चुनावी शोर-शराबे और सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच जयपुर की सड़कों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा है। राजस्थान की राजधानी में इस समय चप्पे-चप्पे पर नाकाबंदी है और संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली जा रही है। लेकिन, अपराधी भी कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। हाल ही में ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस ने एक ऐसी ही शातिर कोशिश को नाकाम कर दिया है, जहां वोटरों को लाने-ले जाने के काम में आने वाली बस का इस्तेमाल 'नशा तस्करी' के लिए किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस ने 6 किलो गांजा बरामद किया और बस चालक को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

चुनावी आड में अपराध की साजिश

यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने जब एक निजी बस को रोका, तो उनका उद्देश्य केवल चुनावी सुरक्षा का जायजा लेना था। लेकिन तलाशी के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने पुलिसकर्मियों को भी चौंका दिया। आरोपी चालक, जिसकी पहचान शाबू बर्मन के रूप में हुई है, काफी समय से बस के जरिए पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से यात्रियों को लाने-ले जाने का काम कर रहा था।

चालक ने सोचा कि चुनावी माहौल में जब पुलिस सुरक्षा में व्यस्त है और बसों का आवागमन आम बात है, तो तस्करी का यह तरीका सबसे सुरक्षित होगा। उसने यात्रियों और वोटरों की भीड़ की आड़ लेकर बस की डिक्की में गांजा छिपाया और बेखौफ जयपुर पहुंच गया। उसे लगा कि पुलिस यात्रियों के सामान और सुरक्षा को प्राथमिकता देगी और शायद ही इतनी गहराई से बस की तलाशी लेगी। लेकिन, ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस की सतर्कता ने उसके इन मंसूबों पर पानी फेर दिया।

ऑपरेशन क्लीन स्वीप: नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट लंबे समय से नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' अभियान चला रही है। यह महज एक रूटीन चेकिंग नहीं, बल्कि शहर में फैल रहे नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की एक सुनियोजित रणनीति है। इसी ऑपरेशन के तहत पुलिस को मुखबिरों से गुप्त सूचना मिली थी कि एक बस, जो पश्चिम बंगाल से लौट रही है, उसमें नशीले पदार्थ की बड़ी खेप लाई जा रही है।

जैसे ही बस शहर की सीमा में दाखिल हुई, पुलिस की टीम ने नाकाबंदी कर उसे घेर लिया। तलाशी के दौरान जब बस की डिक्की खोली गई, तो वहां से 6 किलो गांजा बरामद हुआ। यह बरामदगी साबित करती है कि अपराधियों के लिए अब नशा तस्करी के रास्ते कितने जटिल हो गए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि शाबू बर्मन का संपर्क किन तस्करों से था और यह खेप किसे सप्लाई की जानी थी।

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एनडीपीएस एक्ट और तस्करी का कड़वा सच

इस घटना के बाद एक गंभीर सवाल उठता है कि गांजा तस्करी के लिए बसों का इस्तेमाल क्यों बढ़ रहा है? भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ 'एनडीपीएस एक्ट' (NDPS Act - Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत बेहद सख्त प्रावधान हैं। इस कानून के तहत यदि कोई भारी मात्रा में मादक पदार्थ के साथ पकड़ा जाता है, तो उसे 10 से 20 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। बावजूद इसके, तस्कर अंतरराज्यीय बस सेवाओं को अपना जरिया बनाते हैं।

जानकारों का मानना है कि सड़क मार्ग से होने वाली तस्करी में पकड़े जाने का खतरा कम होता है क्योंकि रेलवे की तुलना में सड़कों पर चेकिंग के बिंदु कम होते हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों से उत्तर भारत की ओर आने वाली बसों का इस्तेमाल तस्कर अक्सर 'पार्सल' या 'यात्रियों के सामान' की आड़ में करते हैं। अपराधी अक्सर चालक को मोटी रकम का लालच देकर इस अवैध धंधे में शामिल कर लेते हैं, जैसा कि इस मामले में चालक शाबू बर्मन के साथ हुआ। यह घटना इस बात की चेतावनी भी है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में निजी वाहनों का उपयोग कैसे गलत हाथों में पड़ सकता है।

निष्कर्ष

जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर में हुई यह बरामदगी न केवल पुलिस की मुस्तैदी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि कानून तोड़ने वाले चाहे कितने भी शातिर क्यों न हो जाएं, पुलिस की निगरानी से बच पाना उनके लिए मुश्किल है। 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' जैसे अभियानों की सफलता ने शहर के नशा माफियाओं में खौफ पैदा कर दिया है। फिलहाल आरोपी पुलिस की हिरासत में है और पूछताछ जारी है। इस मामले ने एक बार फिर जनता को यह संदेश दिया है कि चुनावी माहौल में सुरक्षा केवल बाहरी खतरे से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी आपराधिक गतिविधियों से भी निपटने के लिए है। पुलिस का यह एक्शन निश्चित रूप से आने वाले दिनों में नशा तस्करों के लिए एक कड़ा सबक साबित होगा।