10 नवंबर 2025 की वो सुबह। दिल्ली का लाल किला इलाका आम दिनों की तरह चहल-पहल से भरा था, लेकिन अचानक हुए कार ब्लास्ट ने उस सन्नाटे को चीखों में बदल दिया। इस धमाके में 11 लोगों की जान चली गई, और अब जो सच सामने आया है, वो होश उड़ाने वाला है। NIA की 7500 पन्नों की चार्जशीट में साफ हुआ है कि दिल्ली ब्लास्ट के लिए आतंकियों ने AI का सहारा लिया था।
एजेंसी की जांच के अनुसार, अल-कायदा से जुड़े मॉड्यूल के आतंकियों ने ChatGPT और YouTube का इस्तेमाल बम और रॉकेट बनाने की ट्रेनिंग लेने के लिए किया। उन्होंने 'रॉकेट कैसे बनाएं' और 'विस्फोटकों का मिक्सचर रेश्यो' जैसे सवाल सर्च किए थे। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती, अब आगे क्या होगा?
NIA चार्जशीट में दिल्ली ब्लास्ट का सच
दिल्ली के लाल किला के पास कार ब्लास्ट मामले की NIA जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, अल-कायदा से जुड़े आतंकियों ने टेरर इंजीनियरिंग के लिए ChatGPT और YouTube जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था। आतंकियों ने ‘रॉकेट कैसे बनाएं और मिक्सचर किस रेश्यो में होना चाहिए’ जैसे सवाल सर्च किए। जांच में रॉकेट IED, ड्रोन और विस्फोटक तैयार करने की साजिश का भी खुलासा हुआ है। NIA ने 14 मई 2026 को स्पेशल कोर्ट में 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
अल-कायदा मॉड्यूल और आतंकी साजिश
NIA जांच में सामने आया कि जसिर बिलाल वानी नाम का आतंकी अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल का ‘इन-हाउस इंजीनियर’ था। AQIS और उसके सभी सहयोगी संगठनों को गृह मंत्रालय आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। चार्जशीट के मुताबिक, जसिर 2024-25 के दौरान हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में दो-तीन बार तकनीकी मदद देने के लिए रुका था।
डॉक्टरों ने IED बनाने में की मदद
जांच में पता चला कि जसिर की मुलाकात मुख्य आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी से डॉ. आदिल अहमद राथर ने कराई थी। डॉ. उमर हमले वाले दिन विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था। डॉ. आदिल ने जसिर को IED बनाने के लिए पिसी चीनी और पोटैशियम नाइट्रेट (NPK खाद) जैसी सामग्री दी, जबकि डॉ. उमर ने रॉकेट IED पर रिसर्च कर उसे मार्गदर्शन दिया।
YouTube और ChatGPT से सीखा बम बनाना
चार्जशीट के अनुसार, जसिर ने YouTube और ChatGPT पर ‘रॉकेट कैसे बनाएं’ जैसे सवाल सर्च किए। इसके बाद उसने डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर रॉकेट IED तैयार किए और जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड जंगल में उनका परीक्षण किया। NIA टीमों ने बाद में जंगल से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए।
ड्रोन अटैक और TATP विस्फोटक का उपयोग
जांच में सामने आया कि डॉ. उमर ने जसिर को दो ड्रोन दिए थे और उनकी उड़ान रेंज और विस्फोटक ले जाने की क्षमता बढ़ाने को कहा था। इसके अलावा, जसिर ने फ्लिपकार्ट से सेंसर, हीट गन, RF ट्रांसमीटर-रिसीवर, सोल्डरिंग किट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगाए। धमाके में TATP नाम का खतरनाक विस्फोटक इस्तेमाल हुआ था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया। जांच में ‘डॉक्टर’ या ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का भी खुलासा हुआ, जिसमें कट्टरपंथी बनाए गए मेडिकल प्रोफेशनल शामिल थे।
UN का दावा- दिल्ली ब्लास्ट की जिम्मेदारी जैश ने ली
यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने ली है। रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र है। जिसमें कहा गया है कि पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकी भी मारे जा चुके हैं। यह रिपोर्ट UNSC की 1267 सेंक्शंस कमेटी को सौंपी गई है।
निष्कर्ष
दिल्ली ब्लास्ट की यह घटना तकनीक के गलत इस्तेमाल का एक डरावना चेहरा है। 2026 में सुरक्षा एजेंसियां अब साइबर और एआई-आधारित आतंकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं। राजस्थान क्राइम और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि ऐसी साजिशों को समय रहते रोका जा सके।
स्रोत: Dainik Bhaskar





