राजस्थान के 12 जिले इस समय अतिभारी बारिश के ऑरेंज अलर्ट में भीग रहे हैं — और ठीक इसी समय दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों की नजर प्रशांत महासागर के उस आंकड़े पर टिकी है, जो हर हफ्ते ऊपर चढ़ रहा है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के ताजा साप्ताहिक आंकड़ों (15 जुलाई के सप्ताह) के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस गर्म हो चुका है — यही है एल नीनो, और इस बार यह मामूली नहीं है। NOAA का 9 जुलाई का आधिकारिक आकलन कहता है कि 81% संभावना है कि अक्टूबर-दिसंबर तक यह 1950 के बाद दर्ज सबसे ताकतवर एल नीनो घटनाओं में गिना जाएगा, और 97% संभावना है कि यह 2027 की शुरुआत तक बना रहेगा।

एल नीनो क्या है — फोन पर समझाने लायक भाषा में

सामान्य वर्षों में प्रशांत महासागर के ऊपर बहने वालीं व्यापारिक हवाएं गर्म पानी को एशिया की तरफ धकेलती रहती हैं — इसी गर्म पानी से उठी नमी हमारे मानसून की ताकत बनती है। एल नीनो में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी उल्टा अमेरिका की ओर खिसक जाता है। नतीजा — बादल बनाने वाली पूरी मशीनरी (उठती हुई गर्म हवा) भारत-इंडोनेशिया से हटकर प्रशांत के बीचोंबीच शिफ्ट हो जाती है, और हमारे हिस्से की हवा नीचे बैठने लगती है — यानी बादल बनने ही कम होते हैं। NOAA ने अपने ताजा बुलेटिन में साफ लिखा है कि इंडोनेशिया के ऊपर बादल-गतिविधि अभी से दबी हुई है — यानी असर शुरू हो चुका है।

तो अभी झमाझम क्यों हो रही है?

यही इस कहानी का असली पेच है। मानसून कोई नल नहीं जो एल नीनो आते ही बंद हो जाए — यह हफ्तों के सक्रिय-कमजोर दौरों में चलता है। इस समय उत्तरी मध्यप्रदेश के ऊपर बना परिसंचरण तंत्र और सही जगह बैठी मानसून ट्रफ राजस्थान को 4-5 दिन का सुनहरा सक्रिय दौर दे रही है — कल भी 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। लेकिन बड़ी तस्वीर यह है कि जून में देशभर की बारिश सामान्य से करीब 40% कम रही (1901 के बाद पांचवां सबसे सूखा जून) और राजस्थान में 21 जुलाई तक सीजन की बारिश सामान्य से 29% कम थी — मौजूदा दौर इस कमी की भरपाई कर रहा है। वैज्ञानिकों की चिंता अभी की नहीं, अगस्त-सितंबर की है, जब एल नीनो अपनी पूरी ताकत पर होगा।

अगस्त-सितंबर के लिए क्या कह रहे हैं पूर्वानुमान

एजेंसीपूर्वानुमान
IMD (मई का सीजन पूर्वानुमान)पूरा सीजन सामान्य का 90% — "सामान्य से कम"; हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों को अपवाद बताया गया
IMD (जुलाई आउटलुक)जुलाई सामान्य के 94% से कम
स्काईमेटअगस्त सामान्य का ~92%; पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका
ECMWF (यूरोपीय मॉडल, मीडिया रिपोर्ट)अगस्त-अक्टूबर में मध्य-पश्चिम भारत के सबसे सूखे दायरे में जाने की 40-60% संभावना

सबसे अहम तारीख आगे है — IMD जुलाई के अंत में अगस्त-सितंबर का आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करेगा। वह आते ही हम यह लेख अपडेट करेंगे।

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1997 में कुछ नहीं बिगड़ा था — इस बार फर्क क्या है

इतिहास ईमानदारी से पढ़ें तो एल नीनो हर बार सूखा नहीं लाता। 1997 का एल नीनो भी बेहद ताकतवर था, फिर भी मानसून सामान्य रहा — क्योंकि तब हिंद महासागर का अपना तापमान-पैटर्न (IOD) मजबूती से भारत के पक्ष में था और उसने भरपाई कर दी। इस बार IMD के अनुसार IOD तटस्थ (neutral) है और सीजन भर तटस्थ रहने का अनुमान है — यानी हिंद महासागर से वैसी मदद की उम्मीद कम है। NOAA खुद सावधानी बरतता है: सबसे ताकतवर एल नीनो भी हर जगह तय असर नहीं दिखाता, बस संभावना का पलड़ा झुका देता है।

राजस्थान के किसान के लिए इसका मतलब

खरीफ की बुवाई देशभर में पिछले साल से करीब 16% पीछे चल रही है। मौजूदा बारिश का दौर बुवाई के लिए सबसे कीमती मौका है — पर अगस्त में लंबे सूखे दौर (ड्राई स्पेल) की आशंका को देखते हुए सिंचाई का इंतजाम और मौसम-आधारित सलाह पर नजर रखना समझदारी होगी। बांधों की स्थिति — जयपुर की लाइफलाइन बीसलपुर समेत — पर भी अगस्त की बारिश का सीधा असर पड़ेगा। सीजन का पूरा हिसाब-किताब मानसून ट्रैकर 2026 पर और रोज का जिलेवार पूर्वानुमान मौसम सेक्शन में मिलता रहेगा।

⚠️ नोट: समुद्री तापमान व संभावना के आंकड़े NOAA/CPC के 9-20 जुलाई 2026 के आधिकारिक बुलेटिनों से और भारत के पूर्वानुमान IMD की विज्ञप्तियों से लिए गए हैं। तस्वीर: NOAA का ताजा वैश्विक समुद्री-तापमान नक्शा (सार्वजनिक डोमेन) — भूमध्य रेखा पर लाल पट्टी ही एल नीनो है। मौसम पूर्वानुमान संभावनाएं हैं, गारंटी नहीं — खेती-सिंचाई के फैसले स्थानीय कृषि विभाग की सलाह से करें।