जयपुर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने REET Mains — तृतीय श्रेणी शिक्षक (Level-1 व Level-2) सीधी भर्ती का परिणाम 27 मई 2026 को जारी कर दिया। यह भर्ती कुल 7,759 पदों के लिए है। रिजल्ट और कट-ऑफ आने के बाद अब लाखों सफल अभ्यर्थियों के मन में एक ही सबसे बड़ा सवाल है — "REET Mains district allotment 2026 में मुझे कौन-सा जिला मिलेगा और जिला तय कैसे होता है?" इस मास्टर गाइड में: जिला आवंटन का पूरा गणित (मेरिट + श्रेणी + जिला-प्राथमिकता), Level-1 बनाम Level-2 आवंटन में अंतर, TSP/अनुसूचित क्षेत्र की अलग प्रक्रिया, choice-filling/काउंसलिंग, पसंदीदा जिला भर जाने पर क्या होगा, और नई नियुक्ति पर ट्रांसफर के नियम — सब एक जगह।

अभी कहाँ है प्रक्रिया (3 जून 2026 तक): रिजल्ट के बाद बोर्ड ने विस्तृत आवेदन-सह-स्क्रूटिनी फॉर्म (Pre-DV) की विंडो 1 जून से 15 जून 2026 तक खोली है — यह सत्यापित (confirmed) है। दस्तावेज़ सत्यापन (DV) पूरा होने के बाद ही अंतिम मेरिट सूची और फिर जिला आवंटन आदेश जारी होते हैं। नोट: इस लेख में जहाँ "संभावित/reported" लिखा है, वह बोर्ड की पिछली (तृतीय श्रेणी 2022) भर्ती की स्थापित परिपाटी पर आधारित है — आवंटन की अंतिम प्रक्रिया व कोई भी संख्या हमेशा rssb.rajasthan.gov.in और शिक्षा विभाग/शाला दर्पण की आधिकारिक अधिसूचना से ही पुष्टि करें।

एक नज़र में — रिजल्ट से जिला आवंटन तक (Timeline)

चरण (Stage)तिथि / स्थिति
REET Mains रिजल्ट + कट-ऑफ (Level-1 व Level-2)27 मई 2026 (जारी) ✅
कुल पद (Total Posts)7,759 (Level-1 + Level-2; reported)
विस्तृत आवेदन-सह-स्क्रूटिनी फॉर्म (Pre-DV)1 जून – 15 जून 2026 ✅
दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification)~1–15 जून 2026 (प्रक्रियाधीन)
अंतिम मेरिट सूची (Final Merit List)DV के बाद (संभावित)
जिला आवंटन आदेश + पदस्थापनअंतिम मेरिट के बाद (संभावित: जून अंत/जुलाई)
आवंटन पोर्टलrssb.rajasthan.gov.in व शाला दर्पण (rajshaladarpan.rajasthan.gov.in)

परीक्षा-स्तर की पूरी मेरिट गणना (subject-wise व TSP/NTSP अलग सूचियाँ) समझने के लिए देखें — REET Mains Merit List 2026 — कट-ऑफ व रैंक कैसे बनती है। और DV के बाद की पूरी जॉइनिंग-कार्यभार प्रक्रिया के लिए देखें — REET Mains जॉइनिंग व पदस्थापन प्रक्रिया 2026

जिला आवंटन का मूल गणित — किन बातों से जिला तय होता है?

तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में जिला "लॉटरी" से नहीं, बल्कि एक तय क्रम से मिलता है। मुख्यतः तीन कारक मिलकर आपका जिला तय करते हैं — और इनमें सबसे ऊपर है मेरिट रैंक:

कारक (Factor)भूमिका — कैसे असर डालता है
1. मेरिट रैंकसबसे निर्णायक। ऊँची रैंक वाले अभ्यर्थी को उसकी जिला-प्राथमिकता पहले मिलती है; नीचे की रैंक तक आते-आते लोकप्रिय जिलों के पद भर जाते हैं।
2. श्रेणी (Category)SC/ST/OBC/MBC/EWS/सामान्य का आरक्षण व कैटेगरी-वार कट-ऑफ अलग होती है; प्रत्येक श्रेणी की रिक्तियाँ उसी श्रेणी की मेरिट से भरी जाती हैं। दिव्यांग (PwD), भूतपूर्व सैनिक आदि क्षैतिज आरक्षण भी लागू।
3. जिला/पद प्राथमिकता (Preference)आवेदन/काउंसलिंग में दिए गए जिलों का वरीयता-क्रम। आपकी रैंक के क्रम में आपका पहला उपलब्ध (खाली) पसंदीदा जिला आवंटित किया जाता है।
4. क्षेत्र (TSP / Non-TSP)अनुसूचित (TSP) व गैर-अनुसूचित (Non-TSP/NTSP) क्षेत्रों की मेरिट सूची व रिक्तियाँ पूरी तरह अलग होती हैं — नीचे विस्तार से।

