखना बंद हो जाए और घर वालों को पता ही न चले — यह राजस्थान के सरकारी स्कूलों में आम बात है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के अनुसार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर अब सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की विशेष नेत्र जांच कराई जाएगी और करीब 75 हजार जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री के शब्दों में — राज्य सरकार का प्रयास है कि "किसी भी बच्चे की पढ़ाई कमजोर दृष्टि के कारण प्रभावित न हो।"
नीचे वह पूरी प्रक्रिया है जिससे जांच आपके बच्चे तक पहुंचेगी, वे संकेत जिन्हें घर पर पहचानकर आप खुद पहल कर सकते हैं, और वह बड़ी बात जो इस खबर में दबी रह जाती है — यह जांच किसी एक बार के अभियान की नहीं, एक स्थायी राष्ट्रीय कार्यक्रम की कड़ी है, जिसका फायदा आप कैंप का इंतजार किए बिना भी ले सकते हैं।
जांच होगी कैसे — पांच चरण
| चरण | कहां | कौन करेगा |
|---|---|---|
| 1. बच्चों की सूची | — | शाला दर्पण पोर्टल के विद्यार्थी डेटा से चिह्नित किए जाएंगे |
| 2. प्रारंभिक जांच | स्कूल में ही | RBSK टीम (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) |
| 3. रेफरल | — | दृष्टि दोष मिलने पर बच्चे को आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा |
| 4. विस्तृत जांच | नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र | नेत्र सहायक (ऑप्थेल्मिक असिस्टेंट) — प्रदेश में 382 कार्यरत |
| 5. चश्मा | — | जरूरत के अनुसार नि:शुल्क |
पूरी प्रक्रिया में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के बीच समन्वय से काम होगा — यानी स्कूल और स्वास्थ्य विभाग दोनों की जिम्मेदारी है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि रेफर किया गया कोई भी विद्यार्थी बिना जांच के लौटे नहीं, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है — पिछले साल 71 हजार बच्चों को चश्मे मिले थे
यह आंकड़ा इस खबर का सबसे भरोसेमंद हिस्सा है, क्योंकि यह इरादा नहीं, हो चुका काम है। पिछले वर्ष इसी तरह के अभियान में प्रदेश के 71 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क चश्मे वितरित किए गए थे। इस बार का लक्ष्य करीब 75 हजार है — यानी काम का ढांचा पहले से मौजूद है और उसे थोड़ा बढ़ाया जा रहा है। अभिभावकों के लिए इसका मतलब यह है कि यह घोषणा कागजी नहीं है, पर इसकी रफ्तार भी जादुई नहीं होगी।
घर पर ये संकेत दिखें तो कैंप का इंतजार मत कीजिए
बच्चों में नजर की कमजोरी की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि बच्चा खुद शिकायत नहीं करता — उसे लगता है सबको ऐसा ही दिखता है। इसलिए पहचान बड़ों को करनी पड़ती है। इनमें से दो-तीन बातें भी लगातार दिखें तो आंखें जरूर जंचवाइए:
- किताब या मोबाइल बहुत पास लाकर पढ़ना, या टीवी के एकदम नजदीक जाकर बैठना।
- दूर देखते वक्त आंखें सिकोड़ना (भेंगापन जैसा) या सिर टेढ़ा करके देखना।
- बार-बार आंखें मलना, आंखों से पानी आना या पलकें बहुत झपकाना।
- बोर्ड से नकल करने में गलतियां — शिक्षक की शिकायत कि लिखने में अक्षर छूट रहे हैं, जबकि बच्चा मौखिक जवाब सही देता है।
- पढ़ने के थोड़ी देर बाद सिरदर्द या आंखों में थकान की शिकायत।
- पढ़ाई या खेल में अचानक मन हटना — कई बार यह "मन नहीं लगता" नहीं, "दिखता नहीं" होता है।
ऐसी स्थिति में सीधे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में दिखाया जा सकता है — इसके लिए स्कूल कैंप का इंतजार जरूरी नहीं है।
असली बात: RBSK सिर्फ आंखों तक सीमित नहीं है
यह नेत्र जांच जिस कार्यक्रम के तहत हो रही है, वह है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) — और अधिकतर अभिभावकों को इसका दायरा पता ही नहीं होता। इसकी बुनियादी बातें:
- उम्र: जन्म से 18 वर्ष तक के सभी बच्चे।
- चार श्रेणियां (4 Ds): जन्मजात विकृतियां (Defects at birth), कमियां जैसे खून की कमी व कुपोषण (Deficiencies), बीमारियां (Diseases), और विकास संबंधी देरी व दिव्यांगता (Development delays)।
- कुल 32 सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों की जांच होती है — दृष्टि दोष उन्हीं में से एक है। सुनने की समस्या, दांत, त्वचा, हृदय रोग, कटे होंठ-तालु, कुपोषण जैसी स्थितियां भी इसमें आती हैं।
- इलाज नि:शुल्क — जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर सर्जरी तक, कार्यक्रम के प्रावधानों के अनुसार।
- 0 से 6 वर्ष के बच्चों का प्रबंधन जिला स्तर के DEIC (डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) पर होता है, और 6 से 18 वर्ष के बच्चों का मौजूदा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के जरिए।
यानी अगर स्कूल की जांच में आपके बच्चे को किसी और समस्या के लिए भी रेफर किया जाए, तो वह भी इसी कार्यक्रम के तहत मुफ्त इलाज का हकदार है। रेफरल पर्ची संभालकर रखें — आगे की जांच में वही काम आती है।
अभिभावक अभी क्या करें
- स्कूल से पूछें, इंतजार न करें। जांच की तारीख ब्लॉक स्तर पर तय होगी, इसलिए सबसे सही जानकारी आपके बच्चे के संस्था प्रधान या कक्षाध्यापक के पास ही सबसे पहले पहुंचेगी।
- बच्चे को जांच से मना न करने दें। कई बच्चे चश्मे के डर या साथियों के मजाक की वजह से जांच से बचते हैं — यही उम्र है जब समय पर चश्मा लगने से नजर स्थिर हो जाती है।
- चश्मे के पैसे न दें। कार्यक्रम में जांच और चश्मा दोनों नि:शुल्क हैं। कोई शुल्क मांगे तो ब्लॉक CMHO कार्यालय या स्कूल प्रशासन को बताएं।
- तारीख वाले वायरल मैसेज से बचें। अभी न कोई जिलेवार कार्यक्रम जारी हुआ है, न कक्षाओं की सूची। जो मैसेज इनका दावा करे, वह अनुमान है।
शिक्षा और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अपडेट के लिए शिक्षा सेक्शन देखते रहिए। स्कूल से जुड़ी बाकी जानकारी — अगस्त की छुट्टियों की लिस्ट और शिविरा पंचांग 2026-27 का पूरा कैलेंडर।
⚠️ नोट: नेत्र जांच और 75 हजार चश्मों से जुड़ी जानकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई सूचना पर आधारित है, जिसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ और मिशन निदेशक NHM डॉ. जोगाराम के कथन शामिल हैं। जांच की तारीख, कक्षाओं का दायरा और जिलेवार कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुए हैं — इस पेज को आधिकारिक आदेश आने पर अपडेट किया जाएगा। RBSK के दायरे संबंधी जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम दस्तावेजों से है। किसी भी लक्षण पर अंतिम सलाह अपने चिकित्सक से ही लें।






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