ठीक एक साल पहले, 24 जुलाई 2025 को बीसलपुर बांध के गेट खुले थे — करीब 25 साल में पहली बार जुलाई में ही बांध लबालब हो गया था। इस बार उसी तारीख को तस्वीर उलटी है: बांध 313.62 RL मीटर पर, यानी 66.31% भरा हुआ, और बीते चार दिन में जलस्तर 2 सेंटीमीटर नीचे आया है। जयपुर, अजमेर और टोंक की करीब सवा करोड़ आबादी की प्यास इसी बांध से बुझती है, इसलिए हर बारिश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है — बांध कब भरेगा, गेट कब खुलेंगे? आंकड़े जो कहानी बताते हैं, वह चौंकाने वाली है।
आज की स्थिति — एक नज़र में
| बिंदु | आंकड़ा |
|---|---|
| जलस्तर (24 जुलाई 2026) | 313.62 RL मीटर |
| भराव | 66.31% |
| पूर्ण भराव क्षमता (FRL) | 315.50 RL मीटर |
| गेट खुलने से दूरी | 1.88 मीटर |
| पिछले 4 दिन का रुझान | 313.64 (20 जुलाई) से घटकर 313.62 — यानी 2 सेमी नीचे |
असली आंकड़ा: जुलाई की आवक 100 गुना कम
यह समझने के लिए एक तुलना काफी है। पिछले जुलाई में बांध में करीब 35 TMC पानी आया था। इस जुलाई में अब तक सिर्फ 0.35 TMC — यानी लगभग सौवां हिस्सा। रिपोर्ट्स के अनुसार यह 22 साल में जुलाई की दूसरी सबसे कम आवक है। वजह भी साफ है — बांध का पेट भरने वाला कैचमेंट (भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़-राजसमंद से आने वाली बनास-बेड़च-मेनाली, जो त्रिवेणी पर मिलती हैं) इस बार जमकर नहीं बरसा। दूसरी तरफ रोज की निकासी जारी है — जयपुर, चाकसू व दूदू के लिए 700 MLD, अजमेर-किशनगढ़-ब्यावर के लिए 335 MLD और टोंक-देवली-उनियारा के लिए 71 MLD। आवक कम और निकासी पूरी, इसीलिए जलस्तर बढ़ने के बजाय हल्का घट रहा है।
तो क्या इस बार बांध भरेगा ही नहीं?
अभी उम्मीद खत्म नहीं हुई। जल संसाधन विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बांध लगभग हर बार अगस्त में ही छलका है, इसलिए इस बार भी अगस्त पर नजर है। और ताजा बारिश के आंकड़े थोड़ी उम्मीद जगाते हैं — बीते 24 घंटों में चित्तौड़गढ़ के गंभीरी बांध पर 57 मिमी और बस्सी बांध पर 50 मिमी बारिश हुई है, और ये दोनों बेड़च-बनास तंत्र यानी बीसलपुर के कैचमेंट का हिस्सा हैं। उदयपुर के झाड़ोल में 95 मिमी और ब्यावर में एक ही दिन में करीब 9 इंच पानी गिरा। कैचमेंट का पानी त्रिवेणी तक पहुंचने में एक-दो दिन लगते हैं, इसलिए अगले कुछ दिन का गेज ही बताएगा कि आवक बनी या नहीं।
पूरे राजस्थान के बांधों का हाल — पिछले साल से 24% पीछे
तस्वीर सिर्फ बीसलपुर की नहीं है। जल संसाधन विभाग के 24 जुलाई के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के बांधों में कुल भराव 46.67% है, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 70.66% था। हां, बीते 24 घंटों में 61.85 MQM पानी की बढ़त दर्ज हुई है — मानसून सक्रिय है।
| क्षेत्र | भराव |
|---|---|
| कोटा | 59.04% |
| जयपुर | 47.72% |
| बांसवाड़ा | 45.89% |
| उदयपुर | 37.15% |
| भरतपुर | 25.56% |
| जोधपुर | 18.27% (सबसे कम) |
जयपुर के लिए इसका क्या मतलब
घबराने की जरूरत नहीं है — 66% भराव का मतलब है कि पेयजल आपूर्ति के लिए पानी पर्याप्त है; जुलाई की शुरुआत में विभाग ने अगले मानसून तक की आपूर्ति सुरक्षित बताया था। चिंता की बात लंबी अवधि की है: बांध पूरा नहीं भरा तो अगले साल गर्मियों तक का गणित तंग रहेगा। और यहीं एल नीनो का साया मायने रखता है — अगस्त-सितंबर की बारिश ही तय करेगी कि बांध छलकेगा या नहीं।
बांध का लाइव जलस्तर और भराव प्रतिशत हमारे बीसलपुर बांध पेज पर देखते रहें; कल के मौसम का जिलेवार अलर्ट यहां और प्रदेश के अन्य बांधों की स्थिति बांध सेक्शन में है।
⚠️ नोट: जलस्तर, भराव प्रतिशत व बांधों के आंकड़े 24 जुलाई 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्ट्स (जल संसाधन विभाग के गेज पर आधारित) से लिए गए हैं। त्रिवेणी नदी के गेज व आवक (क्यूसेक) का ताजा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए यहां नहीं दिया गया। जलस्तर रोज बदलता है — ताजा स्थिति के लिए विभागीय बुलेटिन देखें।






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