सरल भाषा में: बोर्ड श्रेणी व क्षेत्र (TSP/NTSP) के अनुसार अंतिम मेरिट सूची बनाता है, फिर रैंक के क्रम से (टॉप रैंक पहले) हर अभ्यर्थी की दी गई जिला-प्राथमिकता देखकर उसका पहला खाली जिला आवंटित करता जाता है। यानी आपकी रैंक जितनी अच्छी, मनचाहा (गृह) जिला मिलने की संभावना उतनी ज़्यादा।

Level-1 बनाम Level-2 — आवंटन में क्या फर्क है?

दोनों स्तरों का जिला आवंटन का सिद्धांत (मेरिट + श्रेणी + प्राथमिकता) एक जैसा है, पर व्यवहारिक अंतर हैं:

बिंदुLevel-1 (कक्षा 1–5, प्राथमिक)Level-2 (कक्षा 6–8, उच्च प्राथमिक)
पद का स्वरूपसामान्य शिक्षक (सभी विषय पढ़ाते हैं)विषय-आधारित (गणित-विज्ञान, सामाजिक अध्ययन, हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत आदि)
मेरिट सूचीएकल (स्तर-आधारित)हर विषय की अलग मेरिट व कट-ऑफ — आवंटन विषय-वार रिक्तियों के अनुसार
रिक्ति-वितरणहर जिले में प्राथमिक स्कूलों की संख्या ज़्यादा — सापेक्ष रूप से व्यापक विकल्पविषय-विशेष रिक्ति जिलेवार सीमित; लोकप्रिय विषयों में प्रतिस्पर्धा अधिक
TSP/NTSPदोनों क्षेत्रों की अलग सूचीविषय × क्षेत्र (TSP/NTSP) — और बारीक विभाजन

मुख्य बात: Level-2 में आपका जिला सिर्फ़ रैंक से नहीं, बल्कि आपके विषय की उस जिले में खाली रिक्तियों से भी तय होता है। इसलिए दो अभ्यर्थी समान रैंक पर भी अलग-अलग जिला पा सकते हैं यदि उनके विषय की रिक्तियाँ अलग जिलों में हों।

TSP / अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas) में आवंटन

राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र (TSP — Tribal Sub-Plan) मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ तथा उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, पाली व चित्तौड़गढ़ के कुछ अनुसूचित ब्लॉकों में आते हैं। यहाँ आवंटन की प्रमुख बातें:

  • अलग मेरिट व कट-ऑफ: TSP और Non-TSP (NTSP) क्षेत्रों की मेरिट सूचियाँ अलग बनती हैं। रिजल्ट 27 मई को इन्हें अलग-अलग ही जारी किया गया, और TSP की कट-ऑफ सामान्यतः NTSP से कुछ कम रहती है (जैसे रिपोर्ट के अनुसार Level-2 विज्ञान-गणित सामान्य वर्ग में NTSP ~216 बनाम TSP ~199 अंक)।
  • क्षेत्र-बद्ध भर्ती: TSP पद के लिए चयनित अभ्यर्थी को TSP जिलों में और NTSP वालों को NTSP जिलों में आवंटन मिलता है — दोनों पूल आपस में नहीं मिलते।
  • स्थानीय आरक्षण: अनुसूचित क्षेत्रों में ST के लिए विशेष प्रावधान/स्थानीय अनुसूचित-जनजाति प्राथमिकता लागू होती है (आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार)।

Choice-filling / काउंसलिंग — जिला-प्राथमिकता कैसे भरें?

