पूर्वी राजस्थान में तनाव के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूछा है कि वे पांचना बांध मुद्दे पर चुप क्यों हैं। गहलोत ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी से क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है।

पांचना बांध विवाद पर गहलोत का तीखा वार: CM स्वयं पूर्वी राजस्थान से आते हैं, मौन रहना समझ से परे

Panchna Dam Dispute: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांचना बांध विवाद को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्वी राजस्थान में कई दिनों से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संवाद नहीं होने से अविश्वास और आक्रोश बढ़ रहा है। गहलोत ने सरकार से पंच-पटेलों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को एक मंच पर बुलाकर बातचीत शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो विवाद और गंभीर हो सकता है तथा क्षेत्र की शांति और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

जयपुर. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्वी राजस्थान में पांचना बांध को लेकर चल रहे विवाद पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा है कि कई दिनों से क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को गंभीरता से नहीं लेने के कारण स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है और लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

गहलोत ने कहा कि पांचना बांध का मुद्दा अब केवल पानी के वितरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे जुड़े क्षेत्रों के लोगों के बीच अविश्वास और तनाव का माहौल भी पैदा हो गया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने चिंता जताई कि दोनों पक्षों के बीच लगातार संवादहीनता बनी हुई है, जिससे जनता के भीतर आक्रोश बढ़ने की आशंका है।

सरकार की भूमिका मध्यस्थ और समन्वयक की होनी चाहिए

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संवेदनशील विवाद का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से ही संभव है। ऐसे मामलों में सरकार की भूमिका मध्यस्थ और समन्वयक की होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह मामले को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रही है, जबकि यह विवाद क्षेत्रीय सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। सरकार से मांग की कि दोनों पक्षों के पंच-पटेलों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को तुरंत एक मंच पर बुलाकर संवाद प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि यदि सभी पक्षों को साथ बैठाकर चर्चा की जाए तो विवाद का शांतिपूर्ण और न्यायसंगत समाधान निकाला जा सकता है। उनका मानना है कि संवाद की कमी ही वर्तमान तनाव का प्रमुख कारण बन रही है।

CM स्वयं पूर्वी राजस्थान से आते हैं, मौन रहना समझ से परे है

गहलोत ने मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं पूर्वी राजस्थान से आते हैं, ऐसे में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनका मौन रहना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता उम्मीद कर रही है कि मुख्यमंत्री इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और समाधान की दिशा में पहल करेंगे। लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णायक कदम सामने नहीं आया है। सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में फैसला लेना चाहिए। पांचना बांध से जुड़े विवाद का असर बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों पर पड़ सकता है, इसलिए आवश्यक है कि सरकार संवेदनशीलता के साथ इस मामले को संभाले। उन्होंने मुख्यमंत्री से जल्द सक्रिय रुख अपनाने और सभी संबंधित पक्षों के बीच वार्ता कराकर विवाद का स्थायी समाधान निकालने की अपील की। गहलोत ने कहा कि समय रहते उचित कदम उठाए गए तो क्षेत्र में शांति और विश्वास का माहौल कायम रखा जा सकता है।

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क्या आप जानते हैं पांचना बांध का इतिहास?

पांचना बांध का निर्माण 1970 के दशक में हुआ था। यह बांध करौली जिले के टोडाभीम उपखंड में स्थित है। बांध का मुख्य उद्देश्य सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, इसके जल बंटवारे को लेकर विभिन्न गांवों और समुदायों के बीच समय-समय पर विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। यह विवाद अक्सर स्थानीय राजनीति का केंद्र भी बनते हैं, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का यह बयान इसी राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है, जहां वे वर्तमान सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहे हैं।

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विवाद का समाधान कैसे संभव है?

पांचना बांध विवाद का समाधान आपसी संवाद और सरकार की सक्रिय मध्यस्थता से ही संभव है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सही सुझाव दिया है कि सरकार को सभी संबंधित पक्षों को एक साथ लाकर बातचीत का माहौल बनाना चाहिए। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंच-पटेल और अधिकारी शामिल होने चाहिए। जब तक सभी पक्ष अपनी बात खुलकर नहीं रख पाएंगे और सरकार एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगी, तब तक इस तरह के विवाद पनपते रहेंगे। यह आवश्यक है कि सरकार केवल राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर समाधान खोजने का प्रयास करे।

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निष्कर्ष

पांचना बांध विवाद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर हमलावर होना, प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी को दर्शाता है। गहलोत ने जिस तरह से मुख्यमंत्री के मौन रहने पर सवाल उठाया है, उससे यह स्पष्ट है कि यह पांचना बांध विवाद अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। ऐसे में सरकार का त्वरित और संवेदनशील कदम उठाना क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।