बोर्ड की स्थापित परिपाटी (तृतीय श्रेणी 2022 की तरह) के अनुसार DV व अंतिम मेरिट के बाद अभ्यर्थियों से जिला-वरीयता (district preference) भरवाई जाती है — इसे ही व्यवहार में "काउंसलिंग/choice-filling" कहते हैं। सुझाव:

  1. सभी विकल्प भरें: जितने जिलों के विकल्प माँगे जाएँ, सब क्रम से भरें — सिर्फ़ 1–2 भरकर खाली न छोड़ें, वरना सिस्टम बचे हुए जिले स्वतः आवंटित कर सकता है।
  2. यथार्थ क्रम लगाएँ: रैंक मध्यम/नीचे हो तो ऊपर सिर्फ़ बड़े शहर (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर) न रखें; साथ में कम भीड़ वाले जिले भी ऊपर रखें ताकि मनचाहा-सा जिला मिल सके।
  3. रिक्ति देखकर तय करें: आवंटन से पहले शाला दर्पण के रिक्ति सर्च (Vacancy Search) पर जिलेवार/विषयवार खाली पद देखकर अपनी प्राथमिकता तय करें।
  4. समय-सीमा का ध्यान: choice-filling की विंडो छोटी होती है — खुलते ही भरें।

पसंदीदा जिला भर जाए तो क्या होगा?

यह सबसे आम चिंता है। प्रक्रिया मेरिट-क्रम (rank order allotment) पर चलती है:

  • आपकी बारी आने पर सिस्टम आपकी वरीयता-सूची ऊपर से देखता है। जो पहला जिला अब भी खाली होगा, वही आपको मिलेगा।
  • यदि आपके सारे ऊपरी पसंदीदा जिले (आपकी श्रेणी/विषय में) भर चुके हैं, तो सूची में नीचे का पहला खाली जिला आवंटित होगा।
  • यदि किसी कारणवश कोई वरीयता खाली न बची हो, तो बोर्ड/विभाग बचे हुए रिक्त जिलों में से आवंटन कर सकता है — इसलिए ज़्यादा-से-ज़्यादा विकल्प भरना सुरक्षित रहता है।
  • बिना भरे/अनुपस्थित रहने पर आवंटन से वंचित होने या प्रतीक्षा-सूची में जाने का जोखिम रहता है।

नई नियुक्ति के बाद ट्रांसफर के नियम (Transfer Rules)

जिला मनचाहा न मिले तो भी घबराएँ नहीं — पर ट्रांसफर के नियम समझ लें:

  • परिवीक्षाकाल (Probation): नवनियुक्त शिक्षक सामान्यतः 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रहते हैं। इस दौरान सामान्यतः नियमित स्थानांतरण नहीं मिलता।
  • ट्रांसफर खुलने पर: राज्य की स्थानांतरण नीति लागू होने पर ही ऑनलाइन आवेदन खुलते हैं; तब प्रायः अधिकतम 5 स्कूल/विकल्प चुनने की सुविधा रहती है (नीति के अनुसार)।
  • परिवीक्षा में स्थानांतरण: यदि परिवीक्षा/प्रशिक्षण अवधि में ही स्थानांतरण हो, तो कार्यग्रहण काल (Joining Time) के सामान्य लाभ सीमित रहते हैं (RSR/राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार)।
  • व्यावहारिक सलाह: पहले कुछ वर्ष आवंटित जिले में सेवा देने की मानसिक तैयारी रखें; नीति-आधारित ट्रांसफर ही दीर्घकालिक रास्ता है।

नई नियुक्ति के वेतन, ग्रेड-पे, परिवीक्षा-वेतन और स्थानांतरण नीति की विस्तृत जानकारी के लिए देखें — राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक वेतन व स्थानांतरण नीति

(स्रोत: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) — REET Mains तृतीय श्रेणी शिक्षक रिजल्ट 27 मई 2026, विस्तृत आवेदन-सह-स्क्रूटिनी फॉर्म 1–15 जून 2026, rssb.rajasthan.gov.in; जिला/पदस्थापन आदेश हेतु शिक्षा विभाग शाला दर्पण Posting Management System, rajshaladarpan.rajasthan.gov.in; कुल 7,759 पद, TSP/NTSP अलग मेरिट व कट-ऑफ — रिपोर्ट के अनुसार। आवंटन-मेकैनिक तृतीय श्रेणी 2022 भर्ती की स्थापित परिपाटी पर आधारित; अंतिम प्रक्रिया व संख्या आधिकारिक अधिसूचना से ही सत्यापित करें।)